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                <title>ANJU SHARMA - देश रोजाना</title>
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                <description>ANJU SHARMA RSS Feed</description>
                
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                <title>पंजाब की ओर चले शाह, विधानसभा चुनाव 2027 साधने की तैयारी। </title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>देश में 5 राज्यों में चुनाव अब समाप्त हो चुके हैं। पश्चिम बंगाल, असम, केरल, पुडुचेरी और तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के फाइनल नतीजे 4 मई को आएंगे।  लेकिन बीजेपी का अगला पड़ाव अब पंजाब की धरती पर होगा। इसी को देखते हुए मई की शुरुआत से अमित शाह मिशन पंजाब साधने में जुट गए हैं।  </strong></p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.deshrojana.com/state/punjab/shah-heads-towards-punjab-to-prepare-for-assembly-elections-2027/article-968"><img src="https://www.deshrojana.com/media/400/2026-05/amit-shah-best-173856975586.jpg" alt=""></a><br /><p><img src="https://www.deshrojana.com/media/2026-05/amit-shah-best-173856975586.jpg" alt="Amit-Shah-best-173856975586" width="659" height="491"></img></p>
<p>पांचों राज्यों में चुनाव के बाद अब बीजेपी का अगला टारगेट पंजाब पर अपनी पकड़ मजबूत करने का है। सूत्रों के अनुसार गृहमंत्री अमित शाह अब हर महीने पंजाब का दौरा  करेंगे और पूरे राज्य में ड्रग्स के खिलाफ एक बड़े जनजागरूकता अभियान चलाएंगे। हालाँकि बीजेपी इस मुद्दे के जरिए राज्य की आम आदमी पार्टी सरकार को घेरने की तैयारी में है। </p>
<p>विधानसभा चुनाव में अभी एक साल बाकि है लेकिन बीजेपी ने अभी से तैयारी शुरू कर दी है। इसे काम साम दंड भेद हर तरीके से अपने पीला में लाने की तैयारी है। आपको बता दें कि बीजेपी पहले ही साफ़ कर चुकी है कि वो सभी 117 सीटों पर अकेले चुनाव लड़ेगी। इसी को लेकर आरएसएस तो पहले यहाँ अपने काम में जुट गई थी। आरएसएस ने फरवरी में यहाँ रणनीति बनानी शुरू कर दी थी। मोहन भगवत ने हर कार्यकर्ता या स्वमसेवकों को हर दलित के घर पहुँचने को कहा। क्योंकि पंजाब में कुल 117 विधान सभा सीटें है और जिसमें 38 फीसदी आबादी दलितों की है यानि हर तीसरा व्यक्ति दलित है। </p>
<p><img src="https://akm-img-a-in.tosshub.com/indiatoday/images/story/202405/prime-minister-narendra-modi-being-felicitated-during-a-public-rally-in-punjabs-patiala-image-pt-285802557-16x9_0.jpg?VersionId=cwcLiyXrxSeetCvxH_QBdte9z9TViQoH&amp;size=690:388" alt="Fighting alone in Punjab, what's the BJP pinning its hopes on ..."></img></p>
<p>राजनितिक विश्लेषकों का कहना है कि जैसे दक्षिण के राज्यों में बीजेपी अपनी पकड़ नहीं बना पा रही है। बंगाल उसके लिए टेढ़ी खीर है वही पंजाब भी बीजेपी के लिए सपने जैसा है। अकाली दल के साथ बीजेपी का गठजोड़ जब तक था तब तक कृषि करने वाले और सिख समाज के लोग उससे जुड़ जाते थे और शहरी वर्ग भारतीय जनता पार्टी के साथ जुड़ जाता था। जो बीजेपी की जीत को सुनिश्चित करता था। अकाली दल जबसे कमजोर हुआ तबसे ग्रामीण और दलित वर्ग को साधना बीजेपी के लिए दूर की कौड़ी बन गया। अब भारतीय जनता पार्टी को सही नेता भी वहां नहीं मिल पा रहे हैं। हाल ही में आप पार्टी छोड़ बीजेपी में शामिल हुए राघव चड्ढा उनकी ढाल बन पाएंगे या नहीं ये आने वाला वक्त बतायेगा। इसलिए अपनी पकड मजबूत बनाने के लिए अमित शाह अब पंजाब का रुख करने जा रहे हैं। </p>
<p><img src="https://fl-i.thgim.com/public/incoming/xnana9/article70856909.ece/alternates/LANDSCAPE_660/Amit%20Shah%20during%20a%20rally%20at%20Killi%20Chalan%20in%20Moga" alt="Amit Shah's Anti-Conversion Promise Opens a New Faultline in ..."></img></p>
<p>बताया जा रहा है कि गृहमंत्री अमित शाह अब हर महीने पंजाब का दौरा  करेंगे और पूरे राज्य में ड्रग्स के खिलाफ एक बड़े जनजागरूकता अभियान की शुरुआत करेंगे। बीजेपी इसके जरिए राज्य की आम आदमी पार्टी सरकार को घेरने की तैयारी में है। पंजाब के साथ-साथ अगले साल फरवरी में चार और राज्यों- उत्तर प्रदेश, गोवा, उत्तराखंड और मणिपुर में विधानसभा चुनाव होने हैं। इन राज्यों पर बीजेपी की ही सरकारें हैं, लेकिन पंजाब में बीजेपी अपनी जमीन मजबूत करना चाहती है। </p>
<p>अमित शाह का ये मिशन मई के आरम्भ से शुरू हो जायेगा। इस दौरान वो पूरे पंजाब में ड्रग्स के खिलाफ एक अभियान चलाएंगे इसके लिए यात्राओं की शुरुआत भी की जाएगी। इन यात्राओं में बीजेपी के छोटे बड़े सभी नेता भी समय समय पर जुड़ेंगे। जो जनता को ये भी बताएंगे कि पंजाब बॉर्डर राज्य है, जिस वजह से यहाँ ड्रग की सप्लाई आसानी से हो जाती है लेकिन जब यहाँ बीजेपी की सरकार बनाएगी तब डबल इंजन सरकार के प्रयासों से सीमा से ड्रग्स की तस्करी पर भी नकेल  लगाई लगाएगी। मतलब बीजेपी चुनावों से पहले ड्रग्स को एक बड़ा मुद्दा बनाना चाहती है। बीजेपी नेताओं का कहना है कि अमित शाह ने पूरे देश में ड्रग्स के खिलाफ लड़ाई छेड़ी हुई है और अब पंजाब को भी इस लत से मुक्त कराया जाएगा। </p>
<p><img src="https://images.jansatta.com/2024/12/Punjab-drugs-case.jpg" alt="संपादकीय: नशे के खिलाफ उठी आवाज हो गई ..."></img></p>
<p>इस अभियान के जरिए उन परिवारों का समर्थन जुटाने की कोशिश की जाएगी जो इस समस्या से सीधे प्रभावित हैं। साथ ही पंजाब की आप सरकार की ड्रग्स पर नकेल कसने को लेकर नाकामी को भी जनता के सामने लाया जाएगा। बीजेपी का मनना है कि साल 2022 में आम आदमी पार्टी ने भी  ड्रग्स को विधानसभा चुनाव में एक बड़ा मुद्दा बनाया था और शायद आप की जीत का एक बड़ा कारण भी यही था। अब बीजेपी भी  यही करने जा रही है। अब पंजाब का भविष्य क्या होगा ये तो आने वाला वक्त ही बताएगा क्यों बीजेपी की कमजोर पकड़, आम आदमी पार्टी सरकार अपने वादे पूरे नहीं कर पाई तो वहीँ कांग्रेस अंदरूनी गुटबाजी से जुझ रही है। जबकि अकाली दल भी सरदार प्रकाश सिंह बादल के निधन के बाद आंतरिक मतभेदों में उलझी है। इन सबके लिहाज बीजेपी को इस बार पंजाब में अपनी पकड़ बना शायद आसान लग रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>पंजाब</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 02 May 2026 12:11:30 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[ANJU SHARMA]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पश्चिम बंगाल: 15 पोलिंग बूथों में दोबारा मतदान। </title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>पश्चिम बंगाल में 29 अप्रैल को हुए दूसरे चरण के मतदान में ईवीएम मशीन के साथ छेड़छाड़ के आरोपों के बाद आज 2 मई को 15 पोलिंग बूथों में दोबारा मतदान हो रहा है। यहाँ कुछ बूथों पर बीजेपी वाले बटन पर टेप लगाने की शिकायत मिली थी। </strong></p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.deshrojana.com/state/west-bengal/west-bengal-re-polling-in-15-polling-booths/article-967"><img src="https://www.deshrojana.com/media/400/2026-05/screenshot-2026-05-02-112156.png" alt=""></a><br /><p><img src="https://www.deshrojana.com/media/2026-05/screenshot-2026-05-02-112156.png" alt="Screenshot 2026-05-02 112156" width="683" height="333"></img></p>
<p>पश्चिम बंगाल में द्वितीय चरण के मतदान के दौरान EVM के BJP वाले बटन पर टेप लगा कर छेड़छाड़ के आरोपों की जांच के बाद आज दो विधानसभाओं के 15 पोलिंग बूथों में दोबारा मतदान हो रहा है। 29 अप्रैल को हुए विधानसभा चुनावों के दूसरे चरण की वोटिंग के दौरान दक्षिण 24 परगना, मगराहाट पश्चिम के 11 बूथ और डायमंड हार्बर के चार बूथों पर ईवीएम पर बीजेपी के सिंबल के सामने टेप लगाया गया था। हालाँकि दोपहर किसी ने इसका वीडियो बना लिया जिसके बाद काफी हो हल्ला हुआ, खूब बवाल मचा। बीजेपी उम्मीदवार ने चुनाव आयोग को इसकी शिकायत भेजी। जिस पर संज्ञान लेते हुए चुनाव आयोग ने इसकी जांच कराई और दुबारा चुनाव करने के निर्देश दिए।   </p>
<p>निर्वाचन आयोग के आदेश पर आज 2 मई को सुबह 7 बजे से शाम 6 बजे के बीच मतदान हो रहा है। वोटरों को पुनर्मतदान के बारे में जानकारी देने के लिए आयोग ने अधिकारियों को प्रचार करने के निर्देश पहले ही दे दिए थे, ताकि इन समबन्धित पोलिंग बूथों के मतदाताओं को पुनर्मतदान की जानकारी मिल सके। साथ ही केंद्रीय सुरक्षाबल के अधिकारियों ने भी मतदाताओं को निर्भीक होकर पुनर्मतदान में शामिल होने के लिए प्रोत्साहित किया था।  </p>
<p><img src="https://akm-img-a-in.tosshub.com/indiatoday/images/story/202604/the-bjp-alleged-that-the-names-of-its-candidates-were-covered-with-tape-on-evms-303424436-16x9_0.png?VersionId=XwP1qWKbUJXe7iiYxaXYujftw_bM95kS&amp;size=690:388" alt="West Bengal Election: Election Commission gets 77 EVM tampering ..."></img></p>
