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                <title> पश्चिम बंगाल - देश रोजाना</title>
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                <description> पश्चिम बंगाल RSS Feed</description>
                
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                <title>पश्चिम बंगाल- साधन संपन्न और खुशहाल प्रदेश कैसे बना पिछड़ेपन का शिकार ?</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>कभी देश आर्थिक राजधानी हुआ करता था पश्चिम बंगाल। प्राकृतिक रूप से साधन संपन्न और बहुत ही खुशहाल प्रदेश, आज अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है। इतने खुशहाल प्रदेश को अर्श से फर्श पर लाने में कौन से कारण जिम्मेदार हैं ? चलिए आज इसी का विश्लेषण करते हैं। </strong></p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.deshrojana.com/state/west-bengal/west-bengal-%E2%80%93-how-a-resourceful-and-prosperous-state-became/article-716"><img src="https://www.deshrojana.com/media/400/2026-04/360_f_105094996_ncnrhu61to1dupx92wftyzcxb1kzawae.jpg" alt=""></a><br /><p><img src="https://www.deshrojana.com/media/2026-04/360_f_105094996_ncnrhu61to1dupx92wftyzcxb1kzawae.jpg" alt="360_F_105094996_nCNRHU61To1DupX92wFTYzcxb1KZawAE" width="948" height="632"></img></p>
<p>पश्चिम बंगाल में इलेक्शन नजदीक हैं। चारों और चुनावी भाषण और रैलियों का दौर चल रहा है। ऐसे में बंगाल की कमजोर कड़ी की सब बखिया उधेड़ रहे हैं। यहां की गरीबी, रोजगार की कमी, हिन्दू मुस्लिम विवाद, दंगे और पलायन करते लोग। कहने का मतलब है कि बंगाल गरीबी, भुखमरी और अनेक परशानियों से जूझ रहा है। प्रदेश में अशांति का माहौल है। </p>
<p>अब सवाल ये उठता है कि, क्या बंगाल शुरू ऐसा ही था ? जवाब है नहीं, क्योकि पश्चिम बंगाल प्राकृतिक संसाधनों से भरपूर है। जैसे-उपजाऊ जलोढ़ मिट्टी, विस्तृत वन क्षेत्र (सुंदरबन), गंगा-भागीरथी नदी प्रणाली, और प्रचुर मात्रा में कोयला भंडार से समृद्ध है। राज्य में चावल, जूट, चाय और आलू की प्रमुख खेती होती है। प्रमुख खनिजों में कोयला, देश का करीब आधा हिस्सा यही से आता है, अग्नि-मिट्टी यानि सिरेमिक और चीनी मिट्टी शामिल हैं। ये सभी संसाधन किसी भी क्षेत्र को आर्थिक रूप से संपन्न बनाने के लिए पर्याप्त हैं। लेकिन आज बंगाल की हालत बद से बदतर हो गई है। </p>
<p>मुग़ल काल से लेकर अंग्रेजी सियासत तक पूरे देश पर यही से अर्तव्यवस्था का संचालन होता था। क्योंकि ये देश की आर्थिक राजधानी हुआ करती थी। इस दौर में बंगाल भारत का सबसे</p>
<p><img style="aspect-ratio:auto;" src="https://www.deshrojana.com/media/2026-04/screenshot-2026-04-20-150121.png" alt="Screenshot 2026-04-20 150121" width="972" height="623"></img></p>
<p> संपन्न हिस्सा हुआ करता था। अब एक बड़ा सवाल कि, अगर इतना संपन्न राज्य था बंगाल तो आज यहाँ के लोग देश भर में रोजगार की तलाश में मारे-मारे क्यों फिर रहे हैं। इसकी बदहाली का कारण क्या ? आखिर ऐसा क्या हुआ कि 'भारत की आर्थिक राजधानी' कहलाने वाला यह प्रांत धीरे-धीरे पीछे छूटता गया? तो चलिए इतिहास के कुछ पन्ने पलटते हैं और जानते है कि बंगाल दशा और दिशा बिगाड़ने में कौन से कारण जिम्मेदार है। ।</p>
