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                <title>सम्पादकीय - देश रोजाना</title>
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                <title>युवा आंदोलन ने दिखाई हिन्दुस्तान की असली तस्वीर: संजय मग्गू</title>
                                    <description><![CDATA[<p>अंतत: दिल्ली के जंतर मंतर पर युवाओं का पिछले 36 दिनों से चल रहा प्रदर्शन समाप्त हो गया। धमेंद्र प्रधान ने शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया है और उसे स्वीकार भी कर लिया गया है। वहीं युवाओं की दो अन्य मांगें नीट पीड़ितों को एक-एक करोड़ रुपये और युवाओं पर दर्ज केस की वापसी भी मान ली गई है।</p>
<p>36 दिन चले युवाओं के इस आंदोलन ने यह साबित कर दिया है कि यदि युवा अपनी जिद पर अड़ जाएं, तो आसमान में भी सुराख कर सकते हैं। यह वही सरकार है जिसके रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने कहा</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.deshrojana.com/top-news/youth-movement-showed-the-real-picture-of-india-sanjay-maggu/article-3124"><img src="https://www.deshrojana.com/media/400/2026-07/img-20260726-wa0005.jpg" alt=""></a><br /><p>अंतत: दिल्ली के जंतर मंतर पर युवाओं का पिछले 36 दिनों से चल रहा प्रदर्शन समाप्त हो गया। धमेंद्र प्रधान ने शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया है और उसे स्वीकार भी कर लिया गया है। वहीं युवाओं की दो अन्य मांगें नीट पीड़ितों को एक-एक करोड़ रुपये और युवाओं पर दर्ज केस की वापसी भी मान ली गई है।</p>
<p>36 दिन चले युवाओं के इस आंदोलन ने यह साबित कर दिया है कि यदि युवा अपनी जिद पर अड़ जाएं, तो आसमान में भी सुराख कर सकते हैं। यह वही सरकार है जिसके रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने कहा था कि यह एनडीए की सरकार है। यूपीए सरकार की तरह हमारे यहां इस्तीफे नहीं होते हैं। हालांकि इससे पहले 2018 में विदेश राज्य मंत्री एमजे अकबर का इस्तीफा हुआ था। तब दुनियाभर में 'मी टू' आंदोलन चल रहा था और अकबर पर पत्रकारिता के दिनों में यौन उत्पीड़न के आरोप लगे थे। देश के युवाओं की यह बहुत बड़ी सफलता है।</p>
<p>आंदोलन के दौरान हिंदुस्तान की सच्ची तस्वीर उभर कर सामने आई। युवाओं ने जाति, धर्म, भाषा, प्रांत जैसी भावनाओं से ऊपर उठकर लड़ाई लड़ी और सफलता पाई। उन्होंने बता दिया कि जब सबके उद्देश्य साझे हों, तो संकीर्णताएं कोई मायने नहीं रखती हैं। जंतर मंतर पर हजारों लड़कियां हजारों लड़कों के बीच दिन रात रहीं, लेकिन किसी के साथ बदसलूकी नहीं हुई।</p>
<p>लाठीचार्ज के दौरान पुलिसकर्मियों पर जरूर ऐसे आरोप लगे। हिंदुस्तान की असली झांकी देखकर मन को यह आश्वस्ति जरूर हुई कि कोई भी कितनी जातीय और सांप्रदायिक मतभेद पैदा करने की कोशिश करे, लेकिन भारत के लोग इसे स्वीकार नहीं करेंगे। सांप्रदायिक भेदभाव हिंदुस्तान की जनता के डीएनए में ही नहीं है। वह कुछ लोगों के बहकावे में आकर भले ही क्षणिक रूप से विचलित हो सकती है, लेकिन यह उसका स्थायी भाव नहीं है। देश की जनता ने भी इन युवाओं का भरपूर समर्थन किया। बहुत सारे लोग ऐसे थे जो युवाओं का समर्थन करने के लिए जंतर मंतर आना चाहते थे, लेकिन अपनी निजी और व्यावसायिक मजबूरी के चलते नहीं आ पाए। ऐसे लोगों ने दूसरी तरह से मदद करके अपनी उपस्थिति दर्शाई।</p>
<p>हजारों छात्रों को पिछले छत्तीस दिनों तक खाने-पीने, रहने की कोई दिक्कत नहीं हुई। देशभर से लोगों ने भरपूर सहायता भेजी। किसी ने दवा भेजा, तो किसी ने पानी। किसी ने आंदोलनकारी युवाओं के लिए पिज्जा बर्गर की व्यवस्था की, तो किसी ने कोल्ड ड्रिंक की। गुरुद्वार से लंगर आए, तो मुसलमानों ने खाने के पैकेट भिजवाए। हिंदुओं ने खाने-पीने की भरपूर व्यवस्था की। जैसे सबमें होड़ लगी हो कि इन युवाओं की ज्यादा से ज्यादा सहायता कौन करता है। असली हिंदुस्तान यही है। सबने कंधे से कंधा मिलाकर अपनी लड़ाई लड़ी।  </p>
<p>लड़की या लड़के का भेद भुलाकर, जाति धर्म की दीवारों को जमींदोज करके लड़ने वाले युवाओं को आज अपने उद्देश्य में सफलता मिल गई। अब विजयी युवा घर जाकर जी जान से पढ़ाई करें और अपना अभीप्सित लक्ष्य हासिल करें, यही कामना है।</p>
<img src="https://www.deshrojana.com/media/2026-07/img-20260726-wa0005.jpg" alt="IMG-20260726-WA0005" width="500" height="512"></img>
संजय मग्गू
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                            <category>सम्पादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 25 Jul 2026 21:40:58 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>यह जेन जेड है जनाब, प्यार से समझाइए, मान जाएंगे: संजय मग्गू</title>
                                    <description><![CDATA[<p>सैनेटरी नैपकिन से मेरे पीरियड्स इतने लीक नहीं होते, जितने सरकारी संस्थाओं में पेपर लीक होते हैं। दिल्ली के जंतर मंतर पर खड़ी एक जेन जेड जब यह कह रही थी, तो उसके चेहरे पर न कोई  झिझक थी और न ही किसी किस्म का तनाव। उसे इस बात की चिंता नहीं थी कि उसके मां-बाप, भाई-बहन, मोहल्ले-टोले वाले जब यह वीडियो देखेंगे तो क्या सोचेंगे। सच कहें तो इस जेन जेड का यह कथन उस भ्रष्ट शिक्षा व्यवस्था के गाल पर एक करारा तमाचा है जो पिछले सत्तर पचहत्तर साल से पारदर्शी परीक्षा कराने का दावा करता आ रहा</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.deshrojana.com/top-news/this-is-gen-z-sir-explain-it-with-love-sanjay/article-3113"><img src="https://www.deshrojana.com/media/400/2026-07/neet1.jpg" alt=""></a><br /><p>सैनेटरी नैपकिन से मेरे पीरियड्स इतने लीक नहीं होते, जितने सरकारी संस्थाओं में पेपर लीक होते हैं। दिल्ली के जंतर मंतर पर खड़ी एक जेन जेड जब यह कह रही थी, तो उसके चेहरे पर न कोई  झिझक थी और न ही किसी किस्म का तनाव। उसे इस बात की चिंता नहीं थी कि उसके मां-बाप, भाई-बहन, मोहल्ले-टोले वाले जब यह वीडियो देखेंगे तो क्या सोचेंगे। सच कहें तो इस जेन जेड का यह कथन उस भ्रष्ट शिक्षा व्यवस्था के गाल पर एक करारा तमाचा है जो पिछले सत्तर पचहत्तर साल से पारदर्शी परीक्षा कराने का दावा करता आ रहा है।</p>
<p><img src="https://www.deshrojana.com/media/2026-07/neet1.jpg" alt="neet1" width="1280" height="720"></img></p>
<p>पेपर लीक की शुरुआत कोई आज नहीं हुई है और न आज के बाद बंद हो जाएगी। लेकिन शिक्षा व्यवस्था के खिलाफ मुट्ठियां तानकर शायद पहली बार जेन जेड खड़ा हुआ है। इससे पहले संपूर्ण क्रांति का नारा बुलंद कर जय प्रकाश नारायण ने इंदिरा शासन के खिलाफ युवाओं को खड़ा किया था। उस आंदोलन से निकले छात्र नेताओं ने बाद में जिस तरह भारतीय राजनीति की ऐसी-तैसी कर दी, वह सबके सामने है। लेकिन यह जेन जेड है। यह पुस्तकालय नहीं जाती है। किताबें भी नहीं पढ़ती है। इसकी लाइब्रेरी और पुस्तकें मोबाइल में ही है। यह 1997 के बाद जन्मे हैं। इनकी उम्र बीस से सत्ताइस के बीच है। इनकी भाषा में शर्म या लिहाज जैसी चीजें नहीं हैं। बदतमीज पर उतर आएं, तो यह अपने मां-बाप को भी भरे बाजार बेइज्जत कर दें। इन्हें राजनीति से कोई लेना-देना नहीं है। यह किसी को भी खुलेआम गाली देने की कूबत रखते हैं। इन्हें पुलिस, जेल, ईडी, सीआईडी का भी भय नहीं है। इनके जेब में टका नहीं है, लेकिन इनमें साहस इतना है कि यह पहाड़ से भी टकरा जाएं।</p>
<p>बस, इनकी समझ में आना चाहिए कि पहाड़ से टकराना उचित है, जायज है। दिल्ली के जंतर-मंतर पर मौजूद युवाओं को जरा गौर से देखिए। वह आज उस शासन सत्ता से टकराने निकले हैं जिसे भारी भरकम मतों से उन्होंने ही सत्ता सौंपी थी। झोली भर-भरकर वोट देकर। इनका पाखंड से दूर-दूर तक नाता नहीं है। इनके चेहरे पर किसी किस्म का खौफ भी नहीं है। पुलिस की लाठियों से चोट खाकर गिरे जेन जेड के चेहरे पर कहीं भी कातरता, भय या बेचैनी नहीं नजर आई होगी। यह साहस इनमें ही हो सकता है कि यह पुलिस से जाकर पूछें कि आंसू गैसे गोले लाए हैं क्या? मानता हूं, जेन जेड बदतमीज हैं, बदमिजाज हैं।</p>
<p>केंद्र सरकार और पीएम के संदर्भ में ऐसी-ऐसी बातें कह रहे हैं जो इन्हें कतई नहीं कहना चाहिए। इन्हें इस बात का एहसास तक नहीं है कि इन्हें क्या कहना चाहिए और क्या नहीं। लेकिन इनमें अपने भविष्य को लेकर जो बेचैनी है, जो चिंता है, जो घबराहट है, वह नाजायज नहीं है। भविष्य की अनिश्चितता ने इनमें जो साहस पैदा किया है, उस साहस को आप नकार नहीं सकते हैं।</p>
<p>इनका लक्ष्य बिल्कुल साफ है, साफ सुथरी शिक्षा व्यवस्था। ऐसी हालत में अगर बल प्रयोग करके इन्हें रास्ते पर लाने की बात सोची गई, तो हालात और बिगड़ सकते हैं। अहंकार, सत्ता का मद और शक्तिशाली होने का गुमान त्यागकर बड़े प्रेम से इनसे बात करनी होगी। भरोसा दिलाना होगा कि भविष्य में शिक्षा व्यवस्था में आमूलचूल परिवर्तन होगा। जेन जेड मान जाएंगे</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                            <category>सम्पादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 25 Jul 2026 12:24:32 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[NELOFER HASHMI]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>स्टीम से हाइड्रोजन तक भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन जींद से चलेगी विकसित हरियाणा - विकसित भारत</title>
                                    <description><![CDATA[<p>भारतीय रेलवे का इतिहास केवल पटरियों के विस्तार की कहानी नहीं, बल्कि तकनीकी प्रगति और नवाचार की निरंतर यात्रा का दस्तावेज़ है। भाप से शुरू हुआ यह सफर डीज़ल और बिजली के पड़ावों से गुज़रता हुआ अब हरित ऊर्जा के नए युग में प्रवेश कर रहा है।</p>