<p>वहीँ कुछ लोग टीएमसी पके कार्यकर्ताओं पर इल्जाम लगा रहे हैं  कि 29 अप्रैल की रात, TMC के गुंडों ने इन इलाकों के हरेक घर में जाकर लोगों का ऊँगली चेक की। जिस किसी के ऊँगली पर मतदान स्याही दिखी, उसके साथ मार-पिट की गयी,  महिलाओं को यह धमकी दी गयी कि अगर फिर से पोलिंग होती है और वो मतदान करने जाती हैं, तो उनके साथ सामूहिक बलात्कार किया जाएगा।महिलाओं ने निडरता के साथ इन गुंडों का सामूहिक विरोध किया।  पुलिस को इसकी सूचना दी गयी हालाँकि ये शिकायतें कितनी गलत है या सही हैं ये जांच के बाद ही साफ़ हो पायेगा। </p>
<p>कहा ये भी जा रहा है कि TMC के लोगों ने इन इलाकों में सुरक्षाबलों को घुसने से रोकने के अनेक प्रयास किये। सड़कमार्ग पर पेड़ काट कर गिरा दिए थे, जिसे सुरक्षाबलों ने आकर हटाया। बंगाल पुलिस ने धमकी देने वाले कुछ कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार भी किया है। बाकीलोगो को पकड़ने के लिए धर-पकड़ के प्रयास जारी हैं। </p>
<p><img src="https://akm-img-a-in.tosshub.com/aajtak/images/story/202405/66514ff4a3ed4-bengal-254155471-16x9.jpg?size=1200:675" alt="पश्चिम बंगाल में फिर आपस में भिड़े ..."></img></p>
<p>आपको बता दें कि दक्षिण बंगाल के ज्यादातर हिस्सों पर टीएमसी का दबदबा है। इस मजबूत गढ़ को भेदना बीजेपी के लिए आसान नहीं होगा। दुबारा चुनाव कराने पर भी यहाँ बीजेपी अपनी पकड़ बनाए में कितनी कामयाब हो पायेगी फ़िलहाल इस पर कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी। हालाँकि एग्जिट पोल में बीजेपी को जीत मिलने का दवा किया जा रहा है। अब इंतजार है तो 4 मई का जब तस्वीर साफ़ होगी की जीत का सेहरा किसके सर बंधेगा। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>चुनाव</category>
                                            <category> पश्चिम बंगाल</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 02 May 2026 11:55:57 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[ANJU SHARMA]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पश्चिम बंगाल के अंतिम फेस के चुनाम में आज 142 सीटों पर होगा मतदान,  क्या TMC के इस अभेद्य किला को ध्वस्त कर पाएगी BJP . </title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>बंगाल विधानसभा चुनाव में आज दूसरे और अंतिम चरण की वोटिंग है। इस चरण में पश्चिम बंगाल की कुल 294 सीटों में 142 सीटों पर इस चरण में वोट डाले जाएंगे। अंतिम चरण सिर्फ चुनाव नहीं, बल्कि ‘गढ़ बनाम चुनौती’ की सीधी लड़ाई बन चुका है। बंगाल की राजनीति में लंबे समय से यह धारणा रही है कि सत्ता का रास्ता दक्षिणी जिलों के घनी आबादी वाले मैदानी इलाकों से होकर गुजरता है। </strong></p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.deshrojana.com/state/west-bengal/voting-will-be-held-on-142-seats-today-in-the/article-921"><img src="https://www.deshrojana.com/media/400/2026-04/murshidabad-voter-queue-pti.jpg" alt=""></a><br /><p><img src="https://www.deshrojana.com/media/2026-04/murshidabad-voter-queue-pti.jpg" alt="murshidabad-voter-queue-PTI" width="1200" height="675"></img></p>
<p>पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में आज दूसरे और अंतिम चरण की वोटिंग है। इस चरण में पश्चिम बंगाल की कुल 294 सीटों में 142 सीटों पर इस चरण में वोट डाले जाएंगे। अंतिम चरण सिर्फ चुनाव नहीं, बल्कि ‘गढ़ बनाम चुनौती’ की सीधी लड़ाई बन चुका है। बंगाल की राजनीति में लंबे समय से यह धारणा रही है कि सत्ता का रास्ता दक्षिणी जिलों के घनी आबादी वाले मैदानी इलाकों से होकर गुजरता है। </p>
<p>पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव 2026 अब अपने सबसे निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुका है। पहले चरण में रिकॉर्ड मतदान के बाद आज दूसरे चरण में जिन 142 सीटों पर वोटिंग होनी है, वही असल मायनों में सत्ता की दिशा तय कर सकती हैं। खास बात यह है कि ये सभी सीटें दक्षिण बंगाल के उन इलाकों में हैं, जिन्हें तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) का अभेद्य किला माना जाता रहा है। वहीं भाजपा इस किला को भेदने में पूरी ताकत झोंक चुकी है। अब जनता तय करेगी कि आज का चुनाव किस पार्टी के लिए गेम चेंजर होता है। यहां बता दें कि 2021 के विधानसभा चुनाव में टीएमसी ने इन 142 सीटों में से 123 पर जीत दर्ज की थी, जबकि भाजपा को 18 सीटें ही मिली थीं और आईएसएफ को 1 सीट मिली थी।</p>
<p>पश्चिम बंगाल की दशा और दिशा तय करने में यह अंतिम चरण सिर्फ चुनाव नहीं, बल्कि ‘गढ़ बनाम चुनौती’ की सीधी लड़ाई बन छुअक है। बंगाल की राजनीति में लंबे समय से यह धारणा रही है कि सत्ता का रास्ता दक्षिणी जिलों के घनी आबादी वाले मैदानी इलाकों से होकर गुजरता है। उत्तर 24 परगना और दक्षिण 24 परगना जैसे बड़े जिले इस समीकरण के केंद्र में हैं। 33 सीटों वाला उत्तर 24 परगना और 31 सीटों वाला दक्षिण 24 परगना, कोलकाता (11 सीट) और हावड़ा (16 सीट) मिलकर कुल 91 सीटों का प्रतिनिधित्व करते हैं जो विधानसभा की कुल 294 सीटों का लगभग एक तिहाई हिस्सा को छूता है। यही वजह है कि राजनीतिक के जानकार इन इलाकों को ‘किंगमेकर’ मानते हैं।</p>
<p><img src="https://www.deshrojana.com/media/2026-04/437893.jpg" alt="437893" width="3000" height="2000"></img></p>
<p>आपको बता दें कि पहले चरण में 152 सीटों पर हुए रिकॉर्ड मतदान हुआ था।  जिसमे महिलाओं ने बढ़ चढ़ कर हिस्सा लिया था। करीब 93.% मतदान के बाद भाजपा ने दावा किया कि जनता ने बदलाव के पक्ष में वोट किया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने यहां तक कहा कि उनकी पार्टी पहले चरण में 110 से ज्यादा सीटें जीत सकती है। दूसरे चरण की ये 142 सीटें चुनाव का टर्निंग पॉइंट मानी जा रही हैं। अगर टीएमसी अपने गढ़ को बचाने में सफल रहती है, तो भाजपा के लिए सत्ता तक पहुंचना बेहद मुश्किल हो जाएगा। वहीं तृणमूल के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने कहा है कि पहले फेज में तृणमूल 152 सीटों में सेंचुरी पार कर चुकी है। दूसरे चरण में डबल सेंचुरी पार करेंगे।</p>
<p>आज 29 अप्रैल को होने वाला मतदान ही सत्ता का रास्ता तय करता हुआ दिखेगा। आज जिसके पक्ष में मतदान होंगे, उसे ही सत्ता का साथ मिलेगा, वरना निराशा ही हाथ लगेगी। अब किसे मिलेगी सत्ता और कौन रह जायेगा सस्ता इस सवाल का जवाब तो 4 मई को मिलेगा </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                            <category> पश्चिम बंगाल</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 29 Apr 2026 12:03:14 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[ANJU SHARMA]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>लोकतंत्र के उत्सव में 'अंधेरा', सोनागाछी की 150 यौनकर्मी वोट से वंचित, प्रशासन के वादे निकले खोखले।</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>कोलकाता के प्रसिद्ध रेडलाइट एरिया में 150 यौनकर्मी हुयीं मतदान से वंचित।  CEO मनोज अग्रवाल का आश्वासन भी हो गया नाकाम। कानूनी सहायता लेने को मजबूर हुयीं यौनकर्मी। </strong></p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.deshrojana.com/state/west-bengal/will-the-water-crisis-deepen-due-to-ethanol-will-people/article-920"><img src="https://www.deshrojana.com/media/400/2026-04/an-sir-camp-at-sonagachi-in-north-kolkata-tuesday.-partha-paul.jpg" alt=""></a><br /><p><img src="https://www.deshrojana.com/media/2026-04/an-sir-camp-at-sonagachi-in-north-kolkata-tuesday.-partha-paul.jpg" alt="An-SIR-camp-at-Sonagachi-in-North-Kolkata-Tuesday.-Partha-Paul" width="1600" height="900"></img></p>
<p> </p>
<p>कोलकाता के प्रसिद्ध रेडलाइट एरिया सोनागाछी की लगभग 150 यौनकर्मी अप्रैल 2026 में हुए चुनावों में मतदान करने से वंचित रह गईं। यह स्थिति तब उत्पन्न हुई जब उनके नाम मतदाता सूची से काट दिए गए, जिससे उन्हें अपने संवैधानिक अधिकार का प्रयोग करने का मौका नहीं मिला। यह घटना तब और भी गंभीर हो जाती है जब मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) मनोज अग्रवाल ने खुद इन महिलाओं को आश्वासन दिया था कि उन्हें वोट देने से कोई नहीं रोक पाएगा।</p>
<p>दरसल कुछ समय पहले चुनाव आयोग ने सोनागाछी में एक विशेष शिविर का आयोजन किया था। वहां CEO मनोज अग्रवाल ने वादा किया था, "यदि किसी के पास माता-पिता के नाम का विवरण नहीं भी है, लेकिन वह वैध नागरिक है, तो आयोग अपनी 'विशेष शक्तियों' का उपयोग कर उनका नाम मतदाता सूची में शामिल करेगा।" लेकिन, जब अंतिम सूची सामने आई, तो लगभग 150 महिलाओं के नाम गायब थे। दुर्बार महिला समन्वय समिति की सचिव विशाखा लश्कर के अनुसार, कई महिलाओं को सुनवाई के लिए बुलाया गया था और दस्तावेज जमा करने के बावजूद उनका नाम शामिल नहीं किया गया।</p>
<p><img src="https://www.deshrojana.com/media/2026-04/img_5590_11zon.jpg" alt="IMG_5590_11zon" width="1200" height="675"></img></p>
<p>आपको बता दें कि अधिकांश यौनकर्मियों के नाम 'विशेष गहन संशोधन' (SIR) प्रक्रिया के दौरान हटा दिए गए क्योंकि वे अपने माता-पिता के दस्तावेज या पुराने रिकॉर्ड (जैसे 2002 के दस्तावेज) पेश करने में असमर्थ थीं। इनमें से कई महिलाएं दशकों पहले अपने परिवारों को छोड़कर आई थीं और उनके पास पिछले निवास का कोई प्रमाण नहीं था।</p>
