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                <title>खेती-किसानी - देश रोजाना</title>
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                <description>खेती-किसानी RSS Feed</description>
                
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                <title>विकसित भारत जी राम जी योजना की शुरुआत एक जुलाई से, गांवों के समग्र विकास को मिलेगी नई दिशा- शिवराज सिंह</title>
                                    <description><![CDATA[<p>केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आज महाराष्ट्र के सतारा स्थित सैनिक स्कूल ग्राउंड में आयोजित “प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण (PMAY-G) लाभार्थी सम्मेलन एवं महा आवास अभियान राज्य स्तरीय पुरस्कार वितरण समारोह” में 5 लाख पूर्ण ग्रामीण आवासों के गृह प्रवेश का शुभारंभ किया</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.deshrojana.com/state/maharashtra/launch-of-vikas-bharat-ji-ram-ji-yojana-from-july/article-1285"><img src="https://www.deshrojana.com/media/400/2026-05/1001619747.jpg" alt=""></a><br /><div>सतारा (महाराष्ट्र)/नई दिल्ली: केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आज महाराष्ट्र के सतारा स्थित सैनिक स्कूल ग्राउंड में आयोजित “प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण (PMAY-G) लाभार्थी सम्मेलन एवं महा आवास अभियान राज्य स्तरीय पुरस्कार वितरण समारोह” में 5 लाख पूर्ण ग्रामीण आवासों के गृह प्रवेश का शुभारंभ किया। तथा5 लाभार्थियों को आवास की चाबियां सौंपीं और महाराष्ट्र के ग्रामीण विकास को नई गति देने वाले कई महत्वपूर्ण निर्णयों की घोषणा की। <img src="https://www.deshrojana.com/media/2026-05/1001619747.jpg" alt="1001619747" width="3008" height="2000"></img>इस अवसर पर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री जयकुमार गोरे, पर्यटन, खननकर्म एवं माजी सैनिक कल्याण मंत्री तथा सतारा के पालकमंत्री शंभूराज देसाई, सार्वजनिक बांधकाम मंत्री शिवेंद्रसिंह भोसले, मदद एवं पुनर्वसन मंत्री मकरंद जाधव (पाटील), ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज राज्य मंत्री योगेश कदम तथा स्थानीय सांसद श्रीमंत छत्रपति उदयनराजे भोसले उपस्थित थे।</div>
<div> </div>
<div>अपने संबोधन में केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार का स्पष्ट संकल्प है कि देश में कोई भी गरीब कच्चे मकान में न रहे और प्रत्येक पात्र परिवार को सम्मानजनक पक्की छत मिले। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र ने PMAY-G के क्रियान्वयन में उल्लेखनीय कार्य करते हुए रिकॉर्ड समय में 5 लाख आवास पूर्ण कर सुशासन, संवेदनशीलता और परिणामोन्मुख प्रशासन का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत किया है। <img src="https://www.deshrojana.com/media/2026-05/1001619748.jpg" alt="1001619748" width="1280" height="1042"></img></div>
<div> </div>
<div>केंद्रीय मंत्री चौहान ने महाराष्ट्र के लिए प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के अंतर्गत वित्त वर्ष 2026-27 हेतु 8,368.50 करोड़ रु. की केंद्रीय अंश सहायता जारी किए जाने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि यह राशि राज्य में ग्रामीण गरीबों के आवास निर्माण अभियान को और तेज करेगी तथा बेघर-मुक्त ग्रामीण महाराष्ट्र के संकल्प को मजबूत आधार देगी। </div>
<div>केंद्रीय मंत्री ने यह भी कहा कि जिन पात्र परिवारों का नाम अब तक छूट गया है, उनके लिए भी रास्ता खुला है और सर्वे तथा सत्यापन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद आवश्यकतानुसार और आवास उपलब्ध कराए जाएंगे। उन्होंने दोहराया कि केंद्र सरकार का लक्ष्य केवल मकान बनाना नहीं, बल्कि बिजली, जल, स्वच्छता और सम्मानपूर्ण जीवन के साथ समग्र ग्रामीण जीवन-स्तर को ऊंचा उठाना है। </div>
<div>केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह ने प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना-IV के अंतर्गत महाराष्ट्र के लिए 122.98 करोड़ रु. की लागत वाली 35 सड़क परियोजनाओं की स्वीकृति भी मुख्यमंत्री फडणवीस को सौंपी। 95.99 किलोमीटर लंबाई की इन परियोजनाओं से राज्य की 35 ग्रामीण बसावटों को लाभ मिलेगा और शिक्षा, स्वास्थ्य, बाजार तथा अन्य आवश्यक सेवाओं तक पहुंच अधिक सुगम होगी। </div>
<div>शिवराज सिंह चौहान ने ‘महा आवास अभियान’ के अंतर्गत उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले जिलों, इकाइयों और अधिकारियों को मुख्यमंत्री फडणवीस के साथ सम्मानित करते हुए कहा कि जब राजनीतिक इच्छाशक्ति, प्रशासनिक दक्षता और जनकल्याण का भाव साथ आता है, तब विकास अभियान जनआंदोलन बन जाते हैं। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र ने ग्रामीण आवास के क्षेत्र में जिस गति और प्रतिबद्धता का परिचय दिया है, वह अन्य राज्यों के लिए भी प्रेरक है। <img src="https://www.deshrojana.com/media/2026-05/1001619749.jpg" alt="1001619749" width="1280" height="852"></img>केंद्रीय मंत्री चौहान ने विकसित भारत जी राम जी योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि एक जुलाई से शुरू होने जा रही यह पहल गांवों के समग्र और सुनियोजित विकास की नई आधारशिला बनेगी। उन्होंने कहा कि इस योजना के माध्यम से ग्राम पंचायतें अपनी स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप विकास की व्यापक रूपरेखा तैयार करेंगी, जिससे गांवों के बुनियादी ढांचे, जनसुविधाओं और आजीविका से जुड़े महत्वपूर्ण कार्यों को गति मिलेगी तथा विकसित भारत के राष्ट्रीय संकल्प को विकसित गांवों के मजबूत आधार पर आगे बढ़ाया जा सकेगा।</div>
<div>किसानों के मुद्दों पर विशेष रूप से बोलते हुए केंद्रीय कृषि मंत्री चौहान ने प्याज उत्पादक किसानों को बड़ी राहत दी। उन्होंने कहा कि उत्पादन बढ़ने और निर्यात संबंधी परिस्थितियों के कारण बाजार भाव प्रभावित हुए हैं, इसलिए आज से ही NAFED द्वारा 12 रु. 35 पैसे प्रति किलो की दर से प्याज की खरीदी शुरू की जाएगी, ताकि किसानों को तत्काल सहारा मिल सके। उन्होंने स्पष्ट कहा कि केंद्र सरकार किसानों को संकट में अकेला नहीं छोड़ेगी और खरीदी व्यवस्था को प्रभावी, पारदर्शी तथा व्यवस्थित बनाने पर बल दिया। चौहान ने अधिकारियों को सतर्क निगरानी रखने के निर्देश भी दिए, ताकि खरीदी प्रक्रिया सुचारु रहे और वास्तविक किसानों को उसका लाभ मिल सके। </div>
<div>गन्ना उत्पादकों से जुड़े मुद्दों पर चौहान ने भरोसा दिलाया कि केंद्र और महाराष्ट्र सरकार मिलकर समस्याओं का समाधान निकालेंगे। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री फडणवीस के साथ इस विषय पर चर्चा हुई है और संबंधित मंत्रालयों के स्तर पर आवश्यक विमर्श कर व्यावहारिक समाधान की दिशा में पूरी कोशिश की जाएगी, क्योंकि किसान देश की अर्थव्यवस्था का आधार हैं। </div>
<div>चौहान ने यह भी रेखांकित किया कि कृषि भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ है और किसान उसकी आत्मा हैं। उन्होंने MSP में हालिया बढ़ोतरी, तिलहन-दलहन खरीदी, कपास मिशन, फार्मर आईडी, किसान-केंद्रित व्यवस्थाओं और ग्रामीण आधारभूत संरचना के विस्तार जैसे उपायों का उल्लेख करते हुए कहा कि केंद्र सरकार किसानों और ग्रामीण गरीबों के कल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। </div>
<div>शिवराज सिंह चौहान ने सतारा की पावन धरती को छत्रपति शिवाजी महाराज की वीरता, स्वाभिमान और सुशासन की प्रेरणास्थली बताते हुए कहा कि शिवाजी महाराज केवल महाराष्ट्र ही नहीं, बल्कि पूरे राष्ट्र के नायक हैं। उन्होंने कहा कि शिवाजी महाराज ने देश को यह संदेश दिया कि सुशासन का अर्थ गरीबों के आँसू पोंछना, माताओं-बहनों का सम्मान सुनिश्चित करना, किसानों को समृद्ध बनाना और समाज के अंतिम व्यक्ति को गले लगाना है; प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में केंद्र सरकार इसी जनकल्याणकारी और संवेदनशील शासन-दृष्टि को आगे बढ़ाने के संकल्प के साथ कार्य कर रही है।</div>