<p>17 जुलाई 2026 को हरियाणा का जींद इतिहास रचेगा, जब प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन को हरी झंडी दिखाएंगे। जींद–सोनीपत रेलखंड से शुरू होने वाली यह सेवा तकनीकी नवाचार, ऊर्जा आत्मनिर्भरता और पर्यावरणीय ज़िम्मेदारी को एक साथ जोड़ेगी।</p>
<p><img src="https://www.deshrojana.com/media/2026-07/pm-sir-photo.jpeg" alt="PM sir photo" width="1200" height="1200" /></p>
<p>  </p>
<p>जलवायु परिवर्तन और ऊर्जा सुरक्षा आज वैश्विक चुनौतियां हैं, जिनके चलते</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.deshrojana.com/top-news/from-steam-to-hydrogen-indias-first-hydrogen-train-will-run/article-2853"><img src="https://www.deshrojana.com/media/400/2026-07/pm-sir-photo.jpeg" alt=""></a><br /><p>भारतीय रेलवे का इतिहास केवल पटरियों के विस्तार की कहानी नहीं, बल्कि तकनीकी प्रगति और नवाचार की निरंतर यात्रा का दस्तावेज़ है। भाप से शुरू हुआ यह सफर डीज़ल और बिजली के पड़ावों से गुज़रता हुआ अब हरित ऊर्जा के नए युग में प्रवेश कर रहा है।</p>
<p>17 जुलाई 2026 को हरियाणा का जींद इतिहास रचेगा, जब प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन को हरी झंडी दिखाएंगे। जींद–सोनीपत रेलखंड से शुरू होने वाली यह सेवा तकनीकी नवाचार, ऊर्जा आत्मनिर्भरता और पर्यावरणीय ज़िम्मेदारी को एक साथ जोड़ेगी।</p>
<p><img src="https://www.deshrojana.com/media/2026-07/pm-sir-photo.jpeg" alt="PM sir photo" width="1280" height="1280"></img></p>
<p> </p>
<p>जलवायु परिवर्तन और ऊर्जा सुरक्षा आज वैश्विक चुनौतियां हैं, जिनके चलते परिवहन क्षेत्र को स्वच्छ और ऊर्जा-कुशल बनाना अनिवार्य हो गया है। भारतीय रेलवे ने भी व्यापक विद्युतीकरण, आधुनिक स्टेशन विकास और उन्नत सुरक्षा प्रणालियों से अपने आधुनिकीकरण को गति दी है। हाइड्रोजन ट्रेन इसी यात्रा की अगली कड़ी है।</p>
<p>इस बदलाव की शुरुआत हरियाणा से होना विशेष महत्व रखता है। जींद–सोनीपत खंड का चुनाव राज्य के मज़बूत बुनियादी ढांचे और परियोजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू करने की क्षमता का परिचायक है। औद्योगिक विकास, राष्ट्रीय राजमार्गों के विस्तार और नागरिक उड्डयन में हुए निवेश ने हरियाणा को राष्ट्रीय महत्व की परियोजनाओं का स्वाभाविक केंद्र बना दिया है।</p>
<h5>           <strong>  विकास के नए आयाम गढ़ता हरियाणा</strong></h5>
<p>प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व और डबल इंजन सरकार के समन्वित प्रयासों से हरियाणा में आधारभूत ढांचे, स्वास्थ्य, शिक्षा और परिवहन के क्षेत्र में अभूतपूर्व कार्य हो रहे हैं। 17 जुलाई को प्रधानमंत्री जी के कर-कमलों से ₹14,700+ करोड़ की परियोजनाओं का लोकार्पण एवं शिलान्यास होगा, जिनमें जींद–सोनीपत हाइड्रोजन ट्रेन, कुरुक्षेत्र एलिवेटेड रेलवे ट्रैक, भिवानी व नारनौल के चिकित्सा महाविद्यालय, दिल्ली –अम्बाला –कटरा हाईवे तथा अम्बाला– काला अम्ब और जींद–गोहाना नेशनल हाईवे शामिल हैं। साथ ही सिख संग्रहालय कुरुक्षेत्र और हांसी–बरवाला हाईवे का शिलान्यास भी प्रदेश के सांस्कृतिक और आधारभूत विकास को नई दिशा देगा। ये परियोजनाएं हरियाणा के आर्थिक विकास, स्वास्थ्य सेवाओं, यातायात, निवेश और रोजगार का सशक्त आधार बनेंगी और 'विकसित भारत' के संकल्प को साकार करेंगी।</p>
<h5>           <strong>  हाइड्रोजन ट्रेन — रेल तकनीक का भविष्य</strong></h5>
<p>हाइड्रोजन तकनीक फ्यूल सेल प्रणाली पर आधारित है, जिसमें संग्रहित हाइड्रोजन और वायुमंडलीय ऑक्सीजन की रासायनिक क्रिया से विद्युत ऊर्जा बनती है और केवल पानी व ऊष्मा उपोत्पाद के रूप में निकलती है — कोई प्रदूषणकारी गैस नहीं। यह उन रेलमार्गों के लिए विशेष रूप से कारगर है जहां पूर्ण विद्युतीकरण व्यावहारिक नहीं है, और जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता घटाने में मदद करती है।</p>
<p>भारतीय रेलवे ने परिचालन, सुरक्षा और ऊर्जा प्रबंधन में भी व्यापक बदलाव किए हैं। तेज़ विद्युतीकरण, स्वदेशी सुरक्षा प्रणालियां और नवीकरणीय ऊर्जा के बढ़ते उपयोग ने रेलवे को अधिक आधुनिक और पर्यावरण के प्रति ज़िम्मेदार बनाया है। हाइड्रोजन ट्रेन इसी दिशा की अगली कड़ी है, जो ऊर्जा सुरक्षा मज़बूत करने और आयातित ईंधन पर निर्भरता घटाने में सहायक होगी।</p>
<p>जर्मनी ने वाणिज्यिक हाइड्रोजन यात्री ट्रेन सेवा शुरू करके इस तकनीक को वैश्विक मान्यता दिलाई, और इसके बाद चीन सहित कई देशों ने भी इसके विकास व परीक्षण को गति दी है। भारत का यह कदम दर्शाता है कि देश केवल वैश्विक बदलावों का अनुसरण नहीं कर रहा, बल्कि भविष्य की परिवहन प्रणालियों के विकास में सक्रिय भागीदारी की दिशा में आगे बढ़ रहा है। जींद–सोनीपत सेवा भारतीय इंजीनियरिंग क्षमता और स्वच्छ ऊर्जा के प्रति प्रतिबद्धता का सशक्त उदाहरण बनेगी।</p>
<p>राष्ट्रीय ग्रीन हाइड्रोजन मिशन के अनुरूप रेल परिवहन में हाइड्रोजन तकनीक का समावेश ऊर्जा संक्रमण को तेज़ करेगा और भविष्य में उन रेल मार्गों के लिए भी नए विकल्प देगा जहां पारंपरिक विद्युतीकरण संभव नहीं है। हरियाणा का इस ऐतिहासिक पहल का पहला पड़ाव बनना राज्य के विकसित बुनियादी ढांचे और प्रभावी क्रियान्वयन क्षमता का प्रमाण है।</p>
<p>17 जुलाई को जब यह ट्रेन अपनी पहली यात्रा पर रवाना होगी, तो यह केवल यात्रियों को गंतव्य तक पहुंचाने का साधन नहीं, बल्कि भारतीय रेलवे की उस नई सोच का प्रतीक होगी जिसमें तकनीकी नवाचार और पर्यावरणीय संवेदनशीलता साथ-साथ आगे बढ़ते हैं। यह यात्रा आने वाले वर्षों में रेलवे के विकास को नई दिशा देगी और हरित, आधुनिक तथा आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को नई गति देने वाले एक महत्वपूर्ण पड़ाव के रूप में याद रखी जाएगी।</p>
<p> प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी की दूरदर्शी सोच ने हरियाणा को देश की सबसे बड़ी हरित तकनीकी पहल का प्रथम साक्षी बनाया है, और यह मेरे लिए हर्ष का विषय है। मैं मानता हूं कि यह प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व का ही परिणाम है कि आज हरियाणा विकास, नवाचार और आत्मनिर्भरता के मामले में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल हो गया है। हाइड्रोजन ट्रेन जैसी परियोजनाएं यह सिद्ध करती हैं कि प्रधानमंत्री जी सदैव देश को भविष्य की चुनौतियों के लिए पहले से तैयार करने में विश्वास रखते हैं। इस ऐतिहासिक अवसर पर मैं हरियाणा की जनता की ओर से प्रधानमंत्री जी का हार्दिक आभार व्यक्त करता हूं। मैं यह भी विश्वास दिलाता हूं कि राज्य सरकार प्रधानमंत्री जी के 'विकसित भारत' के संकल्प को साकार करने के लिए पूरी प्रतिबद्धता से कार्य करती रहेगी।</p>
<p><img src="https://www.deshrojana.com/media/2026-07/cm-sir-photo.jpeg" alt="cm sir photo" width="128" height="118"></img></p>
<p><strong>नायब सिंह सैनी</strong></p>
<p><strong>मुख्यमंत्री, हरियाणा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>हरियाणा</category>
                                            <category>सम्पादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 16 Jul 2026 13:43:49 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>प्रधानमंत्री मोदी का 18वां हरियाणा दौरा: विकास, हरित तकनीक और आधुनिक भारत की नई दिशा</title>
                                    <description><![CDATA[<p><img src="https://www.deshrojana.com/media/2026-07/chander-shekhar.jpeg" alt="chander shekhar" width="1200" height="1198" /></p>
<p><strong>प्रस्तुति : चन्द्र शेखर धरणी</strong><br /><strong>वरिष्ठ स्वतंत्र पत्रकार</strong></p>
<p>प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का 17 जुलाई का हरियाणा दौरा केवल एक राजनीतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि विकास, आधुनिक तकनीक और भविष्य की आधारभूत संरचना को नई दिशा देने वाला महत्वपूर्ण अवसर माना जा रहा है। वर्ष 2014 में केंद्र की सत्ता संभालने के बाद प्रधानमंत्री मोदी अब तक 17 बार हरियाणा का दौरा कर चुके हैं और 17 जुलाई को उनका यह 18वां दौरा होगा। पिछले 12 वर्षों का रिकॉर्ड बताता है कि जब-जब प्रधानमंत्री हरियाणा आए हैं, तब-तब प्रदेश को नई विकास परियोजनाओं, राष्ट्रीय योजनाओं और आधारभूत संरचना के क्षेत्र में बड़ी</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.deshrojana.com/top-news/prime-minister-modis-18th-visit-to-haryana-development-green-technology/article-2852"><img src="https://www.deshrojana.com/media/400/2026-07/chander-shekhar.jpeg" alt=""></a><br /><p><img src="https://www.deshrojana.com/media/2026-07/chander-shekhar.jpeg" alt="chander shekhar" width="1280" height="1198"></img></p>
<p><strong>प्रस्तुति : चन्द्र शेखर धरणी</strong><br /><strong>वरिष्ठ स्वतंत्र पत्रकार</strong></p>
<p>प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का 17 जुलाई का हरियाणा दौरा केवल एक राजनीतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि विकास, आधुनिक तकनीक और भविष्य की आधारभूत संरचना को नई दिशा देने वाला महत्वपूर्ण अवसर माना जा रहा है। वर्ष 2014 में केंद्र की सत्ता संभालने के बाद प्रधानमंत्री मोदी अब तक 17 बार हरियाणा का दौरा कर चुके हैं और 17 जुलाई को उनका यह 18वां दौरा होगा। पिछले 12 वर्षों का रिकॉर्ड बताता है कि जब-जब प्रधानमंत्री हरियाणा आए हैं, तब-तब प्रदेश को नई विकास परियोजनाओं, राष्ट्रीय योजनाओं और आधारभूत संरचना के क्षेत्र में बड़ी सौगातें मिली हैं।<br />इस बार का दौरा भी केवल हरियाणा तक सीमित नहीं रहेगा। इसका प्रभाव पंजाब, हिमाचल प्रदेश और पूरे उत्तर भारत के विकास पर दिखाई देगा। रेलवे, सड़क, स्वास्थ्य, हरित ऊर्जा, सांस्कृतिक विरासत और औद्योगिक विकास से जुड़ी कई महत्वाकांक्षी परियोजनाओं का शुभारंभ और लोकार्पण इस दौरे का प्रमुख आकर्षण रहेगा।</p>