<p>अब यौनकर्मियों के बीच अब इस बात का डर है कि बिना पहचान पत्र और मताधिकार के उनका भविष्य असुरक्षित हो जाएगा। विशाखा लश्कर ने बताया कि कई महिलाओं के बच्चों के नाम तो सूची में हैं, लेकिन मां का नाम गायब है। सिर्फ सोनागाछी ही नहीं, बल्कि कालीघाट और खिदिरपुर जैसे इलाकों में रहने वाली यौनकर्मियों के तरफ से भी इसी तरह की खबरें आ रही हैं। 'आमरा पदातिक' संगठन की महाश्वेता मुखर्जी ने इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि अब डिस्ट्रिक्ट लीगल सर्विस अथॉरिटी के माध्यम से भविष्य में दोबारा अधिकार पाने की कोशिश की जा रही है।</p>
<p>रिपोर्ट्स के अनुसार, केवल सोनागाछी ही नहीं, बल्कि कालीघाट और बोबाजार (हर काटा गली) जैसे क्षेत्रों में भी बड़ी संख्या में यौनकर्मियों के नाम मतदाता सूची से हटाए गए या 'निर्णयाधीन' रखे गए हैं। वर्तमान में, ये महिलाएं अपनी नागरिकता और लोकतांत्रिक पहचान को बचाने के लिए न्यायिक संघर्ष की तैयारी कर रही हैं। </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                            <category> पश्चिम बंगाल</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 29 Apr 2026 11:37:49 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[ANJU SHARMA]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अन्नदाता को बड़ी सौगात, महाराष्ट्र में 40 लाख किसानों का कर्ज होगा माफ! </title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>सूखे और बेमौसम बारिश की मार झेल रहे किसानों के लिए महाराष्ट्र सरकार ने अपने वादे के मुताबिक पिटारा खोल दिया है। बजट में घोषित 'पुण्यश्लोक अहिल्यादेवी होलकर किसान कर्ज माफी योजना' अब धरातल पर उतरने के लिए तैयार है। इस योजना के अंतर्गत 35 से 40 लाख किसानों के कर्ज माफ़ किये जायेंगे। </strong></p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.deshrojana.com/state/maharashtra/big-gift-to-annadata-loan-of-40-lakh-farmers-will/article-900"><img src="https://www.deshrojana.com/media/400/2026-04/screenshot-2026-04-28-120246.png" alt=""></a><br /><p> <img src="https://www.deshrojana.com/media/2026-04/screenshot-2026-04-28-115922.png" alt="Screenshot 2026-04-28 115922" width="956" height="513"></img></p><p><br />महाराष्ट्र के करोड़ों अन्नदाताओं के लिए एक राहत भरी खबर आई है। जिसमें  प्रदेश के लगभग 35 से 40 लाख किसानों की कर्ज माफ़ी की घोषणा की गई है। सरकार ने इस ऐतिहासिक कदम के लिए 27,000 करोड़ रुपये का बड़ा बजट निर्धारित किया है। </p><p><strong>अक्टूबर 2025 में बनी थी समिति </strong><br />आपको बता दें कि अक्टूबर 2025 महाराष्ट्र सरकार ने MITRA के CEO प्रवीण परदेसी की अध्यक्षता में एक समिति गठित की थी। जिसे 'पुण्यश्लोक अहिल्यादेवी होल्कर किसान ऋण माफी योजना'नाम दिया गया था। इस समिति ने हाल ही में अपनी रिपोर्ट मुख्यमंत्री को सौंपी है, जिसमें लाभार्थियों के चयन और योजना के प्रभावों पर सुझाव दिए गए हैं। </p><p><img src="https://www.deshrojana.com/media/2026-04/screenshot-2026-04-28-120246.png" alt="Screenshot 2026-04-28 120246" width="948" height="540"></img></p><p><strong>"महा एल्गार मोर्चा" के आगे झुकी सरकार </strong><br />प्रहार जनशक्ति पार्टी के नेता बच्चू कडू ने अक्टूबर 2025 के अंत में महाराष्ट्र के नागपुर में किसानों की पूर्ण कर्जमाफी, एमएसपी और अन्य मांगों को लेकर "महा एल्गार मोर्चा" के तहत एक बड़ा आंदोलन किया। कडू के नेतृत्व में हजारों किसानों ने वर्धा रोड एनएच-44 को जाम कर दिया, जिससे सरकार को बातचीत के लिए मजबूर होना पड़ा। उन्होंने सरकार के सामने किसानों की मांगें रखी थी। कडू ने कर्ज माफी के साथ-साथ खेती को मजबूत करने के उपायों पर भी सुझाव दिए थे। </p><p><strong>इस समिति द्वारा कुछ प्रावधान इस प्रकार हैं </strong><br />महाराष्ट्र सरकार द्वारा घोषित v के अंतर्गत  30 सितंबर, 2025 तक के 2 लाख रुपये तक के फसल ऋण माफ किए जाएंगे। जो किसान समय पर कर्ज चुकाते हैं, उन्हें 50,000 रुपये तक का प्रोत्साहन मिलेगा। हालाँकि ऐसा करने से सरकार पर 2026-27 के बजट में  लगभग ₹27,000 करोड़ से ₹35,000 करोड़ का वित्तीय भार पड़ने का अनुमान है। </p><p><img src="https://www.deshrojana.com/media/2026-04/506537-farmers.jpg" alt="506537-farmers" width="956" height="546"></img></p><p><strong>किसे मिलेगा लाभ ? </strong><br />सबसे पहले जरुरी है कि किसान स्थाई रूप से महारष्ट्र निवासी होना चाहिए , दूसरा कर्ज माफ़ी के लिए वही किसान पत्र होंगे जिनका कर्ज 30 सितंबर 2025 तक बकाया हो। अगर किसी कर्ज उसके बाद का है तो वो किसान इसके पत्र नहीं होंगे। तीसरा इस कर्ज माफ़ी का लाभ केवल वही किसान ले सकेंगे  जिन्होंने राष्ट्रीयकृत बैंकों, सहकारी बैंकों और राज्य द्वारा मान्यता प्राप्त निजी वित्तीय संस्थानों से कर्ज लिया हो। </p><p><strong>किसान ऐसे करें आवेदन </strong><br />सरकार ने आगामी खरीफ सीजन से पहले लाभ वितरित करने का लक्ष्य रखा है। तो पात्र किसान सही समय पर आवेदन करके इसका लाभ लें। जैसे ही अधिकारी इसकी घोषणा कर देंगे तुरंत बैंको के माध्यम से इसके संचालित होने की सम्भावना है। इसके लिए ज़रूरी दस्तावेज तैयार कर लें जैसे -संबंधित बैंक शाखा में आधार कार्ड, भूमि रिकॉर्ड, बैंक पासबुक और फसल ऋण से संबंधित दस्तावेज जमा करने पड़ सकते हैं।  तो पहले से तयारी करके रखें। </p><p><img src="https://www.deshrojana.com/media/2026-04/screenshot-2026-04-28-120557.png" alt="Screenshot 2026-04-28 120557" width="956" height="725"></img></p><p><strong>क्यों जरूरी है लोन माफी योजना?</strong><br />पिछले दो साल में महाराष्ट्र के कृषि क्षेत्र को लगातार संकटों का सामना करना पड़ा है. बाढ़ और बेमौसम बारिश, फसलों के दामों में उतार-चढ़ाव, किसान संगठनों और विपक्ष का दबाव जैसे कारणों से सरकार ने एक बार फिर किसानों को राहत देने के लिए यह बड़ा कदम उठाया है। </p><p>बताया जा रहा है कि, 'एग्रीस्टैक' (Agristack) तकनीक के जरिए लाभार्थियों की लिस्ट तैयार की जा रही है ताकि, किसी भी तरह के भ्रष्टाचार की गुंजाइश न रहे। अगर आप भी महाराष्ट्र के किसान हैं, तो अपने आधार कार्ड और बैंक खाते को अपडेट रखें क्योंकि महाराष्ट्र दिवस यानी 1 मई के बाद कभी भी खुशियों की पहली किस्त आपके खाते में आ सकती है।</p><p><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                            <category>खेती-किसानी</category>
                                            <category>महाराष्ट्र</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 28 Apr 2026 12:29:17 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[ANJU SHARMA]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>आंध्र प्रदेश में स्थापित होगी वर्ल्ड की सबसे पहली कोको सिटी। प्रगतिशील किसानों का बनेगा केंद्र। </title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने राज्य का पहला समर्पित कोको शहर बनाने की घोषण की। उन्होंने अधिकारियों को इस परियोजना के लिए 250 एकड़ भूमि का चयन करने के निर्देश दिए हैं। जो प्रगतिशील किसानों के लिए एक अनुभव केंद्र के रूप में कार्य करेगा। </strong></p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.deshrojana.com/top-news/the-worlds-first-cocoa-city-will-be-established-in-andhra/article-876"><img src="https://www.deshrojana.com/media/400/2026-04/560048208_24826657036987052_453787511093391821_n.jpg" alt=""></a><br /><p><strong><img src="https://www.deshrojana.com/media/2026-04/560048208_24826657036987052_453787511093391821_n.jpg" alt="560048208_24826657036987052_453787511093391821_n" width="919" height="517"></img></strong></p>
<p><strong>आंध्र प्रदेश में बनेगी दुनिया की पहली कोको सिटी। </strong><br />आंध्र प्रदेश सरकार ने बागवानी को 50 लाख एकड़ तक बढ़ाने और 250 एकड़ में कोको सिटी बनाने की योजना तैयार करने के निर्देश दिए हैं। किसानों की आय बढ़ाने के लिए मल्टी-क्रॉपिंग, प्राकृतिक खेती और नई फसलों पर फोकस किया जाएगा। एक कोको शहर स्थापित करने और किसानों की आय बढ़ाने के लिए कृषि को मजबूत करने के निर्देश दिए। जिसमें बाजार आधारित और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा दिया जायेगा। इस योजना में विभिन्न फलों और सब्जियों की खेती बढ़ाना और गरीबी रेखा से नीचे यानी बीपीएल किसानों को सहायता प्रदान करना शामिल है। सामान्य से कम मानसून वर्षा की आशंका के कारण 20 लाख एकड़ में पीएमडीएस जैसे उपाय लागू किए जाएंगे।</p>
<p><strong>किसानो को उत्तम प्रशिक्षण की व्यवस्था और सहायता </strong><br />जी हाँ, आंध्र प्रदेश दुनिया का पहला 'कोको सिटी' स्थापित करने की तैयारी कर रहा है। मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने हाल ही में  अधिकारियों को इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए उपयुक्त स्थान की पहचान करने के निर्देश दिए हैं। इस योजना के अंतर्गत कम से कम एक लाख किसानों को उत्तम प्रशिक्षण देने की व्यवस्था करने को कहा है। जो किसान इस योजना में शामिल होंगे, उन्हें सब्सिडी और सरकारी सहायता भी दी जाएगी। माल अच्छे दामों पर बिके इसके लिए मंडी से लेकर बाजार तक सभी सुविधाए उपलब्ध कराई जाएंगी। </p>