<p> दरअसल इसके पीछे कोई एक कारण नहीं, बल्कि घटनाओं का एक ऐसा सिलसिला है, जिसने बंगाल की भूगोल और तकदीर दोनों बदल दी। 20वीं सदी की शुरुआत तक कलकत्ता जिसे अब कोलकाता के नाम से जाना जाता है ये न केवल बंगाल की, बल्कि पूरे भारत की राजधानी हुआ करती थी। साल 1911 में अंग्रेजो ने कोलकाता को छोड़ देश की राजधानी दिल्ली को बनाया। यह सिर्फ दफ्तरों का एक जगह से दूसरी जगह शिफ्ट होना नहीं था। इसने बंगाल की अर्थव्यवस्था को हिला कर रख दिया। किसी देश की राजधानी होना और फिर महज एक राज्य की राजधानी बनकर रह जाना, बहुत बड़ा अंतर पैदा करता है। इस बदलाव से निवेश, सत्ता का केंद्र और अंतरराष्ट्रीय महत्व दिल्ली की ओर झुक गया। यह बंगाल के आर्थिक स्थिति को तोड़ने जैसा था। </p>
<p><img src="https://www.deshrojana.com/media/2026-04/screenshot-2026-04-20-150802.png" alt="Screenshot 2026-04-20 150802" width="1109" height="726"></img></p>
<p>बंगाल के पतन की सबसे बड़ी वजह बना 1947 का बंटवारा। बंगाल दो हिस्सों में बंट गया। जिसका पश्चमी हिस्सा भारत के पास रहा जिसे आज पश्चिम बंगाल के नाम से जाना जाता है जबकि पूर्वी हिस्सा पाकिस्तान के पास चला गया जो 1971 में बांग्ला देश बना। ये सिर्फ एक बंटवारा नहीं था बल्कि बंगाल के माथे पर खींची गई बदकिस्मती की एक स्याह लकीर थी। एक खुशहाल और संपन्न अर्थव्यवस्था का कत्ल था। </p>
<p>बंगाल जूट का सबसे बड़ा केंद्र था। इस बंटवारे ने उसे बर्बाद कर दिया। जूट पैदा करने वाले खेत पूर्वी हिस्से में चले गए, जबकि उसे प्रोसेस करने वाली मिलें हुगली नदी के किनारे पश्चिम बंगाल में रह गईं। कच्चा माल कहीं और, कारखाना कहीं। इस विसंगति ने बंगाल के औद्योगिक ढांचे को तोड़ दिया। बंटवारे के बाद मानवीय त्रासदी का ये वो दंश था  जिसे बंगाल आज भी झेल रहा है। </p>
<p><img src="https://www.deshrojana.com/media/2026-04/jute-3m.jpg" alt="jute-3m" width="1500" height="1000"></img></p>
<p>पूर्वी पाकिस्तान बनने से लाखों की संख्या में लोग अपनी जमीन, जायदाद और पुश्तैनी काम छोड़कर इस तरफ आए यानि पश्चिम बंगाल में आ गए। एक बसा-बसाया परिवार जब शरणार्थी बनकर आता है, तो उसे दोबारा शून्य से शुरू करना पड़ता है। जिसमे उसकी कई पीढ़ियां लग जाती हैं बंगाल की सीमित ज़मीन और संसाधनों पर अचानक आबादी का भारी बोझ बढ़ गया। जब रोटी का संकट सामने हो, तो समाज की बौद्धिक और सांस्कृतिक प्रगति रुक जाती है। ऐसा ही कुछ यहाँ भी हुआ। </p>
<p>अभी लोग बंगाल बंटवारे के घावों से उबर भी नहीं पाए थे कि उन्हें एक और बड़ा झटका लगा। 1971 की उथल-पुथल शुरू हो गई। पाकिस्तान और पूर्वी पाकिसतन अलग हो गए। बांग्लादेश मुक्ति संग्राम के दौरान एक बार फिर शरणार्थियों का भारी रेला पश्चिम बंगाल की सीमाओं में दाखिल हुआ। कम क्षेत्रफल में घनी आबादी का दबाव बढ़ने से बंगाल के प्राकृतिक संसाधनों पर जो हक यहाँ के पुराने बाशिंदों का था, उसे अब करोड़ों नए लोगों के साथ साझा करना पड़ा। जो इसे और गर्त में ले गया। बढ़ती आबादी और खाने के लाले पड़ने लगे तो पढ़े-लिखे लोग दूसरे राज्यों की और चले गए और पीछे छूट गए अनस्किलड लोग जिससे बंगाल और बिखर गया।</p>
<p><img src="https://www.deshrojana.com/media/2026-04/screenshot-2026-04-20-145159.png" alt="Screenshot 2026-04-20 145159" width="968" height="470"></img></p>
<p>आप बंगाल का नक्शा देखेंगे तो पाएंगे की ये एक पतला और लम्बा दर्रे जैसा दिखने वाला है।  इसकी भौगोलिक सीमाएँ 4000 किमी से ज्यादा है जो इतनी पेचीदा हैं कि कई जगह डिफाइन करना भी मुश्किल कि कहाँ भारतीय सीमा रेखा है और कहाँ बांग्लादेश। भारत-बांग्लादेश सीमा पर '150 गज' का क्षेत्र है जहाँ अंतरराष्ट्रीय नियम लागू है, उस सीमावर्ती इलाकों में एक ऐसी आबादी रहती है जो न इधर की है और ना ही उधर की।  </p>