<h6><strong>हरियाणा से शुरू हुई थी 'बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ' जैसी ऐतिहासिक पहल</strong></h6>
<p>हरियाणा प्रधानमंत्री मोदी की कई ऐतिहासिक राष्ट्रीय योजनाओं का साक्षी रहा है। 22 जनवरी 2015 को पानीपत की धरती से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 'बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ' अभियान की शुरुआत की थी। उस समय हरियाणा में गिरते लिंगानुपात को देखते हुए शुरू किया गया यह अभियान आज पूरे देश में महिला सशक्तिकरण का प्रतीक बन चुका है। विदेशों में बसे भारतीय समुदाय तक भी इस अभियान की सकारात्मक छाप पहुंची है। यह प्रधानमंत्री के हरियाणा से जुड़े विकासात्मक दृष्टिकोण का एक बड़ा उदाहरण माना जाता है।</p>
<h6><br /><strong>भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन बनेगी सबसे बड़ा आकर्षण</strong></h6>
<p>इस दौरे का सबसे महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक क्षण भारत की पहली हाइड्रोजन ईंधन सेल आधारित ट्रेन को हरी झंडी दिखाना होगा। जींद से शुरू होने वाली यह ट्रेन देश में हरित परिवहन क्रांति की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।<br />रेल मंत्रालय की इस महत्वाकांक्षी परियोजना के तहत ट्रेन डीजल के बजाय हाइड्रोजन फ्यूल सेल तकनीक से संचालित होगी। इसमें हाइड्रोजन और ऑक्सीजन की रासायनिक प्रक्रिया से बिजली उत्पन्न होगी तथा उत्सर्जन के रूप में केवल जलवाष्प निकलेगी। इससे प्रदूषण में कमी आएगी और भारत स्वच्छ एवं पर्यावरण-अनुकूल परिवहन प्रणाली की दिशा में आगे बढ़ेगा। यदि यह पायलट प्रोजेक्ट सफल रहता है तो भविष्य में ऐसी ट्रेनें देश के अन्य रेल मार्गों पर भी संचालित की जाएंगी।</p>
<h6><br /><strong>11 आधुनिक रेलवे स्टेशनों का होगा लोकार्पण</strong></h6>
<p>प्रधानमंत्री अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत विकसित 11 आधुनिक रेलवे स्टेशनों का भी लोकार्पण करेंगे। इनमें अंब अंदौरा, साहिबजादा अजीत सिंह नगर (मोहाली), कालका, आनंदपुर साहिब सहित कई प्रमुख स्टेशन शामिल हैं।<br />इन स्टेशनों पर आधुनिक प्रतीक्षालय, दिव्यांगजन अनुकूल सुविधाएं, लिफ्ट, एस्केलेटर, रैंप, टैक्टाइल पथ, डिजिटल सूचना प्रणाली, उन्नत पार्किंग, स्वच्छ शौचालय तथा यात्रियों के लिए बेहतर सुविधाएं विकसित की गई हैं।<br />हरियाणा के नरवाना रेलवे स्टेशन का लगभग 28.30 करोड़ रुपये की लागत से आधुनिकीकरण किया गया है, जबकि कालका रेलवे स्टेशन पर लगभग 31.42 करोड़ रुपये खर्च कर आधुनिक सुविधाएं विकसित की गई हैं। अमृत भारत स्टेशन योजना का उद्देश्य रेलवे स्टेशनों को भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप आधुनिक मल्टी-मॉडल ट्रांसपोर्ट हब के रूप में विकसित करना है।</p>
<h6><br /><strong>स्वास्थ्य सेवाओं को मिलेगी नई मजबूती</strong></h6>
<p>प्रधानमंत्री जींद से वर्चुअल माध्यम के जरिए भिवानी और नारनौल मेडिकल कॉलेजों का उद्घाटन भी करेंगे। विशेष रूप से महेंद्रगढ़ जिले के कोरियावास स्थित महर्षि च्यवन मेडिकल कॉलेज के शुभारंभ को लेकर राज्य सरकार ने व्यापक तैयारियां की हैं।<br />इन दोनों मेडिकल कॉलेजों के शुरू होने से दक्षिण हरियाणा और आसपास के क्षेत्रों के लाखों लोगों को उच्च स्तरीय चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध होंगी। साथ ही प्रदेश में मेडिकल शिक्षा का विस्तार होगा और नए डॉक्टर तैयार करने की क्षमता भी बढ़ेगी।</p>
<h6><br /><strong>कुरुक्षेत्र एलिवेटेड रेलवे ट्रैक से जाम से मिलेगी राहत</strong></h6>
<p>प्रधानमंत्री लगभग 447 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित 5.9 किलोमीटर लंबे कुरुक्षेत्र एलिवेटेड रेलवे ट्रैक का उद्घाटन भी करेंगे।<br />इस परियोजना से शहर के बीच स्थित पांच प्रमुख रेलवे फाटकों पर लगने वाले लंबे जाम से स्थायी राहत मिलेगी। इससे यातायात अधिक सुरक्षित और सुगम होगा तथा ईंधन और समय दोनों की बचत होगी। यह परियोजना धार्मिक नगरी कुरुक्षेत्र में आने वाले लाखों श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए भी बड़ी सुविधा साबित होगी।</p>
<h6><strong>सड़क संपर्क को मिलेगी नई रफ्तार</strong></h6>
<p>प्रधानमंत्री कई महत्वपूर्ण सड़क परियोजनाओं को भी गति देंगे। इनमें काला अंब ग्रीन फील्ड फोरलेन कॉरिडोर प्रमुख है, जो हरियाणा और हिमाचल प्रदेश के बीच औद्योगिक एवं व्यापारिक संपर्क को मजबूत करेगा। यह नया राजमार्ग अंबाला रिंग रोड से काला अंब तक पूरी तरह नए मार्ग पर विकसित किया गया है, जिससे पुराने मार्गों पर भारी वाहनों का दबाव कम होगा।<br />इसके अतिरिक्त दिल्ली-अमृतसर-कटरा एक्सप्रेसवे के हरियाणा खंड, जींद-गोहाना राष्ट्रीय राजमार्ग, हांसी-बरवाला फोरलेन परियोजना तथा बीकानेर-सिवानी-सोनीपत सड़क परियोजना जैसे कई महत्वपूर्ण कार्यों को भी नई गति मिलेगी। इन परियोजनाओं से यात्रा समय कम होगा, निवेश को बढ़ावा मिलेगा तथा प्रदेश की आर्थिक गतिविधियां और औद्योगिक विकास तेज होगा।</p>
<h6><br /><strong>सिख विरासत को मिलेगा आधुनिक स्वरूप</strong></h6>
<p>प्रधानमंत्री कुरुक्षेत्र के उमरी गांव में लगभग 124 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले हरियाणा के पहले सिख संग्रहालय एवं विरासत केंद्र की आधारशिला भी रखेंगे।<br />लगभग पांच एकड़ क्षेत्र में विकसित होने वाला यह आधुनिक संग्रहालय सिख गुरुओं के इतिहास, संस्कृति, परंपराओं और बलिदानों को अत्याधुनिक तकनीक के माध्यम से प्रदर्शित करेगा। यह धार्मिक पर्यटन और सांस्कृतिक संरक्षण की दिशा में हरियाणा का महत्वपूर्ण केंद्र बनेगा।</p>
<h6><strong>हरियाणा के विकास का नया अध्याय</strong></h6>
<p>प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का 17 जुलाई का हरियाणा दौरा केवल उद्घाटन और शिलान्यास तक सीमित नहीं है। यह हरित ऊर्जा, आधुनिक परिवहन, विश्वस्तरीय स्वास्थ्य सेवाओं, बेहतर सड़क एवं रेल नेटवर्क, सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और क्षेत्रीय विकास की व्यापक सोच का प्रतीक है।<br />पिछले 12 वर्षों में हरियाणा को केंद्र सरकार की अनेक महत्वाकांक्षी योजनाओं का लाभ मिला है। अब 18वां दौरा भी प्रदेश को नई विकास परियोजनाओं, आधुनिक तकनीक और भविष्य की आधारभूत संरचना से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर बनने जा रहा है। यदि घोषित परियोजनाएं निर्धारित समयसीमा में पूरी होती हैं तो उनका लाभ केवल हरियाणा ही नहीं, बल्कि पंजाब, हिमाचल प्रदेश और पूरे उत्तर भारत को भी लंबे समय तक मिलता रहेगा।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>हरियाणा</category>
                                            <category>सम्पादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 16 Jul 2026 13:26:06 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[NELOFER HASHMI]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>सीएम विंडो को मिलेगी नई रफ्तार, जवाबदेही होगी तय, जिला स्तर पर ही होगा अधिकतर शिकायतों का समाधान</title>
                                    <description><![CDATA[<p>हरियाणा सरकार ने मुख्यमंत्री कार्यालय की शिकायत निवारण व्यवस्था को अधिक प्रभावी और परिणाममुखी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए वरिष्ठ भाजपा नेता भोपाल सिंह खदरी को मुख्यमंत्री शिकायत निवारण सलाहकार नियुक्त किया है।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.deshrojana.com/top-news/cm-window-will-get-new-momentum-accountability-will-be-fixed/article-2851"><img src="https://www.deshrojana.com/media/400/2026-07/bjp.jpeg" alt=""></a><br /><p>हरियाणा सरकार ने मुख्यमंत्री कार्यालय की शिकायत निवारण व्यवस्था को अधिक प्रभावी और परिणाममुखी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए वरिष्ठ भाजपा नेता भोपाल सिंह खदरी को मुख्यमंत्री शिकायत निवारण सलाहकार नियुक्त किया है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की स्पष्ट मंशा है कि प्रदेश के नागरिकों की शिकायतों का समाधान तय समय सीमा में हो, व्यवस्था में पारदर्शिता बनी रहे और अधिकारियों की जवाबदेही सुनिश्चित की जाए। सरकार का उद्देश्य है कि मुख्यमंत्री विंडो एक बार फिर सुशासन और जनविश्वास का मजबूत माध्यम बने।</p>
<p><img src="https://www.deshrojana.com/media/2026-07/bjp.jpeg" alt="bjp" width="1280" height="1248"></img><br />नई जिम्मेदारी संभालने के बाद भोपाल सिंह खदरी ने बताया कि मुख्यमंत्री ने उन्हें स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि शिकायत निवारण व्यवस्था को पूरी सक्रियता के साथ पुनर्गठित किया जाए, ताकि आम नागरिकों को अपनी समस्याओं के समाधान के लिए बार-बार सरकारी कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें।</p>
<h6><br /><strong>जिला स्तर पर ही सुलझेंगी अधिकतर शिकायतें</strong></h6>
<p>भोपाल सिंह खदरी का कहना है कि उनकी पहली प्राथमिकता पूरे प्रदेश का दौरा कर शिकायत निवारण व्यवस्था का आकलन करना है। जिला प्रशासन, एसडीएम, उपायुक्तों और विभिन्न विभागों के अधिकारियों से संवाद स्थापित कर ऐसी व्यवस्था विकसित की जाएगी, जिससे अधिक से अधिक शिकायतों का समाधान जिला स्तर पर ही हो जाए।<br />उनका मानना है कि यदि स्थानीय प्रशासन समय पर कार्रवाई करे तो अधिकांश मामलों को मुख्यमंत्री कार्यालय तक भेजने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। इससे न केवल आम नागरिकों को त्वरित राहत मिलेगी बल्कि मुख्यमंत्री कार्यालय पर भी अनावश्यक दबाव कम होगा।</p>
