पसीना बहाने में फीसड्डी हैं 41 प्रतिशत भारतीय, बीमारियां कम करने के लिए करना ही होगा शारीरिक श्रम

भारतीय में कम शारीरिक श्रम करने की आदत नॉन कम्यूनिकेबल डिसीस, जैसे मोटापा, डायबिटिज ब्लड प्रेशर आदि का शिकार बना रही है। विश्व स्वास्थ्य संगठन और आईसीएमआर के सहयोग से किए गए एक ताजा सर्वेक्षण में इस बात का खुलाया किया गया है कि केवल 41.5 प्रतिशत भारतीय बेहद आलसी और मेहनत करने में फिसड्डी हैं।

Created By : Pradeep on :12-02-2022 15:44:49 प्रतीकात्मक तस्तीर खबर सुनें

नई दिल्ली
भारतीय में कम शारीरिक श्रम करने की आदत नॉन कम्यूनिकेबल डिसीस, जैसे मोटापा, डायबिटिज ब्लड प्रेशर आदि का शिकार बना रही है। विश्व स्वास्थ्य संगठन और आईसीएमआर के सहयोग से किए गए एक ताजा सर्वेक्षण में इस बात का खुलाया किया गया है कि केवल 41.5 प्रतिशत भारतीय बेहद आलसी और मेहनत करने में फिसड्डी हैं, जिसकी वजह से एनसीडी बीमारियों का ग्राफ बढ़ रहा है। भारतीयों में शारीरिक श्रम की स्थिति का पता लगाने के लिए वर्ष 2017 से 2018 के बीच 12000 पर फिजिकल एक्टिविटी के लिए तैयार अंर्तराष्ट्रीय मानकों के आधार पर सर्वेक्षण किया गया। शारीरिक श्रम करने में पुरूषों की स्थिति महिलाओं से थोड़ी बेहतर हैं, वहीं शहर की अपेक्षा गांव में लोग दिनभर में औसतन अधिक पैदल चल लेते हैं। सर्वेक्षण में 18-69 आयुवर्ग के लोगों को शामिल किया गया।
नेशनल नॉन कम्यूनिकेबल डिसीस मॉनिटरिंग सर्वेक्षण का उद्देश्य गैर संक्रामक बीमारियां जैसे मोटापा, डायबिटिज, ब्लडप्रेशन, दिल के रोग आदि की वजह का पता लगाकर बीमारियों की रोकथाम के लिए नीति निर्धारक फैसले लेना रखा गया। इसमें आईसीएमआर से जुड़े वैज्ञानिकों का अहम योगदान रहा। सर्वेक्षण में शामिल लोगों की सहमति से उनकी फिजिकल एक्टिविटी संबंधी दिनचर्या से संबंधित एक फार्म पर जानकारी हासिल की गई, इसमें इस बात का ध्यान रखा गया कि 12 हजार लोगों में लगभग हर वर्ग के लोगों का प्रतिनिधित्व हो सके, इसके लिए 600-600 विभाजित समूह में वार्ड और ब्लॉक स्तर के लोगों से भी जानकारी जुटाई गई। जिससे सर्वेक्षण में शहरी लोगों के साथ ही ग्रामीण निवासियों की भी फिजिकल एक्टिविटी का पता लग सका। पीए या फिजिकल एक्टिविटी की जानकारी के लिए अंतराष्ट्रीय स्तर के मानके प्रश्न तालिका पर जानकारी जुटाई गई। इसमें वजन, लिंग और लंबाई को भी ध्यान में रखा गया।

क्या रहे सर्वेक्षण के परिणाम
आईसीएमआर की द इंस्टीट्यूशनल एथिक्स कमेटी- नेशनल सेंटर फॉर डिसीज इंफारमेशन द्वारा स्वीकृत किए गए इस सर्वेक्षण दस एजेंसियों का सहयोग रहा। 12 हजार शामिल सैंपल सर्वे में 10659 लोगों ने सर्वेक्षण के सभी चरण पूरे किए। इसमें से 105 व्यस्क को बाद में चरण में शामिल नहीं किया गया क्योंकि वह विश्व स्वास्थ्य संगठन के तय मानक से भी अधिक घंटे शारीरिक श्रम करते हुए पाए गए। अंतिम नतीजों के अनुसार 41.4 प्रतिशत भारतीय विश्व स्वास्थ्य संगठन के तय मानक सप्ताह में 600 एमईटी (वन मेटाबॉलिक इक्वेलेंट) के अनुसार शारीरिक श्रम नहीं करते हैं। आधी से अधिक महिलाएं 52 प्रतिशत भी पसीना बहाने में पीछे हैं। वहीं शहरी आबादी के एवज में ग्रामीण क्षेत्र में पीए की स्थिति अधिक बेहतर है। महत्वपूर्ण यह है कि 2025 तक ग्लोबल बर्डन ऑफ डिसीस को कम करने के लिए सभी व्यस्क को अनिवार्य रूप से नियमित कम से 40 मिनट व्यायाम करने की सलाह दी गई है। सर्वेक्षण केन्द्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा फंड पोषित था।

नॉन कम्यूनिकेबल बीमारियों की स्थिति

कुल बीमारियों से होने वाले 71 प्रतिशत वैश्विक मृत्यु की वजह एनसीडी या नॉन कम्यूनिकेबल डिसीज जैसे कैंसर, हृदयघात, मोटापा, ब्लडप्रेशर आदि की वजह से होती हैं। इन बीमारियों की वजह तंबाकू का सेवन, शारीरिक श्रम न करना, पौष्टिक आहार की कमी और अनियमित दिनचर्या को माना गया है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने शारीरिक श्रम न करने को एक वैश्विक चिंता का विषय बताया है जिसकी वजह से प्रतिवर्ष ग्लोबल बर्डन ऑफ डिसीज बढ़ रहा है। डब्लूएचओ ने सदस्य देशों से कहा है कि बीमारियों के इस बढ़ते हुए बोझ को कम करने के लिए सभी देशों को अपने नागरिको को कम से दस प्रतिशत फिजिकल इनीक्टिविटी को अवश्य ही तुरंत कम करना होगा, जबकि बीते 16 साल में पीए मे केवल 3.5 प्रतिशत का अंतर देखा गया है। इसके लिए कई देश राष्ट्र व्यापी रणनीतियां और योजनाएं बना रहे हैं।

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