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                <title>दुनिया - देश रोजाना</title>
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                <description>दुनिया RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>भारतीय खेती पर पड़ा ईरान-अमेरिका युद्ध का असर, यूरिया की कीमतों में 84 प्रतिशत तक उछाल। </title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>जबसे ईरान-अमेरिका युद्ध शुरू हुआ तभी से होर्मुज स्ट्रेट पर परिवहन ठप्प पड़ा है। इससे कच्चा तेल और एलपीजी गैस तो प्रभावित हुई है। साथ ही रासायनिक उर्वकों के आयात पर भी इसका असर पड़ा है। सप्लाई चेन बाधित होने से इसकी कीमतों में भारी उछाल आया है। ये सीजन तो जैसे-तैसे संभल सकता है, लेकिन रबी सीजन में खाद की कमी एक बड़ी चुनौती बन सकती है। इसलिए सरकार और कंपनियां वैकल्पिक समाधान तलाशने में जुटी हैं।  </strong></p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.deshrojana.com/farming/impact-of-iran-america-war-on-indian-agriculture-urea-prices-rise/article-817"><img src="https://www.deshrojana.com/media/400/2026-04/26361053_agri-2.jpg" alt=""></a><br /><p><img src="https://www.deshrojana.com/media/2026-04/screenshot-2026-04-24-130159.png" alt="Screenshot 2026-04-24 130159" width="924" height="490"></img><br />अप्रैल का महीना चल रहा है ऐसे में एक तरफ तपती धूप सितम ढा रही है। दो महीने बाद मानसून भी अपनी दस्तक देने लगेगा। खरीफ फसलों की बुवाई शुरू हो जाएगी। उसके लिए किसानो को बोरी भर-भर के यूरिया खाद की आवश्यकता होगी। देश में पर्याप्त यूरिया का उत्पादन ना होने से सरकार को इसे दोगुने से ज़्यादा रेटों पर आयत करना पड़ रहा है। जिस वजह से इसकी कीमतों में भारी उछाल आया है। ऐसा इसलिए ताकि किसानों को खरीफ फसल की बुवाई में यूरिया की कमी नहीं पड़े।</p>
<p><strong>भारत में यूरिया की सबसे ज्यादा खपत </strong><br />रासायनिक खादों की जब बात आती है तो भारत में इसकी सबसे ज़्यादा खपत होती है। कृषि विशेषजों का कहना है कि हर साल देश में करीब 400 लाख टन यूरिया की खपत होती है। जिसमे से करीब 310 लाख टन यूरिया का उत्पादन देश में होता है। बाकी बचा 90 से 10 लाख टन यूरिया, इसकी पूर्ति के लिए इसे विदेशों से आयात करना पड़ता है। </p>
<p><strong><img src="https://radhakrishnaagriculture.in/cdn/shop/files/urea.jpg?v=1711181452&amp;width=1946" alt="Urea Fertilizer for Use All Plants 1Kg – Radhakrishnaagriculture"></img></strong></p>
<p><strong>स्टॉक में आई कमी</strong><br />खरीफ सीजन से पहले देश में यूरिया का स्टॉक कम हो गया है। 1 अप्रैल 2026 को यूरिया का भंडार 54.22 लाख टन था, जो पिछले साल से कम है। यह पिछले चार साल में सबसे कम स्तर माना जा रहा है। अगर समय पर खाद नहीं मिली, तो फसलों पर असर पड़ सकता है</p>
<p><strong>कहाँ से होता है आयात </strong><br />भारत अपना अधिकतर यूरिया परंपरागत रूप से मध्य पूर्व के देशों, ओमान, सउदी अरब, संयुक्त अरब अमिरात जैसे देशों से आयात करता है। वहां से आने वाले यूरिया का मार्ग होर्मुज स्ट्रेट ही है, जो कि पिछले दो महीने से बाधित है। इसी संकट के कारण भारत की यूरिया आपूर्ति में भारी बाधा आई है।</p>
<p><strong><img src="https://www.bhaskarhindi.com/h-upload/2026/04/17/1505402-capture.PNG" alt="Hormuz Crisis: ईरान ने किया होर्मुज स्ट्रेट खोलने का ऐलान, सुरक्षित गुजर  सकेंगे जहाज, ट्रंप ने दी प्रतिक्रिया | Trump Expresses Pleasure Over Iran's  Announcement to Open ..."></img></strong></p>
<p><strong>दोगुनी कीमत पर आयात </strong><br />भारत को पहले के मुकाबले लगभग दूनी कीमत पर यूरिया खरीदना पड़ रहा है। खबर है कि भारतीय पोटाश लिमिटेड ने 15 लाख टन यूरिया, जिसकी डिलीवरी पश्चिमी तट पर होगी, का सौदा 935 डॉलर प्रति टन की दर पर किया है। वहीं देश के पूर्वी तट पर 10 लाख टन यूरिया की डिलीवरी होनी है। इसका सौदा 959 डॉलर प्रति टन की दर पर किया गया है। उल्लेखनीय है कि ईरान-इजरायल युद्ध शुरू होने से पहले भारत विदेशों से 490 डॉलर प्रति टन की दर पर यूरिया खरीदा करता था। इस समय जो सौदा हुआ है, वह पहले के मुकाबले करीब 90 फीसदी अधिक है। </p>
<p><strong>दुनिया भर में बढ़ी खाद की कीमतें</strong><br />आपको बता दें कि अभी जो सौदा हुआ है, उससे पहले दो दर्जन से अधिक कंपनियों ने ऑफ़र पेश किया था। इनमें $935 से $1,136 प्रति टन के बीच का रेट रखा गया था। इसलिए सबसे कम कीमत वाला सौदा जो कि $935 है इस पर सरकार ने खरीद की सहमति जताई है। होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने के बाद भारत की पहली खेद होगी।<strong> </strong></p>
<p><strong><img src="https://imgs.etvbharat.com/etvbharat/prod-images/30-03-2026/26361053_agri-2.jpg" alt="क्या आयातित यूरिया के बजाय 'पेशाब' से ..."></img></strong></p>
<p><strong>दूनी कीमत पर खरीद क्यों जरूरी?</strong><br />भारत में जैसे मानसून सीजन की शुरुआत होती है तभी से खरीफ फसलों की बुवाई शुरू हो जाती है। इस समय  में धान, मक्का, सोयाबीन जैसी महत्वपूर्ण फसलों की बुवाई होती है जो कि भारत के खाद्य सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। तब किसान को पर्याप्त मात्रा में यूरिया की आवश्यकता होगी। इसलिए सरकार ने दूनी कीमत पर भी यूरिया की सप्लाई के आर्डर दिए गए हैं। अभी कई मिलियन टन यूरिया की खरीद का टेंडर और जारी होना है।</p>
<p><strong>भारतीय कारखानों में उत्पादन हुआ बाधित </strong><br />एक तो खपत के हिसाब से पहले ही देश में रासायनिक उर्वरक कम बनते है दूसरा। इस समय खाद बनाए वाले जो कारखाने हैं उनमे भी यूरिया का उत्पादन पूरी गति से नहीं हो रहा है। जिसका सबसे बड़ा कारन है नेचुरल गैस आयत कम होना।  दअसल दक्षिण एशियाई देशों में यूरिया उत्पादन बहुत हद तक नेचुरल गैस पर निर्भर करता है। नेचुरल गैस का अधिकांश हिस्सा पश्चिम एशियाई देशों से आता है। यूरिया बनाने के लिए अमोनिया बनाना पड़ता है। इसे बनाने में गैस का उपयोग होता है। हार्मुज़ जलडमरूमध्य के बंद होने के बाद से कई उत्पादकों को अपने कारखाने बंद करने पड़े। वही कुछ कारखानों में काम बहुत कम हो रहा है। </p>
<p><strong><img src="https://www.dowjones.com/wp-content/uploads/2026/03/Strait-of-Hormuz-WP.webp?w=1024" alt="वैश्विक | खाद्य सुरक्षा पर ईरान ..."></img></strong></p>
<p><strong>कहां से आएगा यूरिया?</strong><br />सरकार ने कंपनियों को निर्देश दिया है कि वे यूरिया ऐसे देशों से खरीदें जहां से सुरक्षित तरीके से आपूर्ति हो सके। इसलिए अब ये यूरिया रूस, मिस्र, नाइजीरिया, इंडोनेशिया और मलेशिया जैसे देशों से आ सकता है। सरकार का प्रयास कि ये खाद समय पर पहुँच जाये ताकि  किसानो को परेशनी का सामना ना करना पड़े। इससे यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि समय पर पर्याप्त मात्रा में खाद देश में पहुंच सके। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>खेती-किसानी</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 24 Apr 2026 12:44:02 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[ANJU SHARMA]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>तावडू सीआईए व एंटी नारकोटिक्स सेल की कार्रवाई 8 लाख की हेरोइन सहित दो नशा तस्कर गिरफ्तार,मोटरसाइकिल भी बरामद</title>
                                    <description><![CDATA[<p>सदर थाना क्षेत्र में नशे के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत सीआईए तावडू और एंटी नारकोटिक्स सेल ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए दो कथित नशा तस्करों को करीब 61.43 ग्राम हेरोइन तथा एक मोटरसाइकिल सहित गिरफ्तार किया है।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.deshrojana.com/haryana/nuh-mewat/tawadu-action-taken-by-cia-and-anti-narcotics-cell-two/article-803"><img src="https://www.deshrojana.com/media/400/2026-04/1002360131.jpg" alt=""></a><br /><div>तावडू: सदर थाना क्षेत्र में नशे के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत सीआईए तावडू और एंटी नारकोटिक्स सेल ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए दो कथित नशा तस्करों को करीब 61.43 ग्राम हेरोइन तथा एक मोटरसाइकिल सहित गिरफ्तार किया है। बरामद हेरोइन की अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत करीब 8 लाख रुपये आंकी जा रही है। दोनों आरोपी गुरुग्राम के फरुखनगर क्षेत्र के बताए जा रहे हैं और तावडू क्षेत्र में मादक पदार्थ सप्लाई करने आ रहे थे।<img src="https://www.deshrojana.com/media/2026-04/1002360131.jpg" alt="1002360131" width="1280" height="960"></img></div>