<h6><br /><strong>सीएम विंडो की कार्यप्रणाली होगी और अधिक गतिशील</strong></h6>
<p>भोपाल सिंह खदरी के अनुसार मुख्यमंत्री विंडो की पूरी डिजिटल व्यवस्था पहले से मौजूद है। अब इसका और अधिक प्रभावी उपयोग करते हुए शिकायतों की लगातार निगरानी की जाएगी। प्रत्येक शिकायत का पंजीकरण, उसकी ऑनलाइन ट्रैकिंग तथा शिकायतकर्ता को मोबाइल के माध्यम से कार्रवाई की जानकारी उपलब्ध कराने की व्यवस्था पहले की तरह सक्रिय रहेगी।<br />इसके साथ ही अधिकारियों से निर्धारित समय में फीडबैक लेना अनिवार्य बनाया जाएगा, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि शिकायतों पर गंभीरता से कार्रवाई हो रही है। इससे जवाबदेही और पारदर्शिता दोनों मजबूत होंगी।</p>
<h6><br /><strong>समयबद्ध समाधान पर रहेगा सबसे अधिक जोर</strong></h6>
<p>मुख्यमंत्री शिकायत निवारण सलाहकार का कहना है कि शिकायतों के निपटारे में समय सीमा का विशेष ध्यान रखा जाएगा। यदि किसी शिकायत का समाधान हो जाता है तो इसकी सूचना शिकायतकर्ता को तत्काल दी जाएगी। वहीं यदि किसी कानूनी, तकनीकी या प्रशासनिक कारण से समाधान में समय लगेगा तो उसकी स्पष्ट जानकारी भी शिकायतकर्ता को उपलब्ध कराई जाएगी।<br />उनके अनुसार शिकायतकर्ता को अनिश्चितता में रखने की बजाय संवाद और पारदर्शिता के आधार पर पूरी प्रक्रिया संचालित की जाएगी।</p>
<h6><br /><strong>पुलिस, बिजली और राजस्व विभागों पर रहेगा विशेष फोकस</strong></h6>
<p>सरकार की योजना उन विभागों पर विशेष निगरानी रखने की है, जहां सबसे अधिक शिकायतें प्राप्त होती हैं। इनमें पुलिस, बिजली, राजस्व तथा जनसंपर्क से जुड़े अन्य विभाग प्रमुख हैं।<br />भोपाल सिंह खदरी ने बताया कि सभी विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ नियमित बैठकें होंगी। उन्हें मुख्यमंत्री की प्राथमिकताओं से अवगत कराया जाएगा और यह सुनिश्चित किया जाएगा कि अधिकारी संवेदनशीलता के साथ कार्य करें तथा आम नागरिकों को अनावश्यक परेशानियों का सामना न करना पड़े।</p>
<h6><br /><strong>मुख्यमंत्री की सहज उपलब्धता से बढ़ा जनविश्वास</strong></h6>
<p>भोपाल सिंह खदरी का मानना है कि मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की सबसे बड़ी विशेषता उनकी सहजता और जनता के प्रति संवेदनशीलता है। मुख्यमंत्री लगातार लोगों से मिलते हैं और उनकी समस्याएं स्वयं सुनते हैं। यही कारण है कि बड़ी संख्या में नागरिक सीधे मुख्यमंत्री तक अपनी शिकायतें लेकर पहुंचते हैं।<br />उनके अनुसार शिकायतों की अधिक संख्या किसी व्यवस्था की कमजोरी नहीं, बल्कि इस बात का प्रमाण है कि लोगों को मुख्यमंत्री पर भरोसा है। अब सरकार की जिम्मेदारी है कि उन शिकायतों का समयबद्ध और प्रभावी समाधान सुनिश्चित किया जाए।</p>
<h6><br /><strong>सुशासन का प्रभावी मॉडल बनाने की तैयारी</strong></h6>
<p>भोपाल सिंह खदरी का कहना है कि मुख्यमंत्री विंडो पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल की दूरदर्शी सोच का परिणाम रही है, जिसकी कार्यप्रणाली को अन्य राज्यों ने भी अपनाया। अब प्रयास यह है कि इस व्यवस्था को नई ऊर्जा, बेहतर निगरानी और मजबूत जवाबदेही के साथ फिर से उसी प्रभावशीलता तक पहुंचाया जाए।<br />उन्होंने विश्वास जताया कि पारदर्शी व्यवस्था, त्वरित कार्रवाई और अधिकारियों की जवाबदेही के माध्यम से मुख्यमंत्री शिकायत निवारण प्रणाली जनता का भरोसा और अधिक मजबूत करेगी तथा हरियाणा में सुशासन की दिशा में एक प्रभावी मॉडल के रूप में स्थापित होगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>हरियाणा</category>
                                            <category>सम्पादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 16 Jul 2026 12:45:33 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[NELOFER HASHMI]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>विकसित भारत, विकसित हरियाणा प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में हरियाणा बना आधुनिक रेल क्रांति का अग्रदूत</title>
                                    <description><![CDATA[<img src="https://www.deshrojana.com/media/2026-07/full23035-(1).jpg" alt="full23035 (1)" width="900" height="980" />
नायब सिंह सैनी मुख्यमंत्री, हरियाणा

<p>  </p>
<p>भारत आज विकास के ऐसे स्वर्णिम दौर से गुजर रहा है, जहां आधुनिक तकनीक, आत्मनिर्भरता, पर्यावरण संरक्षण और जनकल्याण एक साथ आगे बढ़ रहे हैं। माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के दूरदर्शी नेतृत्व में देश ने प्रत्येक क्षेत्र में अभूतपूर्व प्रगति की है। रेलवे क्षेत्र भी इससे अछूता नहीं रहा है। आज भारतीय रेल विश्वस्तरीय तकनीक, अत्याधुनिक सुविधाओं और पर्यावरण अनुकूल परिवहन व्यवस्था की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है। इसी विकास यात्रा में हरियाणा को एक ऐतिहासिक उपलब्धि प्राप्त हुई है। देश की पहली हाइड्रोजन संचालित ट्रेन का संचालन हरियाणा के</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.deshrojana.com/top-news/developed-india-developed-haryana-under-the-leadership-of-prime-minister/article-2793"><img src="https://www.deshrojana.com/media/400/2026-07/full23035-1-(1).jpg" alt=""></a><br /><img src="https://www.deshrojana.com/media/2026-07/full23035-(1).jpg" alt="full23035 (1)" width="900" height="980"></img>
नायब सिंह सैनी मुख्यमंत्री, हरियाणा

<p> </p>
<p>भारत आज विकास के ऐसे स्वर्णिम दौर से गुजर रहा है, जहां आधुनिक तकनीक, आत्मनिर्भरता, पर्यावरण संरक्षण और जनकल्याण एक साथ आगे बढ़ रहे हैं। माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के दूरदर्शी नेतृत्व में देश ने प्रत्येक क्षेत्र में अभूतपूर्व प्रगति की है। रेलवे क्षेत्र भी इससे अछूता नहीं रहा है। आज भारतीय रेल विश्वस्तरीय तकनीक, अत्याधुनिक सुविधाओं और पर्यावरण अनुकूल परिवहन व्यवस्था की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है। इसी विकास यात्रा में हरियाणा को एक ऐतिहासिक उपलब्धि प्राप्त हुई है। देश की पहली हाइड्रोजन संचालित ट्रेन का संचालन हरियाणा के जींद-सोनीपत रेलखंड पर किया जाना केवल प्रदेश ही नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए गर्व का विषय है। यह परियोजना विकसित भारत और ग्रीन इंडिया के संकल्प को नई मजबूती प्रदान करेगी।</p>
<p>प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने सदैव इस बात पर बल दिया है कि भारत का विकास आधुनिक तकनीक, नवाचार और आत्मनिर्भरता पर आधारित होना चाहिए। इसी सोच का परिणाम है कि आज भारत स्वदेशी तकनीक के बल पर नई-नई उपलब्धियां हासिल कर रहा है। जींद-सौनीपत हाइड्रोजन ट्रेन परियोजना भारतीय रेलवे के इतिहास में एक परिवर्तनकारी पहल है। यह परियोजना दर्शाती है कि भारत अब केवल तकनीक का उपभोक्ता नहीं, बल्कि नई तकनीकों का निर्माता और विश्व को दिशा देने वाला राष्ट्र बन रहा है।<img src="https://www.deshrojana.com/media/2026-07/ls20260714172440.png" alt="LS20260714172440" width="354" height="839"></img>पूर्णतः स्वदेशी डिजाइन, निर्माण और रुपांतरण के साथ तैयार यह ट्रेन भारतीय इंजीनियरों की क्षमता और आत्मनिर्भर भारत के संकल्प का जीवंत उदाहरण है। यह हाइड्रोजन ट्रेन ब्रॉड गेज पर संचालित होने वाली दुनिया की सबसे लंबी हाइड्रोजन ट्रेनों में से एक होगी। लगभग 141 करोड़ रुपये की लागत से तैयार हरा ट्रेन में दो ड्राइविंग पावर कार और आठ यात्री कोच होंगे। लगभग 2,400 किलोवाट की शक्ति क्षमता के साथ यह भारतीय रेलवे की सबसे शक्तिशाली हाइड्रोजन ट्रेनों में शामिल होगी। इसका सफल ट्रायल पूरा हो चुका है तथा मुख्य रेल संरक्षा आयुक्त (CCRS) की स्वीकृति भी प्राप्त हो चुकी है। इससे स्पष्ट है कि भारत अत्याधुनिक, सुरक्षित और पर्यावरण अनुकूल रेल परिवहन की दिशा में निर्णायक कदम बढ़ा चुका है।</p>
<p>हरियाणा के लिए यह उपलब्धि इसलिए भी विशेष महत्व स्त्पती है क्योंकि यह परियोजना प्रदेश को आधुनिक रेलवे तकनीक का केंद्र बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। लगभग 89 किलोमीटर लंबे जींद सोनीपत रेलखंड पर संचालित होने वाली यह ट्रेन प्रदेश की परिवहन व्यवस्था को नई पहचान देगी। इससे न केवल यात्रियों को आधुनिक सुविधाएं प्राप्त होंगी, बल्कि स्वच्छ ऊर्जा के उपयोग को भी बढ़ावा मिलेगा। आने वाले समय में ऐसी परियोजनाएं भारत को कार्बन उत्सर्जन कम करने तथा हरित विकास के वैश्विक लक्ष्यों को प्राप्त करने में भी महत्वपूर्ण योगदान देंगी।</p>
<p>आज हरियाणा में जो विकास दिखाई दे रहा है, यह केंद्र सरकार और राज्य सरकार के समन्चित्त प्रयासों का परिणाम है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में केंद्र सरकार तथा हरियाणा की डबल इंजन सरकार ने प्रदेश को विकास की नई गति प्रदान की है। चाहे राष्ट्रीय राजमार्गों का विस्तार हो, रेलवे अवसंरचना का आधुनिकीकरण, हवाई सेवाओं का विस्तार, औद्योगिक निवेश को प्रोत्साहन, स्वास्थ्य एवं शिक्षा के क्षेत्र में नई परियोजनाएं हों या आधुनिक सार्वजनिक सुविधाओं का विकास हर क्षेत्र में हरियाणा निरंतर आगे बढ़ रहा है। जींद-सोनीपत हाइड्रोजन ट्रेन परियोजना भी इसी समन्धित विकास दृष्टि का उत्कृष्ट उदाहरण है।</p>
