चैत्र नवरात्रि में कब करें घटस्थापना, जानें ये पूरी विधि

चैत्र नवरात्रि हिन्दू नववर्ष का भी सबसे पहला त्योहार होता है। क्योंकि चैत्र नवरात्रि के पहले दिन से ही हिन्दू नववर्ष की शुरुआत होती है। नवरात्रि का यह पर्व नौ दिनों तक चलने वाला और मां दुर्गा को समर्पित है। इस दौरान मां दुर्गा के नौ अलग-अलग रुपों की उपासना और व्रत भी किए जाते हैं।

Created By : Mukesh on :25-03-2022 14:11:12 प्रतीकात्मक खबर सुनें

चैत्र नवरात्रि हिन्दू नववर्ष का भी सबसे पहला त्योहार होता है। क्योंकि चैत्र नवरात्रि के पहले दिन से ही हिन्दू नववर्ष की शुरुआत होती है। नवरात्रि का यह पर्व नौ दिनों तक चलने वाला और मां दुर्गा को समर्पित है। इस दौरान मां दुर्गा के नौ अलग-अलग रुपों की उपासना और व्रत भी किए जाते हैं। वहीं सालभर में चार बार नवरात्रि आती हैं। इनमें से दो गुप्त और दो सार्वजनिक अर्थात चैत्र और शारदीय नवरात्रि होती हैं। वहीं नवरात्रि व्रत के पहले दिन घर में घटस्थापना की जाती है और उसके बाद मां की उपासना का यह पर्व संपन्न किया जाता है। तो आइए जानते हैं साल 2022 में चैत्र नवरात्रि के दौरान घट या कलश स्थापना कब किया जाएगा और इसकी पूजा विधि क्या होगी।
घटस्थापना का शुभ मुहूर्त 2022
चैत्र नवरात्रि के लिए घटस्थापना शुभ मुहूर्त : 02 अप्रैल 2022, शनिवार की सुबह 06:22 मिनट से सुबह 08:31 मिनट तक रहेगा।
कुल अवधि : 02 घंटे 09 मिनट की रहेगी।
घटस्थापना अभिजीत मुहूर्त : दोपहर 12:08 मिनट से दोपहर 12:57 मिनट तक रहेगा।
कलश स्थापना विधि
नवरात्रि के नौ दिनों तक मां दुर्गा के नौ स्वरुपों की अराधना होती है। पहले दिन विधि अनुसार, घटस्थापना का विधान है। घट स्थापना से एक दिन पूर्व पूजा की सामग्री एकत्रित कर लें। इसके बाद नवरात्रि के पहले दिन स्नान के बाद पूजास्थल को स्वच्छ कर एक चौकी पर गंगाजल छिड़क कर उसे भी शुद्ध कर लें और उस पर लाल कपड़ा बिछाएं और माता दुर्गा की प्रतिमा को इस चौकी पर स्थापित करें और कलश की स्थापना करें।
कलश स्थापना या घटस्थापना के लिए रेत के ऊपर सात तरह के अनाज के बीज छिड़क दें। कलश स्थापना के लिए तांबे या मिट्टी का पात्र लें और इस कलश में गंगाजल मिला जल डाल लें। कलश में पान, सुपारी, अक्षत, हल्दी की गांठ, रुपया व दूब डालकी कलश के मुंह को मौली से बांध लें। अब कलश में आम या अशोक के पत्ते डाल लें। नारियल को एक चुनरी में लपेटकर कलश के ऊपर एक बर्तन में चावल भरकर इस पर नारियल स्थापित करें। अब व्रत का संकल्प लेकर गणपति व मां दुर्गा भवानी का स्मरण और ध्यान करें। कलश की स्थापना के बाद मां दुर्गा को लाल वस्त्र, लाल फूल, लाल चुनरी और श्रृंगार की वस्तुएं अर्पित कर धूप-दीप जलाएं और विधिपूर्वक नौ दिनों तक मां भगवती का पूजन, दुर्गा सप्तशती का पाठ करके कन्या पूजन करें।
Disclaimer: इस स्टोरी में दी गई सूचनाएं सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं। Desh Rojana Portal किसी भी अंधविश्वास और इन तथ्यों की किसी प्रकार से कोई पुष्टि नहीं करता है। इन तथ्यों पर अमल करने से पहले संबंधित ज्योतिषी, आचार्य तथा विशेषज्ञ से संपर्क करें।

Share On