<p><img src="https://www.deshrojana.com/media/2026-04/screenshot-2026-04-27-123306.png" alt="Screenshot 2026-04-27 123306" width="949" height="591"></img></p>
<p><strong>इस परियोजना की मुख्य विशेषताएं </strong><br />इस परियोजना को प्रगतिशील किसानों के लिए एक अनुभव और प्रशिक्षण केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा, जहाँ उन्हें कोको की आधुनिक खेती और अंतरराष्ट्रीय मानकों के बारे में सिखाया जाएगा।  यह कोको सिटी लगभग 250 से 500 एकड़ के क्षेत्र में फैली होगी। शुरुआती प्रस्तावों के अनुसार, इसे एलुरु (Eluru) जिले में स्थापित किया जा सकता है, जो वर्तमान में देश का शीर्ष कोको उत्पादक क्षेत्र है। यहाँ कोको की खेती, प्रसंस्करण (processing) और विपणन (Marketing)के लिए एक एकीकृत हब बनाया जाएगा, जो अंतरराष्ट्रीय मानकों पर आधारित होगा। यह पहल राज्य के कृषि क्षेत्र को मजबूत करने और बागवानी (Horticulture) को 50 लाख एकड़ तक विस्तारित करने की बड़ी योजना का हिस्सा है। </p>
<p><strong>कब तक पूरी होगी योजना ?</strong><br />आंध्र सरकार 2030-31 तक करीब एक लाख किसानों को इसके लिए प्रशिक्षित करेगी, इसके लिए विकास केंद्र स्थापित किये जायेंगे।  25 मिलियन पौधे वितरित किये जायेंगे। कोको उत्पादन में पारदर्शिता लाने के लिए लाइट डिजिटल किसान रजिस्ट्री शुरू करने की भी सिफारिश की गई है  </p>
<p><img src="https://www.deshrojana.com/media/2026-04/screenshot-2026-04-27-123237.png" alt="Screenshot 2026-04-27 123237" width="924" height="610"></img></p>
<p><strong>सब्सिडी और सरकारी सहायता </strong><br />आंध्र प्रदेश सरकार इस पर एक बड़ा काम करने जा रही है आज केंद्र और राज्य सरकार कोको और बागवानी को बढ़ावा देने के लिए अनेक सब्सिडी और योजनाएं प्रदान कर रही हैं, विशेषकर नारियल और सुपारी के बागानों में अंतर-फसल के रूप में लगाने को कहा जाता जिससे एक साथ कई फसल लगा कर किसान दोहरा लाभ ले सकें।</p>
<p>कोको विकास निदेशालय (DCCD) और बागवानी विभाग इसके लिए प्रमुख वित्तीय सहायता देते हैं। जैसे- नई कोको रोपण के लिए प्रति हेक्टेयर 20,000 रुपये तक की वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है। हाइब्रिड फसल लगाने और इंटर क्रॉपिंग के लिए भी 60 से 40 के अनुपात में सहायता प्रदान की जाती है। आंध्र प्रदेश सरकार कोको कंपनियों के माध्यम से उपज बेचने पर 50 रुपये प्रति किलोग्राम तक की अतिरिक्त सब्सिडी भी दे रही है। सरकार किसानो के प्रशिक्षण और कार्यशालाओं के लिए भी सब्सिडी उपलब्ध कराती है, जिसमें प्रति बैच जिसमे 50 किसान शामिल होते हैं उन्हें 3.50 लाख रुपये तक की सहायता भी दी जाती है।</p>
<p>आंध्र सरकार कोको की खेती को बढ़ावा देने के लिए इतना बड़ा कदम उठाने जा रही है। ये प्रयोग अगर सफल रहता है तो देश ही दुनिया में पहली कोको सिटी हमारे देश में होगी। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>खेती-किसानी</category>
                                            <category>आंध्र प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 27 Apr 2026 13:07:08 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[ANJU SHARMA]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>भारतीय खेती पर पड़ा ईरान-अमेरिका युद्ध का असर, यूरिया की कीमतों में 84 प्रतिशत तक उछाल। </title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>जबसे ईरान-अमेरिका युद्ध शुरू हुआ तभी से होर्मुज स्ट्रेट पर परिवहन ठप्प पड़ा है। इससे कच्चा तेल और एलपीजी गैस तो प्रभावित हुई है। साथ ही रासायनिक उर्वकों के आयात पर भी इसका असर पड़ा है। सप्लाई चेन बाधित होने से इसकी कीमतों में भारी उछाल आया है। ये सीजन तो जैसे-तैसे संभल सकता है, लेकिन रबी सीजन में खाद की कमी एक बड़ी चुनौती बन सकती है। इसलिए सरकार और कंपनियां वैकल्पिक समाधान तलाशने में जुटी हैं।  </strong></p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.deshrojana.com/farming/impact-of-iran-america-war-on-indian-agriculture-urea-prices-rise/article-817"><img src="https://www.deshrojana.com/media/400/2026-04/26361053_agri-2.jpg" alt=""></a><br /><p><img src="https://www.deshrojana.com/media/2026-04/screenshot-2026-04-24-130159.png" alt="Screenshot 2026-04-24 130159" width="924" height="490"></img><br />अप्रैल का महीना चल रहा है ऐसे में एक तरफ तपती धूप सितम ढा रही है। दो महीने बाद मानसून भी अपनी दस्तक देने लगेगा। खरीफ फसलों की बुवाई शुरू हो जाएगी। उसके लिए किसानो को बोरी भर-भर के यूरिया खाद की आवश्यकता होगी। देश में पर्याप्त यूरिया का उत्पादन ना होने से सरकार को इसे दोगुने से ज़्यादा रेटों पर आयत करना पड़ रहा है। जिस वजह से इसकी कीमतों में भारी उछाल आया है। ऐसा इसलिए ताकि किसानों को खरीफ फसल की बुवाई में यूरिया की कमी नहीं पड़े।</p>
<p><strong>भारत में यूरिया की सबसे ज्यादा खपत </strong><br />रासायनिक खादों की जब बात आती है तो भारत में इसकी सबसे ज़्यादा खपत होती है। कृषि विशेषजों का कहना है कि हर साल देश में करीब 400 लाख टन यूरिया की खपत होती है। जिसमे से करीब 310 लाख टन यूरिया का उत्पादन देश में होता है। बाकी बचा 90 से 10 लाख टन यूरिया, इसकी पूर्ति के लिए इसे विदेशों से आयात करना पड़ता है। </p>
<p><strong><img src="https://radhakrishnaagriculture.in/cdn/shop/files/urea.jpg?v=1711181452&amp;width=1946" alt="Urea Fertilizer for Use All Plants 1Kg – Radhakrishnaagriculture"></img></strong></p>
<p><strong>स्टॉक में आई कमी</strong><br />खरीफ सीजन से पहले देश में यूरिया का स्टॉक कम हो गया है। 1 अप्रैल 2026 को यूरिया का भंडार 54.22 लाख टन था, जो पिछले साल से कम है। यह पिछले चार साल में सबसे कम स्तर माना जा रहा है। अगर समय पर खाद नहीं मिली, तो फसलों पर असर पड़ सकता है</p>
<p><strong>कहाँ से होता है आयात </strong><br />भारत अपना अधिकतर यूरिया परंपरागत रूप से मध्य पूर्व के देशों, ओमान, सउदी अरब, संयुक्त अरब अमिरात जैसे देशों से आयात करता है। वहां से आने वाले यूरिया का मार्ग होर्मुज स्ट्रेट ही है, जो कि पिछले दो महीने से बाधित है। इसी संकट के कारण भारत की यूरिया आपूर्ति में भारी बाधा आई है।</p>
<p><strong><img src="https://www.bhaskarhindi.com/h-upload/2026/04/17/1505402-capture.PNG" alt="Hormuz Crisis: ईरान ने किया होर्मुज स्ट्रेट खोलने का ऐलान, सुरक्षित गुजर  सकेंगे जहाज, ट्रंप ने दी प्रतिक्रिया | Trump Expresses Pleasure Over Iran's  Announcement to Open ..."></img></strong></p>
<p><strong>दोगुनी कीमत पर आयात </strong><br />भारत को पहले के मुकाबले लगभग दूनी कीमत पर यूरिया खरीदना पड़ रहा है। खबर है कि भारतीय पोटाश लिमिटेड ने 15 लाख टन यूरिया, जिसकी डिलीवरी पश्चिमी तट पर होगी, का सौदा 935 डॉलर प्रति टन की दर पर किया है। वहीं देश के पूर्वी तट पर 10 लाख टन यूरिया की डिलीवरी होनी है। इसका सौदा 959 डॉलर प्रति टन की दर पर किया गया है। उल्लेखनीय है कि ईरान-इजरायल युद्ध शुरू होने से पहले भारत विदेशों से 490 डॉलर प्रति टन की दर पर यूरिया खरीदा करता था। इस समय जो सौदा हुआ है, वह पहले के मुकाबले करीब 90 फीसदी अधिक है। </p>
<p><strong>दुनिया भर में बढ़ी खाद की कीमतें</strong><br />आपको बता दें कि अभी जो सौदा हुआ है, उससे पहले दो दर्जन से अधिक कंपनियों ने ऑफ़र पेश किया था। इनमें $935 से $1,136 प्रति टन के बीच का रेट रखा गया था। इसलिए सबसे कम कीमत वाला सौदा जो कि $935 है इस पर सरकार ने खरीद की सहमति जताई है। होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने के बाद भारत की पहली खेद होगी।<strong> </strong></p>
<p><strong><img src="https://imgs.etvbharat.com/etvbharat/prod-images/30-03-2026/26361053_agri-2.jpg" alt="क्या आयातित यूरिया के बजाय 'पेशाब' से ..."></img></strong></p>
<p><strong>दूनी कीमत पर खरीद क्यों जरूरी?</strong><br />भारत में जैसे मानसून सीजन की शुरुआत होती है तभी से खरीफ फसलों की बुवाई शुरू हो जाती है। इस समय  में धान, मक्का, सोयाबीन जैसी महत्वपूर्ण फसलों की बुवाई होती है जो कि भारत के खाद्य सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। तब किसान को पर्याप्त मात्रा में यूरिया की आवश्यकता होगी। इसलिए सरकार ने दूनी कीमत पर भी यूरिया की सप्लाई के आर्डर दिए गए हैं। अभी कई मिलियन टन यूरिया की खरीद का टेंडर और जारी होना है।</p>
<p><strong>भारतीय कारखानों में उत्पादन हुआ बाधित </strong><br />एक तो खपत के हिसाब से पहले ही देश में रासायनिक उर्वरक कम बनते है दूसरा। इस समय खाद बनाए वाले जो कारखाने हैं उनमे भी यूरिया का उत्पादन पूरी गति से नहीं हो रहा है। जिसका सबसे बड़ा कारन है नेचुरल गैस आयत कम होना।  दअसल दक्षिण एशियाई देशों में यूरिया उत्पादन बहुत हद तक नेचुरल गैस पर निर्भर करता है। नेचुरल गैस का अधिकांश हिस्सा पश्चिम एशियाई देशों से आता है। यूरिया बनाने के लिए अमोनिया बनाना पड़ता है। इसे बनाने में गैस का उपयोग होता है। हार्मुज़ जलडमरूमध्य के बंद होने के बाद से कई उत्पादकों को अपने कारखाने बंद करने पड़े। वही कुछ कारखानों में काम बहुत कम हो रहा है। </p>