<div>पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार गुप्त सूचना के आधार पर गुरनावट-कांगरका रोड स्थित घोड़ा फार्म के पास नाकाबंदी की गई, जहां एक मोटरसाइकिल पर सवार दो युवकों को रोककर काबू किया गया। आरोपियों की पहचान अरुण कुमार निवासी मुबारिकपुर थाना फरुखनगर और शिवा हंस निवासी झाझरोला थाना फरुखनगर, जिला गुरुग्राम के रूप में हुई। नियमानुसार कार्रवाई करते हुए ड्यूटी मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में दोनों आरोपियों की तलाशी ली। तलाशी के दौरान अरुण कुमार के कब्जे से 33.53 ग्राम तथा शिवा हंस के कब्जे से 27.90 ग्राम हेरोइन बरामद हुई। दोनों के कब्जे से कुल 61.43 ग्राम हेरोइन बरामद हुई। तथा आरोपियों की मोटरसाइकिल को भी जब्त किया गया।पूछताछ में आरोपियों ने प्राथमिक तौर पर दिल्ली के विकासपुरी क्षेत्र से एक नाइजीरियन सप्लायर से हेरोइन लाने की बात बताई है। पुलिस इस नेटवर्क की गहनता से जांच में जुटी हुई है। इस संदर्भ में तावड़ू सदर थाना पुलिस ने एनडीपीएस एक्ट की धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया है।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>हरियाणा</category>
                                            <category>नूंह / मेवात</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 23 Apr 2026 23:08:49 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Desh Rojana Bureau]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ईरान-अमेरिका विवाद, क्या फिर से शुरू होगी वार?</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>ईरान अमेरिका और इजराइल कॉन्फ्लिक्ट किसी बड़े युद्ध की चेतावनी दे रहा है। जिस तरह अमेरिका ईरान के बीच समझौते की कड़िया टूट रही है। एक दूसरे पर आरोप-पत्यरोप कर रहे है। उस तरह तो अमेरिका ईरान वॉर पार्ट 2 होने की संभावनाएं साफ़ दिख रही हैं। अमेरिका होर्मुज पर अपना अधिकार जमाये बैठा है तो दूसरी और ईरान भी अपनी जिद पर अड़ा है।  होर्मुज पर धमाके और गोली बारी साफ़ संकेत दिखा रहे है कि यहाँ अभी शांति के आसार नहीं है। </strong></p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.deshrojana.com/world/america/iran-america-dispute-will-the-war-start-again/article-744"><img src="https://www.deshrojana.com/media/400/2026-04/us-military-attack-against-iran_swot-analysis_specialeurasia.png" alt=""></a><br /><p> </p>
<p><img src="https://www.deshrojana.com/media/2026-04/us-military-attack-against-iran_swot-analysis_specialeurasia.png" alt="US-Military-Attack-against-Iran_SWOT-Analysis_SpecialEurasia" width="1536" height="1024"></img>अमेरिका ईरान युद्ध पर हुए सीज फायर के दो सप्ताह का समय लगभग खत्म होने हो को है। होर्मुज पर दोनों के टकराव देखते हुए तो यही लगता है कि ये स्थिति आगे भी बनी रहेगी।अमेरिका-ईरान के बीच शुरू होने वाली दूसरे दौर की शांति वार्ता शुरू होने से पहले फेल रही है। जैसा कि अमेरिकी राष्ट्रपति का बयान है कि "यूएस नेवी ने ओमान की खाड़ी में अमेरिकी नाकेबंदी को पार करने को कोशिश कर रहे एक ईरानी झंडे वाले कार्गो जहाज को कब्जे में ले लिया है। " उधर, ईरान ने बोट ड्रोन से अमेरिकी नेवी पर पलटवार का दावा किया है। </p>
<p>अमेरिका-ईरान के बीच पहले दौर की शांति वार्ता फेल होने के बाद चौतरफा युद्ध शांति के लिए कूटनीतिक हल खोजने की कोशिशे की जा रही थी। इसी बीच ईरान के विदेश मंत्रालय ने शांति वार्ता को लेकर बड़ी जानकारी दी है। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने बताया कि हमने (ईरान) पाकिस्तान को अपना 10 सूत्रीय प्रस्ताव सौंप दिया। इसके साथ ही ईरान ने अमेरिका पर कूटनीतिक बातचीत को लेकर गंभीर न होने और सीजफायर के उल्लंघन का आरोप भी लगाया है। </p>
<p>वहीं, रविवार सुबह अमेरिकी नेवी ने ईरानी झंडे वाले एक कार्गो जहाज को अपने कब्जे में ले लिया था। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस बारे में जानकारी देते हुए कहा कि ये जहाज स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में अमेरिकी नाकाबंदी को पार करने की कोशिश कर कहा था, जबकि ईरान ने बोट ड्रोन से अमेरिकी नेवी पर पलटवार का दावा किया है। ऐसे में ऐसे में सीज फायर होने पर भी उस पर पूरी तरह अमल नहीं किया गया। </p>
<p><img src="https://www.deshrojana.com/media/2026-04/574d966d-d994-45b3-81fb-43f8ddf581c1.jpg" alt="574d966d-d994-45b3-81fb-43f8ddf581c1" width="1366" height="910"></img></p>
<p>आपको बता दें कि अमेरिका-ईरान वार्ता पर दुनिया की नजरें टिकी हैं। 7 अप्रैल से शुरू हुआ दो हफ्ते का युद्धविराम 21 अप्रैल को खत्म हो रहा है, लेकिन दूसरे दौर की बातचीत भी असफल रही। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी है कि अगर ईरान डील नहीं मानता तो अमेरिका उसके हर पावर प्लांट और पुल को तबाह कर देगा।</p>
<p>इन सबके बीच अमेरिकी सेना ने होर्मुज की खतरनाक नाकेबंदी की हुई है। जिसको लेकर अमेरिका की नाकाबंदी से ईरान नाराज नजर आ रहा है। ईरान ने साफ कर दिया है कि ईरान अमेरिका का किसी भी तरह का दबाव बर्दाश्त नहीं करेगा। </p>
<p><img src="https://www.deshrojana.com/media/2026-04/574d966d-d994-45b3-81fb-43f8ddf581c1.jpg" alt="574d966d-d994-45b3-81fb-43f8ddf581c1" width="1366" height="910"></img></p>
<p>दूसरी तरफ इजरायली सेना ने हिज्बुल्लाह पर सीजफायर का उल्लंघन करने का आरोप लगाया है। डीआईएफ के मुताबिक, बिंत जुबैल और लितानी इलाके में तीन अलग-अलग घटनाओं में कुछ हथियारबंद लोग प्रतिबंधित क्षेत्र में घुस आए और सैनिकों के पास पहुंचकर खतरा पैदा करने की कोशिश की। सेना का कहना है कि इस खतरे को देखते हुए उन लोगों पर कार्रवाई की गई और उन्हें मार दिया गया। </p>
<p>अमेरिका और ईरान के बीच मुख्य विवाद का कारण परमाणु कार्यक्रम, आर्थिक प्रतिबंध, क्षेत्रीय वर्चस्व और होर्मुज़ जलडमरूमध्य में सैन्य तनाव है। 2026 में, ईरान द्वारा परमाणु संवर्धन बढ़ाने, अमेरिकी जहाजों को निशाना बनाने और हमास जैसे समूहों का समर्थन करने से संघर्ष चरम पर है। सीज फेरे के लिए जो शर्ते रखी गई थी उसने में ईरान ने कुछ शर्तों को मानने से मना कर दिया। इसी वजह से अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध का साया लगातार गहराता जा रहा है। </p>
<p><img src="https://www.deshrojana.com/media/2026-04/screenshot-2026-04-21-120820.png" alt="Screenshot 2026-04-21 120820" width="1306" height="928"></img></p>
<p>इस बीच, ईरान के संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाकिर गालीबाफ ने अमेरिका को नए सिरे से धमकी दी है। उन्होंने कहा कि अगर जंग फिर से शुरू हुई तो ईरान युद्ध के मैदान में नए पत्ते खोलेगा। संसद स्पीकर मोहम्मद मोहम्मद बगेर गालिबफ ने मंगलवार (21 अप्रैल) सुबह तेहरान में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट में लिखा, "हम धमकियों के साए में बातचीत स्वीकार नहीं करते।"</p>
<p><img src="https://www.deshrojana.com/media/2026-04/screenshot-2026-04-21-121050.png" alt="Screenshot 2026-04-21 121050" width="932" height="622"></img></p>
<p>विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने स्पष्ट किया कि अमेरिका कूटनीति को आगे बढ़ाने के बारे में गंभीर नहीं था। उन्होंने दो सप्ताह के युद्धविराम के उल्लंघनों का हवाला दिया। उन्होंने कहा, "कूटनीति और बातचीत के लिए तत्परता का दावा करते हुए, अमेरिका ऐसे व्यवहार कर रहा है जो किसी भी तरह से राजनयिक प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में गंभीरता का संकेत नहीं देते हैं।"</p>