<div>महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कार्यक्रम में कहा कि प्रधानमंत्री मोदी और केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान के सहयोग से महाराष्ट्र को रिकॉर्ड 30 लाख आवासों की स्वीकृति मिली और राज्य ने रिकॉर्ड समय में 5 लाख घर पूर्ण कर आज लाभार्थियों को समर्पित किए। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने आवासों की गुणवत्ता बढ़ाने, सौर ऊर्जा के माध्यम से बिजली सुविधा उपलब्ध कराने और जमीनविहीन पात्र परिवारों को भी सहायता देकर इस अभियान को व्यापक सामाजिक सुरक्षा के मॉडल में बदला है। </div>
<div> </div>
<div>मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि महाराष्ट्र का लक्ष्य बेघर-मुक्त राज्य का निर्माण है और आने वाले समय में और अधिक परिवारों को आवास उपलब्ध कराए जाएंगे। उन्होंने प्याज किसानों के लिए केंद्रीय मंत्री श्री चौहान द्वारा घोषित NAFED खरीदी का स्वागत किया तथा गन्ना एवं चीनी उद्योग से जुड़े मुद्दों पर केंद्र-राज्य समन्वय से समाधान निकालने का भरोसा व्यक्त किया। </div>
<div>कार्यक्रम में ग्रामीण विकास से जुड़े जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों, लाभार्थियों और बड़ी संख्या में ग्रामीण नागरिकों की उपस्थिति रही।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>दिल्ली /एनसीआर</category>
                                            <category>खेती-किसानी</category>
                                            <category>महाराष्ट्र</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 15 May 2026 22:49:54 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Desh Rojana Bureau]]></dc:creator>
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                <title>उत्तर प्रदेश ने गन्ना किसानों को किया 3.21 लाख करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान </title>
                                    <description><![CDATA[<p>मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार पहले दिन से ही किसानों के हित में कार्य कर रही है। अपने पहले फैसले में किसानों की 36 हजार करोड़ रुपये से अधिक की कर्जमाफी करने वाली योगी सरकार के निर्देश पर किसानों को समय से गन्ना मूल्य भुगतान कराया जा रहा है।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.deshrojana.com/state/uttar-pradesh/lucknow/uttar-pradesh-paid-more-than-rs-321-lakh-crore-to/article-1243"><img src="https://www.deshrojana.com/media/400/2026-05/ganna.jpeg" alt=""></a><br /><p>लखनऊ: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार पहले दिन से ही किसानों के हित में कार्य कर रही है। अपने पहले फैसले में किसानों की 36 हजार करोड़ रुपये से अधिक की कर्जमाफी करने वाली योगी सरकार के निर्देश पर किसानों को समय से गन्ना मूल्य भुगतान कराया जा रहा है। योगी सरकार की नीतियों, पारदर्शी व तकनीक आधारित व्यवस्था ने गन्ना किसानों को वर्ष 2017 से अब तक कुल 3,21,963 करोड़ का रिकॉर्ड गन्ना मूल्य भुगतान कराकर इतिहास रचा है। भुगतान की धनराशि सीधे किसानों के बैंक खातों में भेजी जा रही है, जिससे बिचौलियों की भूमिका भी समाप्त हो गई। गन्ना एवं चीनी उद्योग अब प्रदेश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ बन चुका है। योगी सरकार किसानों की समृद्धि, युवाओं के रोजगार एवं ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। <img src="https://www.deshrojana.com/media/2026-05/ganna.jpeg" alt="ganna" width="1600" height="1470"></img></p>
<h5> </h5>
<h5><strong>9 साल में योगी सरकार ने रिकॉर्ड 3,21,963 करोड़ रुपये का भुगतान किया</strong></h5>
<p>गन्ना किसानों को समय से भुगतान करने में योगी सरकार की नीति पूर्व की सरकारों पर भारी पड़ी। 2007 से 2012 में गन्ना किसानों को 52,131 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया, जबकि 2012 से 2017 में 95,215 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया। वहीं 9 साल में योगी सरकार ने रिकॉर्ड 3,21,963 करोड़ रुपये का भुगतान किया। योगी सरकार की अभिनव पहल ‘स्मार्ट गन्ना किसान’ प्रणाली के माध्यम से गन्ना क्षेत्रफल, सट्टा, कैलेंडरिंग और पर्ची जारी करने की प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन कर दी गई है। अब किसानों को उनकी गन्ना पर्ची सीधे मोबाइल पर प्राप्त होती है और भुगतान डीबीटी के माध्यम से उनके बैंक खातों में पहुंचता है। </p>
<h5><strong>48 लाख गन्ना किसान परिवारों को दी आर्थिक मजबूती </strong></h5>
<p>योगी सरकार ने पेराई सत्र 2025-26 में गन्ना मूल्य की दरों में ऐतिहासिक कदम उठाते हुए 30 रुपये प्रति कुंतल की वृद्धि भी की। अगेती प्रजातियों के लिए 400 रुपये व सामान्य प्रजातियों के लिए 390 रुपये प्रति कुंतल की दर निर्धारित की गई। इस बढ़ोत्तरी से गन्ना किसानों को लगभग 3000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त गन्ना मूल्य भुगतान प्राप्त हुआ है। योगी सरकार के कार्यकाल में चौथी बार गन्ना मूल्य में बढ़ोतरी की गई। समय से भुगतान होने से प्रदेश के 48 लाख गन्ना किसान परिवारों को आर्थिक मजबूती मिली है। प्रदेश की अर्थव्यवस्था को एक ट्रिलियन डॉलर तक ले जाने में गन्ना विकास विभाग का भी महत्वपूर्ण योगदान है।</p>
<h5><strong>उत्तर प्रदेश का औसत चीनी परता 10.21 प्रतिशत </strong></h5>
<p>यूपी के गन्ना क्षेत्रफल में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। 2025-26 में 29.51 लाख हेक्टेयर में गन्ना की खेती की गई। योगी सरकार के प्रयास से उत्तर प्रदेश देश का अग्रणी गन्ना उत्पादक राज्य बना है। उत्तर प्रदेश में कुल 121 चीनी मिलें संचालित हैं। उप्र राज्य चीनी निगम की 3, उप्र सहकारी चीनी मिल्स संघ की 23 व निजी क्षेत्र की 95 चीनी मिलों द्वारा 877.93 लाख टन गन्ने की पेराई कर 89.68 लाख टन चीनी का उत्पादन किया गया है। पिछले पेराई सत्र में औसत चीनी परता उत्तर प्रदेश का 10.21 प्रतिशत रहा, जबकि महाराष्ट्र का चीनी परता 9.49 प्रतिशत है। </p>
<h5><strong>10 लाख से अधिक प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित </strong></h5>
<p>प्रदेश में बंद पड़ी चीनी मिलों के पुनरुद्धार, नई चीनी मिलों की स्थापना तथा मिलों की पेराई क्षमता में 1,28,500 टी.सी.डी. वृद्धि से रोजगार के नए अवसर सृजित हुए हैं। मिलों के आधुनिकीकरण व औद्योगिक पुनरुद्धार से 10 लाख से अधिक रोजगार का सृजन हुआ है। विगत 9 वर्ष से लगभग 6924 करोड़ का अतिरिक्त पूंजी निवेश किया गया है। एथेनॉल उत्पादन में भी उत्तर प्रदेश ने नया कीर्तिमान स्थापित किया है। सरकार के प्रयासों से राज्य में एथेनॉल उत्पादन 188 करोड़ लीटर तक पहुंच गया है। </p>
<h5><strong>गन्ना किसानों की समस्या के समाधान के लिए टोल फ्री 1800-121-3203 एक्टिव</strong></h5>
<p>गन्ना आयुक्त मिनिस्ती एस. ने बताया कि गन्ना किसानों की समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए आधुनिक तकनीक एवं डिजिटल व्यवस्था को बढ़ावा दिया गया है। ई-गन्ना ऐप, ऑनलाइन सर्वे, पारदर्शी पर्ची वितरण एवं शिकायत निवारण प्रणाली जैसी व्यवस्थाओं ने किसानों को बड़ी राहत व सुविधा प्रदान की है। आज लाखों किसान मोबाइल के माध्यम से घर बैठे गन्ना संबंधी समस्त जानकारी प्राप्त कर रहे हैं। गन्ना किसानों की समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए मुख्यालय स्तर पर टोल-फ्री कॉल सेन्टर नम्बर 1800-121-3203 की स्थापना की गयी है, जो 24 घण्टे संचालित है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>खेती-किसानी</category>
                                            <category>उत्तरप्रदेश</category>
                                            <category>लखनऊ</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 14 May 2026 17:34:49 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[NELOFER HASHMI]]></dc:creator>
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                <title>किसान एमएसपी से नीचे उपज बेचने को मजबूर न हो - शिवराज सिंह </title>
