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                <title> पश्चिम बंगाल - देश रोजाना</title>
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                <description> पश्चिम बंगाल RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>पश्चिम बंगाल में चुनाव के बाद हुई हिंसा,TMCऑफिस पर चला बुलडोज़र</title>
                                    <description><![CDATA[<p>पश्चिम बंगाल में चुनाव के बाद हिंसा की घटनाएं सामने आ रही है बीती मंगलवार रात कोलकाता के न्यू मार्केट में भीड़ ने TMC के पार्टी ऑफिस को बुलडोजर से गिरा दिया तथा उपद्रवियों ने आसपास की दुकानों को भी हानि पहुंचाईI</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.deshrojana.com/state/west-bengal/violence-after-elections-in-west-bengal-bulldozer-fired-on-tmc/article-1015"><img src="https://www.deshrojana.com/media/400/2026-05/west-bengal-violence.jpg" alt=""></a><br /><p>पश्चिम बंगाल में चुनाव के बाद हिंसा की घटनाएं सामने आ रही है बीती मंगलवार रात कोलकाता के न्यू मार्केट में भीड़ ने TMC के पार्टी ऑफिस को बुलडोजर से गिरा दिया तथा उपद्रवियों ने आसपास की दुकानों को भी हानि पहुंचाई</p>
<p>TMC ने घटना का वीडियो शेयर करते हुए X यानि ट्विटर पर लिखा- भाजपा का 'परिवर्तन' आ चुका है और वह बुलडोजर लेकर आया है। राज्य में पिछले 24 घंटों के दौरान अलग-अलग जगहों पर 4 लोगों की हत्या कर दी हई। इनमें भाजपा और TMC के 2-2 कार्यकर्ता हैं।<img src="https://www.deshrojana.com/media/2026-05/west-bengal-violence.jpg" alt="west-bengal-violence" width="1280" height="720"></img></p>
<p>बीजेपी  ने उत्तर 24 परगना के न्यू टाउन और हावड़ा के उदय नारायणपुर में TMC पर अपने दो कार्यकर्ताओं की हत्या का आरोप लगाया तथा TMC ने भी बीजेपी पर आरोप लगाया है कि कोलकाता के बेलेघाटा और बीरभूम के नानूर में उसके दो पार्टी सदस्यों की हत्या कर दी गई।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>चुनाव</category>
                                            <category> पश्चिम बंगाल</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 06 May 2026 15:12:07 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[NELOFER HASHMI]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पश्चिम बंगाल: 15 पोलिंग बूथों में दोबारा मतदान। </title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>पश्चिम बंगाल में 29 अप्रैल को हुए दूसरे चरण के मतदान में ईवीएम मशीन के साथ छेड़छाड़ के आरोपों के बाद आज 2 मई को 15 पोलिंग बूथों में दोबारा मतदान हो रहा है। यहाँ कुछ बूथों पर बीजेपी वाले बटन पर टेप लगाने की शिकायत मिली थी। </strong></p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.deshrojana.com/state/west-bengal/west-bengal-re-polling-in-15-polling-booths/article-967"><img src="https://www.deshrojana.com/media/400/2026-05/screenshot-2026-05-02-112156.png" alt=""></a><br /><p><img src="https://www.deshrojana.com/media/2026-05/screenshot-2026-05-02-112156.png" alt="Screenshot 2026-05-02 112156" width="683" height="333"></img></p>
<p>पश्चिम बंगाल में द्वितीय चरण के मतदान के दौरान EVM के BJP वाले बटन पर टेप लगा कर छेड़छाड़ के आरोपों की जांच के बाद आज दो विधानसभाओं के 15 पोलिंग बूथों में दोबारा मतदान हो रहा है। 29 अप्रैल को हुए विधानसभा चुनावों के दूसरे चरण की वोटिंग के दौरान दक्षिण 24 परगना, मगराहाट पश्चिम के 11 बूथ और डायमंड हार्बर के चार बूथों पर ईवीएम पर बीजेपी के सिंबल के सामने टेप लगाया गया था। हालाँकि दोपहर किसी ने इसका वीडियो बना लिया जिसके बाद काफी हो हल्ला हुआ, खूब बवाल मचा। बीजेपी उम्मीदवार ने चुनाव आयोग को इसकी शिकायत भेजी। जिस पर संज्ञान लेते हुए चुनाव आयोग ने इसकी जांच कराई और दुबारा चुनाव करने के निर्देश दिए।   </p>
<p>निर्वाचन आयोग के आदेश पर आज 2 मई को सुबह 7 बजे से शाम 6 बजे के बीच मतदान हो रहा है। वोटरों को पुनर्मतदान के बारे में जानकारी देने के लिए आयोग ने अधिकारियों को प्रचार करने के निर्देश पहले ही दे दिए थे, ताकि इन समबन्धित पोलिंग बूथों के मतदाताओं को पुनर्मतदान की जानकारी मिल सके। साथ ही केंद्रीय सुरक्षाबल के अधिकारियों ने भी मतदाताओं को निर्भीक होकर पुनर्मतदान में शामिल होने के लिए प्रोत्साहित किया था।  </p>
<p><img src="https://akm-img-a-in.tosshub.com/indiatoday/images/story/202604/the-bjp-alleged-that-the-names-of-its-candidates-were-covered-with-tape-on-evms-303424436-16x9_0.png?VersionId=XwP1qWKbUJXe7iiYxaXYujftw_bM95kS&amp;size=690:388" alt="West Bengal Election: Election Commission gets 77 EVM tampering ..."></img></p>
<p>वहीँ कुछ लोग टीएमसी पके कार्यकर्ताओं पर इल्जाम लगा रहे हैं  कि 29 अप्रैल की रात, TMC के गुंडों ने इन इलाकों के हरेक घर में जाकर लोगों का ऊँगली चेक की। जिस किसी के ऊँगली पर मतदान स्याही दिखी, उसके साथ मार-पिट की गयी,  महिलाओं को यह धमकी दी गयी कि अगर फिर से पोलिंग होती है और वो मतदान करने जाती हैं, तो उनके साथ सामूहिक बलात्कार किया जाएगा।महिलाओं ने निडरता के साथ इन गुंडों का सामूहिक विरोध किया।  पुलिस को इसकी सूचना दी गयी हालाँकि ये शिकायतें कितनी गलत है या सही हैं ये जांच के बाद ही साफ़ हो पायेगा। </p>
