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                <title>इजराइल - देश रोजाना</title>
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                <description>इजराइल RSS Feed</description>
                
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                <title>&quot;आज रात पूरी सभ्यता ख़त्म हो जाएगी&quot; ऐसी धमकी के बाद अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर ! दुनिया के सभी देशों ने ली रहत की सांस, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की अमेरिका में थू -थू !</title>
                                    <description><![CDATA[<p>ईरान और अमेरिका के बीच दो हफ्ते का युद्ध विराम इजराइल ने भी जताई सहमति। सुत्रधारधार कौन पाकिस्तान या चीन, क्या है इनसाइड स्टोरी ?</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.deshrojana.com/world/america/israel-also-agreed-to-a-two-week-ceasefire-between-iran-and/article-510"><img src="https://www.deshrojana.com/media/400/2026-04/thumb1.jpg" alt=""></a><br /><p>ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव के बीच एक बड़ी राहत की खबर सामने आई है। दोनों देशों ने दो हफ्ते के सीजफायर पर सहमति जताई है, जिससे फिलहाल हमले रुकने की उम्मीद बन गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने इसका ऐलान किया है। कहा जा रहा है कि पाकिस्तान की मध्यस्तता के कारण  ये संभव हो पाया है। इस समझौते के तहत स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को खोलने और आगे बातचीत शुरू करने का रास्ता साफ हुआ है। हालांकि, जमीनी हालात अभी भी पूरी तरह सामान्य नहीं हुए हैं।</p>
<p>इस समझौते के तहत ईरान ने 10 शर्ते रखी थी जिन्हे अमेरिका ने स्वीकार कर लिए है। ट्रम्प ने कहा कि, "इस दौरान दोनों देशों के बीच युद्ध विराम रहेगा ना तो अमेरिका हमला करेगा और ना ही ईरान कोई गलत कदम उठएगा।" इजराइल ने भी कुछ अनमने अंदाज में इस पर अपनी सहमति जताई है। आइये जानते हैं ईरान की कौन सी 10 शर्ते हैं जिन्हे अमेरिका ने माना है। </p>
<p><strong>ईरान की 10 शर्तें </strong><br />1. कोई हमला ना किया जाये अमेरिका संयम बनाये और कोई आक्रमकता ना दिखाए <br />2 .ईरान को यूरेनियम संवर्धन करने से ना रोका जाये <br /> 3. होर्मुज पर ईरान का नियंत्रण बरक़रार रहे <br />4. यूएन ईरान के खिलाफ अपने प्रस्ताव वापस ले <br />5. प्राथमिक और द्वितीयक (Primary &amp; Secondary) प्रतिबंधों को तत्काल हटाने की मांग <br />6. ईरान पर लगे सभी प्रतिबन्ध अमेरिका हटाए <br />7. युद्ध में हुए नुकसान की भरपाई की जाए <br />8. अंतर्राष्टीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी यानि IAEA के प्रस्तावों को ख़ारिज किया जाए <br />9. अमेरिका अपने सैनिक ईरानी क्षेत्र से हटाए <br />10. लेबनान और अन्य क्षेत्रों से हमले तुरंत रोके जाएं </p>
<p>अमेरिका ने ईरान की 10 शर्तो को मान लिए है। वहीँ अमेरिका ने भी अपनी 15 शर्ते ईरान के सामने रखी है। वो 15 शर्ते कुछ इस प्रकार है -<br /><strong>अमेरिका की 15 शर्तें</strong><br />1. ईरान को एक महीने का सीजफायर करना होगा.<br />2. ईरान को अपने परमाणु कार्यक्रम को लगभग खत्म करना होगा.<br />3. ईरान को यूरेनियम संवर्धन पूरी तरह रोकना होगा.<br />4. सभी न्यूक्लियर सामग्री International Atomic Energy Agency को सौंपनी होगी.<br />5. नतांज, फोर्डो और इस्फहान जैसे प्रमुख केंद्र नष्ट करने होंगे.