                                    <description><![CDATA[<p>केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने शुक्रवार को कृषि भवन, नई दिल्ली में NAFED और NCCF के साथ उपार्जन संबंधी उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में किसानों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए स्पष्ट निर्देश दिए कि जहां बाजार भाव MSP से नीचे हैं, वहां किसानों से प्रभावी और समयबद्ध खरीद हर हाल में सुनिश्चित की जाए।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.deshrojana.com/farming/farmers-should-not-be-forced-to-sell-produce-below-msp/article-1110"><img src="https://www.deshrojana.com/media/400/2026-05/1001595027.jpg" alt=""></a><br /><div>नई दिल्ली:  केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने शुक्रवार को कृषि भवन, नई दिल्ली में NAFED और NCCF के साथ उपार्जन संबंधी उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में किसानों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए स्पष्ट निर्देश दिए कि जहां बाजार भाव MSP से नीचे हैं, वहां किसानों से प्रभावी और समयबद्ध खरीद हर हाल में सुनिश्चित की जाए। कृषि मंत्री शिवराज सिंह ने दोटूक कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में किसान को उसकी उपज का न्यायसंगत मूल्य दिलाना केंद्र सरकार की सर्वोच्च प्रतिबद्धता है और इस लक्ष्य में किसी भी स्तर की ढिलाई स्वीकार नहीं की जाएगी। <img src="https://www.deshrojana.com/media/2026-05/1001595027.jpg" alt="1001595027" width="1548" height="1032"></img>केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आज कृषि भवन में NAFED और NCCF की उपार्जन प्रगति की विस्तृत समीक्षा करते हुए अधिकारियों को निर्देश दिया कि उपार्जन को केवल औपचारिक स्वीकृति के रूप में नहीं, बल्कि किसानों को MSP का लाभ दिलाने वाले मिशन मोड दायित्व के रूप में लिया जाए। उन्होंने कहा कि यदि बाजार में कीमतें MSP से नीचे चल रही हैं और फिर भी खरीद अपेक्षित स्तर पर नहीं हो रही है, तो यह स्थिति किसानों के हित में नहीं मानी जा सकती। कृषि मंत्री चौहान ने विशेष रूप से इस बात पर जोर दिया कि एजेंसियां अपने-अपने जिलों और केंद्रों के स्तर पर स्पष्ट लक्ष्य निर्धारण करें। उन्होंने कहा कि राज्यवार आवंटन के साथ-साथ जिला-स्तर पर उत्पादन, संभावित आवक और 25 प्रतिशत खरीद क्षमता का आकलन कर ठोस कार्ययोजना बनाई जाए, ताकि उपार्जन का लक्ष्य वास्तविक जमीन पर हासिल हो सके। </div>
<div> </div>
<div>शिवराज सिंह चौहान ने दलहन-तिलहन, विशेषकर चना, मसूर, उड़द और सरसों जैसी फसलों पर विशेष फोकस करते हुए कहा कि जहां किसानों को MSP से कम दाम मिल रहे हैं, वहां खरीद में तेजी लाना अनिवार्य है। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि उपार्जन केंद्रों की संख्या, खरीद क्षमता, जिला-स्तरीय बाधाएं, राज्य सरकारों के निर्देश, गुणवत्ता संबंधी स्थानीय समस्याएं और भुगतान व्यवस्था इन सभी पहलुओं की रोजाना निगरानी की जाए और जहां भी बाधा हो, उसका समाधान तत्काल केंद्रीय स्तर पर रखा जाए। <img src="https://www.deshrojana.com/media/2026-05/1001595024.jpg" alt="1001595024" width="1600" height="1065"></img>मसूर उपार्जन की समीक्षा के दौरान केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह ने राज्यों में वास्तविक बाजार भाव की ताजा जानकारी जुटाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जहां कीमतें MSP के आसपास या नीचे हैं, वहां खरीद तंत्र और अधिक चुस्त किया जाए। </div>
<div> </div>
<div>कृषि मंत्री चौहान ने किसानों को समय पर भुगतान को अत्यंत संवेदनशील विषय बताते हुए स्पष्ट निर्देश दिए कि भुगतान व्यवस्था को तेज, सरल और भरोसेमंद बनाया जाए। समीक्षा में यह मुद्दा सामने आया कि किसानों को भुगतान में विलंब की शिकायतें हैं, जिस पर मंत्री ने 72 घंटे के भीतर भुगतान सुनिश्चित करने की दिशा में सख्त SOP तैयार करने और राज्यों से चर्चा कर इसे प्रभावी रूप से लागू करने को कहा। </div>
<div>बैठक में राज्य पोर्टलों और CNA पोर्टल के एकीकरण, भुगतान में देरी, बिहार में DBT व्यवस्था की कमी, गुजरात में भुगतान विलंब, महाराष्ट्र में डेटा लंबित रहने और आंध्र प्रदेश से अतिरिक्त मात्रा के लिए आंकड़े प्राप्त होने जैसे मुद्दों पर भी चर्चा हुई। कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने स्पष्ट किया कि यदि किसी राज्य के निर्देश, प्रक्रियाएं या स्थानीय प्रशासनिक अड़चनें किसानों से खरीद में बाधा बन रही हैं, तो केंद्र सरकार सक्रिय समन्वय के जरिए उनका समाधान सुनिश्चित करेगी। </div>
<div>कृषि मंत्री चौहान ने यह भी कहा कि दलहन-तिलहन उत्पादन बढ़ाने का राष्ट्रीय लक्ष्य तभी सफल होगा, जब किसानों को यह भरोसा होगा कि जरूरत पड़ने पर उनकी उपज MSP पर खरीदी जाएगी। उन्होंने कहा कि भारत सरकार की मंशा स्पष्ट है- किसान को संकट में नहीं छोड़ना है, बल्कि उसे उचित मूल्य, त्वरित भुगतान और प्रभावी खरीद तंत्र के माध्यम से मजबूत समर्थन देना है। </div>
<div> </div>
<div>मंत्री शिवराज सिंह ने NAFED और NCCF को निर्देशित किया कि वे उपार्जन को लेकर बेहतर काम करें, समस्याओं की सूची बनाकर समाधान सहित प्रस्तुत करें और शेष अवधि में खरीद प्रदर्शन में ठोस सुधार दिखाएं। उन्होंने कहा कि किसान हित में केंद्र सरकार पूरी गंभीरता से काम कर रही है और उपार्जन व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और परिणामोन्मुख बनाया जाएगा।</div>
<div> </div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>दिल्ली /एनसीआर</category>
                                            <category>खेती-किसानी</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 09 May 2026 01:05:04 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[NELOFER HASHMI]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अन्नदाता को बड़ी सौगात, महाराष्ट्र में 40 लाख किसानों का कर्ज होगा माफ! </title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>सूखे और बेमौसम बारिश की मार झेल रहे किसानों के लिए महाराष्ट्र सरकार ने अपने वादे के मुताबिक पिटारा खोल दिया है। बजट में घोषित 'पुण्यश्लोक अहिल्यादेवी होलकर किसान कर्ज माफी योजना' अब धरातल पर उतरने के लिए तैयार है। इस योजना के अंतर्गत 35 से 40 लाख किसानों के कर्ज माफ़ किये जायेंगे। </strong></p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.deshrojana.com/state/maharashtra/big-gift-to-annadata-loan-of-40-lakh-farmers-will/article-900"><img src="https://www.deshrojana.com/media/400/2026-04/screenshot-2026-04-28-120246.png" alt=""></a><br /><p> <img src="https://www.deshrojana.com/media/2026-04/screenshot-2026-04-28-115922.png" alt="Screenshot 2026-04-28 115922" width="956" height="513"></img></p><p><br />महाराष्ट्र के करोड़ों अन्नदाताओं के लिए एक राहत भरी खबर आई है। जिसमें  प्रदेश के लगभग 35 से 40 लाख किसानों की कर्ज माफ़ी की घोषणा की गई है। सरकार ने इस ऐतिहासिक कदम के लिए 27,000 करोड़ रुपये का बड़ा बजट निर्धारित किया है। </p><p><strong>अक्टूबर 2025 में बनी थी समिति </strong><br />आपको बता दें कि अक्टूबर 2025 महाराष्ट्र सरकार ने MITRA के CEO प्रवीण परदेसी की अध्यक्षता में एक समिति गठित की थी। जिसे 'पुण्यश्लोक अहिल्यादेवी होल्कर किसान ऋण माफी योजना'नाम दिया गया था। इस समिति ने हाल ही में अपनी रिपोर्ट मुख्यमंत्री को सौंपी है, जिसमें लाभार्थियों के चयन और योजना के प्रभावों पर सुझाव दिए गए हैं। </p><p><img src="https://www.deshrojana.com/media/2026-04/screenshot-2026-04-28-120246.png" alt="Screenshot 2026-04-28 120246" width="948" height="540"></img></p><p><strong>"महा एल्गार मोर्चा" के आगे झुकी सरकार </strong><br />प्रहार जनशक्ति पार्टी के नेता बच्चू कडू ने अक्टूबर 2025 के अंत में महाराष्ट्र के नागपुर में किसानों की पूर्ण कर्जमाफी, एमएसपी और अन्य मांगों को लेकर "महा एल्गार मोर्चा" के तहत एक बड़ा आंदोलन किया। कडू के नेतृत्व में हजारों किसानों ने वर्धा रोड एनएच-44 को जाम कर दिया, जिससे सरकार को बातचीत के लिए मजबूर होना पड़ा। उन्होंने सरकार के सामने किसानों की मांगें रखी थी। कडू ने कर्ज माफी के साथ-साथ खेती को मजबूत करने के उपायों पर भी सुझाव