<?xml version="1.0" encoding="utf-8"?>        <rss version="2.0"
            xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
            xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
            xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom">
            <channel>
                <atom:link href="https://www.deshrojana.com/anju-sharma/author-8" rel="self" type="application/rss+xml" />
                <generator>देश रोजाना RSS Feed Generator</generator>
                <title>ANJU SHARMA - देश रोजाना</title>
                <link>https://www.deshrojana.com/author/8/rss</link>
                <description>ANJU SHARMA RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>पहले कच्चे तेल ने रुलाया, अब खाद्य तेल से निकलेगा उपभोक्ता का 'तेल' !</title>
                                    <description>
                        <![CDATA[<p>ईरान, इज़राइल और अमेरिका के बीच जारी संघर्ष के कारण वैश्विक तेल आपूर्ति श्रृंखला गंभीर रूप से बाधित हुई है, जिससे क्रूड आयल की कीमतें 115 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुँच गई हैं। कच्चे तेल के साथ-साथ इसका असर खाद्य तेलों व दैनिक उपभोग की वस्तुओं पर साफ़ देखा जा रहा है। </p>]]>
                    </description>
                
                                    <content:encoded>
                        <![CDATA[<a href="https://www.deshrojana.com/farming/first-crude-oil-made-us-cry-now-consumer-oil-will/article-498"><img src="https://www.deshrojana.com/media/400/2026-04/thumb.jpg" alt=""></a><br /><p><img src="https://www.deshrojana.com/media/2026-04/thumb.jpg" alt="Thumb" width="1920" height="1080"></img>ईरान, इज़राइल और अमेरिका के बीच युद्ध का असर पूरे विश्व पर पड़ रहा है। एक तरफ क्रूड आयल की कीमते आसमान छू रही हैं तो, दूसरी ओर अंतरराष्ट्रीय बाजार में आपूर्ति प्रभावित होने से भारत में खाद्य तेल महंगे हो गए हैं। विदेशों से पाम और सोयाबीन तेल का आयात घटने से सरसों की मांग में भारी उछाल आया है। जहाँ 2024-25 में सरसों की अधिकतम कीमत मंडी में 5700 रुपए प्रति क़्वींटल हुआ करती थी। आज ये 11,000 रुपए प्रति क्विंटल के पार पहुँच रही है। सरसों की कीमत में 600-800 रुपये प्रति क्विंटल तक का उछाल आया है। </p>
<p><strong>किसानों और व्यापारियों के लिए सुनहरा मौका</strong><br />राजस्थान, जो देश का सबसे बड़ा सरसों उत्पादक राज्य है, वो इसकी बढ़ती कीमतों का सबसे ज़्यादा फायदा उठा रहा है। देश के कुल उत्पादन का 50 फीसदी राजस्थान से आता है। अलवर, भरतपुर, झुंझुनू, सीकर, करौली और दौसा जैसे जिले सरसों उत्पादन के प्रमुख केंद्र हैं। अलवर की मंडियों में इस समय भारी गहमा-गहमी देखि जा रही है। जहां पहले मजदूरों को काम नहीं मिल रहा था, वहीं अब पल्लेदार दिन-रात काम कर रहे हैं। सरसों की बढ़ती कीमतों से किसानों और व्यापारियों दोनों को अच्छा मुनाफा मिल रहा है।</p>