<p><strong><img src="https://www.dowjones.com/wp-content/uploads/2026/03/Strait-of-Hormuz-WP.webp?w=1024" alt="वैश्विक | खाद्य सुरक्षा पर ईरान ..."></img></strong></p>
<p><strong>कहां से आएगा यूरिया?</strong><br />सरकार ने कंपनियों को निर्देश दिया है कि वे यूरिया ऐसे देशों से खरीदें जहां से सुरक्षित तरीके से आपूर्ति हो सके। इसलिए अब ये यूरिया रूस, मिस्र, नाइजीरिया, इंडोनेशिया और मलेशिया जैसे देशों से आ सकता है। सरकार का प्रयास कि ये खाद समय पर पहुँच जाये ताकि  किसानो को परेशनी का सामना ना करना पड़े। इससे यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि समय पर पर्याप्त मात्रा में खाद देश में पहुंच सके। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>खेती-किसानी</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 24 Apr 2026 12:44:02 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[ANJU SHARMA]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title> भारतीय वैज्ञानिकों ने बनाई जादुई छड़ी, डर कर दूर भाग जाएंगे सांप !</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>अक्सर देखा जाता है कि किसान जब खेतों में काम करने जाते हैं तो सांप उन्हें काट लेते हैं। आये दिन ऐसी घटनाएं होती रहती हैं, जिस वजह से किसान कई बार अपनी जान भी गवां देते हैं। लेकिन अब भारतीय वैज्ञानिकों ने किसानों के लिए ऐसी जादुई छड़ी बनाई है। जिसे देखते ही सांप दूर भाग जायेंगे।  </strong></p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.deshrojana.com/farming/indian-scientists-have-created-a-magic-wand-that-will-scare/article-764"><img src="https://www.deshrojana.com/media/400/2026-04/screenshot-2026-04-22-164318.png" alt=""></a><br /><p><span style="background-color:rgb(251,238,184);"><strong><img src="https://www.deshrojana.com/media/2026-04/screenshot-2026-04-22-164318.png" alt="Screenshot 2026-04-22 164318" width="952" height="465"></img></strong></span></p>
<p> </p>
<p><strong>कहानी किसान की </strong><br />चलिए आपको एक कहानी ये कहानी सुनते हैं, कहानी एक किसान की है, जिनका नाम रामलाल है। एक बार रामलाल रात के समय खेतों में पानी लगाने गए थे। वो अपने खेत में घुसे ही थे कि खेत में पड़ा सांप उन्हें दिखाई ही नहीं दिया और सांप ने उनके पैर में काट लिया रामलाल ने ध्यान से देखा तो एक ज़हरीला सांप रेंगते हुए उनके सामने से निकल गया। उन्होंने तुरंत अपना फ़ोन निकला और अपने छोटे भाई फोन कर दिया। छोटा भाई भी तत्परता दिखाते हुए उन्हें हॉस्पिटल लेकर पहुंचा जहाँ रामलाल की जान बच गई। ये कोई एक दिन बात नहीं है किसानों के साथ अक्सर ऐसा होता रहता है। लेकिन सब इतने खुश किस्मत नहीं होते, कई बार लोगों को अपनी जान भी गवानी पड़ जाती है।  </p>
<p>इसी को देखते हुए भारतीय वैज्ञानिकों ने एक स्मार्ट छड़ी बनाई है। यह छड़ी 100 मीटर दूर से ही सांप-बिच्छु का पता लगा सकती है। इस छड़ी में स्पेशल सेंसर लगे होते हैं। यह छड़ी कंपन करके किसानों को खतरे से आगाह करती है। </p>
<p><strong><img src="https://www.deshrojana.com/media/2026-04/screenshot-2026-04-22-164604.png" alt="Screenshot 2026-04-22 164604" width="936" height="708"></img></strong></p>
<p><strong>शिवराज सिंह ने बताई किसान मित्र छड़ी की विशेषता </strong><br />देश में हर साल सांपों के काटने की घटनाएं किसानों के लिए बड़ी चिंता बनी रहती हैं, खासकर तब जब वे रात में खेतों में सिंचाई या काम के लिए जाते हैं। ऐसे में अब भारतीय वैज्ञानिकों ने एक अनोखी तकनीक विकसित की है, जो किसानों को सांप और अन्य जहरीले जीवों से बचाने में मदद करेगी। इस नई खोज का नाम ‘किसान मित्र छड़ी’ है, जो करीब 100 मीटर दूर से ही सांपों की मौजूदगी का पता लगा सकती है। रायसेन के उन्नत कृषि महोत्सव में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इस छड़ी के बारे में लोगों को जानकारी दी।</p>
<p><strong>ऐसे काम करती है स्मार्ट छड़ी </strong><br />आपको बता दें कि मध्य प्रदेश के रायसेन में आयोजित उन्नत कृषि महोत्सव के दौरान इस खास उपकरण की जानकारी देते हुए केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इसकी विशेषतायें बताई थी। उन्होंने कहा, था कि  यह किसान मित्र छड़ी सांप के काटने से होने वाली दुर्घटन पर रोक लगाएगी।।आपको बता कि यह छड़ी सामान्य डंडे जैसी दिखती है, लेकिन इसमें एक विशेष तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। किसान जब खेत या जंगल में जाएं, तो इसे जमीन पर रखकर बटन दबाना होता है। अगर आसपास सांप या कोई जहरीला जीव मौजूद होता है, तो यह छड़ी तेज कंपन करने लगती है। इसके जरिए किसान को पहले ही खतरे का संकेत मिल जाता है और वह सतर्क होकर उस जगह से दूर रह सकता है। और तो और इस छड़ी का उपयोग भी बेहद आसान है।</p>
<p><img src="https://www.deshrojana.com/media/2026-04/screenshot-2026-04-22-164236.png" alt="Screenshot 2026-04-22 164236" width="936" height="564"></img></p>
<p><strong>भारत में हर साल होती हैं 50 से 60 हज़ार लोगो की मौत </strong><br />विशेषज्ञों की माने तो भारत में हर साल 30 से 40 लाख साप के काटे जाने के मामले सामने आते हैं। उनमे से करीब 60 हजार लोगों की मौत हो जाती है। इनमें बड़ी संख्या किसानों की होती है। देश में करीब 350 प्रकार के सांप पाए जाते हैं, जिनमें से लगभग 10 प्रतिशत ही जहरीले होते हैं, लेकिन समय पर इलाज न मिलने पर ये जानलेवा साबित हो सकते हैं।</p>
<p>ऐसे में ये स्मार्ट छड़ी किसानों के लिए एक बड़ी राहत ला सकती है। यह न केवल उनकी सुरक्षा बढ़ाएगी, बल्कि खेतों में काम करते समय उनके आत्मविश्वास को भी मजबूत करेगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>खेती-किसानी</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 22 Apr 2026 16:47:51 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[ANJU SHARMA]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बंगाल इलेक्शन से पहले टीएमसी नेताओं पर ईडी की छापेमारी को ममता ने बताया बीजेपी की साजिश !</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>पश्चिम बंगाल में चुनाव से पहले सियासत गरमा गई है। 20 अप्रैल को प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने कोलकाता में बड़ी कार्रवाई करते हुए पुलिस के DCP शांतनु सिन्हा बिस्वास और कारोबारी जॉय कामदार के ठिकानों पर छापेमारी की है। यह कार्रवाई मनी लॉन्ड्रिंग और ‘सोना पप्पू सिंडिकेट’ केस से जुड़ी बताई जा रही है, जिसमें करोड़ों की नकदी, सोना और हथियार बरामद होने का दवा भी किया हैं। शांतनु सिन्हा को ममता बनर्जी का करीबी माना जाता है। चुनाव से ठीक पहले लगातार हो रही ED और आयकर विभाग की कार्रवाइयों ने TMC बनाम BJP की लड़ाई को और तीखा बना दिया है। अब क्या ये भ्रष्टाचार पर कार्रवाई का मामला है … या चुनावी सियासत? इसे समझते हैं। लेकिन पहले एक नजर 2021 के चुनावों के दौरान और उसके बाद हुई जांच और छापे मारी पर एक नजर। </strong></p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.deshrojana.com/state/west-bengal/mamata-calls-ed-raid-on-tmc-leaders-a-conspiracy-by/article-762"><img src="https://www.deshrojana.com/media/400/2026-04/screenshot-2026-04-27-140521.png" alt=""></a><br /><p><img src="https://www.deshrojana.com/media/2026-04/screenshot-2026-04-27-140521.png" alt="Screenshot 2026-04-27 140521" width="943" height="642"></img></p>
<p>2021 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दौरान और बाद में केंद्रीय जांच एजेंसियों (ED, CBI) ने टीएमसी के कई प्रमुख नेताओं, मंत्रियों और सहयोगियों पर शिकंजा कसा, जिसमें कोयला घोटाला, मवेशी तस्करी और नारद स्टिंग ऑपरेशन जैसे हाई-प्रोफाइल मामले शामिल थे। चुनावों से ठीक पहले और बाद में हुई।  जैसे -विधानसभा चुनाव के तुरंत बाद, मई 2021 में, सीबीआई ने टीएमसी के कद्दावर नेताओं—फिरहाद हकीम, सुब्रत मुखर्जी, मदन मित्रा और पूर्व टीएमसी नेता शोभन चटर्जी को नारद स्टिंग ऑपरेशन मामले में गिरफ्तार किया था। जिसके विरोध में  पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी खुद कोलकाता में सीबीआई के निजाम पैलेस कार्यालय पहुंच गई थीं और घंटों धरने पर बैठी थीं, जिससे केंद्र और राज्य के बीच तनाव चरम पर पहुंच गया था।</p>
<p>अवैध कोयला खनन और मवेशी तस्करी मामलों में मनी लॉन्ड्रिंग की जांच। इससे जुड़े लिंक टीएमसी नेताओं और उनके सहयोगियों से भी तलाशे गए थे, जिसमें अभिषेक बनर्जी से भी पूछताछ की गई थी। चुनाव के बाद हुई हिंसा के मामलों में भी कई स्थानीय टीएमसी नेताओं को सीबीआई द्वारा नोटिस और छापे का सामना करना पड़ा था। टीएमसी ने इन कार्रवाइयों को "राजनीतिक प्रतिशोध" बताया और आरोप लगाया कि केंद्र सरकार बीजेपी के इशारे पर एजेंसियों का इस्तेमाल कर रही है। वहीं बीजेपी ने इसे भ्रष्टाचार के खिलाफ 'जीरो टॉलरेंस' नीति बताया था।</p>