<br />6. IAEA को देश के अंदर पूरी जांच की पूरी आज़ादी देनी होगी.<br />7. ईरान को अपनी प्रॉक्सी रणनीति छोड़नी होगी. हमास जैसे संगठनों से रिश्ते खत्म करने होंगे.<br />8. क्षेत्र में फंडिंग और हथियार सप्लाई पूरी तरह रोकनी होगी.<br />9. Strait of Hormuz को अंतरराष्ट्रीय जहाज़ों के लिए खुला रखना होगा.<br />10. मिसाइल प्रोग्राम पर बाद में बातचीत के तहत संख्या और रेंज पर सीमाएं लगेंगी.<br />11. ईरान की सैन्य क्षमता सिर्फ आत्मरक्षा तक सीमित करनी होगी.<br />12. ईरान पर लगे सभी आर्थिक प्रतिबंध हटाने की बात.<br />13. Bushehr Nuclear Power Plant जैसे सिविल न्यूक्लियर प्रोजेक्ट में अंतरराष्ट्रीय मदद.<br />14. स्नैपबैक यानी अचानक प्रतिबंध वापस लगाने की व्यवस्था खत्म होगी.<br />15. ईरान को भविष्य में परमाणु हथियार न बनाने की औपचारिक गारंटी देनी होगी.</p>
<p><strong>किसकी शर्तों में ज़्यादा दमदार ?</strong><br />अमेरिका ने ईरान के सामने लीबिया जैसी शर्तें रखी हैं. 2003 में लीबिया को भी अमेरिका ने इसी तरह की शर्तों में फंसाया था।  उस वक्त वहां के नेता मुअम्मर गद्दाफी अमेरिकी चालों को समझ नहीं पाए थे. आखिर में 8 साल बाद उन्हें जान से हाथ धोना पड़ा था. ईरान इस मामले में थोड़ा होशियार दिख रहा है. ईरान ने अमेरिका को 2 मामलों में फंसा दिया है. पहला, इस मामले की गारंटी उसे दी जाए कि उस पर आगे से कोई हमला नहीं होगा. यह गारंटी अगर ईरान को मिलती है तो मिडिल ईस्ट में उसका दबदबा कायम रह सकता है.</p>
<p><strong> युद्धविराम में पाकिस्तान की अहम भूमिका</strong><br />ट्रम्प ने बताया कि इस युद्धविराम में पाकिस्तान की अहम भूमिका रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख आसिम मुनीर ने ट्रंप से सीधे बात की और युद्ध विराम करने को कहा। जिस पर विचार करते हुए ट्रम्प ने सीजफायर का ऐलान किया। ईरान की तरफ से भी विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने सीजफायर पर मुहर लगाई है। कहा जा सकता है कि पाकिस्तान, जिसे अभी तक बहुत छोटा, निचले दर्जे का देश गिना जाता था, हमारे देश में भी पाकिस्तान को भूखे नंगे की श्रेणी में रखा जाता था आज उस पाकिस्तान ने इस जंग को बड़ा रूप लेने से रोका है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, चीन ने सीधे तौर पर सामने आने के बजाय बैकडोर डिप्लोमेसी का रास्ता अपनाया. उसने पाकिस्तान, तुर्की और मिस्र जैसे देशों के जरिए ईरान. पर युद्ध विराम का दबाव बनाया। </p>
<p> <br /><strong>इस्लामाबाद में होगी आगे की बातचीत</strong><br />सीजफायर के साथ ही अब दोनों देशों के बीच बातचीत का रास्ता भी खुल गया है। पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में 10 अप्रैल को दोनों पक्षों के बीच वार्ता शुरू होने की संभावना है।</p>
<p>सीजफायर के बावजूद जारी तनाव<br />हालांकि कागजों पर सीजफायर हो गया है, लेकिन जमीन पर हालात अब भी पूरी तरह शांत नहीं हैं। खाड़ी देशों और इजरायल में मिसाइल हमलों के अलर्ट जारी हैं। संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब, कुवैत और बहरीन जैसे देशों में एयर डिफेंस सिस्टम सक्रिय हैं। इससे साफ है कि क्षेत्र में खतरा अभी टला नहीं है और स्थिति बेहद नाजुक बनी हुई है। इजरायल और ईरान के बीच भी हमले पूरी तरह बंद नहीं हुए हैं। दोनों तरफ से जवाबी कार्रवाई जारी रहने की खबरें सामने आ रही हैं, जिससे यह संकेत मिलता है कि सीजफायर को पूरी तरह लागू होने में समय लग सकता है।</p>