<p>कहा ये भी जा रहा है कि TMC के लोगों ने इन इलाकों में सुरक्षाबलों को घुसने से रोकने के अनेक प्रयास किये। सड़कमार्ग पर पेड़ काट कर गिरा दिए थे, जिसे सुरक्षाबलों ने आकर हटाया। बंगाल पुलिस ने धमकी देने वाले कुछ कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार भी किया है। बाकीलोगो को पकड़ने के लिए धर-पकड़ के प्रयास जारी हैं। </p>
<p><img src="https://akm-img-a-in.tosshub.com/aajtak/images/story/202405/66514ff4a3ed4-bengal-254155471-16x9.jpg?size=1200:675" alt="पश्चिम बंगाल में फिर आपस में भिड़े ..."></img></p>
<p>आपको बता दें कि दक्षिण बंगाल के ज्यादातर हिस्सों पर टीएमसी का दबदबा है। इस मजबूत गढ़ को भेदना बीजेपी के लिए आसान नहीं होगा। दुबारा चुनाव कराने पर भी यहाँ बीजेपी अपनी पकड़ बनाए में कितनी कामयाब हो पायेगी फ़िलहाल इस पर कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी। हालाँकि एग्जिट पोल में बीजेपी को जीत मिलने का दवा किया जा रहा है। अब इंतजार है तो 4 मई का जब तस्वीर साफ़ होगी की जीत का सेहरा किसके सर बंधेगा। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>चुनाव</category>
                                            <category> पश्चिम बंगाल</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 02 May 2026 11:55:57 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[ANJU SHARMA]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पश्चिम बंगाल के 15 बूथों पर जारी हुई दोबारा वोटिंग I</title>
                                    <description><![CDATA[<p>पश्चिम बंगाल में डायमंड हार्बर के चार और मगरहाट पश्चिम के 11 बूथों पर शनिवार सुबह 7 बजे से दोबारा मतदान जारी हो चुका है। बता दे कि वोटिंग शाम 6 बजे तक होगी। </p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.deshrojana.com/state/west-bengal/re-voting-continues-in-15-booths-of-west-bengal/article-965"><img src="https://www.deshrojana.com/media/400/2026-05/chunav.jpg" alt=""></a><br /><p>पश्चिम बंगाल में डायमंड हार्बर के चार और मगरहाट पश्चिम के 11 बूथों पर शनिवार सुबह 7 बजे से दोबारा मतदान जारी हो चुका है। बता दे कि वोटिंग शाम 6 बजे तक होगी। <img src="https://www.deshrojana.com/media/2026-05/chunav.jpg" alt="chunav" width="2119" height="1415"></img><br />सुबह 9 बजे तक मगरहाट में 16.68%, डायमंड हार्बर में 15.83% वोटिंग हुई है। दरअसल, 29 अप्रैल को इन बूथों पर दूसरे फेज की वोटिंग के दौरान EVM से छेड़छाड़ और झड़प की शिकायत मिली थी। इसके चलते दोबारा वोटिंग का निर्णय लिया गया। ये सभी बूथ दक्षिण 24 परगना जिले में आते हैं।</p>
<p>वहीं, TMC ने कोलकाता खुदीराम अनुशीलन केंद्र के रिटर्निंग ऑफिसर के खिलाफ शिकायत दर्ज कराते हुए पार्टी ने दावा<br /> किया है कि पोस्टल बैलेट कवर से छेड़छाड़ हुई है।</p>
<p>पश्चिम बंगाल की सभी 294 सीटों पर दर्ज  92.84% वोटिंग हुई। 23 अप्रैल को पहले  फेज की 152 सीटों पर 93.19% मतदान हुआ था। 29 अप्रैल को दूसरे फेज की 142 सीटों पर 92.48% वोट पड़े। आपको बता दें कि वोटिंग का रिजल्ट 4 मई को आएगा I</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>चुनाव</category>
                                            <category> पश्चिम बंगाल</category>
                                    

                <link>https://www.deshrojana.com/state/west-bengal/re-voting-continues-in-15-booths-of-west-bengal/article-965</link>
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                <pubDate>Sat, 02 May 2026 11:38:36 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[NELOFER HASHMI]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पश्चिम बंगाल के अंतिम फेस के चुनाम में आज 142 सीटों पर होगा मतदान,  क्या TMC के इस अभेद्य किला को ध्वस्त कर पाएगी BJP . </title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>बंगाल विधानसभा चुनाव में आज दूसरे और अंतिम चरण की वोटिंग है। इस चरण में पश्चिम बंगाल की कुल 294 सीटों में 142 सीटों पर इस चरण में वोट डाले जाएंगे। अंतिम चरण सिर्फ चुनाव नहीं, बल्कि ‘गढ़ बनाम चुनौती’ की सीधी लड़ाई बन चुका है। बंगाल की राजनीति में लंबे समय से यह धारणा रही है कि सत्ता का रास्ता दक्षिणी जिलों के घनी आबादी वाले मैदानी इलाकों से होकर गुजरता है। </strong></p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.deshrojana.com/state/west-bengal/voting-will-be-held-on-142-seats-today-in-the/article-921"><img src="https://www.deshrojana.com/media/400/2026-04/murshidabad-voter-queue-pti.jpg" alt=""></a><br /><p><img src="https://www.deshrojana.com/media/2026-04/murshidabad-voter-queue-pti.jpg" alt="murshidabad-voter-queue-PTI" width="1200" height="675"></img></p>
<p>पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में आज दूसरे और अंतिम चरण की वोटिंग है। इस चरण में पश्चिम बंगाल की कुल 294 सीटों में 142 सीटों पर इस चरण में वोट डाले जाएंगे। अंतिम चरण सिर्फ चुनाव नहीं, बल्कि ‘गढ़ बनाम चुनौती’ की सीधी लड़ाई बन चुका है। बंगाल की राजनीति में लंबे समय से यह धारणा रही है कि सत्ता का रास्ता दक्षिणी जिलों के घनी आबादी वाले मैदानी इलाकों से होकर गुजरता है। </p>
