कोविड के कहर के बाद फिर डरा रहे हैं टीबी के बढ़ते आंकड़े

डॉक्टर मंगला कहते हैं कि तीन हफ्ते से ज्यादा खांसी हो तो लापरवाह न बनें। तुरंत टीबी की जांच कराएं। टीबी मुक्त देश मुहिम के तहत सरकारी अस्तपातों में बलगम की जांच मुफ्त होती है।

Created By : ashok on :31-10-2022 15:15:22 स्मिथा सिंह खबर सुनें

स्मिथा सिंह
टीबी यानि ट्यूबरक्लोसिस जिसे तपेदिक या क्षय रोग भी कहा जाता है, यह एक संक्रामक बीमारी है, जो एक से दूसरे तक पहुंचती या फैलती है। कारण या वजह बनते हैं कीटाणु। यदि एक व्यक्ति टीबी से संक्रमित है तो संभावना रहती है कि दूसरा को भी उससे संक्रमित हो जाए। लेकिन हर तरह की टीबी में ऐसा नहीं होता, सिर्फ फेफड़े की टीबी में ऐसा होता है। लेकिन आमतौर पर लोग टीबी शब्द सुनते ही मरीज से दूरी बना लेते हैं। बेशक एहतियात जरूरी है, लेकिन साथ ही जरूरी है, पूरी जानकारी। 20 साल से जहां इस बीमारी में मरीजों की गिनती लगातार घट रही थी, अब वो फिर बढ़ने लगी है। बीते दो साल में टीबी के मरीज और इस रोग के चलते मौत का आंकड़ा बढ़ा है।

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ये दो दशक में पहली दफा है, जब टीबी के मामलों में बढ़ोत्तरी देखी जा रही है। इस बढ़ती गिनती को लेकर विश्व स्वास्थ्य संगठन का कहना है कि कोविड 19 के चलते टीबी का इलाज और निदान प्रभावित हुआ है। इसी वजह से मरीजों की गिनती और टीबी के चलते मौतों की संख्या बढ़ी है। भारत के लिए यह चिंता की बात है, क्योंकि दुनिया के आठ देशों में ही टीबी के दो तिहाई से ज्यादा मामले हैं जिनमें भारत भी शामिल है। इसके अलावा चीन, पाकिस्तान, बांग्लादेश, इंडोनेशिया, फिलीपींस, नाइजीरिया और कांगो में भी टीबी के मरीज ज्यादा हैं। बीते सालों में दुनिया के जिन चार देशों में टीबी से सबसे ज्यादा मौतें हुई हैं, उनमें भारत पहले नंबर पर है। इसलिए जरूरी है कि हम इस मुद्दे की गंभीरता को समझें और इस विषय के प्रति पूरी तरह जागरुक बनें।


आज के समय में भी बहुत से लोग इस रोग के कारण, लक्षण, उपचार व निदान पर गंभीरता नहीं दिखाते हैं। लेकिन इस रोग को जड़ से खत्म करने के लिए जरूरी है जागरूकता। इस विषय पर हमने बात की फरीदाबार के मेट्रो अस्पताल के रेस्पिरेटरी मेडिसिन के कंसल्टेंट, डॉक्टर लवली मंगला से, जिन्होंने टीबी यानि क्षय रोग के बारे में विस्तार से बात की और इसके कारण, लक्षण निदान भी बताए। जिन्हें ध्यान में रखा जाए तो रोगी समय पर इलाज शुरू करके भी स्वस्थ हो सकता है।

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डॉक्टर लवलीन मंगला जोर देकर कहते हैं कि तीन हफ्ते से ज्यादा अगर आपको खांसी बनी रहती है, तो किसी और लक्षण के उभरने का इंतजार बिल्कुल न करें। जांच कराएं। इसके अलावा कुछ और लक्षण हैं जो ये संकेत देते हैं कि आप इस बीमारी की चपेट में हो सकते हैं जैसे- सीने में, छाती में जकड़न या दर्द महसूस होना, फीवर रहना, खास तौर पर शाम के समय बुखार का बढ़ना भूख में कमी आना और लगातार वजन का गिरना। ये कुछ सामान्य लक्षण हैं, जो टीबी की गंभीरता का इशारा करते हैं। इन्हें अनदेखा करने पर कुछ वक्त के बाद बगलम के साथ खून का आना रोग की बढ़ती गंभीरता को बताता है।


डॉक्टर मंगला कहते हैं कि तीन हफ्ते से ज्यादा खांसी हो तो लापरवाह न बनें। तुरंत टीबी की जांच कराएं। टीबी मुक्त देश मुहिम के तहत सरकारी अस्तपातों में बलगम की जांच मुफ्त होती है। सक्षम हैं तो किसी भी अस्पताल में ये जांच करा सकते हैं। यदि समस्या है तो इलाज तुरंत शुरू कराएं, देश के सरकारी अस्पतालों में टीबी का इलाज मुफ्त किया जाता है। जरूरत है तो इलाज पूरा कराने की, समय पर दवाएं लेना, नियमित लेना और जितने महीने का कोर्स है, उतने समय तक बिना स्किप किए दवा खाना, इस रोग को रोक सकता है।

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जहां तक बात है इस रोग से बचाव के उिपायों की, तो उसके लिए जन्म से एक महीने के भीतर ही नवजात को बीसीजी का टीका लगाया जाता है। इसके अलावा यदि आपके परिवार में कोई सदस्य इस रोग से पीड़ित है, इलाज चल रहा है तो सबसे पहले जरूरी है कि रोगी और घर के अन्य सदस्य एहतियात बरतें, खांसते छींकते वक्त मुंह पर रुमाल रखें। टीबी के मरीज को इधर उधर थूकने से भी बचना चाहिए। डॉ. लवलीन मंगला कहते हैं कि लंग्स की टीबी ही वो टीबी है, जिसके प्रति सावधान और ज्यादा एतियात बरतने की जरूरत है क्योंकि ये ज्यादा संक्रामक होती है। इसके एक से दूसके को फैलने का खतरा ज्यादा रहता है, बजाय आंत, गुर्दे या हड्डी की टीबी के। डॉक्टर मंगला का कहना है कि संक्रमण से अलग बिगड़ता लाइफ स्टाइल, खानपान, धूम्रपान आदि इसके अहम कारण हैं, जो रोग के विस्तार को बढ़ाते हैं। टीबी यानि ट्यूबरक्लोसिस महज एक रोग नहीं बल्कि अपने देश की एक सामाजिक, आर्थिक समस्या और एक चुनौती भी है।
(ये लेखिका के निजी विचार हैं)

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