<p>इसके अलावा रोजगार की तलाश में नेपाल और भूटान से लोग पश्चिम बंगाल चले आते हैं। बांग्लादेशी और म्यांमार से रोहिंग्या भी भारत में बसने की चाह लेकर अक्सर यहाँ घुसपैठ करते रहते हैं। विशेषज्ञ बताते है कि इन देशों से अंतरराष्ट्रीय प्रवासन का भार पश्चिम बंगाल के सीमावर्ती जिलों पर पड़ता है। आज भी तिब्बत से लेकर बांग्लादेश तक की सीमाओं से घिरा यह राज्य हमेशा से एक संवेदनशील 'बफर ज़ोन' बना रहा, जिसका असर इसके स्थिर आर्थिक विकास पर पड़ रहा है। </p>
<p>विशेषज्ञ मानते हैं कि वाम मोर्चा यानि लेफ्ट फ्रंट का लंबा शासन और 'उद्यम-विरोधी' नीतियां भी इसका बड़ा कारण रही हैं। क्योंकि वामपंथी सरकार पूंजीवाद, लाइसेंस राज और उद्योगों के प्रति कड़े रवैया रखती थी। वामपंथी शासन के दौरान ट्रेड यूनियनों की भूमिका बहुत आक्रामक थी। बार-बार होने वाली हड़तालें, तालाबंदी और काम न करने की संस्कृति के कारण उद्योगों को भारी नुकसान हुआ। जिससे कई उद्योगपति बंगाल छोड़कर गुजरात, महाराष्ट्र और तमिलनाडु जैसे राज्यों में चले गए।</p>
<p><img src="https://www.deshrojana.com/media/2026-04/image-3.png" alt="image-3" width="929" height="634"></img></p>
<p>1952 में फ्रेट इक्वलाइजेशन नीति लागू की गई जिससे खनिज संपन्न प्रदेश होने के बाद भी बंगाल इसका लाभ नहीं ले पाया।  क्योंकि पूरे देश में कोयला, लौह अयस्क समान मूल्य पर उपलब्ध कराया गया, जिससे बंगाल का जो भौगोलिक लाभ था, वह समाप्त हो गया। इसके अलावा नक्सलवाद ने भी बंगाल को पीछे धकेलने का काम किया। </p>
<p>दिल्ली में बैठकर बनाई गई नीतियां अक्सर बंगाल की इन जमीनी हकीकतों ठीक से समझ नहीं पाई। बंगाल का पीछे छूटना सिर्फ गलत नीतियों का नतीजा नहीं था, बल्कि इतिहास की क्रूर मारों का परिणाम भी है। आप ही सोचिये जिन्होंने बार-बार विस्थापन को झेला, सीमावर्ती और राजनितिक उठा-पटक ने बंगाल को खूब पटक पटक कर धोया। अनिश्चितता का दौर देखा।  उसके लिए अपने अस्तित्व को बचाना दूर की कौड़ी बन गई थी। उसे वापस पाना बहुत कठिन है यहाँ पहचान और अस्तित्व की लड़ाई आज भी जारी है।  </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category> पश्चिम बंगाल</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 20 Apr 2026 15:22:15 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[ANJU SHARMA]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>यूपी हरियाणा के बाद अब पश्चिम बंगाल में मजदूरों की आवाज़ बुलंद। </title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>पश्चिम बंगाल में 2026 के विधानसभा चुनावों को लेकर प्रचार और प्रसार का दौर चल रहा है ऐसे में, उत्तर बंगाल के चाय बागान मजदूरों ने न्यूनतम मजदूरी, भूमि अधिकार (पट्टा) और अनेक बुनियादी सुविधाओं की मांग को लेकर आवाज़ उठाई है। ये आवाज़ ऐसे वक्त पर उठाई जा रही जब चुनाव बहुत नज़दीक हैं। तो क्या इसका असर चुनाव परिणाम पर भी पड़ेगा ?</strong></p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.deshrojana.com/state/west-bengal/after-up-haryana-now-the-voice-of-workers-is-loud/article-659"><img src="https://www.deshrojana.com/media/400/2026-04/16770.jpg" alt=""></a><br /><p><img src="https://www.deshrojana.com/media/2026-04/16770.jpg" alt="Bengal Tea Garden Worker" width="900" height="600"></img></p>