<p>पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव 2026 अब अपने सबसे निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुका है। पहले चरण में रिकॉर्ड मतदान के बाद आज दूसरे चरण में जिन 142 सीटों पर वोटिंग होनी है, वही असल मायनों में सत्ता की दिशा तय कर सकती हैं। खास बात यह है कि ये सभी सीटें दक्षिण बंगाल के उन इलाकों में हैं, जिन्हें तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) का अभेद्य किला माना जाता रहा है। वहीं भाजपा इस किला को भेदने में पूरी ताकत झोंक चुकी है। अब जनता तय करेगी कि आज का चुनाव किस पार्टी के लिए गेम चेंजर होता है। यहां बता दें कि 2021 के विधानसभा चुनाव में टीएमसी ने इन 142 सीटों में से 123 पर जीत दर्ज की थी, जबकि भाजपा को 18 सीटें ही मिली थीं और आईएसएफ को 1 सीट मिली थी।</p>
<p>पश्चिम बंगाल की दशा और दिशा तय करने में यह अंतिम चरण सिर्फ चुनाव नहीं, बल्कि ‘गढ़ बनाम चुनौती’ की सीधी लड़ाई बन छुअक है। बंगाल की राजनीति में लंबे समय से यह धारणा रही है कि सत्ता का रास्ता दक्षिणी जिलों के घनी आबादी वाले मैदानी इलाकों से होकर गुजरता है। उत्तर 24 परगना और दक्षिण 24 परगना जैसे बड़े जिले इस समीकरण के केंद्र में हैं। 33 सीटों वाला उत्तर 24 परगना और 31 सीटों वाला दक्षिण 24 परगना, कोलकाता (11 सीट) और हावड़ा (16 सीट) मिलकर कुल 91 सीटों का प्रतिनिधित्व करते हैं जो विधानसभा की कुल 294 सीटों का लगभग एक तिहाई हिस्सा को छूता है। यही वजह है कि राजनीतिक के जानकार इन इलाकों को ‘किंगमेकर’ मानते हैं।</p>
<p><img src="https://www.deshrojana.com/media/2026-04/437893.jpg" alt="437893" width="3000" height="2000"></img></p>
<p>आपको बता दें कि पहले चरण में 152 सीटों पर हुए रिकॉर्ड मतदान हुआ था।  जिसमे महिलाओं ने बढ़ चढ़ कर हिस्सा लिया था। करीब 93.% मतदान के बाद भाजपा ने दावा किया कि जनता ने बदलाव के पक्ष में वोट किया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने यहां तक कहा कि उनकी पार्टी पहले चरण में 110 से ज्यादा सीटें जीत सकती है। दूसरे चरण की ये 142 सीटें चुनाव का टर्निंग पॉइंट मानी जा रही हैं। अगर टीएमसी अपने गढ़ को बचाने में सफल रहती है, तो भाजपा के लिए सत्ता तक पहुंचना बेहद मुश्किल हो जाएगा। वहीं तृणमूल के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने कहा है कि पहले फेज में तृणमूल 152 सीटों में सेंचुरी पार कर चुकी है। दूसरे चरण में डबल सेंचुरी पार करेंगे।</p>
<p>आज 29 अप्रैल को होने वाला मतदान ही सत्ता का रास्ता तय करता हुआ दिखेगा। आज जिसके पक्ष में मतदान होंगे, उसे ही सत्ता का साथ मिलेगा, वरना निराशा ही हाथ लगेगी। अब किसे मिलेगी सत्ता और कौन रह जायेगा सस्ता इस सवाल का जवाब तो 4 मई को मिलेगा </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                            <category> पश्चिम बंगाल</category>
                                    

                <link>https://www.deshrojana.com/state/west-bengal/voting-will-be-held-on-142-seats-today-in-the/article-921</link>
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                <pubDate>Wed, 29 Apr 2026 12:03:14 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[ANJU SHARMA]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>लोकतंत्र के उत्सव में 'अंधेरा', सोनागाछी की 150 यौनकर्मी वोट से वंचित, प्रशासन के वादे निकले खोखले।</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>कोलकाता के प्रसिद्ध रेडलाइट एरिया में 150 यौनकर्मी हुयीं मतदान से वंचित।  CEO मनोज अग्रवाल का आश्वासन भी हो गया नाकाम। कानूनी सहायता लेने को मजबूर हुयीं यौनकर्मी। </strong></p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.deshrojana.com/state/west-bengal/will-the-water-crisis-deepen-due-to-ethanol-will-people/article-920"><img src="https://www.deshrojana.com/media/400/2026-04/an-sir-camp-at-sonagachi-in-north-kolkata-tuesday.-partha-paul.jpg" alt=""></a><br /><p><img src="https://www.deshrojana.com/media/2026-04/an-sir-camp-at-sonagachi-in-north-kolkata-tuesday.-partha-paul.jpg" alt="An-SIR-camp-at-Sonagachi-in-North-Kolkata-Tuesday.-Partha-Paul" width="1600" height="900"></img></p>
<p> </p>
<p>कोलकाता के प्रसिद्ध रेडलाइट एरिया सोनागाछी की लगभग 150 यौनकर्मी अप्रैल 2026 में हुए चुनावों में मतदान करने से वंचित रह गईं। यह स्थिति तब उत्पन्न हुई जब उनके नाम मतदाता सूची से काट दिए गए, जिससे उन्हें अपने संवैधानिक अधिकार का प्रयोग करने का मौका नहीं मिला। यह घटना तब और भी गंभीर हो जाती है जब मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) मनोज अग्रवाल ने खुद इन महिलाओं को आश्वासन दिया था कि उन्हें वोट देने से कोई नहीं रोक पाएगा।</p>
<p>दरसल कुछ समय पहले चुनाव आयोग ने सोनागाछी में एक विशेष शिविर का आयोजन किया था। वहां CEO मनोज अग्रवाल ने वादा किया था, "यदि किसी के पास माता-पिता के नाम का विवरण नहीं भी है, लेकिन वह वैध नागरिक है, तो आयोग अपनी 'विशेष शक्तियों' का उपयोग कर उनका नाम मतदाता सूची में शामिल करेगा।" लेकिन, जब अंतिम सूची सामने आई, तो लगभग 150 महिलाओं के नाम गायब थे। दुर्बार महिला समन्वय समिति की सचिव विशाखा लश्कर के अनुसार, कई महिलाओं को सुनवाई के लिए बुलाया गया था और दस्तावेज जमा करने के बावजूद उनका नाम शामिल नहीं किया गया।</p>