<p>यह बयान ऐसे समय आया जब दोनों पक्ष वार्ता के दूसरे दौर के लिए इस्लामाबाद पहुंचने की तैयारी में थे। सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए इसके जारी रहने की संभावना प्रतीत होती है। पाकिस्तान सरकार ने रेड जोन को लगभग पूरी तरह से सील कर दिया है, जहां सेरेना और मैरियट होटलों सहित प्रमुख कार्यालय और इमारतें स्थित हैं। पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी ने सोमवार को अमेरिका और ईरान के राजदूतों से अलग-अलग मुलाकात की। नवकी ने अपेक्षित दूसरे दौर की वार्ता के लिए सुरक्षा और अन्य व्यवस्थाओं पर चर्चा की।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>ईरान</category>
                                            <category>इजराइल</category>
                                            <category>अमेरिका</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 21 Apr 2026 12:11:20 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[ANJU SHARMA]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>होर्मुज जलडमरूमध्य पर जंग क्यों ? सबके अपने-अपने समुद्री क्षेत्र तो ईरान का क्यों नहीं?</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong> संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून सम्मेलन (UNCLOS) के अनुसार, तटवर्तीय क्षेत्रों से 200 समुद्री मील या लगभग 370 किमी तक जितने भी संसाधन होते है उनका उपयोग देश कर सकता है।  इसे अनन्य आर्थिक क्षेत्र (EEZ) कहा जाता है। इसमें  मछली पकड़ना, खनन और ऊर्जा उत्पादन आदि किया जा सकता है। तो ईरान का होर्मुज पर अधिकार क्यों नहीं ? ईरान अमेरिका जंग क्यों बन रही वर्ल्ड वार की वजह जानेंगे इस लेख में। </strong></p>
<p> </p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.deshrojana.com/top-news/why-war-on-the-strait-of-hormuz-everyone-has-their/article-658"><img src="https://www.deshrojana.com/media/400/2026-04/1408102_720.jpg" alt=""></a><br /><p><img src="https://www.deshrojana.com/media/2026-04/1408102_720.jpg" alt="1408102_720" width="720" height="405"></img></p>
<p>समुद्र तट से सटे देशों की सुरक्षा को लेकर अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर 10 दिसंबर 1982 को जमैका के मोंटेगो में एक कानून पारित किया गया। जिसमे कहा गया कि तटरेखा से 12 समुद्री मील तक देश का पूर्ण अधिकार होगा। जबकि विशेषाधिकार के रूप में 200 मील तक जो संसाधन है उनका उपयोग क्षेत्रीय देश उठा सकते हैं। इसके आगे अंतरराष्ट्रीय सीमा शुरू होगी जिस पर सबका अधिकार होगा। इस समझौते का नाम रखा गया संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून सम्मेलन यानि (UNCLOS) । भले ही कानून 1984 में बन गया था लेकिन आधिकारिक रूप से लागू हुआ 16 नवंबर 1994 को। </p>
<p><strong>समुद्र में 12 मील तक कड़ी सुरक्षा का अधिकार। </strong><br />दुनिया का 80 प्रतिशत व्यापार समुद्री रास्तों से होता है। लेकिन समुद्र से जुड़े जो तटवर्तीय देश हैं उनकी सुरक्षा के लिए सागर, महासागर और समुद्र पर अधिकार को लेकर कुछ कानून बनाये गए। जिसमें 12 समुद्री मील तक देश अपनी सीमाओं को सुरक्षित करने के लिए सभी उपाय कर सकता है। समुद्र पर निगरानी रख सकता, पनडुब्बियों और शिप से गश्त कर सकता है। सुरक्षा के लिए हथियारों का इस्तेमाल कर सकता है। लेकिन हां फ्रेंडली रूप से गुजरने वाले शिप यहाँ से गुजर सकते हैं। ये एक आपसी सहमति या संधि होती है। </p>
<p><strong>200 मील तक आर्थिक क्षेत्रों पर अधिकार। </strong><br /> संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून सम्मेलन (UNCLOS) के अनुसार, तटवर्तीय क्षेत्रों से 200 समुद्री मील या लगभग 370 किमी तक जितने भी संसाधन होते है उनका उपयोग देश कर सकता है।  इसे अनन्य आर्थिक क्षेत्र (EEZ) कहा जाता है। इसमें  मछली पकड़ना, खनन और ऊर्जा उत्पादन आदि किया जा सकता है। इसके आगे उस देश अधिकार नहीं होता। बल्कि उसे अंतर्राष्ट्रीय क्षेत्र माना जायेगा। </p>
<p><img src="https://www.deshrojana.com/media/2026-04/2.png" alt="2" width="1552" height="720"></img></p>
<p><strong>समुद्र पर चलती है क्षेत्रीय देशो की दादागिरी। </strong><br />ऐसे में कई सवाल उठते हैं जैसे -क्या समुद्र में भी ‘टोल टैक्स’ देना पड़ता है? मैरीटाइम लॉ यानी समुद्र में आवाजाही से जुड़े कानून की इसमें भूमिका क्या होती है? कैनाल से गुजरने पर क्या होता है? युद्धपोत और पनडुब्बी को लेकर नियम क्या अलग होता है? इस पर विशेज्ञों की लग अलग रे है जैसे इसमें कुछ मार्ग प्राकृतिक है तो कुछ मैन मेड। विशेषज्ञों का कहना है कि जो प्राकृतिक पैसेज हैं उन पर सबका अधिकार है। लेकिन इसके बावजूद कई देश है जो लाखों डॉलर का टैक्स वसूलते हैं।</p>
<p><img src="https://www.deshrojana.com/media/2026-04/10_05_2025-jagran_photo_1_23934637_m.jpg" alt="10_05_2025-jagran_photo_1_23934637_m" width="789" height="444"></img></p>
<p> </p>
<p><strong>मिश्रा की स्वेज नहर </strong><br />स्वेज नहर पूरी तरह से मिस्र के नियंत्रण में है। यह भूमध्य सागर और लाल सागर को जोड़ता है। यहां जहाज के आकार, वजन और प्रकार के आधार पर लाखों डॉलर का टोल वसूला जाता है। यहाँ तक की कचरा प्रबंधन के नाम पर एक और टैक्स जोड़ा गया है। </p>
<p><strong>पनामा नहर </strong><br />अटलांटिक और प्रशांत महासागर को जोड़ने वाली यह नहर पनामा सरकार के लिए आय का मुख्य स्रोत है। यहां 'स्लॉट नीलामी' और ट्रांजिट फीस के रूप में भारी वसूली होती है। </p>
<p><strong>तुर्की स्ट्रेट्स- बोस्फोरस और डार्डानेल्स </strong><br />उत्तर-पश्चिमी तुर्की में स्थित दो जलमार्ग हैं 'बोस्फोरस' और 'डार्डानेल्स' जो काला सागर को मरमारा और एजियन साग से जोड़ते हैं। हालांकि ये प्राकृतिक रास्ते हैं, लेकिन 1936 की मॉन्ट्रो कन्वेंशन के तहत तुर्की को यहां से गुजरने वाले जहाजों से सैनिटरी निरीक्षण, लाइटहाउस और बचाव सेवाओं के नाम पर शुल्क लेने का अधिकार है। हाल ही में तुर्की ने इसमें कई गुना की बढ़ोतरी की है। </p>
<p><strong>कोरिंथ नहर से ग्रीस</strong><br />यह एक छोटी नहर है जहां से गुजरने के लिए ग्रीस टोल वसूलता है। </p>
<p> </p>
<p><img src="https://www.deshrojana.com/media/2026-04/3.png" alt="3" width="1108" height="577"></img></p>
<p><strong> होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर विवाद क्यों ?</strong><br />अब यहां एक बड़ा साल उठता है कि सबकी अपनी-अपनी समुद्री सीमाएं है तो ईरान का होर्मुज पर अधिकार क्यों नहीं। इस पर पहले समुद्री सीमा पर बने कानूनों को ठीक से समझते है। पहले होर्मुज के आकार के बारे में जान लेते हैं। ये लगभग 167 किलोमीटर यानि लगभग 104 मील लंबा है। इसकी चौड़ाई अलग अलग क्षेत्रो में अलग है। इसके सबसे संकरे बिंदु लगभग 33 से 39 किलोमीटर या 21-24 समुद्री मील चौड़ी है। अब बात इस पर विवाद की। </p>
<p>समुद्र का कानून और अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून दोनों सुनने में भले ही एक जैसे लगते हैं, लेकिन इनमें एक बड़ा अंतर है. समुद्री कानून निजी व्यापार और जहाजों से जुड़ा है, जबकि लॉ ऑफ द सी, देशों के बीच के रिश्तों और सीमाओं को तय करता है।बात करें स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की, जहां जहाजों की पासिंग को लेकर दुनिया में बवाल मचा हुआ है। गौरतलब है कि यहां कोई आधिकारिक ‘टोल गेट’ नहीं है, लेकिन यहां की राजनीति और सुरक्षा स्थिति इतनी संवेदनशील है कि जहाजों को सुरक्षा और बीमा पर बहुत पैसा खर्च करना पड़ता है। दूसरा हरमुज पर अकेले ईरान का अधिकार नहीं है। इसके उत्तर में ईरान और दक्षिण में ओमान का मुसंडम प्रायद्वीप की सीमाएं मुख्य रूप से जुड़ी हैं। यह संकरा समुद्री मार्ग फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ता है। इसके पास ही संयुक्त अरब अमीरात (UAE) की सीमा भी स्थित है, जो इस क्षेत्र का एक प्रमुख खिलाड़ी है। बस यही ईरान अपना दबदबा बनाना चाहता है। उसने हाल में यहाँ से टोल वसूने की घोषणा की। </p>