दिए थे। </p><p><strong>इस समिति द्वारा कुछ प्रावधान इस प्रकार हैं </strong><br />महाराष्ट्र सरकार द्वारा घोषित v के अंतर्गत  30 सितंबर, 2025 तक के 2 लाख रुपये तक के फसल ऋण माफ किए जाएंगे। जो किसान समय पर कर्ज चुकाते हैं, उन्हें 50,000 रुपये तक का प्रोत्साहन मिलेगा। हालाँकि ऐसा करने से सरकार पर 2026-27 के बजट में  लगभग ₹27,000 करोड़ से ₹35,000 करोड़ का वित्तीय भार पड़ने का अनुमान है। </p><p><img src="https://www.deshrojana.com/media/2026-04/506537-farmers.jpg" alt="506537-farmers" width="956" height="546"></img></p><p><strong>किसे मिलेगा लाभ ? </strong><br />सबसे पहले जरुरी है कि किसान स्थाई रूप से महारष्ट्र निवासी होना चाहिए , दूसरा कर्ज माफ़ी के लिए वही किसान पत्र होंगे जिनका कर्ज 30 सितंबर 2025 तक बकाया हो। अगर किसी कर्ज उसके बाद का है तो वो किसान इसके पत्र नहीं होंगे। तीसरा इस कर्ज माफ़ी का लाभ केवल वही किसान ले सकेंगे  जिन्होंने राष्ट्रीयकृत बैंकों, सहकारी बैंकों और राज्य द्वारा मान्यता प्राप्त निजी वित्तीय संस्थानों से कर्ज लिया हो। </p><p><strong>किसान ऐसे करें आवेदन </strong><br />सरकार ने आगामी खरीफ सीजन से पहले लाभ वितरित करने का लक्ष्य रखा है। तो पात्र किसान सही समय पर आवेदन करके इसका लाभ लें। जैसे ही अधिकारी इसकी घोषणा कर देंगे तुरंत बैंको के माध्यम से इसके संचालित होने की सम्भावना है। इसके लिए ज़रूरी दस्तावेज तैयार कर लें जैसे -संबंधित बैंक शाखा में आधार कार्ड, भूमि रिकॉर्ड, बैंक पासबुक और फसल ऋण से संबंधित दस्तावेज जमा करने पड़ सकते हैं।  तो पहले से तयारी करके रखें। </p><p><img src="https://www.deshrojana.com/media/2026-04/screenshot-2026-04-28-120557.png" alt="Screenshot 2026-04-28 120557" width="956" height="725"></img></p><p><strong>क्यों जरूरी है लोन माफी योजना?</strong><br />पिछले दो साल में महाराष्ट्र के कृषि क्षेत्र को लगातार संकटों का सामना करना पड़ा है. बाढ़ और बेमौसम बारिश, फसलों के दामों में उतार-चढ़ाव, किसान संगठनों और विपक्ष का दबाव जैसे कारणों से सरकार ने एक बार फिर किसानों को राहत देने के लिए यह बड़ा कदम उठाया है। </p><p>बताया जा रहा है कि, 'एग्रीस्टैक' (Agristack) तकनीक के जरिए लाभार्थियों की लिस्ट तैयार की जा रही है ताकि, किसी भी तरह के भ्रष्टाचार की गुंजाइश न रहे। अगर आप भी महाराष्ट्र के किसान हैं, तो अपने आधार कार्ड और बैंक खाते को अपडेट रखें क्योंकि महाराष्ट्र दिवस यानी 1 मई के बाद कभी भी खुशियों की पहली किस्त आपके खाते में आ सकती है।</p><p><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                            <category>खेती-किसानी</category>
                                            <category>महाराष्ट्र</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 28 Apr 2026 12:29:17 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[ANJU SHARMA]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अनाज मंडी में खरीदे गए गेहूं की उठान की गति धीमी होने से बनी अव्यवस्था </title>
                                    <description><![CDATA[<p>हथीन अनाज मंडी में खरीदे गए गेहूं की उठान की धीमी गति से अव्यवस्था की स्थिति बन गई है। इस कारण आढ़तियों एवं किसानों में रोष व्याप्त है।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.deshrojana.com/haryana/palwal/district-hathin/chaos-due-to-slow-lifting-of-wheat-purchased-in-grain/article-893"><img src="https://www.deshrojana.com/media/400/2026-04/img-20260408-wa0490.jpg" alt=""></a><br /><p>हथीन। हथीन अनाज मंडी में खरीदे गए गेहूं की उठान की धीमी गति से अव्यवस्था की स्थिति बन गई है। इस कारण आढ़तियों एवं किसानों में रोष व्याप्त है।</p>
<img src="https://www.deshrojana.com/media/2026-04/img-20260408-wa0490.jpg" alt="IMG-20260408-WA0490" width="3000" height="4000"></img>
हथीन अनाज मंडी हथीन में खुले आसमान के नीचे पड़ा हुआ है। उठान की गति धीमी होने के कारण बनी अव्यवस्था

<p>मंडी में अब तक तीन लाख 80 हजार क्विंटल से अधिक की आवक हो चुकी है। जिसमें से दो सरकारी खरीद एजेंसियों ने  तीन लाख 53 हजार 313 क्विंटल गेहूं की खरीद की है।कुल खरीद में से मात्र  दो लाख 10 हजार पांच क्विंटल गेहूं का उठान हुआ है।इसी प्रकार हथीन अनाज मंडी के सब यार्ड खरीद केंद्र मण्डकौला में कुल 90 हजार क्विंटल से अधिक गेहूं की आवक हुई। जिसमें से 85 हजार 459 क्विंटल गेहूं की खरीद हुई।मण्डकौला खरीद केंद्र से अब तक मात्र 60 हजार 173 क्विंटल गेहूं का उठान हुआ है।उठान की गति धीमी होने के कारण हजारों किसानों का करोड़ों रुपए का भुगतान भी अटका हुआ है। अनाज मंडी आढ़ती असोसिएशन के पूर्व प्रधान सुखवीर सिंह राजाजी ने कहा कि उठान के लिए नियुक्त ट्रांसपोर्ट ठेकेदार समय पर उठान के लिए पर्याप्त संख्या में गाड़ियां नही भेज रहे हैं। इस कारण उठान की गति  संतोष जनक नही है। उठान न होने से खरीदा गया गेहूं सम्बंधित एजेंसियों के स्टोर वेयर हाउस तक नही पहुंच पा रहा  है। इस कारण किसानों  का भुगतान भी नही हो रहा है। उन्होंने मांग की है कि पर्याप्त गाड़ियों का प्रबन्ध कर उठान की गति में तेजी लाई  जाए। हथीन अनाज मंडी में वर्तमान में एक लाख 40 हजार क्विंटल से अधिक गेहूं खुले आसमान के नीचे पड़ा हुआ है। मौसम बिगड़ने पर खरीदा गया गेहूं भीग भी सकता है।  इस संबंध में अनाज मंडी के नोडल अधिकारी एवं स्थानीय एसडीएम हरिराम ने बताया कि उठान तेज करने के लिए सम्बन्धित स्टाफ एवं ट्रांसपोर्ट ठेकेदार को निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि लापरवाही हुई तो कड़ा एक्शन लिया जाएगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>हरियाणा</category>
                                            <category>खेती-किसानी</category>
                                            <category>पलवल</category>
                                            <category>ज़िला हथीन</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 28 Apr 2026 00:16:16 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Desh Rojana Bureau]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>डीसी अपराजिता के नेतृत्व में गेहूं खरीद एवं उठान कार्यों में आई तेजी</title>
                                    <description><![CDATA[<p>डीसी अपराजिता के कुशल नेतृत्व में जिले की अनाज मंडियों में गेहूं खरीद और उठान कार्य सुचारू रूप से चल रहा है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के आदेशानुसार प्रशासन द्वारा</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.deshrojana.com/haryana/kaithal/wheat-procurement-and-lifting-operations-increased-under-the-leadership-of/article-891"><img src="https://www.deshrojana.com/media/400/2026-04/dc.jpeg" alt=""></a><br /><p>कैथल। डीसी अपराजिता के कुशल नेतृत्व में जिले की अनाज मंडियों में गेहूं खरीद और उठान कार्य सुचारू रूप से चल रहा है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के आदेशानुसार प्रशासन द्वारा किसानों की सुविधा के लिए किए गए प्रभावी प्रबंधन के चलते खरीद के साथ साथ उठान कार्यों में भी लगातार प्रगति दर्ज की जा रही है।<img src="https://www.deshrojana.com/media/2026-04/dc.jpeg" alt="DC" width="3000" height="1264"></img><br />आंकड़ों पर नजर दौड़ाई जाए तो 26 अप्रैल तक जिले में 6,92,170 मीट्रिक टन गेहूं (एमटी) की खरीद की जा चुकी है। जिसमें से खाद्य एवं आपूर्ति विभाग द्वारा 2,19,932 एमटी, हैफेड द्वारा 3,02,201 एमटी तथा हरियाणा वेयरहाउसिंग कॉरपोरेशन 1,70,037 एमटी गेहूं खरीद की गई है।<br />वहीं उठान की बात करें तो 26 अप्रैल तक कुल 4,46,202 एमटी गेहूं का उठान किया जा चुका है, जो कुल खरीद का लगभग 64.45 प्रतिशत है। खाद्य एवं आपूर्ति विभाग द्वारा 1,28,899 एमटी, हैफेड द्वारा 2,08,197 एमटी तथा हरियाणा वेयरहाउसिंग कॉरपोरेशन द्वारा 1,09,106 एमटी का उठान किया गया है।<br />डीसी अपराजिता ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि उठान कार्य को और तेज किया जाए, ताकि मंडियों में व्यवस्था सुचारू बनी रहे और किसानों को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रशासन का मुख्य उद्देश्य किसानों को उनकी फसल का उचित मूल्य और समय पर भुगतान सुनिश्चित करना है। जिले में गेहूं की निर्धारित एमएसपी 2585 रुपये प्रति क्विंटल पर खरीद की जा रही है। साथ ही अधिकारियों को पेयजल, बिजली, साफ-सफाई और अन्य मूलभूत सुविधाएं निरंतर बनाए रखने के निर्देश भी दिए गए हैं।<br />डीसी ने किसानों से अपील की है कि वे गेहूं के अवशेषों में आग न लगाएं, क्योंकि ऐसा करने से भूमि की उपजाऊ शक्ति कमजोर होती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>हरियाणा</category>
