दूसरे देश के आंतरिक मामलों में चीन का बढ़ता हस्तक्षेप

दरअसल, पश्चिमी देशों की मीडिया रिपोर्ट्स की मानें, तो चीन राष्ट्रपति जिनपिंग कनाडा के प्रधानमंत्री पर इसलिए झल्लाए हुए थे क्योंकि उन दोनों के बीच हुई बातचीत मीडिया में लीक हो गई थी।

Created By : ashok on :18-11-2022 14:14:47 संजय मग्गू खबर सुनें

त्वरित टिप्पणी

संजय मग्गू
इंडोनेशिया के बाली शहर में दो दिवसीय जी-20 शिखर सम्मेलन की उपलब्धियों की समीक्षा होती रहेगी, लेकिन पश्चिमी मीडिया में कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच हुई झड़प या झल्लाहट की चर्चा बड़ी जोर शोर से हुई। भारत की मीडिया में यह सिर्फ एक खबर बनकर रह गई क्योंकि ट्रूडो पर जिनपिंग की झल्लाहट की असली वजह तब तक सामने नहीं आ पाई थी। पश्चिमी मीडिया ने दोनों नेताओं के बीच हुई बातचीत पर विस्तार से चर्चा की है और चीन पर चुटकी भी ली है। दरअसल, पश्चिमी देशों की मीडिया रिपोर्ट्स की मानें, तो चीन राष्ट्रपति जिनपिंग कनाडा के प्रधानमंत्री पर इसलिए झल्लाए हुए थे क्योंकि उन दोनों के बीच हुई बातचीत मीडिया में लीक हो गई थी। इस घटना से एक दिन पहले हुआ यह था कि ट्रूडो ने जिनपिंग के साथ अनौपचारिक बातचीत के दौरान उनके देश की दूसरे देशों के आंतरिक मामलों में अनावश्यक हस्तक्षेप को लेकर आपत्ति जताई थी।

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इस बातचीत की वीडियो क्लिप पश्चिमी देशों के सोशल मीडिया से लेकर अन्य मीडिया में वायरल हो गई थी। बस, यही बात जिनपिंग को बुरी लगी थी और दूसरे दिन जब ट्रूडो से उनकी थोड़ी देर के लिए मुलाकात हुई, तो वह अपनी झल्लाहट व्यक्त करने से नहीं रोक पाए। उन्होंने कहा कि आपसी बातचीत को मीडिया में लीक करना सही नहीं है। उनके इस आरोप का कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने विरोध किया। पश्चिमी मीडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, इसी साल कनाडा की खुफिया एजेंसी ने सरकार को रिपोर्ट दी थी कि जब वर्ष 2019 में जब संघीय चुनाव हुए थे, तो चीन ने चुनाव को प्रभावित करने के लिए हस्तक्षेप किया था। चीन सरकार के इशारे पर चुनाव को प्रभावित करने के लिए पैसा भी इन्वेस्ट किया गया था। कनाडा में हुए संघीय चुनाव के दौरान चीन की हस्तक्षेप नीति से जस्टिन ट्रूडो काफी नाराज थे।

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और इसी नाराजगी का इजहार ट्रूडो ने जिनपिंग के सामने किया था जो लीक होकर मीडिया में आ गया था। यही नहीं, जी-20 शिखर सम्मेलन से ठीक दो दिन पहले कनाडा में क्यूबेक पॉवर कंपनी के एक रिसर्चर को जासूसी के आरोप में गिरफ्तार किया गया था जो कनाडा में रिसर्च के बहाने वहां की खुफिया जानकारी चीन भेजता था। वैसे चीन की यह हरकत कोई नई बात नहीं है। सरकार के इशारे पर चीनी कंपनियां विभिन्न देशों में व्यवसाय के नाम प्रवेश करती हैं और फिर धीरे-धीरे घुसपैठ करके वहां रक्षा, व्यापार, चिकित्सा, अंतरिक्ष अनुसंधान आदि से जुड़ी जानकारियां इकट्ठी करके चीन भेजती हैं। भारत में भी कई बार चीनी कंपनियों पर इसी आरोप में प्रतिबंध लगाया जा चुका है। विभिन्न चीनी वेबसाइटों पर रोक लगाई गई है। पाकिस्तान, श्रीलंका, बांग्लादेश, नेपाल, म्यांमार जैसे तमाम देशों में चीन पूंजी निवेश के नाम पर घुसपैठ कर चुका है और वहां की सरकार पर दबाव डालकर अपने मनमुताबिक फैसले करवा रहा है। इन तमाम देशों के चुनावों में भी वह हस्तक्षेप करता रहता है। बस, उसकी दाल भारत के मामले में नहीं गलती है।

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