<p><strong>अमेरिका-ईरान विवाद  </strong><img style="aspect-ratio:auto;" src="https://www.deshrojana.com/media/2026-04/7.png" alt="7" width="1393" height="577"></img>होर्मुज जलडमरूमध्य अमेरिका और ईरान के बीच विवाद का मुख्य कारण सामरिक और आर्थिक वर्चस्व की लड़ाई है। यह दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्ग है, जिससे दुनिया का 20% तेल गुजरता है। अमेरिका ने ईरानी तेल निर्यात को रोकने और आर्थिक प्रतिबंधों को कड़ा करने के लिए यहाँ नाकाबंदी की है, जबकि ईरान इसे अपनी संप्रभुता पर हमला मानता है।  ईरान इस रास्ते को एक ‘रणनीतिक हथियार’ की तरह इस्तेमाल करता है, जिससे वह वैश्विक तेल आपूर्ति को प्रभावित करने की ताकत रखता है। हाल ही में ईरान ने यहाँ टैक्स बड़े टैक्स वसूली की बात कही जिससे जिससे अमेरिका समेत कई बड़े देश इसका विरोध कर रहे हैं। </p>
<p>हाल के दिनों में ईरान और अमेरिका के बीच मचे घमासान ने इस समुद्री मार्ग को युद्ध के मैदान में बदल दिया है। परमाणु विवाद से शुरू हुई यह जंग अब समुद्री सीमाओं पर कब्जे और टोल टैक्स की वसूली तक जा पहुंची है, जिससे वैश्विक व्यापार पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। ईरान और अमेरिका के बीच जारी सैन्य और कूटनीतिक तनातनी में 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' सबसे बड़ा हथियार बनकर उभरा है। 4 मार्च के बाद से इस जलमार्ग को बंद करने की धमकियों ने वैश्विक बाजार में हलचल पैदा कर दी। ईरान ने न केवल इस मार्ग को ब्लॉक करने की कोशिश की, बल्कि अब यहां से गुजरने वाले जहाजों से टोल टैक्स वसूलने का दावा भी ठोक दिया है। </p>
<p> </p>
<p><img src="https://www.deshrojana.com/media/2026-04/usa-iran-b.jpg" alt="usa-iran-b" width="1640" height="664"></img></p>
<p><strong>अमेरिकी नाकेबंदी से बढ़ा विवाद। </strong></p>
<p>अमेरिका की ओर से की गई जवाबी नाकाबंदी ने इस विवाद को और हवा दे दी है, जिससे परमाणु मुद्दे से शुरू हुई लड़ाई अब समुद्री वर्चस्व की होड़ में बदल गई है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज महज एक समुद्री रास्ता नहीं है, बल्कि यह वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा की लाइफलाइन है। अगर यह रास्ता बंद होता है, तो भारत समेत पूरी दुनिया में ऊर्जा का संकट खड़ा हो जाएगा। ईरान इसी बात का फायदा उठाकर अंतरराष्ट्रीय समुदाय पर दबाव बनाने की रणनीति अपना रहा है, ताकि वह अमेरिका के खिलाफ अपनी स्थिति मजबूत कर सके।</p>
<p>अंतरराष्ट्रीय कानून के मुताबिक, किसी भी देश का अपनी तटरेखा से केवल 12 समुद्री मील (लगभग 22 किलोमीटर) तक ही समुद्र पर अधिकार होता है. ईरान इसी 'टेरिटोरियल वॉटर'</p>
<p><img style="aspect-ratio:auto;" src="https://www.deshrojana.com/media/2026-04/5.png" alt="5" width="1552" height="809"></img></p>
<p> कानून का हवाला देकर होर्मुज पर अपना मालिकाना हक जताता है. हालांकि, तकनीकी रूप से यह जलमार्ग इतना संकरा है कि यहां ईरान और ओमान की सीमाएं आपस में मिलती हैं.</p>
<p>इसका साफ मतलब है कि होर्मुज पर किसी एक देश का एकाधिकार नहीं है. जितना हक ईरान का है, उतना ही ओमान और यूएई का भी है. ईरान द्वारा टोल टैक्स की वसूली और जहाजों को रोकना सीधे तौर पर अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>व्यापार</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 17 Apr 2026 12:32:04 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[ANJU SHARMA]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>महिला सशक्तिकरण को जन आंदोलन बनाने की पहल  - 15 अप्रैल को निकलेगी ‘नारी शक्ति पदयात्रा’, 16 को होगा नारी वंदन सम्मेलन</title>
                                    <description><![CDATA[<p>डीसी ने विशेष रूप से निर्देशित किया कि जिले में 15 अप्रैल को निर्धारित रूटों पर 'नारी शक्ति पदयात्रा' का भव्य आयोजन किया जाए और 16 अप्रैल को नारी वंदन सम्मेलन का आयोजन किया जाएगा।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.deshrojana.com/haryana/faridabad/initiative-to-make-women-empowerment-a-mass-movement-nari/article-581"><img src="https://www.deshrojana.com/media/400/2026-04/pn_41.jpeg" alt=""></a><br /><p>फरीदाबाद: हरियाणा के मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने आज वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से प्रदेश के सभी उपायुक्तों के साथ 'नारी शक्ति वंदन अभियान' की तैयारियों की विस्तृत समीक्षा की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में संचालित इस अभियान का मुख्य उद्देश्य महिला सशक्तिकरण के प्रति जनभागीदारी और जागरूकता को बढ़ावा देना है। राज्य स्तरीय दिशा-निर्देशों के उपरान्त उपायुक्त (डीसी) आयुष सिन्हा ने जिले के अधिकारियों को कार्ययोजना लागू करने के निर्देश देते हुए बताया कि इस अभियान के तहत नारी शक्ति सम्मेलन, पदयात्रा और स्कूटी व बाइक रैली जैसी विविध गतिविधियों का आयोजन किया जाएगा।</p>
<p><img src="https://www.deshrojana.com/media/2026-04/pn_41.jpeg" alt="PN_4" width="931" height="554"></img><br /><strong>15 अप्रैल को निकलेगी ‘नारी शक्ति पदयात्रा’, 16 को होगा नारी वंदन सम्मेलन</strong><br />डीसी ने विशेष रूप से निर्देशित किया कि जिले में 15 अप्रैल को निर्धारित रूटों पर 'नारी शक्ति पदयात्रा' का भव्य आयोजन किया जाए और 16 अप्रैल को नारी वंदन सम्मेलन का आयोजन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि नारी शक्ति पदयात्रा में व्यापक स्तर पर सामाजिक रूप से सक्रिय महिलाएं, स्वयं सहायता समूहों की सदस्याएं, स्कूलों एवं कॉलेजों की छात्राएं, एनएसएस एवं एनसीसी कैडेट्स सहित विभिन्न वर्गों की महिलाओं की भागीदारी रहेगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि इन आयोजनों के माध्यम से महिलाओं की सक्रिय नेतृत्व क्षमता को प्रदर्शित किया जाएगा। साथ ही, महिला सशक्तिकरण के विषयों पर केंद्रित सांस्कृतिक कार्यक्रम और विचार-विमर्श सत्रों के जरिए समाज को जागरूक करने का प्रयास किया जाएगा।<br /><strong>9667173333 पर मिस्ड कॉल देकर दें ‘नारी शक्ति वंदन’ को समर्थन</strong><br />अभियान की पहुंच बढ़ाने के लिए डिजिटल माध्यमों पर #NariShaktiVandan हैशटैग के साथ सोशल मीडिया कैंपेन चलाया जाएगा। डीसी ने नागरिकों से इस मुहिम में जुड़ने की अपील करते हुए एक विशेष मिस्ड कॉल अभियान की भी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि आमजन मोबाइल नंबर 9667173333 पर मिस्ड कॉल देकर इस नारी शक्ति वंदन  अभियान के प्रति अपना समर्थन दर्ज करा सकते हैं।<br /><br />बैठक में एडीसी अंजलि श्रोत्रिया, सीईओ जिला परिषद शिखा, फरीदाबाद एसडीएम हनी बंसल, जिला शिक्षा अधिकारी अंशु सिंगला, डीआईपीआरओ मूर्ति दलाल, सीडीपीओ मिनाक्षी चौधरी सहित अन्य सम्बंधित अधिकारीगण मौजूद रहे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>हरियाणा</category>
                                            <category>फरीदाबाद</category>
                                    

                <link>https://www.deshrojana.com/haryana/faridabad/initiative-to-make-women-empowerment-a-mass-movement-nari/article-581</link>
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                <pubDate>Mon, 13 Apr 2026 21:05:36 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Desh Rojana Bureau]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>&quot;आज रात पूरी सभ्यता ख़त्म हो जाएगी&quot; ऐसी धमकी के बाद अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर ! दुनिया के सभी देशों ने ली रहत की सांस, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की अमेरिका में थू -थू !</title>
