रूस के साथ दोस्ती से नाराज हुआ अमेरिका, दी ये चेतावनी

रूस-यूक्रेन में युद्ध के जारी है। इसी बीच अमेरिका ने भारत को चेतावनी दी है। अमेरिका रूस पर भारत के रुख से बेहद नाराज है। बार-बार दबाव बनाने के बावजूद भी जब भारत ने रूस को लेकर अपने निष्पक्ष रुख में बदलाव नहीं किया तो अमेरिका अब धमकी देने पर उतर आया है।

Created By : Pradeep on :07-04-2022 12:25:39 प्रतीकात्मक तस्वीर खबर सुनें

रूस-यूक्रेन में युद्ध के जारी है। इसी बीच अमेरिका ने भारत को चेतावनी दी है। अमेरिका रूस पर भारत के रुख से बेहद नाराज है। बार-बार दबाव बनाने के बावजूद भी जब भारत ने रूस को लेकर अपने निष्पक्ष रुख में बदलाव नहीं किया तो अमेरिका अब धमकी देने पर उतर आया है। अमेरिका का कहना है कि भारत अगर रूस के साथ गठबंधन करता है तो उसे भारी कीमत चुकानी होगी। ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक, राष्ट्रपति जो बाइडेन के शीर्ष आर्थिक सलाहकार ब्रायन डीज ने कहा है कि अमेरिकी प्रशासन ने भारत को रूस के साथ गठबंधन करने के खिलाफ चेतावनी दी है।

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बता दें कि यूक्रेन-रूस युद्ध पर भारत की कुछ प्रतिक्रियाओं से अमेरिका नाराज है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय न्यूज वेबसाइट क्रिश्चियन साइंस मॉनिटर की तरफ से बुधवार को आयोजित एक कार्यक्रम में संवाददाताओं से कहा कि युद्ध के संदर्भ में कई ऐसे मौके रहे हैं जहां हम चीन और भारत दोनों के फैसलों से निराश हुए हैं। उन्होंने कहा कि अमेरिका ने भारत से कहा है कि अगर भारत रूस के साथ अपनी रणनीतिक साझेदारी को और बढ़ाता है तो भारत को इसके दीर्घकालीन अंजाम झेलने पड़ेंगे।


यूक्रेन पर रूसी आक्रमण को लेकर जहां अमेरिका, यूरोपीय देशों, ऑस्ट्रेलिया और जापान ने रूस पर कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगाए हैं। वहीं भारत ने रूसी हमले की आलोचना तक नहीं की है। भारत ने संयुक्त राष्ट्र में रूसी हमले के निंदा प्रस्तावों पर वोटिंग से भी खुद को दूर रखा है। भारत लगातार कहता रहा है कि हिंसा को तत्काल समाप्त किया जाना चाहिए और दोनों पक्षों को कूटनीतिक तरीके से मतभेदों को सुलझाना चाहिए।

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भारत ने यूक्रेन में मानवीय मदद भी भेजी है। वहीं, रूस भारत को रियायती दरों पर ईंधन तेल ऑफर कर रहा है जिसे लेने के लिए भारत तैयार है। भारत ने रूस से तेल का आयात भी पहले की तरह जारी रखा है। भारत और अमेरिका पिछले कुछ दशकों से काफी करीब आए हैं और दोनों देशों के बीच का सामरिक और रणनीतिक रिश्ता भी काफी मजबूत हुआ है। चीनी आक्रामकता के खिलाफ अमेरिका भारत के साथ दिखा है और वो कई बार भारत के पक्ष में बयान भी दे चुका है।

भारत को भी चीनी प्रभाव का मुकाबला करने के लिए अमेरिका का साथ जरूरी है लेकिन रूस-यूक्रेन युद्ध में भारत के निष्पक्ष और स्वतंत्र रुख से अमेरिका भारत से काफी नाराज हुआ है। अमेरिका ने हर स्तर पर भारत से बात करके उसके रुख में बदलाव की कोशिश की है। कई अमेरिकी अधिकारी भी भारत आए हैं लेकिन इन सबका अब तक कोई फायदा नहीं हुआ है। पिछले हफ्ते अमेरिका के उप राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार दलीप सिंह भी भारत आए थे। अपनी भारत यात्रा के दौरान दलीप ने भी भारत पर रूस से संबंधों को आगे न बढ़ाने का आग्रह किया था।

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