<p><img src="https://www.deshrojana.com/media/2026-04/img_5590_11zon.jpg" alt="IMG_5590_11zon" width="1200" height="675"></img></p>
<p>आपको बता दें कि अधिकांश यौनकर्मियों के नाम 'विशेष गहन संशोधन' (SIR) प्रक्रिया के दौरान हटा दिए गए क्योंकि वे अपने माता-पिता के दस्तावेज या पुराने रिकॉर्ड (जैसे 2002 के दस्तावेज) पेश करने में असमर्थ थीं। इनमें से कई महिलाएं दशकों पहले अपने परिवारों को छोड़कर आई थीं और उनके पास पिछले निवास का कोई प्रमाण नहीं था।</p>
<p>अब यौनकर्मियों के बीच अब इस बात का डर है कि बिना पहचान पत्र और मताधिकार के उनका भविष्य असुरक्षित हो जाएगा। विशाखा लश्कर ने बताया कि कई महिलाओं के बच्चों के नाम तो सूची में हैं, लेकिन मां का नाम गायब है। सिर्फ सोनागाछी ही नहीं, बल्कि कालीघाट और खिदिरपुर जैसे इलाकों में रहने वाली यौनकर्मियों के तरफ से भी इसी तरह की खबरें आ रही हैं। 'आमरा पदातिक' संगठन की महाश्वेता मुखर्जी ने इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि अब डिस्ट्रिक्ट लीगल सर्विस अथॉरिटी के माध्यम से भविष्य में दोबारा अधिकार पाने की कोशिश की जा रही है।</p>
<p>रिपोर्ट्स के अनुसार, केवल सोनागाछी ही नहीं, बल्कि कालीघाट और बोबाजार (हर काटा गली) जैसे क्षेत्रों में भी बड़ी संख्या में यौनकर्मियों के नाम मतदाता सूची से हटाए गए या 'निर्णयाधीन' रखे गए हैं। वर्तमान में, ये महिलाएं अपनी नागरिकता और लोकतांत्रिक पहचान को बचाने के लिए न्यायिक संघर्ष की तैयारी कर रही हैं। </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                            <category> पश्चिम बंगाल</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 29 Apr 2026 11:37:49 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[ANJU SHARMA]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बंगाल इलेक्शन से पहले टीएमसी नेताओं पर ईडी की छापेमारी को ममता ने बताया बीजेपी की साजिश !</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>पश्चिम बंगाल में चुनाव से पहले सियासत गरमा गई है। 20 अप्रैल को प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने कोलकाता में बड़ी कार्रवाई करते हुए पुलिस के DCP शांतनु सिन्हा बिस्वास और कारोबारी जॉय कामदार के ठिकानों पर छापेमारी की है। यह कार्रवाई मनी लॉन्ड्रिंग और ‘सोना पप्पू सिंडिकेट’ केस से जुड़ी बताई जा रही है, जिसमें करोड़ों की नकदी, सोना और हथियार बरामद होने का दवा भी किया हैं। शांतनु सिन्हा को ममता बनर्जी का करीबी माना जाता है। चुनाव से ठीक पहले लगातार हो रही ED और आयकर विभाग की कार्रवाइयों ने TMC बनाम BJP की लड़ाई को और तीखा बना दिया है। अब क्या ये भ्रष्टाचार पर कार्रवाई का मामला है … या चुनावी सियासत? इसे समझते हैं। लेकिन पहले एक नजर 2021 के चुनावों के दौरान और उसके बाद हुई जांच और छापे मारी पर एक नजर। </strong></p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.deshrojana.com/state/west-bengal/mamata-calls-ed-raid-on-tmc-leaders-a-conspiracy-by/article-762"><img src="https://www.deshrojana.com/media/400/2026-04/screenshot-2026-04-27-140521.png" alt=""></a><br /><p><img src="https://www.deshrojana.com/media/2026-04/screenshot-2026-04-27-140521.png" alt="Screenshot 2026-04-27 140521" width="943" height="642"></img></p>
<p>2021 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दौरान और बाद में केंद्रीय जांच एजेंसियों (ED, CBI) ने टीएमसी के कई प्रमुख नेताओं, मंत्रियों और सहयोगियों पर शिकंजा कसा, जिसमें कोयला घोटाला, मवेशी तस्करी और नारद स्टिंग ऑपरेशन जैसे हाई-प्रोफाइल मामले शामिल थे। चुनावों से ठीक पहले और बाद में हुई।  जैसे -विधानसभा चुनाव के तुरंत बाद, मई 2021 में, सीबीआई ने टीएमसी के कद्दावर नेताओं—फिरहाद हकीम, सुब्रत मुखर्जी, मदन मित्रा और पूर्व टीएमसी नेता शोभन चटर्जी को नारद स्टिंग ऑपरेशन मामले में गिरफ्तार किया था। जिसके विरोध में  पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी खुद कोलकाता में सीबीआई के निजाम पैलेस कार्यालय पहुंच गई थीं और घंटों धरने पर बैठी थीं, जिससे केंद्र और राज्य के बीच तनाव चरम पर पहुंच गया था।</p>
<p>अवैध कोयला खनन और मवेशी तस्करी मामलों में मनी लॉन्ड्रिंग की जांच। इससे जुड़े लिंक टीएमसी नेताओं और उनके सहयोगियों से भी तलाशे गए थे, जिसमें अभिषेक बनर्जी से भी पूछताछ की गई थी। चुनाव के बाद हुई हिंसा के मामलों में भी कई स्थानीय टीएमसी नेताओं को सीबीआई द्वारा नोटिस और छापे का सामना करना पड़ा था। टीएमसी ने इन कार्रवाइयों को "राजनीतिक प्रतिशोध" बताया और आरोप लगाया कि केंद्र सरकार बीजेपी के इशारे पर एजेंसियों का इस्तेमाल कर रही है। वहीं बीजेपी ने इसे भ्रष्टाचार के खिलाफ 'जीरो टॉलरेंस' नीति बताया था।</p>
<p><img src="https://www.livemint.com/lm-img/img/2025/10/16/1600x900/Anil-Ambani--4_1759894355323_1759894366491_1760592134344.jpg" alt="ED conducts raids in multiple West Bengal locations, including ..."></img></p>