<p><img src="https://www.livemint.com/lm-img/img/2025/10/16/1600x900/Anil-Ambani--4_1759894355323_1759894366491_1760592134344.jpg" alt="ED conducts raids in multiple West Bengal locations, including ..."></img></p>
<p>अब अप्रैल 2026 में 23 और 29 तारिख को बंगाल में इलेक्शन है उससे पहले । सरकारी जांच एजेंसिया फिर से सक्रिय हो गई हैं। जिसमें टीएमसी के कई नेता कार्यकर्ता और बिज़नेस में लपेटे में आ गए हैं। ममता ने आरोप लगाया कि चुनाव के दौरान छापेमारी और मनी लॉन्ड्रिन जांच राजनितिक दुर्भावना से प्रेरित है। लेकिन बंगाल की जनता बीजेपी को सबक सिखाएगी </p>
<p>ममता बनर्जी ने इसे अपनी पार्टी के खिलाफ साजिश बताया है। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी को हर दिन ईडी की छापेमारी का सामना करना पड़ रहा है। रेड के जरिये उनकी पार्टी को डराया जा रहा है। कुछ राजनितिक विशेषज्ञ इसे बिहार इलेक्शन से जोड़ रहे है। जहाँ प्रशांत किशोर आये दिन बीजेपी के नेताओं और नितीश सरकार पर कर्रेप्शन के आरोप लगा रहे थे। लेकिन वहां कोई ईडी की करवाई देखने को नहीं मिली लेकिन, बंगाल में आये दिन नेताओं और कार्यकर्ताओं पर ईडी की कार्रवाई होरही है।  विशेषज्ञों का मानना है की इसके पीछे चुनाव आयोग और केंद्र की सत्ता जिम्मेदार है। इसी का विरोध ममता अपने मंचो बार-बार कर रही हैं। </p>
<p>एक खबर ये भी है कि चुनाव में बाधा डालने वालों की एक लम्बी चौड़ी लिस्ट बनाई गई है, जिसमें तृणमूल के नेता, कार्यकर्त्ता और विधायकों के नाम शामिल है। चुनाव आयोग ने टीएमसी के 9 नेताओं की सूचि बनाई है जिन्हे ट्रबल मेकर बताया गया है। जो सूचि बनाई गई है उसमे करीब 100 लोगों के नाम शामिल हैं। 20 अप्रैल को एक रैली के दौरान ममता ने कहा कि मेरे कई कार्यकर्ताओं को गिरफ्ताज किया जा सकता है। उन्होंने बीजेपी के एक नेता पर करप्शन का आरोप लगाते हुए कहा कि ये उपद्रवियों की पार्टी है। </p>
<p><img src="https://media.newindianexpress.com/newindianexpress/2024-09-13/dv7q9gq9/ANI_20240913084754.jpg?w=1200&amp;h=900&amp;auto=format%2Ccompress&amp;fit=max&amp;enlarge=true" alt="ED raids multiple locations in West Bengal in connection with coal mining  case"></img></p>
<p>हालाँकि चुनाव के दौरान सुरक्षा में तैनात कर्मियों की मीटिंग की तस्वीरें जारी कर टीएमसी नेताओं ने आरोप लगाया है कि ये मीटिंग केंद्र सरकार द्वारा चुनाव को प्रभावित करने के लिए जा रही है। उनका कहना है जितनी फाॅर्स यहाँ लगाई गई है उससे आधी फाॅर्स ही काफी थी। टीएमसी नेता महुआ मोइत्रा ने ट्वीट किया कि बीजेपी के सारे पालतू आईपीएस यहाँ जमा है ताकि वे चुनाव में हेराफेरी कर सकें। हालाँकि हम इस बाद से सहमत नहीं क्योंकि चुनाव के समय फाॅर्स की इस तरह मीटिंग्स होती ही हैं। सेना को खास निर्देश दिए जाते हैं ताकि कोई अप्रिय घटना ना घटे।</p>
<p> वैसे आपको बता दे कि यहाँ SIR में जिस क्षेत्र से ज़्यादा लोगों के नाम कटे है उन क्षेत्रों पर सेना की ज्यादा तैनाती की गई है। चुनाव आयोग ने भी कुछ चुनाव बूथों को अति संवेदनशील घोषित किया है। क्योंकि वहां हर बूथ पर करीब 100 से 150 लोगों के नाम काटे गए हैं। पुलिस अधिकारियों का भी कहना कि जिनके नाम कटे हैं वो चुनाव के दिन हंगामा कर सकते हैं। </p>
<p>पश्चिम बंगाल में विधानसभा की 294 सीटें है। 2021 में टीएमसी को 215 सीटें मिली जबकि बीजेपी को 77 सीटें मिली।  जबकि 2024 के लोकसभा चुनाव में बंगाल 42 लोकसभा सीटों में से टीएमसी को 29, बीजेपी को 12 तो कांग्रेस को एक सीट पर जीत मिली थी। अब 2026 में 23 और 29 अप्रैल को यहाँ चुनाव होने जिसका रिजल्ट 4 मई को घोषित होगा। अब देखना ये की पश्चिम बंगाल में चल रही राजनितिक उठा-पटक और आरोप-प्रत्यारोप और आये दिन चल रही छापेमारी चुनाव को किस और ले जाएगी। ममता भरेंगी हुंकार या बीजेपी का पलड़ा होगा भारी। </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>चुनाव</category>
                                            <category> पश्चिम बंगाल</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 22 Apr 2026 11:32:23 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[ANJU SHARMA]]></dc:creator>
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                <title>ईरान-अमेरिका विवाद, क्या फिर से शुरू होगी वार?</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>ईरान अमेरिका और इजराइल कॉन्फ्लिक्ट किसी बड़े युद्ध की चेतावनी दे रहा है। जिस तरह अमेरिका ईरान के बीच समझौते की कड़िया टूट रही है। एक दूसरे पर आरोप-पत्यरोप कर रहे है। उस तरह तो अमेरिका ईरान वॉर पार्ट 2 होने की संभावनाएं साफ़ दिख रही हैं। अमेरिका होर्मुज पर अपना अधिकार जमाये बैठा है तो दूसरी और ईरान भी अपनी जिद पर अड़ा है।  होर्मुज पर धमाके और गोली बारी साफ़ संकेत दिखा रहे है कि यहाँ अभी शांति के आसार नहीं है। </strong></p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.deshrojana.com/world/america/iran-america-dispute-will-the-war-start-again/article-744"><img src="https://www.deshrojana.com/media/400/2026-04/us-military-attack-against-iran_swot-analysis_specialeurasia.png" alt=""></a><br /><p> </p>
<p><img src="https://www.deshrojana.com/media/2026-04/us-military-attack-against-iran_swot-analysis_specialeurasia.png" alt="US-Military-Attack-against-Iran_SWOT-Analysis_SpecialEurasia" width="1536" height="1024"></img>अमेरिका ईरान युद्ध पर हुए सीज फायर के दो सप्ताह का समय लगभग खत्म होने हो को है। होर्मुज पर दोनों के टकराव देखते हुए तो यही लगता है कि ये स्थिति आगे भी बनी रहेगी।अमेरिका-ईरान के बीच शुरू होने वाली दूसरे दौर की शांति वार्ता शुरू होने से पहले फेल रही है। जैसा कि अमेरिकी राष्ट्रपति का बयान है कि "यूएस नेवी ने ओमान की खाड़ी में अमेरिकी नाकेबंदी को पार करने को कोशिश कर रहे एक ईरानी झंडे वाले कार्गो जहाज को कब्जे में ले लिया है। " उधर, ईरान ने बोट ड्रोन से अमेरिकी नेवी पर पलटवार का दावा किया है। </p>
<p>अमेरिका-ईरान के बीच पहले दौर की शांति वार्ता फेल होने के बाद चौतरफा युद्ध शांति के लिए कूटनीतिक हल खोजने की कोशिशे की जा रही थी। इसी बीच ईरान के विदेश मंत्रालय ने शांति वार्ता को लेकर बड़ी जानकारी दी है। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने बताया कि हमने (ईरान) पाकिस्तान को अपना 10 सूत्रीय प्रस्ताव सौंप दिया। इसके साथ ही ईरान ने अमेरिका पर कूटनीतिक बातचीत को लेकर गंभीर न होने और सीजफायर के उल्लंघन का आरोप भी लगाया है। </p>
<p>वहीं, रविवार सुबह अमेरिकी नेवी ने ईरानी झंडे वाले एक कार्गो जहाज को अपने कब्जे में ले लिया था। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस बारे में जानकारी देते हुए कहा कि ये जहाज स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में अमेरिकी नाकाबंदी को पार करने की कोशिश कर कहा था, जबकि ईरान ने बोट ड्रोन से अमेरिकी नेवी पर पलटवार का दावा किया है। ऐसे में ऐसे में सीज फायर होने पर भी उस पर पूरी तरह अमल नहीं किया गया। </p>
<p><img src="https://www.deshrojana.com/media/2026-04/574d966d-d994-45b3-81fb-43f8ddf581c1.jpg" alt="574d966d-d994-45b3-81fb-43f8ddf581c1" width="1366" height="910"></img></p>
<p>आपको बता दें कि अमेरिका-ईरान वार्ता पर दुनिया की नजरें टिकी हैं। 7 अप्रैल से शुरू हुआ दो हफ्ते का युद्धविराम 21 अप्रैल को खत्म हो रहा है, लेकिन दूसरे दौर की बातचीत भी असफल रही। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी है कि अगर ईरान डील नहीं मानता तो अमेरिका उसके हर पावर प्लांट और पुल को तबाह कर देगा।</p>
<p>इन सबके बीच अमेरिकी सेना ने होर्मुज की खतरनाक नाकेबंदी की हुई है। जिसको लेकर अमेरिका की नाकाबंदी से ईरान नाराज नजर आ रहा है। ईरान ने साफ कर दिया है कि ईरान अमेरिका का किसी भी तरह का दबाव बर्दाश्त नहीं करेगा। </p>
<p><img src="https://www.deshrojana.com/media/2026-04/574d966d-d994-45b3-81fb-43f8ddf581c1.jpg" alt="574d966d-d994-45b3-81fb-43f8ddf581c1" width="1366" height="910"></img></p>
<p>दूसरी तरफ इजरायली सेना ने हिज्बुल्लाह पर सीजफायर का उल्लंघन करने का आरोप लगाया है। डीआईएफ के मुताबिक, बिंत जुबैल और लितानी इलाके में तीन अलग-अलग घटनाओं में कुछ हथियारबंद लोग प्रतिबंधित क्षेत्र में घुस आए और सैनिकों के पास पहुंचकर खतरा पैदा करने की कोशिश की। सेना का कहना है कि इस खतरे को देखते हुए उन लोगों पर कार्रवाई की गई और उन्हें मार दिया गया। </p>
<p>अमेरिका और ईरान के बीच मुख्य विवाद का कारण परमाणु कार्यक्रम, आर्थिक प्रतिबंध, क्षेत्रीय वर्चस्व और होर्मुज़ जलडमरूमध्य में सैन्य तनाव है। 2026 में, ईरान द्वारा परमाणु संवर्धन बढ़ाने, अमेरिकी जहाजों को निशाना बनाने और हमास जैसे समूहों का समर्थन करने से संघर्ष चरम पर है। सीज फेरे के लिए जो शर्ते रखी गई थी उसने में ईरान ने कुछ शर्तों को मानने से मना कर दिया। इसी वजह से अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध का साया लगातार गहराता जा रहा है। </p>