                                    <description><![CDATA[<p>ईरान और अमेरिका के बीच दो हफ्ते का युद्ध विराम इजराइल ने भी जताई सहमति। सुत्रधारधार कौन पाकिस्तान या चीन, क्या है इनसाइड स्टोरी ?</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.deshrojana.com/world/america/israel-also-agreed-to-a-two-week-ceasefire-between-iran-and/article-510"><img src="https://www.deshrojana.com/media/400/2026-04/thumb1.jpg" alt=""></a><br /><p>ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव के बीच एक बड़ी राहत की खबर सामने आई है। दोनों देशों ने दो हफ्ते के सीजफायर पर सहमति जताई है, जिससे फिलहाल हमले रुकने की उम्मीद बन गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने इसका ऐलान किया है। कहा जा रहा है कि पाकिस्तान की मध्यस्तता के कारण  ये संभव हो पाया है। इस समझौते के तहत स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को खोलने और आगे बातचीत शुरू करने का रास्ता साफ हुआ है। हालांकि, जमीनी हालात अभी भी पूरी तरह सामान्य नहीं हुए हैं।</p>
<p>इस समझौते के तहत ईरान ने 10 शर्ते रखी थी जिन्हे अमेरिका ने स्वीकार कर लिए है। ट्रम्प ने कहा कि, "इस दौरान दोनों देशों के बीच युद्ध विराम रहेगा ना तो अमेरिका हमला करेगा और ना ही ईरान कोई गलत कदम उठएगा।" इजराइल ने भी कुछ अनमने अंदाज में इस पर अपनी सहमति जताई है। आइये जानते हैं ईरान की कौन सी 10 शर्ते हैं जिन्हे अमेरिका ने माना है। </p>
<p><strong>ईरान की 10 शर्तें </strong><br />1. कोई हमला ना किया जाये अमेरिका संयम बनाये और कोई आक्रमकता ना दिखाए <br />2 .ईरान को यूरेनियम संवर्धन करने से ना रोका जाये <br /> 3. होर्मुज पर ईरान का नियंत्रण बरक़रार रहे <br />4. यूएन ईरान के खिलाफ अपने प्रस्ताव वापस ले <br />5. प्राथमिक और द्वितीयक (Primary &amp; Secondary) प्रतिबंधों को तत्काल हटाने की मांग <br />6. ईरान पर लगे सभी प्रतिबन्ध अमेरिका हटाए <br />7. युद्ध में हुए नुकसान की भरपाई की जाए <br />8. अंतर्राष्टीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी यानि IAEA के प्रस्तावों को ख़ारिज किया जाए <br />9. अमेरिका अपने सैनिक ईरानी क्षेत्र से हटाए <br />10. लेबनान और अन्य क्षेत्रों से हमले तुरंत रोके जाएं </p>
<p>अमेरिका ने ईरान की 10 शर्तो को मान लिए है। वहीँ अमेरिका ने भी अपनी 15 शर्ते ईरान के सामने रखी है। वो 15 शर्ते कुछ इस प्रकार है -<br /><strong>अमेरिका की 15 शर्तें</strong><br />1. ईरान को एक महीने का सीजफायर करना होगा.<br />2. ईरान को अपने परमाणु कार्यक्रम को लगभग खत्म करना होगा.<br />3. ईरान को यूरेनियम संवर्धन पूरी तरह रोकना होगा.<br />4. सभी न्यूक्लियर सामग्री International Atomic Energy Agency को सौंपनी होगी.<br />5. नतांज, फोर्डो और इस्फहान जैसे प्रमुख केंद्र नष्ट करने होंगे.<br />6. IAEA को देश के अंदर पूरी जांच की पूरी आज़ादी देनी होगी.<br />7. ईरान को अपनी प्रॉक्सी रणनीति छोड़नी होगी. हमास जैसे संगठनों से रिश्ते खत्म करने होंगे.<br />8. क्षेत्र में फंडिंग और हथियार सप्लाई पूरी तरह रोकनी होगी.<br />9. Strait of Hormuz को अंतरराष्ट्रीय जहाज़ों के लिए खुला रखना होगा.<br />10. मिसाइल प्रोग्राम पर बाद में बातचीत के तहत संख्या और रेंज पर सीमाएं लगेंगी.<br />11. ईरान की सैन्य क्षमता सिर्फ आत्मरक्षा तक सीमित करनी होगी.<br />12. ईरान पर लगे सभी आर्थिक प्रतिबंध हटाने की बात.<br />13. Bushehr Nuclear Power Plant जैसे सिविल न्यूक्लियर प्रोजेक्ट में अंतरराष्ट्रीय मदद.<br />14. स्नैपबैक यानी अचानक प्रतिबंध वापस लगाने की व्यवस्था खत्म होगी.<br />15. ईरान को भविष्य में परमाणु हथियार न बनाने की औपचारिक गारंटी देनी होगी.</p>
<p><strong>किसकी शर्तों में ज़्यादा दमदार ?</strong><br />अमेरिका ने ईरान के सामने लीबिया जैसी शर्तें रखी हैं. 2003 में लीबिया को भी अमेरिका ने इसी तरह की शर्तों में फंसाया था।  उस वक्त वहां के नेता मुअम्मर गद्दाफी अमेरिकी चालों को समझ नहीं पाए थे. आखिर में 8 साल बाद उन्हें जान से हाथ धोना पड़ा था. ईरान इस मामले में थोड़ा होशियार दिख रहा है. ईरान ने अमेरिका को 2 मामलों में फंसा दिया है. पहला, इस मामले की गारंटी उसे दी जाए कि उस पर आगे से कोई हमला नहीं होगा. यह गारंटी अगर ईरान को मिलती है तो मिडिल ईस्ट में उसका दबदबा कायम रह सकता है.</p>
<p><strong> युद्धविराम में पाकिस्तान की अहम भूमिका</strong><br />ट्रम्प ने बताया कि इस युद्धविराम में पाकिस्तान की अहम भूमिका रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख आसिम मुनीर ने ट्रंप से सीधे बात की और युद्ध विराम करने को कहा। जिस पर विचार करते हुए ट्रम्प ने सीजफायर का ऐलान किया। ईरान की तरफ से भी विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने सीजफायर पर मुहर लगाई है। कहा जा सकता है कि पाकिस्तान, जिसे अभी तक बहुत छोटा, निचले दर्जे का देश गिना जाता था, हमारे देश में भी पाकिस्तान को भूखे नंगे की श्रेणी में रखा जाता था आज उस पाकिस्तान ने इस जंग को बड़ा रूप लेने से रोका है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, चीन ने सीधे तौर पर सामने आने के बजाय बैकडोर डिप्लोमेसी का रास्ता अपनाया. उसने पाकिस्तान, तुर्की और मिस्र जैसे देशों के जरिए ईरान. पर युद्ध विराम का दबाव बनाया। </p>
<p> <br /><strong>इस्लामाबाद में होगी आगे की बातचीत</strong><br />सीजफायर के साथ ही अब दोनों देशों के बीच बातचीत का रास्ता भी खुल गया है। पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में 10 अप्रैल को दोनों पक्षों के बीच वार्ता शुरू होने की संभावना है।</p>
<p>सीजफायर के बावजूद जारी तनाव<br />हालांकि कागजों पर सीजफायर हो गया है, लेकिन जमीन पर हालात अब भी पूरी तरह शांत नहीं हैं। खाड़ी देशों और इजरायल में मिसाइल हमलों के अलर्ट जारी हैं। संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब, कुवैत और बहरीन जैसे देशों में एयर डिफेंस सिस्टम सक्रिय हैं। इससे साफ है कि क्षेत्र में खतरा अभी टला नहीं है और स्थिति बेहद नाजुक बनी हुई है। इजरायल और ईरान के बीच भी हमले पूरी तरह बंद नहीं हुए हैं। दोनों तरफ से जवाबी कार्रवाई जारी रहने की खबरें सामने आ रही हैं, जिससे यह संकेत मिलता है कि सीजफायर को पूरी तरह लागू होने में समय लग सकता है।</p>
<p><strong>स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बना सबसे बड़ा मुद्दा</strong><br />इस पूरे संघर्ष का सबसे बड़ा केंद्र स्ट्रेट ऑफ होर्मुज रहा है। दुनिया के बड़े हिस्से में तेल और गैस की सप्लाई इसी रास्ते से होती है। ईरान ने इस जलमार्ग पर नियंत्रण कड़ा कर दिया था, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर पड़ा।</p>
<p>आर्थिक असर और अंतरराष्ट्रीय दबाव<br />सीजफायर की घोषणा के बाद वैश्विक बाजारों में सकारात्मक असर देखा गया। अमेरिका के तेल की कीमतों में 17 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट आई, जबकि जापान और दक्षिण कोरिया के शेयर बाजारों में तेजी रही।</p>
<p><strong>डोनाल्ड ट्रंप की छीछालेदार</strong><br />हालाँकि दुनियाभर में इस समय डोनाल्ड ट्रंप की छीछालेदार हो रही है। अमेरिका को विश्व का सबसे बड़ा देश माना जाता है, हर जगह निर्णायक की भूमिका में रहा है। शांति और समृद्धि की बात करता है। वही अमेरिका ईरान पर अपना अधिकार जमाना चाहता है। उसके कच्चे तेल के भंडार को अपना कहता है और ईरान पर हमले करता है। इस वजह से अमेरिका में विपक्षी पार्टी तो छोड़िये उनकी खुद की पार्टी के नेता उनके विरोध में सड़क पर उतर आये थे।अमेरिका की जनता भी ट्रंप की निति के विरोध में रही है। अब अचानक युद्ध से पीछे हटना देश की नाक कटाने जैसा है। यहाँ तक की अमेरिका में उन्हें राष्ट्रपति पद से हटाए जाने की बात कही जा रही है। </p>
<p><strong>ईरान में गुस्सा और ख़ुशी का मिला जुला असर </strong><br />सीजफायर के ऐलान के बाद ईरानी जनता जहाँ एक और जश्न मना रही है वहीँं दूसरी और कुछ लोग इसका विरोध कर रहे हैं। पुरुषों के साथ-साथ महिलाये भी हथियार लहराते हुए सड़कों पर उतरी हैं। डोनाल्ड ट्रंप पर कई तरह के मीम बनाये जा रहे है।उसे डरपोक कहा जा रहा है। ईरानी देवता से आगे ट्रंप घुटनो के बल बैठे दिखाया जा रहा। </p>