                                            <category>खेती-किसानी</category>
                                            <category>कैथल</category>
                                    

                <link>https://www.deshrojana.com/haryana/kaithal/wheat-procurement-and-lifting-operations-increased-under-the-leadership-of/article-891</link>
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                <pubDate>Mon, 27 Apr 2026 23:55:49 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Desh Rojana Bureau]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>आंध्र प्रदेश में स्थापित होगी वर्ल्ड की सबसे पहली कोको सिटी। प्रगतिशील किसानों का बनेगा केंद्र। </title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने राज्य का पहला समर्पित कोको शहर बनाने की घोषण की। उन्होंने अधिकारियों को इस परियोजना के लिए 250 एकड़ भूमि का चयन करने के निर्देश दिए हैं। जो प्रगतिशील किसानों के लिए एक अनुभव केंद्र के रूप में कार्य करेगा। </strong></p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.deshrojana.com/top-news/the-worlds-first-cocoa-city-will-be-established-in-andhra/article-876"><img src="https://www.deshrojana.com/media/400/2026-04/560048208_24826657036987052_453787511093391821_n.jpg" alt=""></a><br /><p><strong><img src="https://www.deshrojana.com/media/2026-04/560048208_24826657036987052_453787511093391821_n.jpg" alt="560048208_24826657036987052_453787511093391821_n" width="919" height="517"></img></strong></p>
<p><strong>आंध्र प्रदेश में बनेगी दुनिया की पहली कोको सिटी। </strong><br />आंध्र प्रदेश सरकार ने बागवानी को 50 लाख एकड़ तक बढ़ाने और 250 एकड़ में कोको सिटी बनाने की योजना तैयार करने के निर्देश दिए हैं। किसानों की आय बढ़ाने के लिए मल्टी-क्रॉपिंग, प्राकृतिक खेती और नई फसलों पर फोकस किया जाएगा। एक कोको शहर स्थापित करने और किसानों की आय बढ़ाने के लिए कृषि को मजबूत करने के निर्देश दिए। जिसमें बाजार आधारित और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा दिया जायेगा। इस योजना में विभिन्न फलों और सब्जियों की खेती बढ़ाना और गरीबी रेखा से नीचे यानी बीपीएल किसानों को सहायता प्रदान करना शामिल है। सामान्य से कम मानसून वर्षा की आशंका के कारण 20 लाख एकड़ में पीएमडीएस जैसे उपाय लागू किए जाएंगे।</p>
<p><strong>किसानो को उत्तम प्रशिक्षण की व्यवस्था और सहायता </strong><br />जी हाँ, आंध्र प्रदेश दुनिया का पहला 'कोको सिटी' स्थापित करने की तैयारी कर रहा है। मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने हाल ही में  अधिकारियों को इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए उपयुक्त स्थान की पहचान करने के निर्देश दिए हैं। इस योजना के अंतर्गत कम से कम एक लाख किसानों को उत्तम प्रशिक्षण देने की व्यवस्था करने को कहा है। जो किसान इस योजना में शामिल होंगे, उन्हें सब्सिडी और सरकारी सहायता भी दी जाएगी। माल अच्छे दामों पर बिके इसके लिए मंडी से लेकर बाजार तक सभी सुविधाए उपलब्ध कराई जाएंगी। </p>
<p><img src="https://www.deshrojana.com/media/2026-04/screenshot-2026-04-27-123306.png" alt="Screenshot 2026-04-27 123306" width="949" height="591"></img></p>
<p><strong>इस परियोजना की मुख्य विशेषताएं </strong><br />इस परियोजना को प्रगतिशील किसानों के लिए एक अनुभव और प्रशिक्षण केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा, जहाँ उन्हें कोको की आधुनिक खेती और अंतरराष्ट्रीय मानकों के बारे में सिखाया जाएगा।  यह कोको सिटी लगभग 250 से 500 एकड़ के क्षेत्र में फैली होगी। शुरुआती प्रस्तावों के अनुसार, इसे एलुरु (Eluru) जिले में स्थापित किया जा सकता है, जो वर्तमान में देश का शीर्ष कोको उत्पादक क्षेत्र है। यहाँ कोको की खेती, प्रसंस्करण (processing) और विपणन (Marketing)के लिए एक एकीकृत हब बनाया जाएगा, जो अंतरराष्ट्रीय मानकों पर आधारित होगा। यह पहल राज्य के कृषि क्षेत्र को मजबूत करने और बागवानी (Horticulture) को 50 लाख एकड़ तक विस्तारित करने की बड़ी योजना का हिस्सा है। </p>
<p><strong>कब तक पूरी होगी योजना ?</strong><br />आंध्र सरकार 2030-31 तक करीब एक लाख किसानों को इसके लिए प्रशिक्षित करेगी, इसके लिए विकास केंद्र स्थापित किये जायेंगे।  25 मिलियन पौधे वितरित किये जायेंगे। कोको उत्पादन में पारदर्शिता लाने के लिए लाइट डिजिटल किसान रजिस्ट्री शुरू करने की भी सिफारिश की गई है  </p>
<p><img src="https://www.deshrojana.com/media/2026-04/screenshot-2026-04-27-123237.png" alt="Screenshot 2026-04-27 123237" width="924" height="610"></img></p>
<p><strong>सब्सिडी और सरकारी सहायता </strong><br />आंध्र प्रदेश सरकार इस पर एक बड़ा काम करने जा रही है आज केंद्र और राज्य सरकार कोको और बागवानी को बढ़ावा देने के लिए अनेक सब्सिडी और योजनाएं प्रदान कर रही हैं, विशेषकर नारियल और सुपारी के बागानों में अंतर-फसल के रूप में लगाने को कहा जाता जिससे एक साथ कई फसल लगा कर किसान दोहरा लाभ ले सकें।</p>
<p>कोको विकास निदेशालय (DCCD) और बागवानी विभाग इसके लिए प्रमुख वित्तीय सहायता देते हैं। जैसे- नई कोको रोपण के लिए प्रति हेक्टेयर 20,000 रुपये तक की वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है। हाइब्रिड फसल लगाने और इंटर क्रॉपिंग के लिए भी 60 से 40 के अनुपात में सहायता प्रदान की जाती है। आंध्र प्रदेश सरकार कोको कंपनियों के माध्यम से उपज बेचने पर 50 रुपये प्रति किलोग्राम तक की अतिरिक्त सब्सिडी भी दे रही है। सरकार किसानो के प्रशिक्षण और कार्यशालाओं के लिए भी सब्सिडी उपलब्ध कराती है, जिसमें प्रति बैच जिसमे 50 किसान शामिल होते हैं उन्हें 3.50 लाख रुपये तक की सहायता भी दी जाती है।</p>
<p>आंध्र सरकार कोको की खेती को बढ़ावा देने के लिए इतना बड़ा कदम उठाने जा रही है। ये प्रयोग अगर सफल रहता है तो देश ही दुनिया में पहली कोको सिटी हमारे देश में होगी। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>खेती-किसानी</category>
                                            <category>आंध्र प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 27 Apr 2026 13:07:08 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[ANJU SHARMA]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>भारतीय खेती पर पड़ा ईरान-अमेरिका युद्ध का असर, यूरिया की कीमतों में 84 प्रतिशत तक उछाल। </title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>जबसे ईरान-अमेरिका युद्ध शुरू हुआ तभी से होर्मुज स्ट्रेट पर परिवहन ठप्प पड़ा है। इससे कच्चा तेल और एलपीजी गैस तो प्रभावित हुई है। साथ ही रासायनिक उर्वकों के आयात पर भी इसका असर पड़ा है। सप्लाई चेन बाधित होने से इसकी कीमतों में भारी उछाल आया है। ये सीजन तो जैसे-तैसे संभल सकता है, लेकिन रबी सीजन में खाद की कमी एक बड़ी चुनौती बन सकती है। इसलिए सरकार और कंपनियां वैकल्पिक समाधान तलाशने में जुटी हैं।  </strong></p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.deshrojana.com/farming/impact-of-iran-america-war-on-indian-agriculture-urea-prices-rise/article-817"><img src="https://www.deshrojana.com/media/400/2026-04/26361053_agri-2.jpg" alt=""></a><br /><p><img src="https://www.deshrojana.com/media/2026-04/screenshot-2026-04-24-130159.png" alt="Screenshot 2026-04-24 130159" width="924" height="490"></img><br />अप्रैल का महीना चल रहा है ऐसे में एक तरफ तपती धूप सितम ढा रही है। दो महीने बाद मानसून भी अपनी दस्तक देने लगेगा। खरीफ फसलों की बुवाई शुरू हो जाएगी। उसके लिए किसानो को बोरी भर-भर के यूरिया खाद की आवश्यकता होगी। देश में पर्याप्त यूरिया का उत्पादन ना होने से सरकार को इसे दोगुने से ज़्यादा रेटों पर आयत करना पड़ रहा है। जिस वजह से इसकी कीमतों में भारी उछाल आया है। ऐसा इसलिए ताकि किसानों को खरीफ फसल की बुवाई में यूरिया की कमी नहीं पड़े।</p>