<p><img src="https://www.deshrojana.com/media/2026-04/screenshot-2026-04-21-120820.png" alt="Screenshot 2026-04-21 120820" width="1306" height="928"></img></p>
<p>इस बीच, ईरान के संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाकिर गालीबाफ ने अमेरिका को नए सिरे से धमकी दी है। उन्होंने कहा कि अगर जंग फिर से शुरू हुई तो ईरान युद्ध के मैदान में नए पत्ते खोलेगा। संसद स्पीकर मोहम्मद मोहम्मद बगेर गालिबफ ने मंगलवार (21 अप्रैल) सुबह तेहरान में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट में लिखा, "हम धमकियों के साए में बातचीत स्वीकार नहीं करते।"</p>
<p><img src="https://www.deshrojana.com/media/2026-04/screenshot-2026-04-21-121050.png" alt="Screenshot 2026-04-21 121050" width="932" height="622"></img></p>
<p>विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने स्पष्ट किया कि अमेरिका कूटनीति को आगे बढ़ाने के बारे में गंभीर नहीं था। उन्होंने दो सप्ताह के युद्धविराम के उल्लंघनों का हवाला दिया। उन्होंने कहा, "कूटनीति और बातचीत के लिए तत्परता का दावा करते हुए, अमेरिका ऐसे व्यवहार कर रहा है जो किसी भी तरह से राजनयिक प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में गंभीरता का संकेत नहीं देते हैं।"</p>
<p>यह बयान ऐसे समय आया जब दोनों पक्ष वार्ता के दूसरे दौर के लिए इस्लामाबाद पहुंचने की तैयारी में थे। सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए इसके जारी रहने की संभावना प्रतीत होती है। पाकिस्तान सरकार ने रेड जोन को लगभग पूरी तरह से सील कर दिया है, जहां सेरेना और मैरियट होटलों सहित प्रमुख कार्यालय और इमारतें स्थित हैं। पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी ने सोमवार को अमेरिका और ईरान के राजदूतों से अलग-अलग मुलाकात की। नवकी ने अपेक्षित दूसरे दौर की वार्ता के लिए सुरक्षा और अन्य व्यवस्थाओं पर चर्चा की।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>ईरान</category>
                                            <category>इजराइल</category>
                                            <category>अमेरिका</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 21 Apr 2026 12:11:20 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[ANJU SHARMA]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पश्चिम बंगाल- साधन संपन्न और खुशहाल प्रदेश कैसे बना पिछड़ेपन का शिकार ?</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>कभी देश आर्थिक राजधानी हुआ करता था पश्चिम बंगाल। प्राकृतिक रूप से साधन संपन्न और बहुत ही खुशहाल प्रदेश, आज अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है। इतने खुशहाल प्रदेश को अर्श से फर्श पर लाने में कौन से कारण जिम्मेदार हैं ? चलिए आज इसी का विश्लेषण करते हैं। </strong></p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.deshrojana.com/state/west-bengal/west-bengal-%E2%80%93-how-a-resourceful-and-prosperous-state-became/article-716"><img src="https://www.deshrojana.com/media/400/2026-04/360_f_105094996_ncnrhu61to1dupx92wftyzcxb1kzawae.jpg" alt=""></a><br /><p><img src="https://www.deshrojana.com/media/2026-04/360_f_105094996_ncnrhu61to1dupx92wftyzcxb1kzawae.jpg" alt="360_F_105094996_nCNRHU61To1DupX92wFTYzcxb1KZawAE" width="948" height="632"></img></p>
<p>पश्चिम बंगाल में इलेक्शन नजदीक हैं। चारों और चुनावी भाषण और रैलियों का दौर चल रहा है। ऐसे में बंगाल की कमजोर कड़ी की सब बखिया उधेड़ रहे हैं। यहां की गरीबी, रोजगार की कमी, हिन्दू मुस्लिम विवाद, दंगे और पलायन करते लोग। कहने का मतलब है कि बंगाल गरीबी, भुखमरी और अनेक परशानियों से जूझ रहा है। प्रदेश में अशांति का माहौल है। </p>
<p>अब सवाल ये उठता है कि, क्या बंगाल शुरू ऐसा ही था ? जवाब है नहीं, क्योकि पश्चिम बंगाल प्राकृतिक संसाधनों से भरपूर है। जैसे-उपजाऊ जलोढ़ मिट्टी, विस्तृत वन क्षेत्र (सुंदरबन), गंगा-भागीरथी नदी प्रणाली, और प्रचुर मात्रा में कोयला भंडार से समृद्ध है। राज्य में चावल, जूट, चाय और आलू की प्रमुख खेती होती है। प्रमुख खनिजों में कोयला, देश का करीब आधा हिस्सा यही से आता है, अग्नि-मिट्टी यानि सिरेमिक और चीनी मिट्टी शामिल हैं। ये सभी संसाधन किसी भी क्षेत्र को आर्थिक रूप से संपन्न बनाने के लिए पर्याप्त हैं। लेकिन आज बंगाल की हालत बद से बदतर हो गई है। </p>
<p>मुग़ल काल से लेकर अंग्रेजी सियासत तक पूरे देश पर यही से अर्तव्यवस्था का संचालन होता था। क्योंकि ये देश की आर्थिक राजधानी हुआ करती थी। इस दौर में बंगाल भारत का सबसे</p>
<p><img style="aspect-ratio:auto;" src="https://www.deshrojana.com/media/2026-04/screenshot-2026-04-20-150121.png" alt="Screenshot 2026-04-20 150121" width="972" height="623"></img></p>
<p> संपन्न हिस्सा हुआ करता था। अब एक बड़ा सवाल कि, अगर इतना संपन्न राज्य था बंगाल तो आज यहाँ के लोग देश भर में रोजगार की तलाश में मारे-मारे क्यों फिर रहे हैं। इसकी बदहाली का कारण क्या ? आखिर ऐसा क्या हुआ कि 'भारत की आर्थिक राजधानी' कहलाने वाला यह प्रांत धीरे-धीरे पीछे छूटता गया? तो चलिए इतिहास के कुछ पन्ने पलटते हैं और जानते है कि बंगाल दशा और दिशा बिगाड़ने में कौन से कारण जिम्मेदार है। ।</p>
<p> दरअसल इसके पीछे कोई एक कारण नहीं, बल्कि घटनाओं का एक ऐसा सिलसिला है, जिसने बंगाल की भूगोल और तकदीर दोनों बदल दी। 20वीं सदी की शुरुआत तक कलकत्ता जिसे अब कोलकाता के नाम से जाना जाता है ये न केवल बंगाल की, बल्कि पूरे भारत की राजधानी हुआ करती थी। साल 1911 में अंग्रेजो ने कोलकाता को छोड़ देश की राजधानी दिल्ली को बनाया। यह सिर्फ दफ्तरों का एक जगह से दूसरी जगह शिफ्ट होना नहीं था। इसने बंगाल की अर्थव्यवस्था को हिला कर रख दिया। किसी देश की राजधानी होना और फिर महज एक राज्य की राजधानी बनकर रह जाना, बहुत बड़ा अंतर पैदा करता है। इस बदलाव से निवेश, सत्ता का केंद्र और अंतरराष्ट्रीय महत्व दिल्ली की ओर झुक गया। यह बंगाल के आर्थिक स्थिति को तोड़ने जैसा था। </p>
<p><img src="https://www.deshrojana.com/media/2026-04/screenshot-2026-04-20-150802.png" alt="Screenshot 2026-04-20 150802" width="1109" height="726"></img></p>
<p>बंगाल के पतन की सबसे बड़ी वजह बना 1947 का बंटवारा। बंगाल दो हिस्सों में बंट गया। जिसका पश्चमी हिस्सा भारत के पास रहा जिसे आज पश्चिम बंगाल के नाम से जाना जाता है जबकि पूर्वी हिस्सा पाकिस्तान के पास चला गया जो 1971 में बांग्ला देश बना। ये सिर्फ एक बंटवारा नहीं था बल्कि बंगाल के माथे पर खींची गई बदकिस्मती की एक स्याह लकीर थी। एक खुशहाल और संपन्न अर्थव्यवस्था का कत्ल था। </p>
<p>बंगाल जूट का सबसे बड़ा केंद्र था। इस बंटवारे ने उसे बर्बाद कर दिया। जूट पैदा करने वाले खेत पूर्वी हिस्से में चले गए, जबकि उसे प्रोसेस करने वाली मिलें हुगली नदी के किनारे पश्चिम बंगाल में रह गईं। कच्चा माल कहीं और, कारखाना कहीं। इस विसंगति ने बंगाल के औद्योगिक ढांचे को तोड़ दिया। बंटवारे के बाद मानवीय त्रासदी का ये वो दंश था  जिसे बंगाल आज भी झेल रहा है। </p>
<p><img src="https://www.deshrojana.com/media/2026-04/jute-3m.jpg" alt="jute-3m" width="1500" height="1000"></img></p>
<p>पूर्वी पाकिस्तान बनने से लाखों की संख्या में लोग अपनी जमीन, जायदाद और पुश्तैनी काम छोड़कर इस तरफ आए यानि पश्चिम बंगाल में आ गए। एक बसा-बसाया परिवार जब शरणार्थी बनकर आता है, तो उसे दोबारा शून्य से शुरू करना पड़ता है। जिसमे उसकी कई पीढ़ियां लग जाती हैं बंगाल की सीमित ज़मीन और संसाधनों पर अचानक आबादी का भारी बोझ बढ़ गया। जब रोटी का संकट सामने हो, तो समाज की बौद्धिक और सांस्कृतिक प्रगति रुक जाती है। ऐसा ही कुछ यहाँ भी हुआ। </p>
<p>अभी लोग बंगाल बंटवारे के घावों से उबर भी नहीं पाए थे कि उन्हें एक और बड़ा झटका लगा। 1971 की उथल-पुथल शुरू हो गई। पाकिस्तान और पूर्वी पाकिसतन अलग हो गए। बांग्लादेश मुक्ति संग्राम के दौरान एक बार फिर शरणार्थियों का भारी रेला पश्चिम बंगाल की सीमाओं में दाखिल हुआ। कम क्षेत्रफल में घनी आबादी का दबाव बढ़ने से बंगाल के प्राकृतिक संसाधनों पर जो हक यहाँ के पुराने बाशिंदों का था, उसे अब करोड़ों नए लोगों के साथ साझा करना पड़ा। जो इसे और गर्त में ले गया। बढ़ती आबादी और खाने के लाले पड़ने लगे तो पढ़े-लिखे लोग दूसरे राज्यों की और चले गए और पीछे छूट गए अनस्किलड लोग जिससे बंगाल और बिखर गया।</p>
<p><img src="https://www.deshrojana.com/media/2026-04/screenshot-2026-04-20-145159.png" alt="Screenshot 2026-04-20 145159" width="968" height="470"></img></p>
<p>आप बंगाल का नक्शा देखेंगे तो पाएंगे की ये एक पतला और लम्बा दर्रे जैसा दिखने वाला है।  इसकी भौगोलिक सीमाएँ 4000 किमी से ज्यादा है जो इतनी पेचीदा हैं कि कई जगह डिफाइन करना भी मुश्किल कि कहाँ भारतीय सीमा रेखा है और कहाँ बांग्लादेश। भारत-बांग्लादेश सीमा पर '150 गज' का क्षेत्र है जहाँ अंतरराष्ट्रीय नियम लागू है, उस सीमावर्ती इलाकों में एक ऐसी आबादी रहती है जो न इधर की है और ना ही उधर की।  </p>