<p><strong>स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बना सबसे बड़ा मुद्दा</strong><br />इस पूरे संघर्ष का सबसे बड़ा केंद्र स्ट्रेट ऑफ होर्मुज रहा है। दुनिया के बड़े हिस्से में तेल और गैस की सप्लाई इसी रास्ते से होती है। ईरान ने इस जलमार्ग पर नियंत्रण कड़ा कर दिया था, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर पड़ा।</p>
<p>आर्थिक असर और अंतरराष्ट्रीय दबाव<br />सीजफायर की घोषणा के बाद वैश्विक बाजारों में सकारात्मक असर देखा गया। अमेरिका के तेल की कीमतों में 17 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट आई, जबकि जापान और दक्षिण कोरिया के शेयर बाजारों में तेजी रही।</p>
<p><strong>डोनाल्ड ट्रंप की छीछालेदार</strong><br />हालाँकि दुनियाभर में इस समय डोनाल्ड ट्रंप की छीछालेदार हो रही है। अमेरिका को विश्व का सबसे बड़ा देश माना जाता है, हर जगह निर्णायक की भूमिका में रहा है। शांति और समृद्धि की बात करता है। वही अमेरिका ईरान पर अपना अधिकार जमाना चाहता है। उसके कच्चे तेल के भंडार को अपना कहता है और ईरान पर हमले करता है। इस वजह से अमेरिका में विपक्षी पार्टी तो छोड़िये उनकी खुद की पार्टी के नेता उनके विरोध में सड़क पर उतर आये थे।अमेरिका की जनता भी ट्रंप की निति के विरोध में रही है। अब अचानक युद्ध से पीछे हटना देश की नाक कटाने जैसा है। यहाँ तक की अमेरिका में उन्हें राष्ट्रपति पद से हटाए जाने की बात कही जा रही है। </p>
<p><strong>ईरान में गुस्सा और ख़ुशी का मिला जुला असर </strong><br />सीजफायर के ऐलान के बाद ईरानी जनता जहाँ एक और जश्न मना रही है वहीँं दूसरी और कुछ लोग इसका विरोध कर रहे हैं। पुरुषों के साथ-साथ महिलाये भी हथियार लहराते हुए सड़कों पर उतरी हैं। डोनाल्ड ट्रंप पर कई तरह के मीम बनाये जा रहे है।उसे डरपोक कहा जा रहा है। ईरानी देवता से आगे ट्रंप घुटनो के बल बैठे दिखाया जा रहा। </p>
<p><img src="https://www.deshrojana.com/media/2026-04/thumb1.jpg" alt="Thumb" width="1920" height="1080"></img><br />अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम पर भारत ने सकारात्मक प्रतिक्रिया देते हुए इस कदम का स्वागत किया है। विदेश मंत्रालय ने तनाव कम करने, बातचीत और कूटनीति के जरिए शांति बहाली पर जोर दिया, क्योंकि यह संघर्ष ऊर्जा आपूर्ति और वैश्विक व्यापार को प्रभावित कर रहा था। हलकी जब भारत को अमेरिका और ईरान के बीच तनाव को कम करने में मध्यस्तता करने को कहा गया था।  विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने मार्च 2026 में एक सर्वदलीय बैठक के दौरान पाकिस्तान की ओर इशारा करते हुए कहा था कि "हम पाकिस्तान की तरह दलाल  देश नहीं हैं"। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत मध्यस्थता के खेल में नहीं पड़ता और न ही किसी दूसरे देश के लिए मध्यस्थ की भूमिका निभाता है। </p>
<p>इजरायल ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के युद्धविराम फैसले का समर्थन तो किया है, लेकिन यह भी साफ कर दिया है कि यह लेबनान पर लागू नहीं होगा।  इजरायली सरकार ने दक्षिणी लेबनान के एक शहर के लिए नया निकासी आदेश जारी किया है, जो यह संकेत देता है कि वहां सैन्य अभियान जारी रह सकता है. इजरायल ने कहा है कि वह अमेरिका के फैसले का समर्थन तभी करेगा, जब ईरान तुरंत जलडमरूमध्य खोले और क्षेत्र में हमले बंद करे. साथ ही इजरायल ने यह भी स्पष्ट किया कि वह अमेरिका के उन प्रयासों के साथ है, जिनका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि ईरान भविष्य में परमाणु, मिसाइल या आतंकवादी खतरा न बने।  ऐसे सीजफायर कितने दिनों के लिए रहेगा ये भी स्पष्ट रूप नहीं कहा जा सकता। </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>ईरान</category>
