बोधि वृक्ष: विद्या का हमेशा करें सदुपयोग

कहा जाता है कि विद्या मे वह ताकत होती है कि वह इनसान की तकदीर बदल दे। लेकिन उस विद्या का उपयोग और दुरुपयोग हमी करते हैं। विद्या छोटी बड़ी नहीं होती। इस संदर्भ में एक कथा कही जाती है। एक बार एक गांव मे एक व्यक्ति रहता था।

Created By : Pradeep on :13-01-2022 18:45:06 प्रतीकात्मक तस्वीर खबर सुनें

अशोक मिश्र

कहा जाता है कि विद्या मे वह ताकत होती है कि वह इनसान की तकदीर बदल दे। लेकिन उस विद्या का उपयोग और दुरुपयोग हमी करते हैं। विद्या छोटी बड़ी नहीं होती। इस संदर्भ में एक कथा कही जाती है। एक बार एक गांव मे एक व्यक्ति रहता था। वह पशु पक्षियों का व्यापार किया करता था। उसे मालूम हुआ कि उसके गुरु को पशु पक्षियों की बोली लगाने की अच्छी विद्या आती है।
वह पहुंच गया गुरु के पास और जाते ही गुरु की सेवा करने लगा तो उसने कहा कि मुझे पशु पक्षियों के व्यापार करने की विधि बता दो जिससे मुझे अच्छा मुनाफा हो सके। गुरु कहते हैं कि ठीक है परन्तु एक बात ध्यान रखना कि कभी भी इस विधि का प्रयोग अपने फायदे के लिए मत करना। वह कहता है ठीक है। वह जैसे ही घर पहुंचा कबूतर उससे कहता है कि दो दिन बाद बैल मरने वाले हैं। वह सुनते ही बैलों को बेच देता है। उसे अच्छा मुनाफा होता है। दूसरे दिन एक चिडिय़ा कहती है कि मुर्गियां मरने वाली हैं। उसने सारी मुर्गियां अच्छे दामों पर बेच दी।
एक बार बिल्ली ने कहा कि तुम मरने वाले है। तो वह परेशान हो जाता है और गुरु के पास जाता है और कहता है कि मैं मरने वाला हूं। तो गुरु कहते हैं कि मैने पहले कहा था कि इस विद्या का प्रयोग कभी खुद की भलाई के लिए मत करना। खुद के मुनाफे के लिए कभी मत करना। विद्या की हमेशा एक खासियत होती है, उसे कभी अपने लिए नहीं प्रयोग किया जाता। और नहीं दूसरों की बुराई के लिए उसका प्रयोग करना है। जब भी ऐसा किया जाता है, तो कुछ न कुछ बुरा ही होता है। विद्या कोई भी दूसरों का भला करने के लिए होती है।
यदि उसका उपयोग परहित में किया जाए, तो वह दिन दूनी रात चौगुनी बढ़ती है। यही नहीं, विद्या के चलते कभी किसी का नुकसान नहीं होता है, बस, लालच और लोभ से अगर व्यक्ति दूर रहे। लोभ, मोह, क्रोध और मद ये ऐसे विकार हैं जो विद्या की भी चमक फीकी कर देते हैं। विद्या जब लालच के वशीभूत हो जाती है, तो बेकार हो जाती है।

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