<p><strong>भारत में यूरिया की सबसे ज्यादा खपत </strong><br />रासायनिक खादों की जब बात आती है तो भारत में इसकी सबसे ज़्यादा खपत होती है। कृषि विशेषजों का कहना है कि हर साल देश में करीब 400 लाख टन यूरिया की खपत होती है। जिसमे से करीब 310 लाख टन यूरिया का उत्पादन देश में होता है। बाकी बचा 90 से 10 लाख टन यूरिया, इसकी पूर्ति के लिए इसे विदेशों से आयात करना पड़ता है। </p>
<p><strong><img src="https://radhakrishnaagriculture.in/cdn/shop/files/urea.jpg?v=1711181452&amp;width=1946" alt="Urea Fertilizer for Use All Plants 1Kg – Radhakrishnaagriculture"></img></strong></p>
<p><strong>स्टॉक में आई कमी</strong><br />खरीफ सीजन से पहले देश में यूरिया का स्टॉक कम हो गया है। 1 अप्रैल 2026 को यूरिया का भंडार 54.22 लाख टन था, जो पिछले साल से कम है। यह पिछले चार साल में सबसे कम स्तर माना जा रहा है। अगर समय पर खाद नहीं मिली, तो फसलों पर असर पड़ सकता है</p>
<p><strong>कहाँ से होता है आयात </strong><br />भारत अपना अधिकतर यूरिया परंपरागत रूप से मध्य पूर्व के देशों, ओमान, सउदी अरब, संयुक्त अरब अमिरात जैसे देशों से आयात करता है। वहां से आने वाले यूरिया का मार्ग होर्मुज स्ट्रेट ही है, जो कि पिछले दो महीने से बाधित है। इसी संकट के कारण भारत की यूरिया आपूर्ति में भारी बाधा आई है।</p>
<p><strong><img src="https://www.bhaskarhindi.com/h-upload/2026/04/17/1505402-capture.PNG" alt="Hormuz Crisis: ईरान ने किया होर्मुज स्ट्रेट खोलने का ऐलान, सुरक्षित गुजर  सकेंगे जहाज, ट्रंप ने दी प्रतिक्रिया | Trump Expresses Pleasure Over Iran's  Announcement to Open ..."></img></strong></p>
<p><strong>दोगुनी कीमत पर आयात </strong><br />भारत को पहले के मुकाबले लगभग दूनी कीमत पर यूरिया खरीदना पड़ रहा है। खबर है कि भारतीय पोटाश लिमिटेड ने 15 लाख टन यूरिया, जिसकी डिलीवरी पश्चिमी तट पर होगी, का सौदा 935 डॉलर प्रति टन की दर पर किया है। वहीं देश के पूर्वी तट पर 10 लाख टन यूरिया की डिलीवरी होनी है। इसका सौदा 959 डॉलर प्रति टन की दर पर किया गया है। उल्लेखनीय है कि ईरान-इजरायल युद्ध शुरू होने से पहले भारत विदेशों से 490 डॉलर प्रति टन की दर पर यूरिया खरीदा करता था। इस समय जो सौदा हुआ है, वह पहले के मुकाबले करीब 90 फीसदी अधिक है। </p>
<p><strong>दुनिया भर में बढ़ी खाद की कीमतें</strong><br />आपको बता दें कि अभी जो सौदा हुआ है, उससे पहले दो दर्जन से अधिक कंपनियों ने ऑफ़र पेश किया था। इनमें $935 से $1,136 प्रति टन के बीच का रेट रखा गया था। इसलिए सबसे कम कीमत वाला सौदा जो कि $935 है इस पर सरकार ने खरीद की सहमति जताई है। होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने के बाद भारत की पहली खेद होगी।<strong> </strong></p>
<p><strong><img src="https://imgs.etvbharat.com/etvbharat/prod-images/30-03-2026/26361053_agri-2.jpg" alt="क्या आयातित यूरिया के बजाय 'पेशाब' से ..."></img></strong></p>
<p><strong>दूनी कीमत पर खरीद क्यों जरूरी?</strong><br />भारत में जैसे मानसून सीजन की शुरुआत होती है तभी से खरीफ फसलों की बुवाई शुरू हो जाती है। इस समय  में धान, मक्का, सोयाबीन जैसी महत्वपूर्ण फसलों की बुवाई होती है जो कि भारत के खाद्य सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। तब किसान को पर्याप्त मात्रा में यूरिया की आवश्यकता होगी। इसलिए सरकार ने दूनी कीमत पर भी यूरिया की सप्लाई के आर्डर दिए गए हैं। अभी कई मिलियन टन यूरिया की खरीद का टेंडर और जारी होना है।</p>
<p><strong>भारतीय कारखानों में उत्पादन हुआ बाधित </strong><br />एक तो खपत के हिसाब से पहले ही देश में रासायनिक उर्वरक कम बनते है दूसरा। इस समय खाद बनाए वाले जो कारखाने हैं उनमे भी यूरिया का उत्पादन पूरी गति से नहीं हो रहा है। जिसका सबसे बड़ा कारन है नेचुरल गैस आयत कम होना।  दअसल दक्षिण एशियाई देशों में यूरिया उत्पादन बहुत हद तक नेचुरल गैस पर निर्भर करता है। नेचुरल गैस का अधिकांश हिस्सा पश्चिम एशियाई देशों से आता है। यूरिया बनाने के लिए अमोनिया बनाना पड़ता है। इसे बनाने में गैस का उपयोग होता है। हार्मुज़ जलडमरूमध्य के बंद होने के बाद से कई उत्पादकों को अपने कारखाने बंद करने पड़े। वही कुछ कारखानों में काम बहुत कम हो रहा है। </p>
<p><strong><img src="https://www.dowjones.com/wp-content/uploads/2026/03/Strait-of-Hormuz-WP.webp?w=1024" alt="वैश्विक | खाद्य सुरक्षा पर ईरान ..."></img></strong></p>
<p><strong>कहां से आएगा यूरिया?</strong><br />सरकार ने कंपनियों को निर्देश दिया है कि वे यूरिया ऐसे देशों से खरीदें जहां से सुरक्षित तरीके से आपूर्ति हो सके। इसलिए अब ये यूरिया रूस, मिस्र, नाइजीरिया, इंडोनेशिया और मलेशिया जैसे देशों से आ सकता है। सरकार का प्रयास कि ये खाद समय पर पहुँच जाये ताकि  किसानो को परेशनी का सामना ना करना पड़े। इससे यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि समय पर पर्याप्त मात्रा में खाद देश में पहुंच सके। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>खेती-किसानी</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 24 Apr 2026 12:44:02 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[ANJU SHARMA]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>आकेड़ा झील बना आफत: 5000 एकड़ जमीन जलमग्न, तीन साल से किसान बेहाल, मुआवजे की मांग तेज</title>
                                    <description><![CDATA[<p>नूंह जिले के आकेड़ा झील के आसपास जलभराव की समस्या अब किसानों के लिए गंभीर संकट बन चुकी है।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.deshrojana.com/haryana/nuh-mewat/akeda-lake-has-become-a-disaster-5000-acres-of-land/article-812"><img src="https://www.deshrojana.com/media/400/2026-04/whatsapp-image-2026-04-24-at-12.07.36-am.jpeg" alt=""></a><br /><p>नूंह (मेवात): <br />नूंह जिले के आकेड़ा झील के आसपास जलभराव की समस्या अब किसानों के लिए गंभीर संकट बन चुकी है। पिछले करीब तीन वर्षों से लगातार बनी इस समस्या ने क्षेत्र की कृषि व्यवस्था को पूरी तरह चरमरा दिया है। किसानों के अनुसार करीब 5000 एकड़ से अधिक उपजाऊ कृषि भूमि पानी में डूबी हुई है, जिससे न केवल फसल उत्पादन ठप हो गया है, बल्कि किसानों की आर्थिक स्थिति भी बेहद खराब हो गई है। हालात ऐसे हैं कि अपनी ही जमीन होने के बावजूद किसान खेती करने में असमर्थ हैं और उन्हें बाजार से अनाज खरीदने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।<br />स्थानीय किसानों का कहना है कि आकेड़ा झील के आसपास बसे 5 से 6 गांव इस समस्या से बुरी तरह प्रभावित हैं। खेतों में लगातार पानी भरे रहने से जमीन बंजर होती जा रही है और खेती योग्य नहीं बची है। गेहूं, सरसों और अन्य रबी-खरीफ फसलों की बुवाई तक संभव नहीं हो पा रही है। इससे किसानों की आय का प्रमुख स्रोत खत्म हो चुका है और वे कर्ज के बोझ तले दबते जा रहे हैं।</p>