                                            <category>इजराइल</category>
                                            <category>अमेरिका</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 08 Apr 2026 17:15:26 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[ANJU SHARMA]]></dc:creator>
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                <title>ईरान ने साइप्रस में ब्रिटिश एयरबेस पर किया ड्रोन हमला</title>
                                    <description><![CDATA[<p>इजराइल-अमेरिका और ईरान युद्ध  का आज तीसरा दिन है। ईरान ने साइप्रस में ब्रिटिश रॉयल एयर फोर्स (RAF) के अक्रोटिरी बेस पर ड्रोन हमला किया है। ब्रिटेन के रक्षा मंत्रालय के मुताबिक , बीते रविवार देर रात हुए इस हमले में बेस को मामूली नुकसान पहुंचा हैI</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.deshrojana.com/world/america/iran-launches-drone-attack-on-british-airbase-in-cyprus/article-429"><img src="https://www.deshrojana.com/media/400/2026-03/iran-war-1772362055.jpg" alt=""></a><br /><p>तेल अवीव/तेहरान: इजराइल-अमेरिका और ईरान युद्ध  का आज तीसरा दिन है। ईरान ने साइप्रस में ब्रिटिश रॉयल एयर फोर्स (RAF) के अक्रोटिरी बेस पर ड्रोन हमला किया है। ब्रिटेन के रक्षा मंत्रालय के मुताबिक , बीते रविवार देर रात हुए इस हमले में बेस को मामूली नुकसान पहुंचा हैI</p>
<p><img src="https://www.deshrojana.com/media/2026-03/iran-war-1772362055.jpg" alt="iran-war-1772362055" width="1200" height="675"></img></p>
<p>इसके जवाब में ब्रिटिश सेना भी कार्रवाई कर रही है। दरअसल, ब्रिटिश प्रधानमंत्री  कीर स्टारमर ने ईरानी मिसाइल साइट्स पर हमले के लिए अमेरिका को इस बेस का उपयोग करने की इजाजत दी थी।</p>
<p>ईरान ने सोमवार को मिडिल-ईस्ट के 4 देशों में 6 अमेरिकी बेस पर हमला किया है। कुवैत में अमेरिका के कई फाइटर जेट क्रैश हो गए है।हालांकि, इसमें किसी मौत की नहीं हुई है।</p>
<p>ईरान के टॉप नेशनल सिक्योरिटी अधिकारी अली लारीजानी ने सोमवार को कहा कि ईरान अमेरिका से कोई बातचीत नहीं करेगा। यह बयान उन खबरों के जवाब में आया है, जिनमें कहा गया था कि ईरान ने अमेरिका से फिर से बातचीत शुरू करने की कोशिश की है।</p>
<h4><strong>ईरान में 555 की मौत तथा 740 घायल</strong></h4>
<p>अल-जजीरा की रिपोर्ट अनुसार , अमेरिका और इजराइल ने मिलकर अब तक ईरान के 1000 से ज्यादा ठिकानों पर हमले किए हैं। इस दौरान शुरुआती 30 घंटे में 2000 से ज्यादा बम गिराए गए।</p>
<p>इनमें अब तक 555 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 700 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं। एक स्कूल पर मिसाइल गिरने से 180 छात्राओं की मौत हो गई जबकि 45 घायल हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>ईरान</category>
                                            <category>इजराइल</category>
                                            <category>अमेरिका</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 02 Mar 2026 16:59:26 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[NELOFER HASHMI]]></dc:creator>
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