<p> बता दें कि सरकार की ओर से 2026–27 के लिए सरसों का न्यूनतम समर्थन मूल्य 6200 रुपए निर्धारित किया गया है। जबकि बाजार भाव इससे बहुत ऊपर चल रहे हैं। ऐसे में किसानों को बाजार में सरसों बेचने से अच्छा मुनाफा हो रहा है।</p>
<p><strong>क्या कहता है FAO ?</strong><br />फ़ूड एग्रीकल्चर आर्गेनाइजेशन (FAO) ने भी स्वीकार किया है कि अंतराष्ट्रीय तनाव के चलते खाद्य तेलों सहित दैनिक उपभोग की वस्तुओं की कीमतें सितंबर 2025 के बाद से उच्चतम स्तर पर पहुँच गई है। </p>
<p><strong>आयात में गिरावट से बदले समीकरण</strong><br />व्यापारियों का कहना है कि, भारत में पाम ऑयल मुख्य रूप से मलेशिया से और सोयाबीन तेल अमेरिका से आयात किया जाता है। लेकिन मौजूदा वैश्विक हालात और डॉलर की बढ़ती कीमत के कारण आयात महंगा और सीमित हो गया है। पिछले साल जहां देश में करीब 117 लाख टन सरसों का उत्पादन हुआ था, वहीं इस साल ये घटकर करीब 111 लाख टन रह सकता है। हालांकि, उनका ये भी कहना कि सरसों की बढ़ी कीमत इसकी भरपाई कर सकती है। </p>
<p><strong>क्या कहते हैं विशेषज्ञ ?</strong><br />विशेषज्ञों का कहना है कि अगर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चल रहा तनाव लम्बे समय तक जारी रह सकता है तो, सरसों और सरसों तेल के दाम में और बढ़ोतरी हो सकती है। पहले अकसर विदेशी तेल की वजह से देश में सरसों का स्टॉक वर्षभर बना रहता था, इस बार ये लगभग खत्म होने के कगार पर है। इसलिए सरसों की बढ़ती कीमतों का असर आम उपभोक्ताओं पर पड़ सकता है, क्योंकि खाद्य तेल महंगा होगा तो इससे घरेलू बजट पर दबाव बढ़ेगा। अलवर, जो सरसों तेल उत्पादन का बड़ा केंद्र माना जाता है, यहां से तैयार तेल की सबसे ज्यादा सप्लाई बंगाल, असम और बिहार जैसे राज्यों में होती है। यही वजह है कि यहां की मंडियों में हलचल तेज बनी हुई है।</p>
<p><strong>विशषज्ञों की किसानों को सलाह।</strong><br />मंडी प्रतिदिन सरसों के भाव में बड़े उतार-चढाव देखने को मिल रहे हैं। ऐसे में किसानों को चाहिए कि वे अपनी सरसों की फसल बेचने से पहले अपनी निकटतम मंडी से भावों की जानकारी अवश्य लें और उसके बाद ही अपनी सरसों की फसल को बेचने जाएं।  </p>
<p><strong>बेहतर क्वालिटी की सरसों से तेल की मात्रा </strong><br />1 लीटर सरसों का तेल निकालने के लिए आमतौर पर ढाई से 3 किलो (2.5 - 3 kg) अच्छी क्वालिटी की सूखी सरसों की आवश्यकता होती है। सरसों की गुणवत्ता के आधार पर, यह मात्रा थोड़ी कम या ज्यादा हो सकती है, लेकिन सामान्यतः 100 किलो सरसों से लगभग 35-40 लीटर तेल निकलता है। </p>
<p><strong>उपभोक्ता की जेब पर पड़ेगा असर </strong><br />सरसों के मंडी में भाव जब 5000 से 6000 रुपए प्रति कुंतल थे तब बाजार में सरसों के तेल की कीमत 120 से 160 रुपए प्रति लीटर थी। अब सरसों की बढ़ती कीमत से उपक्ता को चिंता सत्ता रही है कि खाद्य तेलों के दाम उसकी जेब पर भारी पड़ने वाले हैं। हालाँकि सरकार की कोशिश है कि आमजन को इससे परेशानी ना उठानी पड़े। </p>
<p> </p>]]>
                    </content:encoded>
                