<p>अब अप्रैल 2026 में 23 और 29 तारिख को बंगाल में इलेक्शन है उससे पहले । सरकारी जांच एजेंसिया फिर से सक्रिय हो गई हैं। जिसमें टीएमसी के कई नेता कार्यकर्ता और बिज़नेस में लपेटे में आ गए हैं। ममता ने आरोप लगाया कि चुनाव के दौरान छापेमारी और मनी लॉन्ड्रिन जांच राजनितिक दुर्भावना से प्रेरित है। लेकिन बंगाल की जनता बीजेपी को सबक सिखाएगी </p>
<p>ममता बनर्जी ने इसे अपनी पार्टी के खिलाफ साजिश बताया है। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी को हर दिन ईडी की छापेमारी का सामना करना पड़ रहा है। रेड के जरिये उनकी पार्टी को डराया जा रहा है। कुछ राजनितिक विशेषज्ञ इसे बिहार इलेक्शन से जोड़ रहे है। जहाँ प्रशांत किशोर आये दिन बीजेपी के नेताओं और नितीश सरकार पर कर्रेप्शन के आरोप लगा रहे थे। लेकिन वहां कोई ईडी की करवाई देखने को नहीं मिली लेकिन, बंगाल में आये दिन नेताओं और कार्यकर्ताओं पर ईडी की कार्रवाई होरही है।  विशेषज्ञों का मानना है की इसके पीछे चुनाव आयोग और केंद्र की सत्ता जिम्मेदार है। इसी का विरोध ममता अपने मंचो बार-बार कर रही हैं। </p>
<p>एक खबर ये भी है कि चुनाव में बाधा डालने वालों की एक लम्बी चौड़ी लिस्ट बनाई गई है, जिसमें तृणमूल के नेता, कार्यकर्त्ता और विधायकों के नाम शामिल है। चुनाव आयोग ने टीएमसी के 9 नेताओं की सूचि बनाई है जिन्हे ट्रबल मेकर बताया गया है। जो सूचि बनाई गई है उसमे करीब 100 लोगों के नाम शामिल हैं। 20 अप्रैल को एक रैली के दौरान ममता ने कहा कि मेरे कई कार्यकर्ताओं को गिरफ्ताज किया जा सकता है। उन्होंने बीजेपी के एक नेता पर करप्शन का आरोप लगाते हुए कहा कि ये उपद्रवियों की पार्टी है। </p>
<p><img src="https://media.newindianexpress.com/newindianexpress/2024-09-13/dv7q9gq9/ANI_20240913084754.jpg?w=1200&amp;h=900&amp;auto=format%2Ccompress&amp;fit=max&amp;enlarge=true" alt="ED raids multiple locations in West Bengal in connection with coal mining  case"></img></p>
<p>हालाँकि चुनाव के दौरान सुरक्षा में तैनात कर्मियों की मीटिंग की तस्वीरें जारी कर टीएमसी नेताओं ने आरोप लगाया है कि ये मीटिंग केंद्र सरकार द्वारा चुनाव को प्रभावित करने के लिए जा रही है। उनका कहना है जितनी फाॅर्स यहाँ लगाई गई है उससे आधी फाॅर्स ही काफी थी। टीएमसी नेता महुआ मोइत्रा ने ट्वीट किया कि बीजेपी के सारे पालतू आईपीएस यहाँ जमा है ताकि वे चुनाव में हेराफेरी कर सकें। हालाँकि हम इस बाद से सहमत नहीं क्योंकि चुनाव के समय फाॅर्स की इस तरह मीटिंग्स होती ही हैं। सेना को खास निर्देश दिए जाते हैं ताकि कोई अप्रिय घटना ना घटे।</p>
<p> वैसे आपको बता दे कि यहाँ SIR में जिस क्षेत्र से ज़्यादा लोगों के नाम कटे है उन क्षेत्रों पर सेना की ज्यादा तैनाती की गई है। चुनाव आयोग ने भी कुछ चुनाव बूथों को अति संवेदनशील घोषित किया है। क्योंकि वहां हर बूथ पर करीब 100 से 150 लोगों के नाम काटे गए हैं। पुलिस अधिकारियों का भी कहना कि जिनके नाम कटे हैं वो चुनाव के दिन हंगामा कर सकते हैं। </p>
<p>पश्चिम बंगाल में विधानसभा की 294 सीटें है। 2021 में टीएमसी को 215 सीटें मिली जबकि बीजेपी को 77 सीटें मिली।  जबकि 2024 के लोकसभा चुनाव में बंगाल 42 लोकसभा सीटों में से टीएमसी को 29, बीजेपी को 12 तो कांग्रेस को एक सीट पर जीत मिली थी। अब 2026 में 23 और 29 अप्रैल को यहाँ चुनाव होने जिसका रिजल्ट 4 मई को घोषित होगा। अब देखना ये की पश्चिम बंगाल में चल रही राजनितिक उठा-पटक और आरोप-प्रत्यारोप और आये दिन चल रही छापेमारी चुनाव को किस और ले जाएगी। ममता भरेंगी हुंकार या बीजेपी का पलड़ा होगा भारी। </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>चुनाव</category>
                                            <category> पश्चिम बंगाल</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 22 Apr 2026 11:32:23 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[ANJU SHARMA]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पश्चिम बंगाल- साधन संपन्न और खुशहाल प्रदेश कैसे बना पिछड़ेपन का शिकार ?</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>कभी देश आर्थिक राजधानी हुआ करता था पश्चिम बंगाल। प्राकृतिक रूप से साधन संपन्न और बहुत ही खुशहाल प्रदेश, आज अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है। इतने खुशहाल प्रदेश को अर्श से फर्श पर लाने में कौन से कारण जिम्मेदार हैं ? चलिए आज इसी का विश्लेषण करते हैं। </strong></p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.deshrojana.com/state/west-bengal/west-bengal-%E2%80%93-how-a-resourceful-and-prosperous-state-became/article-716"><img src="https://www.deshrojana.com/media/400/2026-04/360_f_105094996_ncnrhu61to1dupx92wftyzcxb1kzawae.jpg" alt=""></a><br /><p><img src="https://www.deshrojana.com/media/2026-04/360_f_105094996_ncnrhu61to1dupx92wftyzcxb1kzawae.jpg" alt="360_F_105094996_nCNRHU61To1DupX92wFTYzcxb1KZawAE" width="948" height="632"></img></p>
<p>पश्चिम बंगाल में इलेक्शन नजदीक हैं। चारों और चुनावी भाषण और रैलियों का दौर चल रहा है। ऐसे में बंगाल की कमजोर कड़ी की सब बखिया उधेड़ रहे हैं। यहां की गरीबी, रोजगार की कमी, हिन्दू मुस्लिम विवाद, दंगे और पलायन करते लोग। कहने का मतलब है कि बंगाल गरीबी, भुखमरी और अनेक परशानियों से जूझ रहा है। प्रदेश में अशांति का माहौल है। </p>