<p>अभी यूपी और हरियाणा के मजदूरों का हंगामा ठीक से शांत भी नहीं हुआ था कि, पश्चिम बंगाल में भी चाय मजदूरों ने अपनी मांगों को रखते हुए आवाज उठाई है। दरअसल, उत्तर बंगाल में बहुत सारे चाय के बागान हैं। जिसमें हज़ारों की संख्या में मजदूर काम करते हैं। इन्ही की मेहनत की बदौलत दुनियाभर में चाय पहुँचती है। लेकिन दुख की बात है कि ये मजदूर आज भी बुनियादी सुविधाओं के जूझ रहे हैं। दिनभर चाय के बागानों में काम करने वाले खुद अच्छी चाय पीने से भी वंचित रहते हैं। कई मजदूर आज भी लकड़ी के चूल्हे पर खाना बनाते हैं। अच्छी स्वस्थ्य सुविधाओं, साफ़ पेयजल और बच्चों के लिए अच्छी शिक्षा से वंचित हैं।  </p>
<p><img src="https://www.deshrojana.com/media/2026-04/897398-1000041701.webp" alt="897398-1000041701" width="848" height="478"></img></p>
<p><strong>पीएफ और ग्रेच्युटी में अनियमितता</strong><br />मजदूरों ने शिकायत की है कि उनके वेतन से भविष्य निधि यानि पीएफ का पैसा काटा जा रहा है, लेकिन उसे जमा नहीं किया जा रहा है। साथ ही, सेवानिवृत्त मजदूरों को ग्रेच्युटी मिलने में भी देरी हो रही है। इसके अलावा दार्जिलिंग और डुआर्स क्षेत्र में कई बागानों के बंद होने से हजारों मजदूर बेरोजगार हो गए हैं, जिससे वे भुखमरी और पलायन को मजबूर हैं।</p>
<p><strong>कम मजदूरी और काम नियमित न मिलना </strong><br />इन मजदूरों की सबसे बड़ी समस्या है इन्हे मजदूरी कम मिलती है। ज्यादातर मजदूरों को रोज़ करीब 250 रुपये मिलते हैं, जो उनके लिए पर्याप्त नहीं है। मजदूर चाहते हैं कि उनकी मजदूरी कम से कम 350 रुपये हो जाए ताकि वे अपने परिवार का सही से पालन पोषण कर सकें। दूसरा इन्हे काम भी नियमित नहीं मिलता है। उन्हें कभी काम मिलता है तो कभी नहीं, जिससे उन्हें भविष्य की चिंता बनी रहती है। </p>
<p><strong>स्वास्थ्य और चिकित्सा को लेकर परशानी </strong><br />अक्सर बीमार होने पर मजदूरों के पास अच्छे अस्पताल और इलाज की सुविधा भी कम है। इसके लिए वे अक्सर चाय बागान के छोटे डॉक्टर या सरकारी अस्पताल पर ही निर्भर रहते हैं। ऐसे में सही समय पर सही इलाज न मिल पाने के कारण कई बार गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ता है। </p>
<p><strong>महिलाओं की सरकार से मांग </strong><br />चाय बागानों में काम करने वालो मजदूर में 70 से 80 प्रतिशत तक महिलाएं होती है। दिनभर मेहनत करने के बाद भी ये उतना नहीं कमा पाती कि अपनी ज़रूरतों को ठीक से पूरा कर सकें। इसलिए ज़्यादातर महिलाएं चाहती हैं कि उन्हें सिर्फ पैसे ही नहीं, बल्कि सिलाई मशीन या कोई और काम भी दिया जाए ताकी वे अपनी जरूरतों को ठीक से पूरा करे सकें। </p>
<p><img src="https://www.deshrojana.com/media/2026-04/2.jpg" alt="2" width="1000" height="584"></img></p>
<p><strong>सरकारी योजनाओं का मिले लाभ </strong><br />राज्य में मजदूरों के लिए अनेक सरकारी योजनाएं चलाई जा रही हैं। इसी के तहत लक्ष्मी भंडार का लाभ मिलता है, जिससे उन्हें हर महीने कुछ पैसे मिलते हैं।  लेकिन कई महिलाएं मानती हैं कि पैसे से ज्यादा जरूरी रोजगार के अवसर मिलना है। इसलिए उन्हें काम का सही अवसर मिलना चाहिए ताकि, वे अपने जीवन को बेहतर बना सकें। </p>
<p><strong>चुनाव पर पड़ सकता है असर </strong><br />उत्तर बंगाल की लगभग 20 से 22 सीटों पर चाय बागान मजदूरों का दबदबा है। खासकर जलपाईगुड़ी, अलीपुरद्वार और दार्जिलिंग में इनकी संख्या ज्यादा है. इसलिए चुनाव के समय सभी राजनीतिक पार्टियां इन मजदूरों को अपने पक्ष में करने की कोशिश करती हैं। मजदूरों का वोट जिस पार्टी को मिलेगा, वही पार्टी जीत सकती है। इसलिए इस बार चुनाव में ये मजदूर भी बहुत अहम भूमिका निभाने वाले हैं। उनका फैसला ही तय करेगा कि किसकी सरकार बनेगी। </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>हरियाणा</category>
                                            <category>खेती-किसानी</category>