<p>प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी का स्पाट विजन रहा है कि भारत का विकास केवल बड़े शहरों तक सीमित न रहे, बल्कि देश के प्रत्येक राज्य और प्रत्येक क्षेत्र तक आधुनिक सुविधाएं पहुंचें। इसी सोच के अनुरूप हरियाणा में रेलवे, सड़क, ऊर्जा, उद्योग और डिजिटल अवसंरचना को अभूतपूर्व गति मिली है। प्रदेश में आधुनिक परियोजनाओं का तेजी से क्रियान्वयन यह दर्शाता है कि डबल इंजन सरकार जनहित को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप विकास कार्यों को आगे बढ़ा रहीं है।</p>
<p>हाइड्रोजन ऊर्जा भविष्य की स्वच्छ ऊर्जा मानी जाती है। इसका उपयोग न केवल पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देगा, बल्कि भारत को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने में भी सहायक सिद्ध होगा। भारतीय रेलवे द्वारा हाइड्रोजन तकनीक को अपनाना इस बात का प्रमाण है कि देश भविष्य की चुनौतियों के लिए आज से ही तैयारी कर रहा है। यह पहल प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के "विकसित भारत और 'ग्रीन इंडिया" के विजन को मजबूत आधार प्रदान करती है।</p>
<p>आज भारत दुनिया के सामने एक ऐसे राष्ट्र के रूप में उभर रहा है, जो परंपरा और आधुनिकता का संतुलित समन्वय करते हुए विकास की नई इबारत लिख रहा है। हरियाणा इस परिवर्तनकारी यात्रा का सक्रिय सहभागी है। जींद-सोनीपत हाइड्रोजन ट्रेन परियोजना प्रदेश के युवाओं, इंजीनियरों और उद्योग जगत के लिए भी नई संभावनाओं के द्वार खोलेगी तथा आधुनिक तकनीक के क्षेत्र में रोजगार और निवेश के नए अवसर सुजित करेगी।</p>
<p>मुझे पूर्ण विश्वास है कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के प्रेरणादायी नेतृत्व तथा केंद्र और हरियाणा की डबल इंजन सरकार के संयुक्त प्रयासों से प्रदेश इसी प्रकार विकास के नए कीर्तिमान स्थापित करता रहेगा। औद-सोनीपत हाइड्रोजन ट्रेन परियोजना केवल एक रेल परियोजना नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर भारत, हरित विकास, आधुनिक तकनीक और विकसित भारत के संकल्प का ससक्त प्रतीक है। यह आने वाली पौड़ियों के लिए स्वच्छ, सुरक्षित और आधुनिक भारत की मजबूत नींव सिंद्ध होगी तथा हरियाणा को देश के अग्रणी विकासशील राज्यों की श्रेणी में और अधिक सशक्त बनाएगी।</p>
<p><strong>नायब सिंह सैनी मुख्यमंत्री, हरियाणा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
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                <pubDate>Tue, 14 Jul 2026 17:15:57 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[NELOFER HASHMI]]></dc:creator>
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                <title>सूर्य कवि दादा लख्मी चंद की सोच को साकार कर रही सुपवा</title>
                                    <description><![CDATA[<p><img src="https://www.deshrojana.com/media/2026-07/img-20260714-wa0007.jpg" alt="IMG-20260714-WA0007" width="1140" height="1200" /></p>
<p>हरियाणवी के प्रसिद्ध सांग सम्राट, कवि व लोक कलाकार दादा लख्मी चंद को उनकी 123वीं जयंती पर सर्वप्रथम प्रणाम, विनम्र श्रद्धांजलि। दादा लख्मी चंद का जन्म सोनीपत जिले के जाट्टी कलां गांव में एक साधारण किसान गौड़ ब्राह्मण परिवार में 15 जुलाई 1903 को हुआ। दो भाई व तीन बहनों में वे अपने पिता की दूसरी संतान थे। बाल्यावस्था में उन्हें पशु चराने के लिए खेतों में भेजा जाने लगा। लेकिन, उनकी गाने में रुचि थी। वह हमेशा कुछ न कुछ गुनगुनाते रहते। सात-आठ वर्ष की आयु में ही उन्होंने अपनी मधुर व सुरीली आवाज से लोगों का मन मोहना</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.deshrojana.com/top-news/supava-is-realizing-the-vision-of-surya-kavi-dada-lakhmi/article-2792"><img src="https://www.deshrojana.com/media/400/2026-07/img-20260714-wa0007.jpg" alt=""></a><br /><p><img src="https://www.deshrojana.com/media/2026-07/img-20260714-wa0007.jpg" alt="IMG-20260714-WA0007" width="1140" height="1600"></img></p>
<p>हरियाणवी के प्रसिद्ध सांग सम्राट, कवि व लोक कलाकार दादा लख्मी चंद को उनकी 123वीं जयंती पर सर्वप्रथम प्रणाम, विनम्र श्रद्धांजलि। दादा लख्मी चंद का जन्म सोनीपत जिले के जाट्टी कलां गांव में एक साधारण किसान गौड़ ब्राह्मण परिवार में 15 जुलाई 1903 को हुआ। दो भाई व तीन बहनों में वे अपने पिता की दूसरी संतान थे। बाल्यावस्था में उन्हें पशु चराने के लिए खेतों में भेजा जाने लगा। लेकिन, उनकी गाने में रुचि थी। वह हमेशा कुछ न कुछ गुनगुनाते रहते। सात-आठ वर्ष की आयु में ही उन्होंने अपनी मधुर व सुरीली आवाज से लोगों का मन मोहना शुरू कर दिया। ग्रामीण उनसे नित गीत व भजन सुनाने का आग्रह करने लगे। ग्रामीणों की अपार प्रशंसा से उत्साहित बालक लख्मी चन्द ने अनेक गीत व भजन कंठस्थ कर लिए और गायकी के मार्ग पर अपने कदम तेजी से बढ़ा दिए। गांव जांटी कलां में एक विवाह समारोह में बसौदी निवासी पंडित मान सिंह भजन-रागनी का कार्यक्रम करने के लिए पहुंचे। वे आंखों से देख नहीं सकते थे। उन्होंने कई दिन तक गांव में भजन व रागनियां सुनाईं। बालक लख्मी चन्द भी उनके भजन सुनने के लिए प्रतिदिन जाते थे। लख्मी चन्द के हृदय पटल पर पंडित मान सिंह का ऐसा जादू हुआ कि उन्होंने सीधे मान सिंह जी को अपना गुरु बनाने का निवेदन कर डाला। एक बालक के गायकी के प्रति इस अपार लगाव से प्रभावित होकर पंडित मान सिंह ने उनके पिता पंडित उदमी राम से इस बारे में बात की और उनकी सहमति के बाद उन्होंने बालक लख्मी चन्द को अपना शिष्य बनाना स्वीकार कर लिया। इसके बाद वे अपने गुरु से ज्ञान लेने में तल्लीन हो गए और असीम लगन व कठिन परिश्रम से वे निखरते चले गए।</p>
<p>कुछ ही समय में लोग उनकी गायन प्रतिभा और सुरीली आवाज के कायल हो गए। अब उनकी रूचि ‘सांग’ सीखने की हो गई। ‘सांग’ की कला सीखने के लिए लख्मी चन्द कुण्डल निवासी सोहन लाल के बेड़े में शामिल हो गए। अडिग लगन व मेहनत के बल पर पांच साल में ही उन्होंने ‘सांग’ की बारीकियां सीख लीं। उनके अभिनय एवं नाच का जादू लोगों के सिर चढ़कर बोलने लगा। उनके अंग-अंग का मटकना, मनोहारी अदाएं, हाथों की मुद्राएं, कमर की लचक और गजब की फुर्ती का जादू हर किसी को मदहोश कर देता था। जब वे नारी पात्र अभिनीत करते थे तो देखने वाले बस देखते रह जाते थे। इसी बीच सोहन लाल ने लख्मी चन्द के गुरु मान सिंह के बारे में कुछ असभ्य बात मंच से कह दी, जिसका उन्हें अत्यन्त बुरा लगा। उन्होंने सोहन लाल का बेड़ा छोड़ने का ऐलान कर दिया। इससे भन्नाए कुछ संकीर्ण मानसिकता के लोगों ने धोखे से लख्मी चन्द के खाने में पारा मिला दिया, जिससे उनका स्वास्थ्य खराब हो गया। उनकी आवाज को भी भारी क्षति पहुंची, लेकिन सतत साधना के जरिए उन्होंने कुछ समय बाद पुनः अपनी आवाज में सुधार किया। इसके बाद उन्होंने स्वयं अपना अलग बेड़ा तैयार करने का मन बना लिया।</p>
<p>लख्मी चन्द ने अपने गुरुभाई जैलाल नदीपुर माजरावाले के साथ मिलकर मात्र 18-19 वर्ष की उम्र में ही अलग बेड़ा बनाया और ‘सांग’ मंचित करने लगे। अपनी बहुमुखी प्रतिभा और महान आशा के बल पर उन्होंने एक वर्ष के अन्दर ही लोगों के बीच पुनः अपनी पकड़ बना ली। उनकी लोकप्रियता को देखते हुए बड़े-बड़े नामी कलाकार उनके बेड़े में शामिल होने लगे और पंडित लख्मी चन्द देखते ही देखते ‘सांग-सम्राट’ के रूप में विख्यात होते चले गए। ‘सांग’ के दौरान साज-आवाज-अन्दाज आदि किसी भी मामले में किसी तरह की ढील अथवा लापरवाही उन्हें बिल्कुल भी पसन्द नहीं थी। उन्होंने अपने बेड़े में एक से बढ़कर एक कलाकार रखे और ‘सांग’ कला को नई ऐतिहासिक बुलन्दियों पर पहुंचाया।</p>
<p>प्रारम्भ में लख्मी चंद श्रृंगार रस की रचनाओं पर जोर देते थे, लेकिन धीरे-धीरे उन्होंने आध्यात्मिक ज्ञान को भी अपनी रचनाओं में पिरोना शुरू कर दिया। वेदों, शास्त्रों, उपनिषदों और अन्य धार्मिक ग्रन्थों का ज्ञान लेने के लिए उन्होंने दो विद्वान शास्त्रियों को अपने साथ जोड़ लिया। वे आध्यात्मिक ज्ञान में ऐसे डूबे की संत प्रवृत्ति के होते चले गए और जीवन के आखिरी दशक में वैरागी-सा जीवन जीने लगे। दान एवं पुण्य कार्यों में उन्होंने बढ़-चढ़कर योगदान दिया।</p>
<p>लंबी बीमारी के उपरान्त 17 जुलाई, 1945 की सुबह उनका देहान्त हो गया। वे अपनी अथाह एवं अनमोल विरासत छोड़कर गए हैं। उनकी इस विरासत को सहेजने व आगे बढ़ाने के लिए उनके सुपुत्र पंडित तुलेराम ने उल्लेखनीय भूमिका निभाई। इसके बाद तीसरी पीढ़ी में उनके पौत्र पंडित विष्णु दत्त कौशिक भी अपने दादा की विरासत के संरक्षण एवं संवर्धन में अति प्रशंसनीय भूमिका अदा कर रहे हैं। अब चौथी पीढ़ी के तौर पर चेतन कौशिक इसी विधा को आगे ले जाने की शुरुआत कर चुके हैं। चेतन अपने पड़दादा के नाम पर बनी दादा लख्मी चंद स्टेट यूनिवर्सिटी ऑफ परफॉर्मिंग एंड विजुअल आर्ट्स (डीएलसीसुपवा) से अभिनय के क्षेत्र में ग्रेजुएशन भी कर चुके हैं। हरियाणवी रागनी व सांग में उल्लेखनीय योगदान के कारण दादा लख्मी चंद को ‘सूर्य-कवि’ कहा जाता है। उनके नाम पर साहित्य के क्षेत्र में कई पुरस्कार दिए जाते हैं।</p>
<p>दादा लख्मी के नाम को हमेशा-हमेशा के लिए अमर रखने के लिए ही प्रदेश सरकार ने रोहतक में बनी स्टेट यूनिवर्सिटी ऑफ परफॉर्मिंग एंड विजुअल आर्ट्स का नामकरण दादा लख्मी चंद के नाम पर किया। यह यूनिवर्सिटी पूरी तरह से कला को समर्पित है। जहां युवाओं को न सिर्फ फिल्म जगत में एंट्री के लिए एक्टिंग समेत अन्य सभी कोर्स कराए जा रहे हैं, बल्कि विजुअल आर्ट्स, डिजाइन व प्लानिंग एवं आर्किटेक्चर में भी पारंगत किया जा रहा है। डीएलसीसुपवा के छात्रों की कोर्स फिल्में, डॉक्यूमेंट्री, म्यूजिक वीडियो आज देश-विदेश के इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल के लिए चयनित हो रहे हैं। आने वाले समय में यहां के छात्र दादा लख्मी की मेहनत व लग्न व अनुसरण करते हुए अपना, परिवार, प्रदेश व देश का नाम जरूर रोशन करेंगे।</p>