<p>अब सवाल ये उठता है कि, क्या बंगाल शुरू ऐसा ही था ? जवाब है नहीं, क्योकि पश्चिम बंगाल प्राकृतिक संसाधनों से भरपूर है। जैसे-उपजाऊ जलोढ़ मिट्टी, विस्तृत वन क्षेत्र (सुंदरबन), गंगा-भागीरथी नदी प्रणाली, और प्रचुर मात्रा में कोयला भंडार से समृद्ध है। राज्य में चावल, जूट, चाय और आलू की प्रमुख खेती होती है। प्रमुख खनिजों में कोयला, देश का करीब आधा हिस्सा यही से आता है, अग्नि-मिट्टी यानि सिरेमिक और चीनी मिट्टी शामिल हैं। ये सभी संसाधन किसी भी क्षेत्र को आर्थिक रूप से संपन्न बनाने के लिए पर्याप्त हैं। लेकिन आज बंगाल की हालत बद से बदतर हो गई है। </p>
<p>मुग़ल काल से लेकर अंग्रेजी सियासत तक पूरे देश पर यही से अर्तव्यवस्था का संचालन होता था। क्योंकि ये देश की आर्थिक राजधानी हुआ करती थी। इस दौर में बंगाल भारत का सबसे</p>
<p><img style="aspect-ratio:auto;" src="https://www.deshrojana.com/media/2026-04/screenshot-2026-04-20-150121.png" alt="Screenshot 2026-04-20 150121" width="972" height="623"></img></p>
<p> संपन्न हिस्सा हुआ करता था। अब एक बड़ा सवाल कि, अगर इतना संपन्न राज्य था बंगाल तो आज यहाँ के लोग देश भर में रोजगार की तलाश में मारे-मारे क्यों फिर रहे हैं। इसकी बदहाली का कारण क्या ? आखिर ऐसा क्या हुआ कि 'भारत की आर्थिक राजधानी' कहलाने वाला यह प्रांत धीरे-धीरे पीछे छूटता गया? तो चलिए इतिहास के कुछ पन्ने पलटते हैं और जानते है कि बंगाल दशा और दिशा बिगाड़ने में कौन से कारण जिम्मेदार है। ।</p>
<p> दरअसल इसके पीछे कोई एक कारण नहीं, बल्कि घटनाओं का एक ऐसा सिलसिला है, जिसने बंगाल की भूगोल और तकदीर दोनों बदल दी। 20वीं सदी की शुरुआत तक कलकत्ता जिसे अब कोलकाता के नाम से जाना जाता है ये न केवल बंगाल की, बल्कि पूरे भारत की राजधानी हुआ करती थी। साल 1911 में अंग्रेजो ने कोलकाता को छोड़ देश की राजधानी दिल्ली को बनाया। यह सिर्फ दफ्तरों का एक जगह से दूसरी जगह शिफ्ट होना नहीं था। इसने बंगाल की अर्थव्यवस्था को हिला कर रख दिया। किसी देश की राजधानी होना और फिर महज एक राज्य की राजधानी बनकर रह जाना, बहुत बड़ा अंतर पैदा करता है। इस बदलाव से निवेश, सत्ता का केंद्र और अंतरराष्ट्रीय महत्व दिल्ली की ओर झुक गया। यह बंगाल के आर्थिक स्थिति को तोड़ने जैसा था। </p>
<p><img src="https://www.deshrojana.com/media/2026-04/screenshot-2026-04-20-150802.png" alt="Screenshot 2026-04-20 150802" width="1109" height="726"></img></p>
<p>बंगाल के पतन की सबसे बड़ी वजह बना 1947 का बंटवारा। बंगाल दो हिस्सों में बंट गया। जिसका पश्चमी हिस्सा भारत के पास रहा जिसे आज पश्चिम बंगाल के नाम से जाना जाता है जबकि पूर्वी हिस्सा पाकिस्तान के पास चला गया जो 1971 में बांग्ला देश बना। ये सिर्फ एक बंटवारा नहीं था बल्कि बंगाल के माथे पर खींची गई बदकिस्मती की एक स्याह लकीर थी। एक खुशहाल और संपन्न अर्थव्यवस्था का कत्ल था। </p>
<p>बंगाल जूट का सबसे बड़ा केंद्र था। इस बंटवारे ने उसे बर्बाद कर दिया। जूट पैदा करने वाले खेत पूर्वी हिस्से में चले गए, जबकि उसे प्रोसेस करने वाली मिलें हुगली नदी के किनारे पश्चिम बंगाल में रह गईं। कच्चा माल कहीं और, कारखाना कहीं। इस विसंगति ने बंगाल के औद्योगिक ढांचे को तोड़ दिया। बंटवारे के बाद मानवीय त्रासदी का ये वो दंश था  जिसे बंगाल आज भी झेल रहा है। </p>
<p><img src="https://www.deshrojana.com/media/2026-04/jute-3m.jpg" alt="jute-3m" width="1500" height="1000"></img></p>
<p>पूर्वी पाकिस्तान बनने से लाखों की संख्या में लोग अपनी जमीन, जायदाद और पुश्तैनी काम छोड़कर इस तरफ आए यानि पश्चिम बंगाल में आ गए। एक बसा-बसाया परिवार जब शरणार्थी बनकर आता है, तो उसे दोबारा शून्य से शुरू करना पड़ता है। जिसमे उसकी कई पीढ़ियां लग जाती हैं बंगाल की सीमित ज़मीन और संसाधनों पर अचानक आबादी का भारी बोझ बढ़ गया। जब रोटी का संकट सामने हो, तो समाज की बौद्धिक और सांस्कृतिक प्रगति रुक जाती है। ऐसा ही कुछ यहाँ भी हुआ। </p>
<p>अभी लोग बंगाल बंटवारे के घावों से उबर भी नहीं पाए थे कि उन्हें एक और बड़ा झटका लगा। 1971 की उथल-पुथल शुरू हो गई। पाकिस्तान और पूर्वी पाकिसतन अलग हो गए। बांग्लादेश मुक्ति संग्राम के दौरान एक बार फिर शरणार्थियों का भारी रेला पश्चिम बंगाल की सीमाओं में दाखिल हुआ। कम क्षेत्रफल में घनी आबादी का दबाव बढ़ने से बंगाल के प्राकृतिक संसाधनों पर जो हक यहाँ के पुराने बाशिंदों का था, उसे अब करोड़ों नए लोगों के साथ साझा करना पड़ा। जो इसे और गर्त में ले गया। बढ़ती आबादी और खाने के लाले पड़ने लगे तो पढ़े-लिखे लोग दूसरे राज्यों की और चले गए और पीछे छूट गए अनस्किलड लोग जिससे बंगाल और बिखर गया।</p>
<p><img src="https://www.deshrojana.com/media/2026-04/screenshot-2026-04-20-145159.png" alt="Screenshot 2026-04-20 145159" width="968" height="470"></img></p>
<p>आप बंगाल का नक्शा देखेंगे तो पाएंगे की ये एक पतला और लम्बा दर्रे जैसा दिखने वाला है।  इसकी भौगोलिक सीमाएँ 4000 किमी से ज्यादा है जो इतनी पेचीदा हैं कि कई जगह डिफाइन करना भी मुश्किल कि कहाँ भारतीय सीमा रेखा है और कहाँ बांग्लादेश। भारत-बांग्लादेश सीमा पर '150 गज' का क्षेत्र है जहाँ अंतरराष्ट्रीय नियम लागू है, उस सीमावर्ती इलाकों में एक ऐसी आबादी रहती है जो न इधर की है और ना ही उधर की।  </p>