                                            <category> पश्चिम बंगाल</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 17 Apr 2026 13:53:15 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[ANJU SHARMA]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>West Bengal Elections 2026: ‘बंगाल के लोगों को भूखा मारना चाहती है मोदी सरकार’, अभिषेक बनर्जी ने केंद्र पर निशाना साधा</title>
                                    <description><![CDATA[<p>पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पूर्व तृणमूल कांग्रेस (TMC) के महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी ने रविवार ,5 अप्रैल, 2026 को केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार पर कई आरोप लगाते हुए कहा कि विधानसभा चुनावों में जीतकर TMC बार-बार पश्चिम बंगाल की सत्ता में आई है, इसलिए केंद्र सरकार ने यहां के लोगों को भूखा मारने के लिए पिछले पांच सालों से राज्य का बकाया रोक रखा हैI</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.deshrojana.com/state/west-bengal/west-bengal-elections-2026-modi-government-wants-to-starve-the/article-487"><img src="https://www.deshrojana.com/media/400/2026-04/abhishek.jpg" alt=""></a><br /><p>पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पूर्व तृणमूल कांग्रेस (TMC) के महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी ने रविवार ,5 अप्रैल, 2026 को केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार पर कई आरोप लगाते हुए कहा कि विधानसभा चुनावों में जीतकर TMC बार-बार पश्चिम बंगाल की सत्ता में आई है, इसलिए केंद्र सरकार ने यहां के लोगों को भूखा मारने के लिए पिछले पांच सालों से राज्य का बकाया रोक रखा हैI</p>
<p><img src="https://www.deshrojana.com/media/2026-04/abhishek.jpg" alt="ABHISHEK" width="449" height="300"></img></p>
<p>न्यूज़ एजेंसी के मुताबिक, पूर्व बर्धमान जिले के रैना में एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए अभिषेक बनर्जी ने कहा कि अगर वह झूठ बोल रहे हैं तो बीजेपी सबूतों के साथ उनका खंडन करे और उन्हें जेल भेज देI उन्होंने कहा, ‘केंद्र ने राज्य की परियोजनाओं के लिए एक लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का बकाया अभी तक जारी नहीं की हैIउसने ऐसा पश्चिम बंगाल के गरीब लोगों को भूखा मारने के लिए किया है, क्योंकि बंगाल के लोगों ने लगातार विधानसभा चुनावों में तृणमूल कांग्रेस को सत्ता में पहुंचाया हैI’</p>
<p>लोकसभा सांसद अभिषेक बनर्जी ने कहा, ‘केंद्र ने चाहे कितनी ही मुश्किलें क्यों न खड़ी की हों, लेकिन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस चुनौती का डटकर सामना किया और ग्रामीण रोजगार के लिए कर्मश्री, आवास के लिए बंग्लार बारी और पेयजल आपूर्ति परियोजनाओं जैसी योजनाओं को राज्य के अपने संसाधनों से चलाया हैI’</p>
<p>उन्होंने कहा, ‘TMC हमेशा आपके चेहरे पर मुस्कान देखना चाहती है, जबकि मोदी आपकी आंखों में आंसू देखना चाहते हैं क्योंकि आपने लगातार चुनावों में बीजेपी को नकार दिया हैI’ उन्होंने लोगों से अपील करते हुए कहा कि आपको भूखा मारने की इस साजिश रचने के लिए आप बंगाल विरोधी पार्टी को मुंहतोड़ जवाब देंI</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
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                <pubDate>Mon, 06 Apr 2026 12:05:29 +0530</pubDate>
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