<p> </p>
<p>-- लेखक, डॉ अमित आर्य। दादा लख्मी चंद स्टेट यूनिवर्सिटी ऑफ परफॉर्मिंग एंड विजुअल आर्ट्स के कुलगुरु हैं।<img src="https://www.deshrojana.com/media/2026-07/img-20260714-wa00081.jpg" alt="IMG-20260714-WA0008" width="1459" height="1599"></img></p>]]></content:encoded>
                
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                                            <category>देश</category>
                                            <category>हरियाणा</category>
                                            <category>सम्पादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 14 Jul 2026 17:03:44 +0530</pubDate>
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                <title>परंपरा और आधुनिक शिक्षा का संगम: भारत में मदरसा शिक्षा को मुख्यधारा की शिक्षा से जोड़ने की सरकारी पहल</title>
                                    <description><![CDATA[<p>भारत का एजुकेशन सिस्टम इतिहास, संस्कृति और आस्था से बना एक अलग-अलग तरह का माहौल है। इसकी कई स्ट्रीम में, मदरसा एजुकेशन सिस्टम की एक खास जगह है, खासकर मुस्लिम समुदाय के कुछ हिस्सों के लिए।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.deshrojana.com/righteousness/confluence-of-tradition-and-modern-education-government-initiative-to-link/article-1386"><img src="https://www.deshrojana.com/media/400/2026-05/img-20260518-wa0052.jpg" alt=""></a><br /><div>भारत का एजुकेशन सिस्टम इतिहास, संस्कृति और आस्था से बना एक अलग-अलग तरह का माहौल है। इसकी कई स्ट्रीम में, मदरसा एजुकेशन सिस्टम की एक खास जगह है, खासकर मुस्लिम समुदाय के कुछ हिस्सों के लिए। पारंपरिक रूप से कुरान, हदीस और इस्लामी कानून जैसी धार्मिक पढ़ाई पर फोकस करने वाले मदरसों ने सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पहचान को बनाए रखने में अहम भूमिका निभाई है। हालांकि, साइंस, टेक्नोलॉजी और ग्लोबल कॉम्पिटिशन से तेज़ी से बदलती दुनिया में, मॉडर्न एजुकेशन को पारंपरिक पढ़ाई के साथ जोड़ने की ज़रूरत और भी ज़रूरी हो गई है।<img src="https://www.deshrojana.com/media/2026-05/img-20260518-wa0052.jpg" alt="IMG-20260518-WA0052" width="1536" height="1024"></img>इस कमी को समझते हुए, भारत सरकार और कई राज्य सरकारों ने पिछले कुछ सालों में मदरसा एजुकेशन को मॉडर्न बनाने के लिए कई स्कीम शुरू की हैं। इन कोशिशों का मकसद धार्मिक शिक्षाओं को बदलना नहीं है, बल्कि उन्हें साइंस, गणित, भाषा और कंप्यूटर एजुकेशन जैसे सब्जेक्ट के साथ जोड़ना है, जिससे हायर एजुकेशन और नौकरी के मौके खुलेंगे।</div>
<div> </div>
<div>सबसे शुरुआती कोशिशों में से एक मदरसा मॉडर्नाइज़ेशन प्रोग्राम था, जिसे 1993 में शुरू किया गया था। इसका मुख्य मकसद मदरसा के सिलेबस में मैथ और साइंस जैसे मॉडर्न सब्जेक्ट्स को शामिल करना था। इन सब्जेक्ट्स को पढ़ाने के लिए टीचर्स को रखा गया और उनके काम में मदद के लिए उन्हें मानदेय दिया गया। इस पहल ने पॉलिसी की सोच में एक बड़ा बदलाव किया, यह मानते हुए कि सिर्फ़ धार्मिक शिक्षा ही स्टूडेंट्स के लिए बड़े सोशियो-इकोनॉमिक माहौल में मुकाबला करने के लिए काफ़ी नहीं हो सकती है।</div>
<div> </div>
<div>2009-10 के दौरान मिनिस्ट्री ऑफ़ ह्यूमन रिसोर्स डेवलपमेंट के तहत मदरसों में क्वालिटी एजुकेशन देने की स्कीम (SPQEM) के लॉन्च के साथ एक बड़ा मील का पत्थर आया। यह स्कीम भारत में मदरसा मॉडर्नाइज़ेशन के सबसे ज़रूरी पिलर में से एक बन गई। जो मदरसे मॉडर्न सब्जेक्ट्स शुरू करने के लिए राज़ी हुए, उन्हें फाइनेंशियल मदद दी गई और साथ ही इन सब्जेक्ट्स के लिए काबिल टीचर्स को हायर करने में भी मदद की गई। टीचिंग-लर्निंग मटीरियल, साइंस किट और कंप्यूटर लैब को फंड किया गया। इसका मुख्य आइडिया आसान लेकिन दमदार था, जिससे स्टूडेंट्स फॉर्मल स्कूलिंग (क्लास I-XII) के बराबर एकेडमिक काबिलियत हासिल करने के साथ-साथ धार्मिक शिक्षा भी हासिल कर सकें। कई परिवारों के लिए, इसका मतलब था कि उनके बच्चों को अब धर्म और भविष्य के बीच चुनना नहीं पड़ता था।</div>
<div> </div>
<div>SPQEM के साथ-साथ माइनॉरिटी इंस्टीट्यूशन्स में इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट (IDMI) स्कीम भी चल रही थी, जिसे 2008-09 के आसपास लॉन्च किया गया था। जहाँ SPQEM ने करिकुलम और टीचिंग पर फोकस किया, वहीं IDMI ने इंस्टीट्यूशन्स की फिजिकल कंडीशन पर ध्यान दिया। क्लासरूम, लैब और लाइब्रेरी बनाने के लिए फंड दिए गए। पीने का पानी, सैनिटेशन और बिजली जैसी सुविधाओं को बेहतर बनाया गया। मॉडर्न इंफ्रास्ट्रक्चर ने बेहतर लर्निंग माहौल बनाने में मदद की। SPQEM और IDMI ने मिलकर एक बड़ी अम्ब्रेला स्कीम बनाई, जिसे स्कीम फॉर प्रोवाइडिंग एजुकेशन टू मदरसा/माइनॉरिटीज (SPEMM) के नाम से जाना जाता है, जिसका मकसद माइनॉरिटी एजुकेशनल इंस्टीट्यूशन्स का होलिस्टिक डेवलपमेंट करना था।</div>
<div> </div>
<div>जबकि सेंट्रल स्कीम्स ने नींव रखी, राज्य सरकारों ने इम्प्लीमेंटेशन और इनोवेशन में अहम भूमिका निभाई। 2015 में, उत्तराखंड सरकार ने अपनी मदरसा मॉडर्नाइजेशन स्कीम शुरू की, जिसमें ज़्यादातर इंफ्रास्ट्रक्चर और बेसिक सुविधाओं पर फोकस किया गया, जिसमें फर्नीचर, कंप्यूटर और लाइब्रेरी का प्रोविजन, क्लासरूम और सैनिटेशन सुविधाओं का कंस्ट्रक्शन और साफ पीने के पानी और बिजली तक बेहतर एक्सेस जैसे खास फायदे शामिल थे। इस स्कीम ने यह माना कि सही इंफ्रास्ट्रक्चर के बिना, सबसे अच्छे करिकुलम रिफॉर्म भी सफल नहीं हो सकते।</div>
<div> </div>
<div>महाराष्ट्र सरकार ने अक्टूबर 2013 में डॉ. ज़ाकिर हुसैन मदरसा मॉडर्नाइज़ेशन स्कीम लागू की, जिसने मदरसों को धार्मिक पढ़ाई के साथ-साथ साइंस, मैथ, इंग्लिश और रीजनल भाषाएँ पढ़ाने के लिए बढ़ावा दिया। इस पहल में अच्छी क्वालिटी की शिक्षा देने के लिए स्कॉलरशिप और मॉनिटरिंग सिस्टम भी शामिल थे।</div>
<div> </div>
<div>उत्तर प्रदेश, जो भारत के सबसे बड़े मदरसा नेटवर्क में से एक है, ने मदरसा शिक्षा को मेनस्ट्रीम बोर्ड के साथ जोड़ने के लिए कदम उठाए हैं। हाल के सालों में, स्टैंडर्डाइज़्ड करिकुलम शुरू करने और स्टूडेंट्स के लिए एम्प्लॉयबिलिटी नतीजों को बेहतर बनाने की कोशिश की गई है। इसके अलावा, मॉडर्नाइज़ेशन स्कीम के तहत नियुक्त टीचरों को मॉडर्न सब्जेक्ट पढ़ाने के लिए मानदेय दिया गया, जो इंटीग्रेशन के लिए सरकार के कमिटमेंट को दिखाता है।</div>
<div> </div>
<div>हाल ही में एक अहम डेवलपमेंट उत्तराखंड माइनॉरिटी एजुकेशन बिल (2025) है, जिसका मकसद मदरसों को सीधे राज्य के फॉर्मल एजुकेशन सिस्टम में जोड़ना है। इस रिफॉर्म के तहत, मदरसों को राज्य शिक्षा बोर्ड से जोड़ा जाएगा, नेशनल एजुकेशन पॉलिसी (2020) के साथ करिकुलम का तालमेल पक्का किया जाएगा और स्टूडेंट्स को बड़े मौकों के साथ स्टैंडर्डाइज़्ड शिक्षा मिलेगी। यह पैरेलल सिस्टम से ज़्यादा एक जैसे एजुकेशनल फ्रेमवर्क की ओर बदलाव को दिखाता है।</div>
<div> </div>
<div>मदरसा एजुकेशन को मॉडर्न लर्निंग के साथ जोड़ना, एजुकेशनल रिफॉर्म से ज़्यादा एक सोशल ट्रांसफॉर्मेशन है। यह सबको साथ लेकर चलने को बढ़ावा देता है।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>धर्म संस्कृति</category>
                                            <category>सम्पादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 18 May 2026 23:46:24 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[NELOFER HASHMI]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>स्वतंत्र पत्रकारिता लोकतंत्र की नींव : डॉ. मोहन तिवारी</title>
                                    <description><![CDATA[<p>विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर सेक्टर-12 फरीदाबाद निवासी समाजसेवी एवं वरिष्ठ पत्रकार डॉ. मोहन तिवारी ने कहा कि लोकतंत्र की असली मजबूती सिर्फ संस्थाओं से नहीं, बल्कि स्वतंत्र और निर्भीक पत्रकारिता से तय होती है।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.deshrojana.com/haryana/faridabad/independent-journalism-is-the-foundation-of-democracy-dr-mohan-tiwari/article-984"><img src="https://www.deshrojana.com/media/400/2026-05/e.jpg" alt=""></a><br /><p>फरीदाबाद: विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर सेक्टर-12 फरीदाबाद निवासी समाजसेवी एवं वरिष्ठ पत्रकार डॉ. मोहन तिवारी ने कहा कि लोकतंत्र की असली मजबूती सिर्फ संस्थाओं से नहीं, बल्कि स्वतंत्र और निर्भीक पत्रकारिता से तय होती है। उन्होंने कहा कि प्रेस केवल खबरों का माध्यम नहीं, बल्कि समाज की चेतना और सच का आईना है। जब पत्रकार बिना किसी दबाव के सच्चाई को सामने रखते हैं, तभी व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही कायम रहती है।<img src="https://www.deshrojana.com/media/2026-05/e.jpg" alt="e" width="567" height="545"></img><br />   डॉ. तिवारी ने बदलते दौर की चुनौतियों पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि आज सूचना की गति जितनी तेज हुई है, उतनी ही तेजी से भ्रम और फर्जी खबरें भी फैल रही हैं। ऐसे समय में पत्रकारों की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है, क्योंकि वही सच और झूठ के बीच की स्पष्ट रेखा खींचते हैं। उन्होंने कहा कि पत्रकारिता केवल पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति एक जिम्मेदारी है, जिसे साहस, ईमानदारी और निष्पक्षता के साथ निभाना आवश्यक है। उन्होंने समाज से भी अपील की कि वे जागरूक बनें, सूचनाओं की सत्यता को परखें और जिम्मेदार पत्रकारिता को मजबूती दें। अंत में डॉ. तिवारी ने कहा कि “सच्चाई के साथ खड़ी पत्रकारिता ही लोकतंत्र की असली पहचान और सबसे बड़ी ताकत है।”</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>हरियाणा</category>