<p><img src="https://www.deshrojana.com/media/2026-04/thumb1.jpg" alt="Thumb" width="1920" height="1080"></img><br />अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम पर भारत ने सकारात्मक प्रतिक्रिया देते हुए इस कदम का स्वागत किया है। विदेश मंत्रालय ने तनाव कम करने, बातचीत और कूटनीति के जरिए शांति बहाली पर जोर दिया, क्योंकि यह संघर्ष ऊर्जा आपूर्ति और वैश्विक व्यापार को प्रभावित कर रहा था। हलकी जब भारत को अमेरिका और ईरान के बीच तनाव को कम करने में मध्यस्तता करने को कहा गया था।  विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने मार्च 2026 में एक सर्वदलीय बैठक के दौरान पाकिस्तान की ओर इशारा करते हुए कहा था कि "हम पाकिस्तान की तरह दलाल  देश नहीं हैं"। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत मध्यस्थता के खेल में नहीं पड़ता और न ही किसी दूसरे देश के लिए मध्यस्थ की भूमिका निभाता है। </p>
<p>इजरायल ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के युद्धविराम फैसले का समर्थन तो किया है, लेकिन यह भी साफ कर दिया है कि यह लेबनान पर लागू नहीं होगा।  इजरायली सरकार ने दक्षिणी लेबनान के एक शहर के लिए नया निकासी आदेश जारी किया है, जो यह संकेत देता है कि वहां सैन्य अभियान जारी रह सकता है. इजरायल ने कहा है कि वह अमेरिका के फैसले का समर्थन तभी करेगा, जब ईरान तुरंत जलडमरूमध्य खोले और क्षेत्र में हमले बंद करे. साथ ही इजरायल ने यह भी स्पष्ट किया कि वह अमेरिका के उन प्रयासों के साथ है, जिनका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि ईरान भविष्य में परमाणु, मिसाइल या आतंकवादी खतरा न बने।  ऐसे सीजफायर कितने दिनों के लिए रहेगा ये भी स्पष्ट रूप नहीं कहा जा सकता। </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>ईरान</category>
                                            <category>इजराइल</category>
                                            <category>अमेरिका</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 08 Apr 2026 17:15:26 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[ANJU SHARMA]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ईरान ने साइप्रस में ब्रिटिश एयरबेस पर किया ड्रोन हमला</title>
                                    <description><![CDATA[<p>इजराइल-अमेरिका और ईरान युद्ध  का आज तीसरा दिन है। ईरान ने साइप्रस में ब्रिटिश रॉयल एयर फोर्स (RAF) के अक्रोटिरी बेस पर ड्रोन हमला किया है। ब्रिटेन के रक्षा मंत्रालय के मुताबिक , बीते रविवार देर रात हुए इस हमले में बेस को मामूली नुकसान पहुंचा हैI</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.deshrojana.com/world/america/iran-launches-drone-attack-on-british-airbase-in-cyprus/article-429"><img src="https://www.deshrojana.com/media/400/2026-03/iran-war-1772362055.jpg" alt=""></a><br /><p>तेल अवीव/तेहरान: इजराइल-अमेरिका और ईरान युद्ध  का आज तीसरा दिन है। ईरान ने साइप्रस में ब्रिटिश रॉयल एयर फोर्स (RAF) के अक्रोटिरी बेस पर ड्रोन हमला किया है। ब्रिटेन के रक्षा मंत्रालय के मुताबिक , बीते रविवार देर रात हुए इस हमले में बेस को मामूली नुकसान पहुंचा हैI</p>
<p><img src="https://www.deshrojana.com/media/2026-03/iran-war-1772362055.jpg" alt="iran-war-1772362055" width="1200" height="675"></img></p>
<p>इसके जवाब में ब्रिटिश सेना भी कार्रवाई कर रही है। दरअसल, ब्रिटिश प्रधानमंत्री  कीर स्टारमर ने ईरानी मिसाइल साइट्स पर हमले के लिए अमेरिका को इस बेस का उपयोग करने की इजाजत दी थी।</p>
<p>ईरान ने सोमवार को मिडिल-ईस्ट के 4 देशों में 6 अमेरिकी बेस पर हमला किया है। कुवैत में अमेरिका के कई फाइटर जेट क्रैश हो गए है।हालांकि, इसमें किसी मौत की नहीं हुई है।</p>
<p>ईरान के टॉप नेशनल सिक्योरिटी अधिकारी अली लारीजानी ने सोमवार को कहा कि ईरान अमेरिका से कोई बातचीत नहीं करेगा। यह बयान उन खबरों के जवाब में आया है, जिनमें कहा गया था कि ईरान ने अमेरिका से फिर से बातचीत शुरू करने की कोशिश की है।</p>
<h4><strong>ईरान में 555 की मौत तथा 740 घायल</strong></h4>
<p>अल-जजीरा की रिपोर्ट अनुसार , अमेरिका और इजराइल ने मिलकर अब तक ईरान के 1000 से ज्यादा ठिकानों पर हमले किए हैं। इस दौरान शुरुआती 30 घंटे में 2000 से ज्यादा बम गिराए गए।</p>
<p>इनमें अब तक 555 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 700 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं। एक स्कूल पर मिसाइल गिरने से 180 छात्राओं की मौत हो गई जबकि 45 घायल हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>ईरान</category>
                                            <category>इजराइल</category>
                                            <category>अमेरिका</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 02 Mar 2026 16:59:26 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[NELOFER HASHMI]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>फ्रांसीसी रिटायर्ड शिक्षक  ने 89 नाबालिगों के साथ किया रेप :50 साल में भारत सहित 9 देशों की लड़कियों का किया शोषण </title>
                                    <description><![CDATA[<p>फ्रांस में एक 79 वर्षीय रिटायर्ड शिक्षक पर 1960 से लेकर 2022 तक 89 नाबालिगों के साथ बलात्कार तथा यौन शोषण करने का गंभीर आरोप लगा है।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.deshrojana.com/world/france/french-teacher-raped-89-minors/article-385"><img src="https://www.deshrojana.com/media/400/2026-02/rap.webp" alt=""></a><br /><p>फ्रांस में एक 79 वर्षीय रिटायर्ड शिक्षक पर 1960 से लेकर 2022 तक 89 नाबालिगों के साथ बलात्कार तथा यौन शोषण करने का गंभीर आरोप लगा है। न्यूज एजेंसी AP की रिपोर्ट अनुसार आरोपी का नाम जैक लेवुग्ल है। बता दे कि अभियोजक के अनुसार जैक लेवुग्ल ने 1967 से 2022 के बीच भारत, जर्मनी, स्विट्जरलैंड, मोरक्को, नाइजर, अल्जीरिया, फिलीपींस, कोलंबिया और फ्रांस में नाबालिगों के साथ यौन अपराध किये Iफ्रांस के ग्रेनोबल शहर में अभियोजक एटिएन मंटो ने बीते मंगलवार को इस केस को सार्वजनिक करते हुए पीड़ितों से आगे आने की अपील भी की है ।</p>
<p><img src="https://www.deshrojana.com/media/2026-02/rap.webp" alt="rap" width="640" height="360"></img></p>
<p>वह फ्रेंच भाषा के शिक्षक और गुफा अध्ययन (स्पेलियोलॉजी) के ट्रेनर के रूप में काम करता था तथा  साथ ही सभी स्थानों पर जाकर युवाओं से मिलता था और उनके साथ यौन संबंध बनाता था।</p>
<p>पीड़ितों की उम्र 13 से 17 साल के बीच बताई गई है। आरोपी रिटायर्ड शिक्षक 2024 में आरोप तय होने के बाद से हिरासत में है। आरोपी जैक लेवुग्ल ने अपनी बीमार मां और बुजुर्ग मौसी की हत्या की बात भी स्वीकार की है।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>फ्रांस</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 11 Feb 2026 18:57:35 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[NELOFER HASHMI]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>भारत- अमेरिका व्यापार समझौते पर कांग्रेस अध्यक्ष शैलजा ने उठाए सवाल</title>
                                    <description><![CDATA[<p>भारत और अमेरिका के बीच हाल ही में हुआ व्यापार समझौता सरकार द्वारा एक बड़ी कूटनीतिक और आर्थिक उपलब्धि के रूप में पेश किया जा रहा है।  बड़े-बड़े दावों के बीच गुरुग्राम कांग्रेस महिला सेल की अध्यक्ष शैलजा भाटिया ने कई गंभीर सवाल खड़े किए हैं।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.deshrojana.com/haryana/gurugram/congress-president-shailaja-raised-questions-on-india-us-trade-agreement/article-374"><img src="https://www.deshrojana.com/media/400/2026-02/1pn.jpg" alt=""></a><br /><p>गुरुग्राम:भारत और अमेरिका के बीच हाल ही में हुआ व्यापार समझौता सरकार द्वारा एक बड़ी कूटनीतिक और आर्थिक उपलब्धि के रूप में पेश किया जा रहा है।  बड़े-बड़े दावों के बीच गुरुग्राम कांग्रेस महिला सेल की अध्यक्ष शैलजा भाटिया ने कई गंभीर सवाल खड़े किए हैं। शैलजा ने कहा कि यह देखना जरूरी है कि इन दावों के बीच कुछ सेक्टर, खासतौर पर भारत के उन क्षेत्रों को लेकर जिन पर करोड़ों लोगों की रोजी-रोटी टिकी है, जैसे कृषि, डेयरी और कपड़ा उद्योग।</p>