<p>इसके अलावा रोजगार की तलाश में नेपाल और भूटान से लोग पश्चिम बंगाल चले आते हैं। बांग्लादेशी और म्यांमार से रोहिंग्या भी भारत में बसने की चाह लेकर अक्सर यहाँ घुसपैठ करते रहते हैं। विशेषज्ञ बताते है कि इन देशों से अंतरराष्ट्रीय प्रवासन का भार पश्चिम बंगाल के सीमावर्ती जिलों पर पड़ता है। आज भी तिब्बत से लेकर बांग्लादेश तक की सीमाओं से घिरा यह राज्य हमेशा से एक संवेदनशील 'बफर ज़ोन' बना रहा, जिसका असर इसके स्थिर आर्थिक विकास पर पड़ रहा है। </p>
<p>विशेषज्ञ मानते हैं कि वाम मोर्चा यानि लेफ्ट फ्रंट का लंबा शासन और 'उद्यम-विरोधी' नीतियां भी इसका बड़ा कारण रही हैं। क्योंकि वामपंथी सरकार पूंजीवाद, लाइसेंस राज और उद्योगों के प्रति कड़े रवैया रखती थी। वामपंथी शासन के दौरान ट्रेड यूनियनों की भूमिका बहुत आक्रामक थी। बार-बार होने वाली हड़तालें, तालाबंदी और काम न करने की संस्कृति के कारण उद्योगों को भारी नुकसान हुआ। जिससे कई उद्योगपति बंगाल छोड़कर गुजरात, महाराष्ट्र और तमिलनाडु जैसे राज्यों में चले गए।</p>
<p><img src="https://www.deshrojana.com/media/2026-04/image-3.png" alt="image-3" width="929" height="634"></img></p>
<p>1952 में फ्रेट इक्वलाइजेशन नीति लागू की गई जिससे खनिज संपन्न प्रदेश होने के बाद भी बंगाल इसका लाभ नहीं ले पाया।  क्योंकि पूरे देश में कोयला, लौह अयस्क समान मूल्य पर उपलब्ध कराया गया, जिससे बंगाल का जो भौगोलिक लाभ था, वह समाप्त हो गया। इसके अलावा नक्सलवाद ने भी बंगाल को पीछे धकेलने का काम किया। </p>
<p>दिल्ली में बैठकर बनाई गई नीतियां अक्सर बंगाल की इन जमीनी हकीकतों ठीक से समझ नहीं पाई। बंगाल का पीछे छूटना सिर्फ गलत नीतियों का नतीजा नहीं था, बल्कि इतिहास की क्रूर मारों का परिणाम भी है। आप ही सोचिये जिन्होंने बार-बार विस्थापन को झेला, सीमावर्ती और राजनितिक उठा-पटक ने बंगाल को खूब पटक पटक कर धोया। अनिश्चितता का दौर देखा।  उसके लिए अपने अस्तित्व को बचाना दूर की कौड़ी बन गई थी। उसे वापस पाना बहुत कठिन है यहाँ पहचान और अस्तित्व की लड़ाई आज भी जारी है।  </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category> पश्चिम बंगाल</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 20 Apr 2026 15:22:15 +0530</pubDate>
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                <title>केमिकल से पकाए फल तो होगी जेल, लगेगा भारी जुर्माना,  FSSAI के राज्यों को सख्त निर्देश। </title>
                                    <description><![CDATA[<p class="MsoNormal"><strong>एफएसएसआई ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिए कि अवैध तरीके से फल पकाने वाले एजेंटों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करें। बाजारों, मंडियों, गोदामों और भंडारण केंद्रों पर विशेष निगरानी रखी जाए। निर्देशों का पालन ना करने पर होगी सख्त कार्रवाई।</strong></p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.deshrojana.com/farming/fruits-cooked-with-chemicals-will-be-jailed-heavy-fine-will/article-682"><img src="https://www.deshrojana.com/media/400/2026-04/screenshot-2026-04-18-135948.png" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal"><img src="https://www.deshrojana.com/media/2026-04/screenshot-2026-04-18-135948.png" alt="Screenshot 2026-04-18 135948" width="956" height="648"></img></p>
<p class="MsoNormal">आम के शौकीनों के लिए गर्मी का मौसम बेहद खास होता है। इसमें तरह तरह के आम जो खाने को मिलते हैं। खभी मैंगो शेक, तो कभी आम पन्ना, कभी आम रस, तो कभी शरबत। कितने आम और आम से बनने वाले पेय पदार्थ का आनंद लिया जाता है। लेकिन दुःख तो तब होता जब ये आम हानिकारक रसायनो से पका हो। इससे कई तरह की बीमारियां हो सकती हैं। जैसे<span style="font-family:Calibri;">-</span><span style="font-family:Mangal;">मुँह पकना</span>, मुँह में छाले होना, उलटी और दस्त की शिकायत त्वचा पर दाने निकलना और निगलने में परेशानी होना। इसी को देखते हुए एफएसएसआई ने कैल्शियम कार्बाइड से फलों को पकाने के लिए पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया है। जैसा की आप सभी जानते है कि कुछ विक्रेता अपने फायदे के लिए आम, केला, पपीता और अन्य फलों को जल्दी पकाने के लिए इन पर खतरनाक केमिकल का इस्तेमाल करते है। अब एफएसएसआई के निर्देश के बाद वे ऐसा नहीं कर पाएंगे।  </p>
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<p class="MsoNormal"><strong>एफएसएसआई ने कड़ी कार्रवाई के दिए निर्देश</strong></p>
<p class="MsoNormal">दरअसल, भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण <span style="font-family:Calibri;">(</span>FSSAI) ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश जारी कर अवैध फल पकाने वाले एजेंटों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने को कहा है। इसके तहत बाजारों, मंडियों, गोदामों और भंडारण केंद्रों पर विशेष निगरानी रखी जाएगी।  FSSAI ने साफ किया है कि कैल्शियम कार्बाइड फलों को पकाने के लिए पूरी तरह प्रतिबंधित है। इसका इस्तेमाल आम, केला, पपीता और अन्य फलों को जल्दी पकाने के लिए नहीं किया जा सकता है।अगर कोई ऐसा करता पाया जाएगा तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।  </p>
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<p class="MsoNormal"><strong>खतरनाक रसायनो के इस्तेमाल पर रोक</strong></p>
<p class="MsoNormal">एफएसएसआई ने यह भी बताया है कि कुछ खाद्य व्यवसाय संचालक <span style="font-family:Calibri;">(</span>FBOs) केले और दूसरे फलों को पकाने के लिए इथेफोन घोल में डुबोने का तरीका अपना रहे हैं। प्राधिकरण ने स्पष्ट किया है कि फलों या सब्जियों का एथिलीन पाउडर या तरल रूप में सीधे संपर्क में आना भी नियमों के खिलाफ है। हालांकि, नियंत्रित तरीके से एथिलीन गैस का इस्तेमाल सुरक्षित माध्यम से किया जा सकता है।</p>
<p class="MsoNormal"><img src="https://www.deshrojana.com/media/2026-04/mango.png" alt="mango" width="936" height="546"></img></p>
<p class="MsoNormal"><strong>इन जगहों पर रखी जाएगी निगरानी</strong></p>
<p class="MsoNormal">इसी को ध्यान में रखते हुए सभी राज्यों के खाद्य सुरक्षा आयुक्तों, एफएसएसआई के क्षेत्रीय निदेशकों और लाइसेंसिंग अधिकारियों को कहा गया है कि वे फलों के बाजारों, मंडियों, थोक विक्रेताओं, वितरकों और भंडारण केंद्रों पर निरीक्षण तेज करें। खासतौर पर उन जगहों पर सख्त नजर रखने को कहा गया है, जहां मौसमी फल बड़ी मात्रा में रखे जाते हैं</p>
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<p class="MsoNormal"><strong>सिंथेटिक रंगों के इस्तेमाल पर लगेगी रोक</strong></p>
<p class="MsoNormal">अक्सर कुछ विक्रेता इन हानिकारक केमिकल से फलों को पकाते है। साथ ही फलों को चमकदार और कलरफुल दिखने के लिए खतरनाक रंगो का भी इस्तेमाल करते हैं। ऐसे में एफएसएसआइ ने मोम और सिंथेटिक रंगों के इस्तेमाल को रोकने के लिए विशेष अभियान चलाने के निर्देश दिए भी दिए हैं। अगर किसी गोदाम, दुकान या फलों की पेटियों के पास कैल्शियम कार्बाइड पाया जाता है, तो इसे कानूनी कार्रवाई के लिए पर्याप्त सबूत माना जा सकता है।</p>
<p class="MsoNormal"><img src="https://www.deshrojana.com/media/2026-04/21.png" alt="2" width="937" height="434"></img></p>
<p class="MsoNormal"><strong>ग्राहकों ने फैसले का किया स्वागत</strong></p>
<p class="MsoNormal">एफएसएसआई ने अधिकारियों को यह भी सुझाव दिया है कि गोदामों और फल पकाने वाले चैंबरों में एसिटिलीन गैस की मौजूदगी जांचने के लिए स्ट्रिप पेपर टेस्ट का इस्तेमाल किया जाए<span style="font-family:Calibri;">. </span><span style="font-family:Mangal;">इससे यह पता लगाया जा सकेगा कि कहीं अवैध तरीके से फल तो नहीं पकाए जा रहे हैं</span><span style="font-family:Calibri;">. </span><span style="font-family:Mangal;">इस फैसले का मकसद लोगों को सुरक्षित और प्राकृतिक तरीके से पके फल उपलब्ध कराना है</span><span style="font-family:Calibri;">. </span><span style="font-family:Mangal;">त्योहारों और गर्मियों के मौसम में फलों की मांग बढ़ने के साथ ऐसे मामलों में बढ़ोतरी होती है</span>, इसलिए अब सरकार ने सख्त रुख अपना लिया है<span style="font-family:Calibri;">. </span><span style="font-family:Mangal;">जिसका ग्राहकों ने भी स्वागत किया है। उनका कहना है की अक्सर सिंथेटिक कलर और केमिकल वाले फल घर लाने से पहले उन्हें </span>10 बार सोचना पड़ता था कि कही इससे हमारे परिवार या बच्चों को कोई नुकसान तो नहीं होगा ? लेकिन अगर एफएसएसआई ये काम सही तरीके से करा पाई और बाजार वपर निगरानी ठीक से रख पाई तो यक़ीनन फल खाने का मज़ा दोगुना हो जायेगा।</p>
<p class="MsoNormal"> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>खेती-किसानी</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 18 Apr 2026 14:04:16 +0530</pubDate>
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