                                            <category>यूथ</category>
                                            <category>सम्पादकीय</category>
                                            <category>फरीदाबाद</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 03 May 2026 16:02:56 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vinod Sharma]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कहीं हंसना, रोना और मुस्कुराना भूल तो नहीं रहे हैं: संजय मग्गू</title>
                                    <description><![CDATA[<p>कहीं हंसना, रोना और मुस्कुराना भूल तो नहीं रहे हैं<br />संजय मग्गू<br />बताइए, क्या जमाना आ गया है। रोने, अपनी पीड़ा किसी अनजान व्यक्ति के सामने सुनाने के लिए भी क्राइंग क्लब खुलने लगे हैं। इसके लिए बाकायदा घंटे के हिसाब से फीस भी देनी पड़ती है। देश के कई हिस्सों में खुले यह क्राइंग क्लब आपको आपके दुख के हिसाब से चार्ज भी करते हैं। क्या सचमुच हम अपने घर, परिवार, यार-दोस्तों से इतने कट गए हैं कि हमें रोने के लिए भी किसी दूसरे की सहायता लेनी पड़ रही है। यह सच है कि जैसे-जैसे जीवन शैली बदल</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><p>कहीं हंसना, रोना और मुस्कुराना भूल तो नहीं रहे हैं<br />संजय मग्गू<br />बताइए, क्या जमाना आ गया है। रोने, अपनी पीड़ा किसी अनजान व्यक्ति के सामने सुनाने के लिए भी क्राइंग क्लब खुलने लगे हैं। इसके लिए बाकायदा घंटे के हिसाब से फीस भी देनी पड़ती है। देश के कई हिस्सों में खुले यह क्राइंग क्लब आपको आपके दुख के हिसाब से चार्ज भी करते हैं। क्या सचमुच हम अपने घर, परिवार, यार-दोस्तों से इतने कट गए हैं कि हमें रोने के लिए भी किसी दूसरे की सहायता लेनी पड़ रही है। यह सच है कि जैसे-जैसे जीवन शैली बदल रही है, लोग समाज से कटते जा रहे हैं। आज से तीन-चार दशक पहले तक इंसान दिन में एक बार जरूर अपने परिवार, हित-मित्रों के साथ घंटे-आधे घंटे बैठता था। खूब गप्पें लड़ाए जाते थे। हंसी-ठिठोली होती थी। इसी दौरान लोग अपने मन की पीड़ा को भी बता देते थे। सारे लोग मिलकर एक दूसरे की पीड़ा सुनकर उसका निदान खोजने की कोशिश करते थे। लोग भी इतने विश्वसनीय होते थे कि वह एक की पीड़ा का अंदाजा दूसरे को नहीं लगने देते थे। हंसी भी नहीं उड़ाते थे। हर दोस्त कमीना होते हुए भी दोस्त की पीड़ा को सुनकर खुद दुखी हो जाता था। उसे लगने लगता था कि यह उसका ही दुख है। गांव और शहर में शाम को होने वाली बैठकें लोगों के सुख-दुख की गाथाओं से भरी रहती थीं। लोग भावनाओं में बहकर अपने घर की पोल तक खोल दिया  करते थे, लेकिन मजाल है कि यह बात किसी दूसरे को पता चल जाए। आज दोस्तों, रिश्तेदारों, भाई-बहन, पति-पत्नी, प्रेमी-प्रेमिका, बेटा-बेटी के होते हुए भी इंसान अकेला है। हर इंसान को यही लगता है कि कहीं इसके सामने हमने अपना दुखड़ा रोया और यह सबके सामने गा-गाकर बताएगा। फिर स्टेट्स, ईगो, अमीरी-गरीबी का फर्क भी अब आड़े आने लगा है। बचपन का दोस्त है, लेकिन अगर स्टेट्स में थोड़ा बहुत कम है, तो उसके सामने कैसे रोया जाए, अपने दिल की भड़ास निकाली जाए। इससे बेहतर है कि कुछ रुपये देकर किसी अंजान के सामने जार-जार रोकर अपने दुख को कम कर लिया जाए। आज लोगों की यही मनोवृत्ति हो गई है। यही कारण है कि सन 1917 में गुजरात के सूरत में देश में खुलने वाला पहला क्राइंग क्लब आज कई शहरों में खुल चुका है। यह कैसी विडंबना है कि हंसने और रोने के लिए क्लब खुलने लगे हैं। इन क्लबों में हंसना और रोना सिखाया जाता है, जबकि हंसना और रोना प्रकृति प्रदत्त स्वभाव है। जब बच्चा पैदा होता है, तो वह सबसे पहले रोता ही है। रोना प्रकृति सिखा देती है, नवजात को रोना सिखाने के लिए कोई क्लब नहीं होता है। वैसे ही उस बच्चे को हंसना और मुस्कुराना सिखाने के लिए कोई स्कूल नहीं खोला जाता है। कितने अफसोस की बात है कि इंसान हंसना, रोना और मुस्कुराना भूलता जा रहा है। सोचकर देखिए, आप दिन भर में कितनी बार अतीत या वर्तमान की किसी घटना को याद करके मुस्कुराए हैं। अपने घर-परिवार में अपनी पीड़ा बताते समय आपकी आंखों में आंसू आए हों। शायद एक बार भी नहीं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>सम्पादकीय</category>
                                    

                <link>https://www.deshrojana.com/editorial/is-sanjay-maggu-forgetting-to-laugh-cry-and-smile/article-905</link>
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                <pubDate>Tue, 28 Apr 2026 22:19:47 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[NELOFER HASHMI]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>नारी शक्ति वंदन अधिनियमः सशक्त भारत की ओर एक ऐतिहासिक कदम</title>
                                    <description><![CDATA[<p>भारत में महिलाओं की भूमिका सदियों से महत्वपूर्ण रही है, लेकिन सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक क्षेत्रों में उन्हें बराबरी का स्थान दिलाने के लिए निरंतर प्रयास किए जाते रहे हैं।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.deshrojana.com/editorial/nari-shakti-vandan-act-a-historic-step-towards-strong-india/article-633"><img src="https://www.deshrojana.com/media/400/2026-04/img-20260415-wa0036.jpg" alt=""></a><br /><p>भारत में महिलाओं की भूमिका सदियों से महत्वपूर्ण रही है, लेकिन सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक क्षेत्रों में उन्हें बराबरी का स्थान दिलाने के लिए निरंतर प्रयास किए जाते रहे हैं। इसी दिशा में नारी शक्ति वंदन अधिनियम एक ऐतिहासिक और दूरदर्शी पहल के रूप में सामने आया है। यह अधिनियम न केवल महिलाओं को राजनीतिक प्रतिनिधित्व प्रदान करता है, बल्कि उन्हें निर्णय लेने की प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी का अवसर भी देता है।</p>
<p>प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के कुशल नेतृत्व में केंद्र सरकार ने महिलाओं के सशक्तिकरण को प्राथमिकता देते हुए अनेक योजनाएं और नीतियां लागू की हैं, जिनका उद्देश्य महिलाओं को आत्मनिर्भर और सशक्त बनाना है। नारी शक्ति वंदन अधिनियम का मुख्य उद्देश्य महिलाओं को राजनीति में अधिक भागीदारी सुनिश्चित करना है। इसके तहत लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान किया गया है।</p>
<p>यह अधिनियम भारत के लोकतांत्रिक ढांचे को और अधिक समावेशी बनाता है, जहां महिलाओं की आवाज को समान महत्व मिलता है। इससे महिलाओं को नीति निर्माण और प्रशासनिक निर्णयों में भाग लेने का अवसर मिलेगा। यह अधिनियम महिलाओं को केवल प्रतिनिधित्व नहीं देता, बल्कि उन्हें नेतृत्व की भूमिका निभाने के लिए प्रेरित करता है।</p>
<p>प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने कई मंचों पर यह स्पष्ट किया है कि "नारी शक्ति" भारत की प्रगति का आधार है। उनका मानना है कि जब महिलाएं सशक्त होंगी, तभी देश तेजी से विकास करेगा। उनके नेतृत्व में सरकार ने महिलाओं को "लाभार्थी" से "निर्माता बनाने की दिशा में काम किया है। यानी महिलाएं अब केवल योजनाओं का लाभ लेने वाली नहीं, बल्कि देश के विकास में सक्रिय भागीदार बन रही हैं।</p>
<p>प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने महिलाओं के सशक्तिकरण को प्राथमिकता देते हुए अनेक योजनाएं और नीतियां लागू की हैं, जिनका उद्देश्य महिलाओं को आत्मनिर्भर और सशक्त बनाना है।</p>
<p>'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ योजना का उद्देश्य बालिका जन्म दर में सुधार करना और लडकियों की शिक्षा को बढ़ावा देना है। इससे समाज में बेटियों के प्रति सकारात्मक सोच विकसित हुई है। हर घर-हर गृहिणी योजना के तहत गरीब महिलाओं को मुफ्त गैस कनेक्शन दिए गए, जिससे उन्हें धुएं से मुक्ति मिली और उनके स्वास्थ्य में सुधार हुआ। जन-धन योजना के माध्यम से महिलाओं के बैंक खाते खोले गए, जिससे वे आर्थिक रूप से सशक्त बनीं और वित्तीय समावेशन को बढ़ावा मिला।</p>
<p>प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के तहत गर्भवती महिलाओं को आर्थिक सहायता प्रदान कर उनके स्वास्थ्य और पोषण का ध्यान रखा गया है। सुकन्या समृद्धि योजना बालिकाओं के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए शुरू की गई, जिसमें उनकी शिक्षा और विवाह के लिए बचत की जाती है। मोदी सरकार ने स्वच्छ भारत मिशन के तहत शौचालय निर्माण ने महिलाओं की गरिमा और सुरक्षा को बढ़ाया है। महिला स्वयं सहायता समूहों को बढ़ावा देकर उन्हें स्वरोजगार के अवसर प्रदान किए गए। डिजिटल इंडिया अभियान के तहत महिलाओं को डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ा गया, जिससे वे ऑनलाइन सेवाओं का लाभ उठा सकें।</p>
<p>राजनीति में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी नारी शक्ति वंदन अधिनियम के लागू होने से महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। संसद और विधानसभाओं में महिलाओं की संख्या बढ़ेगी और महिला नेताओं को नए अवसर मिलेंगे। नीति निर्माण में महिलाओं का दृष्टिकोण शामिल होगा। मोदी सरकार का यह कदम भारतीय लोकतंत्र को और अधिक मजबूत बनाएगा।</p>
<p>यह अधिनियम केवल राजनीतिक सुधार नहीं है, बल्कि सामाजिक परिवर्तन का माध्यम भी है। महिलाओं के प्रति समाज की सोच बदलेगी तथा लड़कियों को आगे बढने की प्रेरणा मिलेगी। यह महिलाओं को समान अधिकार और अवसर प्रदान करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।</p>
