आदमी की मौलिक जरूरत

रोटी, कपड़ा और मकान के अलावा जितनी चीजें हैं, वे विलासिता की श्रेणी में आनी चाहिए। सोना, चांदी, जवाहरात, रुपये पैसे सब बेकार हो जाते हैं, जब किसी व्यक्ति को भूख लगती है।

Created By : ashok on :02-11-2022 15:51:14 अशोक मिश्र खबर सुनें

अशोक मिश्र
आदमी की मौलिक जरूरत क्या है? यह एक अहम सवाल है। खाना, पानी, रहने के लिए एक छत और पहनने के लिए कपड़े। यह मनुष्य की न्यूनतम जरूरत है। अगर आदमी को जीवन भर इतना मिलने की गारंटी मिल जाए, तो मेरा ख्याल है कि व्यक्ति को संतुष्ट हो जाना चाहिए। लेकिन ऐसा होता नहीं है। किसी की जीवन भर ये न्यूनतम जरूरतें भी पूरी नहीं हो पाती हैं और किसी के पास इतना होता है कि वह जीवन भर खुले हाथ से लुटाता रहे तो भी उसके पास कमी नहीं होगी। रोटी, कपड़ा और मकान के अलावा जितनी चीजें हैं, वे विलासिता की श्रेणी में आनी चाहिए। सोना, चांदी, जवाहरात, रुपये पैसे सब बेकार हो जाते हैं, जब किसी व्यक्ति को भूख लगती है।

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आदमी भूख लगने पर खाता अन्न ही है, प्यास लगने पर पीता वह पानी ही है। नींद आने पर उसे एक अदद बिस्तर चाहिए। इससे इतर जो भी चीजें हैं, वह भूख, प्यास और नींद की तृप्ति होने के बाद काम आने वाली वस्तुएं हैं। फिर भी इंसान दूसरी वस्तुओं को संग्रहीत करने में जीवन भर लगा रहता है। एक लाख है, तो एक करोड़ करने में जुटा रहता है। एक घर है, तो दूसरा घर बनाने की फिराक में ही जीवन गुजार देता है। वह उन लोगों के बारे में कतई नहीं सोच पाता है कि जिन लोगों के पास खाने को अन्न नहीं, पीने को पानी नहीं और सोने के लिए एक बिस्तर नहीं है, वे अपना जीवन कैसे गुजारते होंगे। भूख लगने पर वह सोना, चांदी और हीरे-जवाहरात नहीं खा सकता है। प्यास लगने पर उसे पानी ही चाहिए, दूसरे तरल पदार्थ नहीं चाहिए। फिर इतनी लालसा क्यों? दूसरों की संपत्ति हड़प लेने की इच्छा क्यों? अपनी अगली पीढ़ी के लिए अधिक से अधिक जमा कर लेने की हवस क्यों?

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