26 नवंबर संविधान दिवस

संविधान यानि कि हमारे मौलिक अधिकार,हमारे कर्तव्‍य,जो हमारी ढाल बनकर हमें हमारा हक दिलवाते हैं

Created By : Manuj on :26-11-2022 12:22:41 स्मिथा सिंह खबर सुनें

26 नवंबर संविधान दिवस
गुलाम भारत को दौ सौ साल के बाद अंग्रेजी हुकूमत से आजादी मिली इसलिए 15 अगस्‍त की वो तारीख सभी के जहन में बसी है। लेकिन एक और तारीख है जो आजाद भारत के लिए खास है और वो है 26 नंवबर की तारीख, क्‍योंकि ये वो ही खास दिन है जिस दिन देश की संविधान सभा ने मौजूदा संविधान को विधिवत रूप से अपनाया था। संविधान यानि कि हमारे मौलिक अधिकार,हमारे कर्तव्‍य,जो हमारी ढाल बनकर हमें हमारा हक दिलवाते हैं। इ सके साथ ही ये मौलिक कर्तव्‍य हमें हमारी जिम्‍मेदारियां याद दिलाते है।

ये भी पढ़ें

हरियाणा में पराली प्रबंधन का खोजा नायाब तरीका

हर साल 26 नंवबर को भारत का संविधान दिवस मनाया जाता है। हालांकि पहले ऐसा नहीं था, साल 2015 में बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर की 125 वीं जयंती के मौके पर पीएम मोदी की सरकार ने 26 नवंबर को संविधान दिवस के तौर पर मनाने की घोषणा की और 19 नंवबर 2015 को सामाजिक न्‍याय मंत्रालय द्वारा ये फैसला लिया गया कि भारत सरकार 26 नंवबर को संविधान दिवस के रूप में मलाए जाने की परंपरा शुरू की जाएगी और तब से ही हर साल 26 नंवबर को संविधान दिवस मनाया जाता है।


इस दिन को राष्‍ट्रीय कानून दिवस के तौर पर भी जाना जाता है। 26 नंवबर 1949 को संविधान को अपनाया गया था और 26 जनवरी 1950 को इसे देश में लागू किया गया था। संविधान दिवस का दिन हमारे लिए वो मौका है जब हम न सिर्फ आजाद भारत का नागरिक होने का अहसास करते है बल्कि ये हमें हमारे कर्तव्‍यों मौलिक अधिकारों को नागरिक के तौर पर अपनी जिम्‍मेदारियों को याद दिलाता है।
क्‍या है संविधान और उसका महत्‍व--- हमारे भारत देश ने औपचारिक रूप से 26 नवंबर 1949 को ही संविधान को अपना लिया था, हालांकि इसे 26 जनवरी 1950 को लागू किया गया, संविधान को तैयार करने में कुल दो साल 11 महीने और 18 दिन का वक्‍त लगा। संविधान दिवस को मनाने का मुख्‍य उद्देश्‍य था संविधान के निर्माता और देश के पहले कानून मंत्री डॉक्‍टर भीमराव अंबेडकर को श्रद्धांजलि देना।

ये भी पढ़ें

समय को पहचानना सीखिए

भारत के संविधान में जो भी अधिकार हमें मिले है,उन्‍हीं के आधार पर देश की सरकार और राजनीतिक सिद्धांत,प्रक्रियाएं,अधिकार,दिशा-निर्देष,प्रतिबंध और कर्तव्‍य आदि को तय किया जाता है। हमारे भारत देश का संविधान देश को संप्रभु,धर्मनिरपेक्ष,समाजवादी,लोकत्रांतिक गणतंत्र बनाता है और नागरिकों के लिए समानता,स्‍वतंत्रता और न्‍याय की व्‍यवस्‍था रखता है।


संविधान की क्‍या जरूरत थी--- दो सौ साल की अंग्रेजो की गुलामी करने के बाद देश को एक ऐसे कानून की आवश्‍यकता पड़ी जो देश में रहने वाले लोगों, अलग-अलग धर्मो के बीच एक समानता और एकता का भाव दिलवा सकें, देश एकजुट हो सकें, सभी लोग बिना किसी भेदभाव के मिलजुलकर रहें सभी को समान अधिकार मिल सकें। इन्‍हीं सभी मुद्दों को लेकर जब देश आजाद हुआ था

ये भी पढ़ें

समय को पहचानना सीखिए

तब एक संविधान सभा के गठन की मांग स्‍वतंत्रता सेनानियों के बीच उठने लगी।
कैसे बना संविधान--- आजादी के बाद एक संविधान सभा का गठन किया गया, संविधान सभा की पहली बैठक नौ दिसंबर 1946 को संसद भवन के सेंट्रल हॉल में रखी गई,उस दिन दौ सौ सात सदस्‍य ही बैठक में शामिल हुए थे। पहले संविधान सभा में कुल मिलाकर 389 सदस्‍य थे, लेकिन देश के बंटवारे के बाद कुछ रियासतों के संविधान सभा में भाग ना लेने के कारण सभा के सदस्‍यों की संख्‍या घटकर 299 हो गई थी। संविधान सभा के सदस्‍य भारत के राज्‍यों की सभाओं के निर्वाचित सदस्‍यों के द्वारा चुने गए थे

ये भी पढ़ें

सुप्रीमकोर्ट को क्यों याद आ रहे हैं शेषन!

पंडित जवाहरलाल नेहरु, डॉक्‍टर भीमराव अंबेडकर,डॉक्‍टर राजेन्‍द्र प्रसाद, सरदार वल्‍लभ भाई पटेल, मौलाना अबुल कलाम आजाद आदि इस सभा के प्रमुख सदस्‍य थे।
ये जानकारी भी आपको होनी चाहिए--- हमारे देश भारत का संविधान सबसे लंबा लिखित संविधान है, इसके कई हिस्‍से यूनाइटेड किंगडम, अमेरिका, जर्मनी, आयरलैंड, ऑस्‍ट्रेलिया, कनाडा और जापान के संविधान से लिए गए है। इसमें देश के नागरिकों के मौलिक अधिकारों, कर्तव्‍यों, सरकार की भूमिका, प्रधानमंत्री, राष्‍ट्रपति, राज्‍यपाल और मुख्‍यमंत्री की शक्तियों का बखान भी मिलता है।

Share On