<p><img src="https://www.deshrojana.com/media/2026-04/whatsapp-image-2026-04-24-at-12.07.36-am.jpeg" alt="WhatsApp Image 2026-04-24 at 12.07.36 AM" width="1599" height="899"></img><br />आकेड़ा निवासी किसान खुर्शीद ने बताया कि पिछले तीन सालों से हालात जस के तस बने हुए हैं। उन्होंने कहा कि कई बार अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को समस्या से अवगत कराया गया, लेकिन आज तक न तो जल निकासी की व्यवस्था की गई और न ही किसी प्रकार का मुआवजा मिला। “हमारी जमीन पानी में डूबी है, फसल उगाना नामुमकिन हो गया है। मजबूरी में हमें बाहर से अनाज खरीदना पड़ रहा है,” उन्होंने दर्द बयां करते हुए कहा।<br />किसानों का कहना है कि बरसात के मौसम में समस्या और भी विकराल रूप ले लेती है। पानी का स्तर बढ़ने से नुकसान कई गुना बढ़ जाता है और खेत पूरी तरह तालाब में तब्दील हो जाते हैं। जल निकासी की कोई स्थायी व्यवस्था न होने के कारण हर साल यही स्थिति दोहराई जाती है।<br />समस्या को और गंभीर बनाता है अरावली क्षेत्र की नजदीकी, जहां से जंगली जानवर खेतों की ओर रुख कर रहे हैं। किसानों के अनुसार फसल बची-खुची हो तो उसे भी जानवर नुकसान पहुंचा देते हैं, जिससे उनकी परेशानियां और बढ़ जाती हैं।<br />किसानों ने आरोप लगाया कि राज्यपाल सहित कई बड़े अधिकारी और जनप्रतिनिधि क्षेत्र का दौरा कर चुके हैं और किसानों की समस्याएं भी सुनी गई हैं। कई बार जल निकासी के लिए आश्वासन भी दिए गए, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। इससे किसानों में भारी रोष व्याप्त है।<br />अब प्रभावित किसानों ने सरकार से स्पष्ट मांग की है कि या तो जलभराव की स्थायी निकासी की व्यवस्था की जाए या फिर पिछले तीन वर्षों में हुए नुकसान का उचित मुआवजा दिया जाए। किसानों का कहना है कि यदि जल्द ही समाधान नहीं निकला तो वे बड़ा आंदोलन करने को मजबूर होंगे।<br />आकेड़ा झील के आसपास की यह समस्या अब केवल किसानों का मुद्दा नहीं रह गई है, बल्कि यह प्रशासनिक लापरवाही और ग्रामीण संकट का प्रतीक बनती जा रही है। ऐसे में जरूरत है कि सरकार और प्रशासन तुरंत संज्ञान लेते हुए स्थायी समाधान की दिशा में ठोस कदम उठाए, ताकि किसानों को राहत मिल सके और क्षेत्र की कृषि व्यवस्था फिर से पटरी पर लौट सके।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>हरियाणा</category>
                                            <category>खेती-किसानी</category>
                                            <category>नूंह / मेवात</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 24 Apr 2026 00:19:02 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Desh Rojana Bureau]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>24 को लखनऊ में होगा उत्तर जोन का क्षेत्रीय कृषि सम्मेलन   कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने पत्रकारों से बातचीत में दी जानकारी</title>
                                    <description><![CDATA[<p>उत्तर जोन खेती का प्राण है। कृषि क्षेत्र में उत्तर प्रदेश ने अनेक सकारात्मक कदम उठाए हैं। यूपी के इस कदम के कारण केंद्रीय किसान कल्याण मंत्रालय के तत्वावधान में 24 अप्रैल (शुक्रवार) को सेंट्रम होटल में क्षेत्रीय कृषि सम्मेलन (उत्तर जोन) होगा।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.deshrojana.com/state/uttar-pradesh/lucknow/regional-agriculture-conference-of-north-zone-will-be-held-in/article-790"><img src="https://www.deshrojana.com/media/400/2026-04/uttar-pradesh.jpeg" alt=""></a><br /><p>लखनऊ: उत्तर जोन खेती का प्राण है। कृषि क्षेत्र में उत्तर प्रदेश ने अनेक सकारात्मक कदम उठाए हैं। यूपी के इस कदम के कारण केंद्रीय किसान कल्याण मंत्रालय के तत्वावधान में 24 अप्रैल (शुक्रवार) को सेंट्रम होटल में क्षेत्रीय कृषि सम्मेलन (उत्तर जोन) होगा। इसमें 9 राज्यों (उत्तर प्रदेश, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, चंडीगढ़, जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, पंजाब व दिल्ली) के कृषि मंत्री, उद्यान मंत्री, प्रमुख सचिव, निदेशक, एफपीओ, प्रगतिशील किसान, कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक, भारत सरकार के अधिकारी आदि रहेंगे। उद्घाटन सत्र में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान, राज्यमंत्री भागीरथ चौधरी व रामनाथ ठाकुर भी सम्मिलित होंगे। </p>
<p>यह जानकारी कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने दी। श्री शाही ने गुरुवार को लोकभवन में पत्रकारों से बातचीत में आयोजन के संबंध में विस्तृत जानकारी दी।  </p>
<img src="https://www.deshrojana.com/media/2026-04/uttar-pradesh.jpeg" alt="uttar pradesh" width="1600" height="1163"></img>
लखनऊ में आयोजित जोनल कॉन्फ्रेंस-2026 के संबंध में प्रेस वार्ता करते कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही

<p>उन्होंने बताया कि इसमें कृषि ऋण, किसान क्रेडिट कार्ड, एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर फंड की प्रगति, राज्यों के किसानों, केंद्र के स्टार्टअप, एफपीओ, नाबार्ड, बैंकों, मिल मालिकों, प्रसंस्करण इकाइयों, बागवानी की संभावनाओं, दलहन आत्मनिर्भरता मिशन की प्रगति, बीज एजेंसियों, खरीद एजेंसियों, सिंचाई कंपनियों, राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन आदि पर चर्चा व समीक्षा भी होगी। </p>
<h5><strong>अपने बेहतर कार्यों के बारे में प्रस्तुतिकरण देंगे अन्य राज्य </strong></h5>
<p>कृषि मंत्री ने बताया कि किसानों के कल्याण व आमदनी को लेकर विभिन्न राज्यों ने बेहतर कार्य किया है। वे अपने कार्यों का प्रस्तुतिकरण देकर अन्य राज्यों को भी अवगत कराएंगे। उत्तर प्रदेश के अंदर गन्ने के साथ इंटरक्रॉपिंग शुरू कराई गई है। इसके साथ ही धान की सीधी बोआई (डीएसआर) विधि को लेकर भी प्रस्तुतिकरण होगा। भारत सरकार ने सर्वोत्तम पद्धति मानते हुए इसे किसानों के हित का भी बताया है। वहीं पंजाब सरकार ने धान के फसल विविधीकरण की पद्धति, हिमाचल व उत्तराखंड ने बागवानी के क्षेत्र में विशेष पद्धति अपनाई है। इसके साथ ही कृषि के क्षेत्र में अन्य राज्यों के विभिन्न सकारात्मक कार्यों की भी जानकारी आदान-प्रदान होगी। </p>
<h6><strong>किसानों को सामर्थ्यवान बनाने पर भी होगी विस्तृत चर्चा</strong></h6>
<p>सम्मेलन में नकली कीटनाशकों, उर्वरकों की कालाबाजारी पर नियंत्रण, प्रभावी वितरण, इसके विकल्पों को बढ़ावा देने, संतुलित उपयोग, रासायनिक फर्टिलाइजर की जगह पर अल्टरनेटिव फर्टिलाइजर के प्रयोग को लेकर भी पर विस्तृत चर्चा व समीक्षा भी होगी। सम्मेलन में उत्तर जोन के लिए आगे क्या पॉलिसी बनाई जाए और इसके जरिए किसानों को कैसे सामर्थ्यवान व आर्थिक रूप से सक्षम बनाया जा सके, इस पर भी चर्चा होगी। </p>
<h6><strong>यूरिया की खपत कम कराने के लिए लगभग 40 हजार कुंतल ढेंचे का बीज कराएंगे उपलब्ध</strong></h6>
<p>कृषि मंत्री ने एक सवाल के जवाब में बताया कि उत्तर प्रदेश में उर्वरक की कोई समस्या नहीं है। उत्तर प्रदेश में 20 लाख मीट्रिक टन से अधिक फर्टिलाइजर है। इसमें साढ़े 11 लाख एमटी यूरिया है। उन्होंने कहा कि सरकार ने तय किया है कि लगभग 40 हजार कुंतल ढेंचे का बीज किसानों को उपलब्ध कराएगी, जिससे यूरिया की 20 प्रतिशत खपत कम होगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>खेती-किसानी</category>
                                            <category>उत्तरप्रदेश</category>
                                            <category>लखनऊ</category>
                                    

                <link>https://www.deshrojana.com/state/uttar-pradesh/lucknow/regional-agriculture-conference-of-north-zone-will-be-held-in/article-790</link>
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                <pubDate>Thu, 23 Apr 2026 17:52:46 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Desh Rojana Bureau]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>फसल खरीद व उठान आदि में असहयोगी अधिकारियों-कर्मियों-ट्रांसपोर्टरों के खिलाफ अपनाएं जीरो टॉलरेंस की नीति: उपायुक्त</title>