<p><img src="https://www.deshrojana.com/media/2026-02/1pn.jpg" alt="1pn" width="768" height="512"></img><br />शैलजा ने कहा कि जब तक इस समझौते का पूरा कानूनी दस्तावेज़ सार्वजनिक नहीं किया जाता, तब तक देश से यह उम्मीद की जा रही है कि वह सिर्फ सरकारी बयानों पर भरोसा करे। यह किसी भी लोकतंत्र में सही तरीका नहीं है। उन्होंने कहा कि भारत में व्यापार का मतलब रोजगार होता है। भारत में व्यापार केवल निर्यात और विदेशी नीति का विषय नहीं है। यह किसानों, मज़दूरों और महिलाओं की आमदनी से जुड़ा हुआ मुद्दा है। देश के करोड़ों परिवार खेती और पशुपालन पर निर्भर हैं, वहीं कपड़ा उद्योग में लाखों महिलाएं और युवा काम करते हैं। अगर किसी समझौते से इन क्षेत्रों पर असर पड़ता है, तो उसका असर सीधे समाज की रीढ़ पर पड़ता है।<br />सरकारी और अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों के अनुसार यह समझौता एक पूरा मुक्त व्यापार समझौता नहीं, बल्कि सिर्फ कुछ टैरिफ (आयात शुल्क) कम करने का पहला चरण है। अमेरिका ने भारत से जाने वाले कई सामानों पर टैक्स घटाकर लगभग 18% कर दिया है, जो पहले बहुत ज़्यादा था। लेकिन अभी तक यह साफ नहीं किया गया है कि कौन से सामान इस छूट में शामिल हैं और कौन से बाहर। जब तक पूरी सूची सार्वजनिक नहीं होगी, तब तक यह पता नहीं चलेगा कि किसका फायदा हुआ और किसका नुकसान।<br />शैलजा ने कहा कि अगर यह समझौता सच में भारत के लिए है, तो आने वाले चरणों में किसानों के लिए लिखित सुरक्षा और कपड़ा उद्योग के लिए असली बाजार पहुंच देनी ही होगी। यही एक सच्ची रणनीतिक साझेदारी होगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>हरियाणा</category>
                                            <category>गुरुग्राम</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 07 Feb 2026 14:02:01 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[NELOFER HASHMI]]></dc:creator>
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                <title>गरीब व मध्यमवर्गीय विरोधी और अमीर हितैषी है बजट : सुमित गौड़</title>
                                    <description><![CDATA[<p>हरियाणा कांग्रेस कमेटी के प्रदेश प्रवक्ता सुमित गौड़ ने केंद्रीय वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा संसद में पेश की बजट को गरीब व मध्यमवर्गीय विरोधी और अमीर हितैषी करार दिया।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.deshrojana.com/haryana/faridabad/budget-sumit-gaur-is-anti-poor-and-middle-class-and-pro-rich/article-354"><img src="https://www.deshrojana.com/media/400/2026-02/img-20260201-wa0010.jpg" alt=""></a><br /><p>फरीदाबाद: हरियाणा कांग्रेस कमेटी के प्रदेश प्रवक्ता सुमित गौड़ ने केंद्रीय वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा संसद में पेश की बजट को गरीब व मध्यमवर्गीय विरोधी और अमीर हितैषी करार दिया। यहां जारी प्रेस बयान में सुमित गौड़ ने कहा कि बजट में गरीबों व मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए कुछ राहत नहीं है, केवल अमीरों के हितों का ध्यान रखा गया है। उन्होंने कहा कि बजट ने  शेयर मार्किट में लोगों के करोड़ों रुपए डूबा दिए। बाजार को उम्मीद थी कि शेयरों के लेन-देन पर लगने वाला एसटीटी टैक्स खत्म होगा या घटेगा, लेकिन वित्तमंत्री ने फ्यूचर्स और ऑप्शन पर टैक्स बढ़ा दिया। उन्होंने कहा कि बजट में में इनकम टैक्स में कोई नई छूट नहीं मिली, सभी स्लैब जस की तस है, कमर्शियल सिलेंडरों के दाम बढ़ा दिए गए, जिससे होटलों, ढाबों व अन्य व्यवसायिक संस्थानों पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। मोबाइल और इलेक्ट्रोनिक पार्ट्स के लिए बजट बढ़ाकर 40 हजार करोड़ कर दिया, लेकिन गरीबों व मध्यमवर्गीय परिवारों को महंगाई से कोई राहत नही दी गई। श्री गौड़ ने कहा कि केंद्रीय बजट में हरियाणा के लिए कुछ भी नहीं है, जबकि पूर्व में कांग्रेस सरकारों में हरियाणा के हितों का पूरा ध्यान रखा जाता था, पिछले 12 सालों की तरह इस बार फिर केंद्रीय बजट में हरियाणा खाली हाथ है, जबकि हरियाणा से देश में सबसे ज्यादा जीएसटी कलेक्शन और टोल टैक्स वसूली होती है, लेकिन बजट में हिस्सेदारी जीरो रहती है।</p>
<p><img src="https://www.deshrojana.com/media/2026-02/img-20260201-wa0010.jpg" alt="IMG-20260201-WA0010" width="712" height="1072"></img></p>]]></content:encoded>
                
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                                            <category>देश</category>
                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>फरीदाबाद</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 01 Feb 2026 15:15:58 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>वसुधैव कुटुंबकम’ के शाश्वत भारतीय दर्शन को साकार करता सूरजकुंड शिल्प मेला : सीपी राधाकृष्णन </title>
                                    <description><![CDATA[<p>हरियाणा के सूरजकुंड में 39वें सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय आत्मनिर्भर शिल्प मेला-2026 का भव्य आगाज हुआ, जो 15 फरवरी तक चलेगा। भारत के उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने बतौर मुख्य अतिथि मेले का उद्घाटन किया।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.deshrojana.com/haryana/faridabad/surajkund-crafts-fair-realizing-the-eternal-indian-philosophy-of-vasudhaiva/article-351"><img src="https://www.deshrojana.com/media/400/2026-01/aa.png" alt=""></a><br /><div>
<div>फरीदाबाद: हरियाणा के सूरजकुंड में 39वें सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय आत्मनिर्भर शिल्प मेला-2026 का भव्य आगाज हुआ, जो 15 फरवरी तक चलेगा। भारत के उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने बतौर मुख्य अतिथि मेले का उद्घाटन किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी, केंद्रीय सहकारिता राज्य मंत्री कृष्ण पाल गुर्जर, मेले में सहयोगी देश मिस्र के एम्बेसडर कमल जायद ग़लाल, हरियाणा के राजस्व एवं शहरी स्थानीय निकाय मंत्री विपुल गोयल, हरियाणा के खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति राज्य मंत्री राजेश नागर, हरियाणा के खेल, युवा अधिकारिता एवं उद्यमिता मंत्री गौरव गौतम, भारत सरकार के पर्यटन मंत्रालय के सचिव डॉ. श्रीवत्स कृष्णा व पर्यटन विभाग हरियाणा के आयुक्त एवं सचिव डॉ अमित अग्रवाल की गरिमामयी उपस्थिति रही।</div>
<div><img src="https://www.deshrojana.com/media/2026-01/aa.png" alt="aa" width="624" height="391"></img></div>
<div>मेले के शुभारंभ अवसर पर उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने मेला परिसर में हरियाणा के अपना घर पवेलियन का दौरा किया, जहां हरियाणवी पगड़ी पहनाकर उनका पारंपरिक स्वागत-सत्कार किया गया। उपराष्ट्रपति ने मेले के थीम स्टेट मेघालय के स्टॉलों का अवलोकन करते हुए शिल्पकारों से संवाद किया तथा उनके हुनर की सराहना की। इसके साथ ही उन्होंने मेले में सहभागी विभिन्न देशों और राज्यों की सांस्कृतिक विधाओं का अवलोकन कर कलाकारों एवं शिल्पकारों का उत्साहवर्धन किया। मेला परिसर की मुख्य चौपाल के मंच से उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन ने दीप प्रज्ज्वलन कर कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने मेले में आने वाले आगंतुकों की सुविधा हेतु मेला साथी ऐप का शुभारंभ भी किया। इस अवसर पर हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी तथा विरासत एवं पर्यटन मंत्री डॉ. अरविंद शर्मा द्वारा उन्हें पांचजन्य शंख और महाभारत के दृश्य को दर्शाती एक आकर्षक पेंटिंग भेंट की गई।</div>
<div>उद्घाटन करने उपरांत उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने अपने संबोधन में कहा कि सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय शिल्प मेला दशकों से भारत की सांस्कृतिक आत्मा, कलात्मक उत्कृष्टता और सभ्यतागत निरंतरता का जीवंत प्रतीक रहा है। यह उत्सव ‘वसुधैव कुटुंबकम’ के उस शाश्वत भारतीय दर्शन को साकार करता है, जिसमें पूरी दुनिया को एक परिवार माना गया है। यह  मेला निर्माण करने वाले हाथों, नवाचार से भरे मस्तिष्कों और हमारी पहचान गढ़ने वाली परंपराओं को एक साझा मंच पर एकत्र करता है। पिछले लगभग चार दशकों से यह आयोजन हमारे कारीगरों, बुनकरों, मूर्तिकारों, चित्रकारों और लोक कलाकारों को वैश्विक पहचान दिला रहा है, जिनमें से अनेक पीढ़ियों से चली आ रही कलाओं को जीवित रखे हुए हैं। इस वर्ष आत्मनिर्भर भारत पर केंद्रित दृष्टिकोण ने मेले के महत्व को और भी गहन बना दिया है, क्योंकि हमारे कारीगर सदियों पुराने ज्ञान के संरक्षक हैं और उन्हें सशक्त बनाना एक समावेशी, सशक्त और टिकाऊ अर्थव्यवस्था की नींव है।</div>