<p> </p>
<p>इस अधिनियम के लागू होने का सबसे बड़ा लाभ यह होगा कि शासन की प्राथमिकताओं में व्यापक बदलाव देखने को मिलेगा। जब निर्णय प्रक्रिया में महिलाओं की भागीदारी बढ़ती है, तो शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण, सुरक्षा, जल और स्वच्छता जैसे विषय अधिक प्राथमिकता के साथ सामने आते हैं। स्थानीय निकायों में महिलाओं के आरक्षण का अनुभव पहले ही यह दर्शा चुका है कि महिला प्रतिनिधित्व से नीतियां अधिक जन-केंद्रित और प्रभावी बनती हैं। अब यही प्रभाव संसद और विधानसभाओं के स्तर पर दिखाई देगा, जिससे विकास की दिशा अधिक संतुलित और समावेशी होगी।</p>
<p>इस परिवर्तन की पृष्ठभूमि पिछले एक दशक में तैयार की गई है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में महिलाओं के सशक्तिकरण को एक व्यापक और जीवन-चक्र आधारित दृष्टिकोण से देखा गया है। बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान ने सामाजिक सोच में सकारात्मक बदलाव लाया है और लड़कियों की माध्यमिक स्तर की नामांकन दर 80.2 प्रतिशत तक पहुंची है। सुकन्या समृद्धि योजना के तहत 4.6 करोड़ से अधिक खाते खोले गए हैं, जो बेटियों के भविष्य को आर्थिक सुरक्षा प्रदान करते हैं। उच्च शिक्षा और तकनीकी क्षेत्रों में महिलाओं की भागीदारी में लगातार वृद्धि इस बदलाव की स्पष्ट तस्वीर प्रस्तुत करती है।</p>
<p>प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी और उनकी सरकार ने महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए जो कदम उठाए हैं, वे देश के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। आज की महिला केवल घर तक सीमित नहीं है, बल्कि हर क्षेत्र में अपनी पहचान बना रही है। नारी शक्ति वंदन अधिनियम इसी बदलाव को और गति देगा और भारत को एक सशक्त, समावेशी और प्रगतिशील राष्ट्र बनाने में अहम भूमिका निभाएगा।</p>
<p>'जब नारी सशक्त होगी, तभी राष्ट्र सशक्त होगा" यही इस अधिनियम का मूल संदेश है।</p>
<img src="https://www.deshrojana.com/media/2026-04/img-20260415-wa0036.jpg" alt="IMG-20260415-WA0036" width="1251" height="1280"></img>
लेखिका - सुमन सैनी उपाध्यक्ष, हरियाणा राज्य बाल कल्याण परिषद् ।

<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>सम्पादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 15 Apr 2026 22:55:08 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Desh Rojana Bureau]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>नए साल 2026 में करें नशे पर प्रहार, युवा पीढ़ी को इससे बचाना समय की मांग </title>
                                    <description><![CDATA[<p>समाज के बदलते परिवेश में कुछ अलग करने की चाह, मानसिक तनाव, कम समय में अधिक कमाने, बेरोजगारी और बहुत से गैर जरूरी शौक ऐसे कारण है जो</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.deshrojana.com/yoth/the-need-of-the-hour-is-to-attack-drugs-in/article-263"><img src="https://www.deshrojana.com/media/400/2025-12/cccccccccccccccccccccc.jpeg" alt=""></a><br /><p>समाज के बदलते परिवेश में कुछ अलग करने की चाह, मानसिक तनाव, कम समय में अधिक कमाने, बेरोजगारी और बहुत से गैर जरूरी शौक ऐसे कारण है जो नशे के प्रचलन को लगातार बढ़ा रहे हैं। इसका शिकार हमारी युवा पीढ़ी हो रही है। नशा करना युवाओं के लिए एक फैशन की तरह बन गया है जो दिन प्रतिदिन बढ़ता ही जा रहा है। एक वक्त था जब नशे के लिए पंजाब ही जाना जाता था लेकिन अब हरियाणा व उसका नूंह जिला भी नशे की गिरफ्त में जकड़ते जा रहे हैं। दुर्भाग्य ये भी है कि यहां नशे से लड़ने के लिए पर्याप्त संसाधन और सुविधाएं मौजूद नहीं हैं।</p>
<p>भारत में हर साल लगभग 20 लाख लोग तंबाकू से होने वाली बीमारियों के कारण मर जाते है और लगभग 5 लाख लोग हर वर्ष शराब के कारण मर जाते है। एक रिपोर्ट के अनुसार भारत में लगभग 28 करोड़ लोग किसी न किसी मादक पदार्थ का सेवन कर रहे है जिनमे से 16 करोड़ लोग शराब और 12 करोड लोग अन्य मादक पदार्थों का सेवन कर रहे है। इस रिपोर्ट के ही अनुसार इनमे से लगभग 6 करोड लोग नशा छोड़ना चाहते है पर वो सुविधाएं न मिलने के कारण ऐसा नहीं कर पा रहे है। जो पीड़ित नशा छोड़ना चाहते हैं उनके लिए ज़रूरी सुविधाएं नहीं होना चिंतनीय है। ये सरकार और प्रशासन का दायित्व है कि नशा छोड़ने वालों के लिए हर मुमकिन सहयोग दे। </p>
<p>करोड़ों बच्चे सूंघने वाले नशे कर रहे है जिनमे व्हाइटनर और सिलोचन जो की जूते चिपकाने पंचर बनाने और फर्नीचर बनाने में काम आता है, इनमे स्ट्रीट चाइल्ड बहुत ज्यादा है जो कि अधिकतर सूंघने वाले नशे करते है। ये मासूम बच्चे बड़े होकर असामाजिक तत्व बनते है और आपराधिक गतिविधियों में लिप्त रहते है। </p>
<p>यदि हम इस बात पर विचार करें की क्यों ये स्थिति आती है तो हम पाएंगे कि इसका मुख्य कारण नशे की समस्या के बारे में समाज में व्याप्त गलत धारणाएं है। हमारे समाज में नशे की समस्या को एक बुरी लत या एक सामाजिक बुराई के तौर पर देखा जाता है जबकि विश्व स्वास्थ्य संगठन 1964 में एडिक्शन को बीमारी घोषित कर चुका है।</p>
<p>हमारे समाज में जब कोई व्यक्ति एडिक्ट हो जाता है तो उसको ठीक करने के लिए सबसे पहले पीटा जाता है,जब पिटाई से काम नहीं होता तो फिर पूजा पाठ और बाबा भभूत से उसको ठीक करने की कोशिश की जाती है, जब ये सब तरीके असफल हो जाते है तो आखिरी में ये कहा जाता है कि इसकी शादी कर दो शादी के बाद ये ठीक हो जायेगा।<br />क्या हम किसी और बीमारी को ऐसे ठीक करने की कोशिश करते है ?</p>
<p>नशे की बीमारी में भी पीड़ित को अन्य बीमारियों की तरह ही उपचार की आवश्यकता होती है, कोई बीमार व्यक्ति अपना उपचार स्वयं नहीं कर सकता है जबकि हम शुरू से उसके दिमाग में ये बात भर देते है कि वो खुद ठीक हो सकता है वो बेचारा खुद ही अपना उपचार करता रहता है जिसका कोई नतीजा नहीं निकलता है।</p>
<p>अतः एकदम से नशे बंद करने के लिए चिकित्सकीय सहायता की आवश्यकता होती है और इसके बाद ही उनको साइकोलॉजिकल प्रोग्राम एवं काउन्सलिंग की मदद से ही नशे से दूर रखा जा सकता है।<br />किसी भी चिकित्सा शास्त्र में ऐसी कोई दवाई उपलब्ध नहीं है जिनको खिलाकर नशे छुड़वाए जा सकें।</p>
<p><br />नशे की लत में परिवार के सदस्यों की भूमिका महत्वपूर्ण होती है, किसी प्रियजन को नशे की लत में डूबते देखना बेहद दर्दनाक अनुभव होता है। आप उस व्यक्ति की कितनी परवाह करते हैं, यह तो स्वाभाविक है, लेकिन उनका व्यवहार आपको क्रोधित, असहाय, दोषी, भयभीत, अकेला, थका हुआ और निराश महसूस करा सकता है। अक्सर, लत से ग्रस्त व्यक्ति अपने द्वारा किए जा रहे विनाश से अनजान होता है, जिससे मदद प्राप्त करना अत्यंत चुनौतीपूर्ण हो जाता है।  </p>
<p>नशा हर किसी को प्रभावित करता है। जीवनसाथी, माता-पिता, बच्चे और भाई-बहन। किसी व्यक्ति के नशे की लत से जुड़ी आदतों को लेकर लगातार चिंता और तनाव से दोस्तों और परिवार के सदस्यों पर मानसिक और शारीरिक दोनों तरह से बुरा असर पड़ सकता है। तनाव बढ़ जाता है और झगड़े आम बात हो जाती है। उचित इलाज के बिना, नशा आपके घर, काम और पारिवारिक जीवन को तबाह कर सकता है।</p>
<p><br />नशे की लत से ग्रस्त व्यक्ति एक चलती-फिरती बम की तरह होता है। उनका अनियमित व्यवहार और तर्कहीन निर्णय परिवार के सदस्यों के साथ लगातार मतभेद का कारण बनते हैं। शराब या नशीली दवाओं को अपनी प्राथमिकता बनाकर, व्यसनी व्यक्ति दूसरों को अपराधबोध कराता है और भावनात्मक रूप से उनका शोषण करता है। मस्तिष्क पर नशीले पदार्थों के प्रभाव के कारण, उनमें क्रोध के प्रकोप की संभावना अधिक होती है।</p>
<p><br />मौजूदा समय में देश की कुल आबादी में 35 साल से कम उम्र के युवाओं की संख्या लगभग 65 फीसदी है। ऐसे में अगर युवाओं के बीच नशे का चलन बढ़ता है तो यह देश के लिए आने वाले समय में गंभीर खतरा पैदा कर सकता है। युवाओं को नशे की लत से बचाने के लिए सरकारों  को व्यापक अभियान चलाने की विशेष जरूरत है।</p>
<p>नशे के खिलाफ सभी को लामबंद होना पड़ेगा वो चाहे सामाजिक संस्थाएं हो, राजनैतिक दल हो, आम नागरिक हो, प्रशासन हो , सभी को एक मंच पर आकर नशे के खिलाफ काम करना पड़ेगा तब जाकर कहीं नशे को खत्म या कम किया जा सकेगा। 1996 में हरियाणा के मुख्यमंत्री चौधरी बंसीलाल ने नशे (शराब) के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए राज्य में पूर्ण शराबबंदी लागू की थी (1 जुलाई 1996 से)। यह उनके कार्यकाल का एक बड़ा कदम था, क्योंकि उन्होंने नशे को खत्म करने के वादे पर जनता से समर्थन लिया था। हालांकि, इस नीति के लागू होने के कुछ ही समय बाद अवैध शराब की तस्करी और राजस्व का नुकसान, जिसके कारण अंततः उनकी सरकार को इस फैसले पर पुनर्विचार करना पड़ा और यह प्रतिबंध हटाना पड़ा। <br />आज फिर शराब बंदी और नशे बंदी के खिलाफ एकजुट होकर साहसिक कदम उठाया जाना चाहिए। मैं खुद 2026 के साल में नशे के खिलाफ नूंह में लोगों को जागरूक करने के लिए प्रतिबद्ध हूं। हाल ही में हुए शीतकालीन विधानसभा सत्र में मैंने नशे के मुद्दे को गंभीरता से सदन में उठाया था, क्योंकि नशे से पीड़ित लोगों को हम सभी की मदद की जरूरत है।</p>
<p>अगर समय रहते हुए हमने नशे का नाश नहीं किया तो नशा हमारे समाज का नाश कर देगा। आप सभी को नए साल की शुभकामनाएं और आप नए साल में ये प्रण लें कि कम से कम एक इंसान को नशे के चंगुल से बाहर निकालने में मदद करेंगे और समाज को नशे के खिलाफ जागरूक करेंगे। </p>
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                <pubDate>Tue, 30 Dec 2025 17:35:56 +0530</pubDate>
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