                                    <description><![CDATA[<p>उपायुक्त डा. हरीश कुमार वशिष्ठ ने कड़े शब्दों में निर्देश दिए कि फसल खरीद-उठान आदि कार्यों में असहयोग बरतने वाले अधिकारियों-कर्मचारियों तथा ट्रांसपोर्टरों के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति अपनायें।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.deshrojana.com/haryana/palwal/deputy-commissioner-should-adopt-the-policy-of-zero-tolerance-against/article-777"><img src="https://www.deshrojana.com/media/400/2026-04/whatsapp-image-2026-04-23-at-12.19.18-am-(1).jpeg" alt=""></a><br /><p>पलवल:<br />उपायुक्त डा. हरीश कुमार वशिष्ठ ने कड़े शब्दों में निर्देश दिए कि फसल खरीद-उठान आदि कार्यों में असहयोग बरतने वाले अधिकारियों-कर्मचारियों तथा ट्रांसपोर्टरों के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति अपनायें। उन्होंने सख्त निर्देश दिए कि उचित प्रकार से उठान कार्य न करने वाले ट्रांसपोर्टरों को ब्लैक लिस्ट करवायें।<br />रबी सीजन के अंतर्गत गेहूं की फसल की आवक-खरीद-उठान-भुगतान आदि की समीक्षा के लिए बुधवार को लघु सचिवालय में संबंधित अधिकारियों की बैठक का आयोजन किया गया, जिसकी अध्यक्षता उपायुक्त डा. हरीश कुमार वशिष्ठ कर रहे थे। उपायुक्त ने बेहद विस्तारपूर्वक फसल खरीद संबंधी कार्यों की समीक्षा की। उन्होंने विशेष रूप से फसल उठान को लेकर पड़ताल की। इस पर विभिन्न मंडियों व खरीद केंद्रों के कई नोडल अधिकारियों ने ट्रांसपोर्टरों की शिकायत की, जिसमें फसल उठान कार्य में ढिलाई की बात रखी गई। उपायुक्त ने इस पर कड़ा संज्ञान लेते हुए कड़े निर्देश दिए कि ऐसे ट्रांसपोर्टरों के विरूद्घ ब्लैक लिस्ट की कार्रवाई अमल में लायें। बार-बार निर्देश देने के बावजूद उचित प्रकार से उठान कार्य न करने वाले ट्रांसपोर्टरों को ब्लैक लिस्ट करवाने की सिफारिश करें।</p>
<p><img src="https://www.deshrojana.com/media/2026-04/whatsapp-image-2026-04-23-at-12.19.18-am-(1).jpeg" alt="WhatsApp Image 2026-04-23 at 12.19.18 AM (1)" width="1280" height="671"></img><br />बैठक के दौरान एसडीएम होडल ने एक खरीद एजेंसी के आला अधिकारी की शिकायत की कि वे उनके द्वारा बुलाई गई बैठक से नदारद रहे, जिस पर उपायुक्त ने निर्देश दिए कि वे संबंधित अधिकारी को चार्जशीट करने के लिए लिखें। उपायुक्त ने स्पष्टï किया कि फसल खरीद व उठान आदि कार्यों में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार्य नहीं है। साथ ही उन्होंने एक अन्य नोडल अधिकारी की शिकायत पर एएफएसओ को भी चार्जशीट करने के निर्देश दिए। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे नियमित रूप से फसल खरीद व उठान संबंधी रिपोर्ट प्रेषित करें।<br />उपायुक्त डा. हरीश कुमार वशिष्ठ ने अनाज मंडियों व खरीद केंद्रों के नोडल अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे रोजाना एक बार उन्हें आवंटित मंडी तथा खरीद केंद्र का दौरा अवश्य करें। इससे वास्तविक स्थिति की जानकारी मिलेगी, जिससे आवश्यक कदम उठाने में मदद मिलेगी। इस दौरान जिला परिषद के सीईओ जितेंद्र कुमार, पलवल के एसडीएम भूपेंद्र सिंह, होडल की एसडीएम बलीना, हथीन के एसडीएम हरीराम, एमडी शुगर मिल द्विजा, नगराधीश प्रीति रावत, जिला राजस्व अधिकारी बलराज दांगी, डीडीपीओ उपमा अरोड़ा, डीडीए बाबूलाल आदि अधिकारी-कर्मचारी मौजूद थे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>हरियाणा</category>
                                            <category>खेती-किसानी</category>
                                            <category>पलवल</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 23 Apr 2026 00:33:54 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Desh Rojana Bureau]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title> भारतीय वैज्ञानिकों ने बनाई जादुई छड़ी, डर कर दूर भाग जाएंगे सांप !</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>अक्सर देखा जाता है कि किसान जब खेतों में काम करने जाते हैं तो सांप उन्हें काट लेते हैं। आये दिन ऐसी घटनाएं होती रहती हैं, जिस वजह से किसान कई बार अपनी जान भी गवां देते हैं। लेकिन अब भारतीय वैज्ञानिकों ने किसानों के लिए ऐसी जादुई छड़ी बनाई है। जिसे देखते ही सांप दूर भाग जायेंगे।  </strong></p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.deshrojana.com/farming/indian-scientists-have-created-a-magic-wand-that-will-scare/article-764"><img src="https://www.deshrojana.com/media/400/2026-04/screenshot-2026-04-22-164318.png" alt=""></a><br /><p><span style="background-color:rgb(251,238,184);"><strong><img src="https://www.deshrojana.com/media/2026-04/screenshot-2026-04-22-164318.png" alt="Screenshot 2026-04-22 164318" width="952" height="465"></img></strong></span></p>
<p> </p>
<p><strong>कहानी किसान की </strong><br />चलिए आपको एक कहानी ये कहानी सुनते हैं, कहानी एक किसान की है, जिनका नाम रामलाल है। एक बार रामलाल रात के समय खेतों में पानी लगाने गए थे। वो अपने खेत में घुसे ही थे कि खेत में पड़ा सांप उन्हें दिखाई ही नहीं दिया और सांप ने उनके पैर में काट लिया रामलाल ने ध्यान से देखा तो एक ज़हरीला सांप रेंगते हुए उनके सामने से निकल गया। उन्होंने तुरंत अपना फ़ोन निकला और अपने छोटे भाई फोन कर दिया। छोटा भाई भी तत्परता दिखाते हुए उन्हें हॉस्पिटल लेकर पहुंचा जहाँ रामलाल की जान बच गई। ये कोई एक दिन बात नहीं है किसानों के साथ अक्सर ऐसा होता रहता है। लेकिन सब इतने खुश किस्मत नहीं होते, कई बार लोगों को अपनी जान भी गवानी पड़ जाती है।  </p>
<p>इसी को देखते हुए भारतीय वैज्ञानिकों ने एक स्मार्ट छड़ी बनाई है। यह छड़ी 100 मीटर दूर से ही सांप-बिच्छु का पता लगा सकती है। इस छड़ी में स्पेशल सेंसर लगे होते हैं। यह छड़ी कंपन करके किसानों को खतरे से आगाह करती है। </p>
<p><strong><img src="https://www.deshrojana.com/media/2026-04/screenshot-2026-04-22-164604.png" alt="Screenshot 2026-04-22 164604" width="936" height="708"></img></strong></p>
<p><strong>शिवराज सिंह ने बताई किसान मित्र छड़ी की विशेषता </strong><br />देश में हर साल सांपों के काटने की घटनाएं किसानों के लिए बड़ी चिंता बनी रहती हैं, खासकर तब जब वे रात में खेतों में सिंचाई या काम के लिए जाते हैं। ऐसे में अब भारतीय वैज्ञानिकों ने एक अनोखी तकनीक विकसित की है, जो किसानों को सांप और अन्य जहरीले जीवों से बचाने में मदद करेगी। इस नई खोज का नाम ‘किसान मित्र छड़ी’ है, जो करीब 100 मीटर दूर से ही सांपों की मौजूदगी का पता लगा सकती है। रायसेन के उन्नत कृषि महोत्सव में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इस छड़ी के बारे में लोगों को जानकारी दी।</p>
<p><strong>ऐसे काम करती है स्मार्ट छड़ी </strong><br />आपको बता दें कि मध्य प्रदेश के रायसेन में आयोजित उन्नत कृषि महोत्सव के दौरान इस खास उपकरण की जानकारी देते हुए केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इसकी विशेषतायें बताई थी। उन्होंने कहा, था कि  यह किसान मित्र छड़ी सांप के काटने से होने वाली दुर्घटन पर रोक लगाएगी।।आपको बता कि यह छड़ी सामान्य डंडे जैसी दिखती है, लेकिन इसमें एक विशेष तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। किसान जब खेत या जंगल में जाएं, तो इसे जमीन पर रखकर बटन दबाना होता है। अगर आसपास सांप या कोई जहरीला जीव मौजूद होता है, तो यह छड़ी तेज कंपन करने लगती है। इसके जरिए किसान को पहले ही खतरे का संकेत मिल जाता है और वह सतर्क होकर उस जगह से दूर रह सकता है। और तो और इस छड़ी का उपयोग भी बेहद आसान है।</p>
<p><img src="https://www.deshrojana.com/media/2026-04/screenshot-2026-04-22-164236.png" alt="Screenshot 2026-04-22 164236" width="936" height="564"></img></p>
<p><strong>भारत में हर साल होती हैं 50 से 60 हज़ार लोगो की मौत </strong><br />विशेषज्ञों की माने तो भारत में हर साल 30 से 40 लाख साप के काटे जाने के मामले सामने आते हैं। उनमे से करीब 60 हजार लोगों की मौत हो जाती है। इनमें बड़ी संख्या किसानों की होती है। देश में करीब 350 प्रकार के सांप पाए जाते हैं, जिनमें से लगभग 10 प्रतिशत ही जहरीले होते हैं, लेकिन समय पर इलाज न मिलने पर ये जानलेवा साबित हो सकते हैं।</p>
<p>ऐसे में ये स्मार्ट छड़ी किसानों के लिए एक बड़ी राहत ला सकती है। यह न केवल उनकी सुरक्षा बढ़ाएगी, बल्कि खेतों में काम करते समय उनके आत्मविश्वास को भी मजबूत करेगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>खेती-किसानी</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 22 Apr 2026 16:47:51 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[ANJU SHARMA]]></dc:creator>
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