<p>इसके अलावा रोजगार की तलाश में नेपाल और भूटान से लोग पश्चिम बंगाल चले आते हैं। बांग्लादेशी और म्यांमार से रोहिंग्या भी भारत में बसने की चाह लेकर अक्सर यहाँ घुसपैठ करते रहते हैं। विशेषज्ञ बताते है कि इन देशों से अंतरराष्ट्रीय प्रवासन का भार पश्चिम बंगाल के सीमावर्ती जिलों पर पड़ता है। आज भी तिब्बत से लेकर बांग्लादेश तक की सीमाओं से घिरा यह राज्य हमेशा से एक संवेदनशील 'बफर ज़ोन' बना रहा, जिसका असर इसके स्थिर आर्थिक विकास पर पड़ रहा है। </p>
<p>विशेषज्ञ मानते हैं कि वाम मोर्चा यानि लेफ्ट फ्रंट का लंबा शासन और 'उद्यम-विरोधी' नीतियां भी इसका बड़ा कारण रही हैं। क्योंकि वामपंथी सरकार पूंजीवाद, लाइसेंस राज और उद्योगों के प्रति कड़े रवैया रखती थी। वामपंथी शासन के दौरान ट्रेड यूनियनों की भूमिका बहुत आक्रामक थी। बार-बार होने वाली हड़तालें, तालाबंदी और काम न करने की संस्कृति के कारण उद्योगों को भारी नुकसान हुआ। जिससे कई उद्योगपति बंगाल छोड़कर गुजरात, महाराष्ट्र और तमिलनाडु जैसे राज्यों में चले गए।</p>
<p><img src="https://www.deshrojana.com/media/2026-04/image-3.png" alt="image-3" width="929" height="634"></img></p>
<p>1952 में फ्रेट इक्वलाइजेशन नीति लागू की गई जिससे खनिज संपन्न प्रदेश होने के बाद भी बंगाल इसका लाभ नहीं ले पाया।  क्योंकि पूरे देश में कोयला, लौह अयस्क समान मूल्य पर उपलब्ध कराया गया, जिससे बंगाल का जो भौगोलिक लाभ था, वह समाप्त हो गया। इसके अलावा नक्सलवाद ने भी बंगाल को पीछे धकेलने का काम किया। </p>
<p>दिल्ली में बैठकर बनाई गई नीतियां अक्सर बंगाल की इन जमीनी हकीकतों ठीक से समझ नहीं पाई। बंगाल का पीछे छूटना सिर्फ गलत नीतियों का नतीजा नहीं था, बल्कि इतिहास की क्रूर मारों का परिणाम भी है। आप ही सोचिये जिन्होंने बार-बार विस्थापन को झेला, सीमावर्ती और राजनितिक उठा-पटक ने बंगाल को खूब पटक पटक कर धोया। अनिश्चितता का दौर देखा।  उसके लिए अपने अस्तित्व को बचाना दूर की कौड़ी बन गई थी। उसे वापस पाना बहुत कठिन है यहाँ पहचान और अस्तित्व की लड़ाई आज भी जारी है।  </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category> पश्चिम बंगाल</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 20 Apr 2026 15:22:15 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[ANJU SHARMA]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>यूपी हरियाणा के बाद अब पश्चिम बंगाल में मजदूरों की आवाज़ बुलंद। </title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>पश्चिम बंगाल में 2026 के विधानसभा चुनावों को लेकर प्रचार और प्रसार का दौर चल रहा है ऐसे में, उत्तर बंगाल के चाय बागान मजदूरों ने न्यूनतम मजदूरी, भूमि अधिकार (पट्टा) और अनेक बुनियादी सुविधाओं की मांग को लेकर आवाज़ उठाई है। ये आवाज़ ऐसे वक्त पर उठाई जा रही जब चुनाव बहुत नज़दीक हैं। तो क्या इसका असर चुनाव परिणाम पर भी पड़ेगा ?</strong></p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.deshrojana.com/state/west-bengal/after-up-haryana-now-the-voice-of-workers-is-loud/article-659"><img src="https://www.deshrojana.com/media/400/2026-04/16770.jpg" alt=""></a><br /><p><img src="https://www.deshrojana.com/media/2026-04/16770.jpg" alt="Bengal Tea Garden Worker" width="900" height="600"></img></p>
<p>अभी यूपी और हरियाणा के मजदूरों का हंगामा ठीक से शांत भी नहीं हुआ था कि, पश्चिम बंगाल में भी चाय मजदूरों ने अपनी मांगों को रखते हुए आवाज उठाई है। दरअसल, उत्तर बंगाल में बहुत सारे चाय के बागान हैं। जिसमें हज़ारों की संख्या में मजदूर काम करते हैं। इन्ही की मेहनत की बदौलत दुनियाभर में चाय पहुँचती है। लेकिन दुख की बात है कि ये मजदूर आज भी बुनियादी सुविधाओं के जूझ रहे हैं। दिनभर चाय के बागानों में काम करने वाले खुद अच्छी चाय पीने से भी वंचित रहते हैं। कई मजदूर आज भी लकड़ी के चूल्हे पर खाना बनाते हैं। अच्छी स्वस्थ्य सुविधाओं, साफ़ पेयजल और बच्चों के लिए अच्छी शिक्षा से वंचित हैं।  </p>
<p><img src="https://www.deshrojana.com/media/2026-04/897398-1000041701.webp" alt="897398-1000041701" width="848" height="478"></img></p>
<p><strong>पीएफ और ग्रेच्युटी में अनियमितता</strong><br />मजदूरों ने शिकायत की है कि उनके वेतन से भविष्य निधि यानि पीएफ का पैसा काटा जा रहा है, लेकिन उसे जमा नहीं किया जा रहा है। साथ ही, सेवानिवृत्त मजदूरों को ग्रेच्युटी मिलने में भी देरी हो रही है। इसके अलावा दार्जिलिंग और डुआर्स क्षेत्र में कई बागानों के बंद होने से हजारों मजदूर बेरोजगार हो गए हैं, जिससे वे भुखमरी और पलायन को मजबूर हैं।</p>
<p><strong>कम मजदूरी और काम नियमित न मिलना </strong><br />इन मजदूरों की सबसे बड़ी समस्या है इन्हे मजदूरी कम मिलती है। ज्यादातर मजदूरों को रोज़ करीब 250 रुपये मिलते हैं, जो उनके लिए पर्याप्त नहीं है। मजदूर चाहते हैं कि उनकी मजदूरी कम से कम 350 रुपये हो जाए ताकि वे अपने परिवार का सही से पालन पोषण कर सकें। दूसरा इन्हे काम भी नियमित नहीं मिलता है। उन्हें कभी काम मिलता है तो कभी नहीं, जिससे उन्हें भविष्य की चिंता बनी रहती है। </p>
<p><strong>स्वास्थ्य और चिकित्सा को लेकर परशानी </strong><br />अक्सर बीमार होने पर मजदूरों के पास अच्छे अस्पताल और इलाज की सुविधा भी कम है। इसके लिए वे अक्सर चाय बागान के छोटे डॉक्टर या सरकारी अस्पताल पर ही निर्भर रहते हैं। ऐसे में सही समय पर सही इलाज न मिल पाने के कारण कई बार गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ता है। </p>