                                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>खेती-किसानी</category>
                                    

                <link>https://www.deshrojana.com/farming/first-crude-oil-made-us-cry-now-consumer-oil-will/article-498</link>
                <guid>https://www.deshrojana.com/farming/first-crude-oil-made-us-cry-now-consumer-oil-will/article-498</guid>
                <pubDate>Tue, 07 Apr 2026 13:31:06 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.deshrojana.com/media/2026-04/thumb.jpg"                         length="1277711"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator>
                        <![CDATA[ANJU SHARMA]]>
                    </dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अब गाय से 100% बछिया ही पैदा होंगी जानिए Sexed Semen का पूरा सच !</title>
                                    <description>
                        <![CDATA[<p><strong>गाय केवल मादा बच्चे यानि बछिया ही जन्मे . इसका समाधान करेगा Sexed Semen इससे गाय सिर्फ बछिया ही पैदा करेगी और किसानों पर बैलों के पालन पोषण का खर्च नहीं पड़ेगा। </strong></p>]]>
                    </description>
                
                                    <content:encoded>
                        <![CDATA[<a href="https://www.deshrojana.com/top-news/now-only-100-calves-will-be-born-from-a-cow/article-492"><img src="https://www.deshrojana.com/media/400/2026-04/thumbb-copy.jpg" alt=""></a><br /><p>आज कृषि में बैल की उपयोगिता ना के बराबर रह गई है इसलिए किसान चाहते हैं कि उनकी गाय केवल मादा बच्चे यानि बछिया ही जन्मे और नर बच्चे पैदा ना हों। ताकि वे दूध बेच कर ज़्यादा से ज़्यादा मुनाफा कमा सकें लेकिन, प्रकृति के नियम के अनुसार गाय, नर और मादा दोनों को ही जन्म देती है। किसान की इसी समस्या का समाधान करेगा Sexed Semen इससे गाय सिर्फ बछिया ही पैदा करेगी और किसानों पर बैलों के पालन पोषण का खर्च नहीं पड़ेगा। तो आइये जानते हैं कि ये कैसे संभव है। ..</p>
<p><strong>लिंग-निर्धारण वीर्य की प्रक्रिया </strong><br />जैसा की आप सभी जानते है कि एक मादा में XX Chromosomes मौजूद होते हैं जबकि, एक पुरुष में X और Y दोनों तरह के Chromosomes होते हैं। मादा के X और पुरुष के Y Chromosomes एक मेल के जन्म के लिए उत्तरदायी होते हैं जबकि, मादा का X और पुरुष का X Chromosomes एक फीमेल के जन्म के लिए उत्तरदायी होते हैं। ठीक इसी तरह से एक गाय और सांड में XX और XY Chromosomes होते हैं। ऐसे में यदि सांड के सीमन से Y गुणसूत्रों को हटा दिया जाए तो गाय और सांड के X X गुणसूत्र यानि Chromosomes मिलने से गाय सिर्फ बछिया को ही जन्म देगी। और वैज्ञानिको ने इसे संभव कर दिखाया है। </p>
<p>लैबोरेटरी में सांड के वीर्य से  'X' और 'Y' गुणसूत्रों को उनके आकार या डीएनए की मात्रा के आधार पर अलग किया जाता है। सांड के वीर्य में मौजूद 'Y' गुणसूत्रों को लेजर का उपयोग करके हटा दिया जाता है। बाद में सांड के X X वाले हेल्दी शुक्राणुओं को गाय के गर्भाशय में प्लांट किया जाता है। जिससे गाय केवल मादा बच्चे को ही जन्म देती है। </p>
<p><strong>क्या कहते हैं एक्सपर्ट्स- </strong><br />एक्सपर्ट्स का कहना है कि, "सक्सेड सीमन से 90 परसेंट तक बछिया ही पैदा होंगी। इस पर अभी भी काम चल रहा है ताकि परसेंटेज को बढ़ाया जा सके। इसके लिए सीमन को दो बार प्रोसेस्ड करना होता है इससे पर्सेंटेज 95-96 तक भी जा रही है। " </p>
