पंचायत प्रतिनिधियों को सीएम की नेक सलाह

मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने भी शपथ ग्रहण समारोह  के बाद प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए कहा कि पंचायतें गांव की सरकार होती हैं। गांव में विकास के साथ साथ भाईचारा, सांप्रदायिक सौहार्द और धार्मिक एकता बनाए रखने की जिम्मेदारी पंचायत प्रतिनिधियों की होती है।

Created By : Manuj on :05-12-2022 14:38:34 संजय मग्गू खबर सुनें

पंचायत प्रतिनिधियों को सीएम की नेक सलाह


संजय मग्गू


शनिवार को प्रदेश के सत्तर हजार से अधिक पंचायत प्रतिनिधियों ने शपथ लिया। इसके बाद अब गांवों के विकास कार्यों में तेजी आने की उम्मीद पैदा हो गई है। मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने भी शपथ ग्रहण समारोह के बाद प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए कहा कि पंचायतें गांव की सरकार होती हैं।

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गांव में विकास के साथ साथ भाईचारा, सांप्रदायिक सौहार्द और धार्मिक एकता बनाए रखने की जिम्मेदारी पंचायत प्रतिनिधियों की होती है। यह बात पूरी तरह सही है कि यदि पंचायत प्रतिनिधि यानी पंच और सरपंच सारे भेदभाव भुलाकर कर्तव्य भावना से कार्य करें, तो सभी समस्याओं का समाधान किया जा सकता है। महात्मा गांधी गांवों के विकास को ही देश और प्रदेश के विकास का आधार मानते थे।

उनका मानना था कि यदि पंचायतें स्वराज की भावना से काम करें, तो गरीबी, बेकारी, अस्पृश्यता और जातीय भेदभाव जैसी विकृतियों से मुक्ति पाई जा सकती है। असल में यदि हम लोकतांत्रिक व्यवस्था पर गंभीरता से विचार करें, तो जिस तरह परिवार समाज की पहली इकाई है, ठीक उसी प्रकार ग्राम पंचायत लोकतंत्र की पहली इकाई है। लोकतंत्र की शुरुआत ही यहीं से होती है। जब तक हमारे देश की पंचायतें मजबूत और लोकतंत्र की भावना के अनुरूप नहीं होंगी, तब तक लोकतंत्र के मजबूत होने का सवाल ही नहीं उठता है। खुशहाल गांव ही राष्ट्र की आधारशिला होते हैं।

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जब गांव खुशहाल होंगे, तो निश्चित रूप से प्रदेश खुशहाल होगा और राष्ट्र का विकास होगा। प्रदेश के सीएम मनोहर लाल ने पंचायत प्रतिनिधियों को सलाह भी यही दी है कि वे सारे मतभेद भुलाकर गांव के विकास में जुट जाएं। यदि कोई समस्या आती है तो पुलिस के पास जाने की जगह पंचायत प्रतिनिधियों और गांव के गणमान्य लोगों की कमेटी बनाकर उसे सुलझाया जा सकता है।

इससे बेकार में थाना-कचहरी के चक्कर लगाने और मुकदमा लड़ने में खर्च होने वाले पैसे की तो बचत होगी ही, आपसी वैमनस्य भी नहीं बढ़ेगा। प्राचीन काल में भी तो ऐसा ही होता था। लोग हर समस्या का समाधान पंचायत के माध्यम से ही कर लेते थे। जब हमारे पुरखे ऐसा कर सकते थे, तो आज के इस युग में हम क्यों नहीं कर सकते हैं। हमें हर हाल में भाईचारा कायम रखना है।

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