<p><strong>महिलाओं की सरकार से मांग </strong><br />चाय बागानों में काम करने वालो मजदूर में 70 से 80 प्रतिशत तक महिलाएं होती है। दिनभर मेहनत करने के बाद भी ये उतना नहीं कमा पाती कि अपनी ज़रूरतों को ठीक से पूरा कर सकें। इसलिए ज़्यादातर महिलाएं चाहती हैं कि उन्हें सिर्फ पैसे ही नहीं, बल्कि सिलाई मशीन या कोई और काम भी दिया जाए ताकी वे अपनी जरूरतों को ठीक से पूरा करे सकें। </p>
<p><img src="https://www.deshrojana.com/media/2026-04/2.jpg" alt="2" width="1000" height="584"></img></p>
<p><strong>सरकारी योजनाओं का मिले लाभ </strong><br />राज्य में मजदूरों के लिए अनेक सरकारी योजनाएं चलाई जा रही हैं। इसी के तहत लक्ष्मी भंडार का लाभ मिलता है, जिससे उन्हें हर महीने कुछ पैसे मिलते हैं।  लेकिन कई महिलाएं मानती हैं कि पैसे से ज्यादा जरूरी रोजगार के अवसर मिलना है। इसलिए उन्हें काम का सही अवसर मिलना चाहिए ताकि, वे अपने जीवन को बेहतर बना सकें। </p>
<p><strong>चुनाव पर पड़ सकता है असर </strong><br />उत्तर बंगाल की लगभग 20 से 22 सीटों पर चाय बागान मजदूरों का दबदबा है। खासकर जलपाईगुड़ी, अलीपुरद्वार और दार्जिलिंग में इनकी संख्या ज्यादा है. इसलिए चुनाव के समय सभी राजनीतिक पार्टियां इन मजदूरों को अपने पक्ष में करने की कोशिश करती हैं। मजदूरों का वोट जिस पार्टी को मिलेगा, वही पार्टी जीत सकती है। इसलिए इस बार चुनाव में ये मजदूर भी बहुत अहम भूमिका निभाने वाले हैं। उनका फैसला ही तय करेगा कि किसकी सरकार बनेगी। </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>हरियाणा</category>
                                            <category>खेती-किसानी</category>
                                            <category> पश्चिम बंगाल</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 17 Apr 2026 13:53:15 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[ANJU SHARMA]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>West Bengal Elections 2026: ‘बंगाल के लोगों को भूखा मारना चाहती है मोदी सरकार’, अभिषेक बनर्जी ने केंद्र पर निशाना साधा</title>
                                    <description><![CDATA[<p>पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पूर्व तृणमूल कांग्रेस (TMC) के महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी ने रविवार ,5 अप्रैल, 2026 को केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार पर कई आरोप लगाते हुए कहा कि विधानसभा चुनावों में जीतकर TMC बार-बार पश्चिम बंगाल की सत्ता में आई है, इसलिए केंद्र सरकार ने यहां के लोगों को भूखा मारने के लिए पिछले पांच सालों से राज्य का बकाया रोक रखा हैI</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.deshrojana.com/state/west-bengal/west-bengal-elections-2026-modi-government-wants-to-starve-the/article-487"><img src="https://www.deshrojana.com/media/400/2026-04/abhishek.jpg" alt=""></a><br /><p>पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पूर्व तृणमूल कांग्रेस (TMC) के महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी ने रविवार ,5 अप्रैल, 2026 को केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार पर कई आरोप लगाते हुए कहा कि विधानसभा चुनावों में जीतकर TMC बार-बार पश्चिम बंगाल की सत्ता में आई है, इसलिए केंद्र सरकार ने यहां के लोगों को भूखा मारने के लिए पिछले पांच सालों से राज्य का बकाया रोक रखा हैI</p>
<p><img src="https://www.deshrojana.com/media/2026-04/abhishek.jpg" alt="ABHISHEK" width="449" height="300"></img></p>
<p>न्यूज़ एजेंसी के मुताबिक, पूर्व बर्धमान जिले के रैना में एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए अभिषेक बनर्जी ने कहा कि अगर वह झूठ बोल रहे हैं तो बीजेपी सबूतों के साथ उनका खंडन करे और उन्हें जेल भेज देI उन्होंने कहा, ‘केंद्र ने राज्य की परियोजनाओं के लिए एक लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का बकाया अभी तक जारी नहीं की हैIउसने ऐसा पश्चिम बंगाल के गरीब लोगों को भूखा मारने के लिए किया है, क्योंकि बंगाल के लोगों ने लगातार विधानसभा चुनावों में तृणमूल कांग्रेस को सत्ता में पहुंचाया हैI’</p>
<p>लोकसभा सांसद अभिषेक बनर्जी ने कहा, ‘केंद्र ने चाहे कितनी ही मुश्किलें क्यों न खड़ी की हों, लेकिन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस चुनौती का डटकर सामना किया और ग्रामीण रोजगार के लिए कर्मश्री, आवास के लिए बंग्लार बारी और पेयजल आपूर्ति परियोजनाओं जैसी योजनाओं को राज्य के अपने संसाधनों से चलाया हैI’</p>
<p>उन्होंने कहा, ‘TMC हमेशा आपके चेहरे पर मुस्कान देखना चाहती है, जबकि मोदी आपकी आंखों में आंसू देखना चाहते हैं क्योंकि आपने लगातार चुनावों में बीजेपी को नकार दिया हैI’ उन्होंने लोगों से अपील करते हुए कहा कि आपको भूखा मारने की इस साजिश रचने के लिए आप बंगाल विरोधी पार्टी को मुंहतोड़ जवाब देंI</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>चुनाव</category>
                                            <category> पश्चिम बंगाल</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 06 Apr 2026 12:05:29 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[NELOFER HASHMI]]></dc:creator>
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