<p><br /><strong>सेक्सड सीमन का विश्व में इतिहास</strong><br />सेक्सड सीमन का व्यवसाय के तौर पर उत्पादन सबसे पहले अमेरिका के लिवरपूल में स्थित एक प्रयोगशाला किया गया था। अमेरिका समेत यूरोप के कुछ देशों ने इसे 21वीं सदी के प्रारम्भ में ही अपना लिया था। वर्तमान में दो कंपनियां 'सेक्सिंग टेक्नोलॉजीस' और 'ABS ग्लोबल' विश्व भर में सेक्सड सीमन का उत्पादन कर डेरी फार्मर्स को उपलब्ध करा रही हैं |</p>
<p><strong>भारत में इतिहास</strong><br />भारत में सेक्सड सीमन का उत्पादन सबसे पहले पश्चिम बंगाल गौ संपदा विकास संस्थान ने 2009 में शुरू किया था | संस्था ने राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (RKVY) प्रोजेक्ट के तहत 2.9 करोड़ की लागत से हरिन्गथा में BD इन्फ्लक्स हाई स्पीड सेल सॉर्टर स्थापित किया था | यहाँ उत्पादित सेक्सड सीमन से पहला बछड़ा 1 जनवरी 2011 को पैदा हुआ था, जिसका नाम श्रेयश था | श्रेयश भारत में उत्पादित होने वाले सेक्सड सीमन से पैदा होने वाला पहला बछड़ा था | बंगाल से शुरू होकर ये प्रयोग अब पुरे देश में अपनाया जाने लगा है। </p>
<p>प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मेक इन इंडिया के आवाहन के बाद सेक्सड सीमन का उत्पादन देशभर में होने लगा है। देश के कई राज्यों ने अपने यहाँ सेक्सड सीमन का उत्पादन करने वाली लैब स्थापित करने लिए ग्लोबल टेंडर जारी किये हैं | राज्य सरकारों के अलावा BIAF, JK TRUST, NDDB, AMUL जैंसी संस्थायें भी अपने यहाँ सेक्सड सीमन का उत्पादन शुरू करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही हैं।  </p>
<p><br /><strong>सक्सेड सीमन के फायदे और नुकसान </strong><br />कृषि से सम्बंधित कार्यों में में आजकल बैलों की उपयोगिया ना के बराबर रह गई है ऐसे में किसान बैलों को पलना नहीं चाहते जिस वजह से उन्हें ऐसे छोड़ दिया जाता है। ये आवारा पशु की कैटेगरी में आ गए हैं। वहीँ दूसरी और अगर सिर्फ मादा गाय ही पैदा होंगी तो किसान उनसे दुग्ध उत्पादन कर अच्छा लाभ ले सकेंगे। <br />दूसरा अगर मादा गाय ही पैदा होंगी और नर गाय यानि सांड या बैल आदि पैदा नहीं होंगे तो इससे अच्छी गुवत्ता वाला सीमन प्राप्त करना मुश्किल हो सकता है। <img src="https://www.deshrojana.com/media/2026-04/thumbb-copy.jpg" alt="Thumbb copy" width="1920" height="1080"></img></p>
<p>तीसरा सेक्सड सीमन की कीमत अभी बहुत अधिक है। देश के विभिन्न भागों में सेक्सड सीमन के स्ट्रॉ की कीमत 1200 से 2000 रूपए है | भारत के गरीब किसान के लिए यह महंगा है, अगर किसान स्ट्रॉ खरीद भी लेता है और प्रयोग सक्सेस नहीं हुआ तो बछड़ा पैदा होगा इससे किसान को दुगना नुकसान उठाना पड़ सकता है।  </p>]]>
                    </content:encoded>
                
                                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

                <link>https://www.deshrojana.com/top-news/now-only-100-calves-will-be-born-from-a-cow/article-492</link>
                <guid>https://www.deshrojana.com/top-news/now-only-100-calves-will-be-born-from-a-cow/article-492</guid>
                <pubDate>Tue, 07 Apr 2026 11:31:04 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.deshrojana.com/media/2026-04/thumbb-copy.jpg"                         length="911539"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator>
                        <![CDATA[ANJU SHARMA]]>
                    </dc:creator>
                            </item>

            </channel>
        </rss>
        