<div>मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने शिल्प मेले के उद्घाटन कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि सूरजकुण्ड शिल्प मेला हमारी प्राचीन विरासत और आधुनिक सोच का सजीव संगम है। पिछले 38 वर्षों से यह मेला भारतीय लोक कला, संस्कृति और शिल्प परंपराओं को न केवल संरक्षित कर रहा है, बल्कि उन्हें नई पीढ़ी और वैश्विक मंच से भी जोड़ रहा है। उन्होंने कहा कि इस वर्ष की थीम ‘लोकल टू ग्लोबल’ और ‘आत्मनिर्भर भारत की पहचान’ माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के उस विज़न को साकार करती है, जिसके तहत देश के हर कोने में बसे हुनरमंद कारीगर के हाथों को अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंच मिल सके। मुख्यमंत्री ने कहा कि आत्मनिर्भरता केवल आर्थिक स्वावलंबन तक सीमित नहीं, बल्कि अपनी संस्कृति पर गर्व, अपनी विरासत का संरक्षण और उसे विश्व के समक्ष आत्मविश्वास के साथ प्रस्तुत करने का संकल्प है। सूरजकुण्ड शिल्प मेला इसी आत्मनिर्भरता का जीवंत और प्रेरक प्रतीक है। </div>
<div>उद्घाटन कार्यक्रम को संबोधित करते हुए हरियाणा के विरासत एवं पर्यटन मंत्री डॉ अरविंद शर्मा ने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर सूरजकुंड शिल्प मेले के प्रति विश्वास लगातार बढ़ रहा है, जिसका प्रमाण मेले में बढ़ती वैश्विक भागीदारी है। उन्होंने कहा कि पिछली बार आयोजित 38वें सूरजकुंड क्राफ्ट मेले में जहां लगभग 44 देशों ने मेले में भाग लिया था, वहीं इस वर्ष 50 से अधिक देशों के लगभग 700 प्रतिनिधि और प्रतिभागी सूरजकुंड शिल्प मेले में शामिल हो रहे हैं, जो इस आयोजन के प्रति अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर बढ़ते भरोसे को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि यह मेला शिल्पकारों, कलाकारों और हस्तशिल्प से जुड़े लोगों के लिए एक सशक्त मंच है, जहां उन्हें बेहतर राजस्व के साथ-साथ अंतर्राष्ट्रीय पहचान भी मिलती है। मेले के सफल आयोजन के लिए सुरक्षा, परिवहन और अन्य सभी व्यवस्थाएं पुख्ता की गई हैं, साथ ही दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन को आयोजन का को-पार्टनर बनाया गया है, ताकि आगंतुकों और पर्यटकों को किसी प्रकार की असुविधा न हो। डॉ. शर्मा ने विश्वास व्यक्त किया कि ‘लोकल टू ग्लोबल’ की भावना के साथ सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय आत्मनिर्भर शिल्प महोत्सव आने वाले वर्षों में और अधिक विस्तार पाएगा।</div>
<div>कार्यक्रम में बल्लभगढ़ से विधायक एवं पूर्व मंत्री मूलचंद शर्मा,  बड़खल से विधायक धनेश अदलखा, फरीदाबाद एनआईटी से विद्यालय सतीश फागना,  सोहना से विधायक तेजपाल तवर, राई से विधायक कृष्णा गहलावत, नलवा से विधायक रणधीर पनिहार, फरीदाबाद की मेयर प्रवीण जोशी, मोहन लाल बाड़ौली,   फरीदाबाद मंडलायुक्त संजय जून, मेला के मुख्य प्रशासक पार्थ गुप्ता, डीसी आयुष सिन्हा, नगर निगम के आयुक्त धीरेंद्र खटखटा, सीपी सतेंद्र कुमार गुप्ता, सूचना जनसंपर्क एवं भाषा विभाग की अतिरिक्त निदेशक खांगवाल उपस्थित रहे।</div>
</div>
<div class="signature-text">
<div> </div>
</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>हरियाणा</category>
                                            <category>फरीदाबाद</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 31 Jan 2026 17:37:58 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>31 जनवरी से 15 फरवरी 2026 तक आयोजित होगा 39वां सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय आत्मनिर्भर शिल्प महोत्सव 2026</title>
                                    <description><![CDATA[<p>39वां सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय आत्मनिर्भर शिल्प महोत्सव 2026, 31 जनवरी से 15 फरवरी 2026 तक आयोजित होगा।इस बार उत्तर प्रदेश और मेघालय को थीम राज्य के रूप में चुना गया है।बता दें कि इस बार मिस्र को सहायक देश के रूप में चुना गया है। विश्व की सबसे पुरानी सभ्यताओं में से एक होने के नाते मिस्र मेले में एक विशिष्ट सांस्कृतिक आयाम जोड़ेगाI </p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.deshrojana.com/haryana/faridabad/will-be-held-from-31-january-to-15-february-2026/article-349"><img src="https://www.deshrojana.com/media/400/2026-01/surajkund-international-craft-mela-2026-a.jpg" alt=""></a><br /><p>Surajkund Mela 2026 : <strong>39वां सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय आत्मनिर्भर शिल्प महोत्सव 2026, 31 जनवरी से 15 फरवरी 2026</strong> तक आयोजित होगा।सूरजकुंड, फरीदाबाद (हरियाणा) में 31 जनवरी से 15 फरवरी 2026 तक आयोजित यह अंतरराष्ट्रीय महोत्सव भारतीय कारीगरी की समृद्ध विरासत को करीब से देखने और अपनाने का सुनहरा अवसर है।</p>
<p><img src="https://www.deshrojana.com/media/2026-01/surajkund-international-craft-mela-2026-a.jpg" alt="Surajkund-International-Craft-Mela-2026-A" width="1200" height="675"></img></p>
<h6><strong>थीम राज्य :</strong></h6>
<p>इस बार उत्तर प्रदेश और मेघालय को थीम राज्य के रूप में चुना गया है।यह भव्य महोत्सव भारतीय हस्तशिल्प, लोक कला और आत्मनिर्भरता की भावना को वैश्विक मंच पर प्रदर्शित करेगा।मिट्टी के बर्तन, लकड़ी की नक्काशी, हाथ से बुने हुए वस्त्र, पारंपरिक ज्वेलरी, प्रिंटेड फैब्रिक और खूबसूरत होम डेकोर की विविध वस्तुएँ इस मेले का मुख्य आकर्षण बनेंगी।</p>
<p>सूरजकुंड, फरीदाबाद हरियाणा में आयोजित होने जा रहे अंतर्राष्ट्रीय शिल्प महोत्सव का आकर्षण और भी खास होने जा रहा है।बता दें कि इस बार मिस्र को सहायक देश के रूप में चुना गया है। विश्व की सबसे पुरानी सभ्यताओं में से एक होने के नाते मिस्र मेले में एक विशिष्ट सांस्कृतिक आयाम जोड़ेगाI </p>
<h6><strong>खाद्य स्टॉल :</strong></h6>
<p>सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय आत्मनिर्भर शिल्प महोत्सव में इस बार 100 से अधिक खाद्य स्टॉल लगाए जाएंगे, जो भारत के विभिन्न राज्यों से जातीय व्यंजन प्रदान करेंगे। विशेष रूप से पूर्वोत्तर भारतीय राज्यों जैसे असम, अरुणाचल प्रदेश, मेघालय, मणिपुर, मिजोरम, त्रिपुरा, नागालैंड और सिक्किम की पाक संस्कृति को प्रदर्शित किया जाएगा।</p>
<h6><strong>समय</strong></h6>
<p>आगंतुक प्रतिदिन सुबह 10:30 बजे से रात 8:30 बजे तक मेले का आनंद ले सकते हैं।</p>
<h6><strong>टिकट की कीमत</strong></h6>
<p>कार्यदिवसों (Weekdays) पर टिकट ₹120 और सप्ताहांत (Weekends) पर ₹180 निर्धारित है। वरिष्ठ नागरिकों और छात्रों के लिए छूट का प्रावधान भी रहता हैI</p>
<h3><strong>सूरजकुंड महोत्सव तक पहुँचना हुआ बेहद आसान:</strong></h3>
<p>नजदीकी अंतर्राजीय बस स्टैंड फरीदाबाद, बल्लभगढ़ और महाराणा प्रताप आईएसबीटी कश्मीरी गेट हैं, जबकि मेट्रो से आने वाले आगंतुक बदरपुर बॉर्डर और सराय मेट्रो स्टेशन का उपयोग कर सकते हैं।<br />दूर से आने वाले यात्रियों के लिए इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा सबसे नजदीकी एयरपोर्ट है, और ओला/उबर जैसी कैब सेवाओं से "Surajkund Mela Ground, Faridabad" लोकेशन चुनकर सीधे मेले तक पहुँचा जा सकता है।</p>
<p>महोत्सव में आने वाले लोगों की सुविधा के लिए टॉल फ्री नंबर 0129-2988666 भी उपलब्ध है, ताकि लोगों को जानकारी और सहायता आसानी से प्राप्त की जा सके।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>हरियाणा</category>
                                            <category>व्यापार</category>
                                            <category>फरीदाबाद</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 30 Jan 2026 17:10:43 +0530</pubDate>
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