कोरोना की कमजोरी हाथ लगी, ऐसी सुपर वैक्‍सीन बना रहे वैज्ञानिक जो हर स्वरूप का करेगी खात्मा

Corona Super Vaccine: कोरोना वायरस के नए स्वरूप ने बीते वर्ष तैयार हुए टीकों  को कम प्रभावी कर दिया है। नए कोरोना संक्रमण से नई महामारी का संकट है। ऐसी  वैक्‍सीन की आवश्यकता है जो इन तमाम वायरस से मुकाबला कर पाए।

Created By : Shiv Kumar on :21-02-2022 11:56:24 प्रतीकात्मक तस्वीर खबर सुनें

एजेंसी, दिल्ली।
बीते वर्ष कोरोना डेल्‍टा वेव में मौत ने हर ओर तांडव मचाया। लेकिन ये काल कम टीकाकरणा का था। दिसंबर व जनवरी में जब कोरोना ओमिक्रॉन ने देशभर में तेजी से पैर पसार ने शुरू किए तो मरने वालों की संख्‍या तुलनात्‍मक तौर से कम रही। वैसे ओमिक्रॉन लहर से एक बात स्पष्ट हो गई कि कोरोना से लड़ने के लिए रोग प्रतिरोधक क्षमता प्राप्त करना शायद मुमकिन नहीं है। टीके की दो दो डोज नाकाफी हैं, ना ही तीन या फिर चार। इजरायल में स्वास्थ्य कर्मियों को दो-दो कोविड की बूस्‍टर डोज लगने के बावजूद कोरोना हो गया। टीका निर्माताओं ने ये पहले ही बताया Fkk कि यदि आम जनता की नजर से देखें तो कोरोना बूस्‍टर्स डोज असुविधाजनक, महंगी व शायद व्‍यवहारिक नहीं हैं।
कोरोना से पहले सरकारों ने एडल्‍ट्स के लिए वैक्सीनेशन कार्यक्रम नहीं चलाया था। मतलब यह कि सालाना कोरोना वैक्‍सीनेशन से बात नहीं करेगी। यदि एसा कोई टीका बन जाए जो ना केवल कोरोना स्वरूप से जंग लड़ सके, बल्कि भविष्‍य में उभर सकने वाले कोरोनावायरस को भी हरा पाए तो खेल बदलने वाला साबित हो सकता है। दिसंबर में अमेरिका के महामारी विशेषज्ञ एंथनी फाउची व उनके दो साथियों ने एक यूनिवर्सल टीका की आवश्यकता बताई। न्‍यू इंग्‍लैंड जर्नल ऑफ मेडिसिन में उन्होंने लेख लिखा कि कोरोना कहीं जाने वाला नहीं है। वर्तमान टीका इसके नए स्वरूप पर लगाम नहीं लगा पाएंगे। साथ ही नया कोरोना संक्रमण भी महामारी के रूप में फैल सकते हैं, इस कारण वैज्ञानिकों को एक यूनिवर्सल कोरोना वायरस टीका की आवश्यकता है।
हाल के दिनों में 'नेचर' पत्रिका में छपा एक लेख भी 'वेरिएंट प्रूफ' टीका बनाने की जरूरत पर जोर देता है। इससे मिलने वाली प्रोटेक्‍शन समय के साथ कम होती जाएगी। लेख में ऐसे टीकों की आवश्यकता पर जोर दिया गया है जो वायरस भी रोकें व गंभीर बीमारी भी।
यूनिवर्सल टीका की बात नई नहीं है। एक दशक से भी ज्‍यादा वक्त से वैज्ञानिक यूनिवर्सल फ्लू शॉट बनाने का प्रयास कर रहे हैं। 2019 में एक टीका पर ट्रायल शुरू हुए थे, लेकिन अभी तक उसे बाजार के लिए मंजूरी नहीं मिली है।
फाउची व अन्‍य दक्षों का मानना है कि कोरोना स्वरूपव भविष्‍य के कोरोना के लिए यूनिवर्सल वैक्‍सीन जल्‍द नहीं आ पाएगी। फायनेंशियल टाइम्‍स में छपे एक लेख में फाउची ने कहा कि यूनिवर्सल वैक्‍सीन का टारगेट वे जेनेटिक सीक्‍वेंस होंगे जिनके बारे में पता नहीं है।
लेकिन नई रिसर्च बताती है कि ऐसी वैक्‍सीन बनाना संभव है। अभी तक, सभी बनीं सारी वैक्‍सीन वायरस के स्‍पाइक प्रोटीन को टारगेट करती हैं। इसमें म्‍यूटेशन होता रहता है। मूल 'वुहान' वायरस जिसपर सभी वैक्‍सीन आधारित हैं और ओमीक्रोन बीच स्‍पाइक प्रोटीन में ही कम से कम 30 बदलाव हुए हैं। वैक्‍सीन की कम होती एफेकसी के पीछे यही वजह है।

यूनिवर्सल वैक्‍सीन में संक्रमण के उन हिस्‍सों पर वार किया जाएगा जो स्वरूप चेंज होने पर भी एक समान रहते हैं। यदि रोग प्रतिरोधक प्रणाली को इन हिस्‍सों की पहचान में ट्रेन कर लिया जाए तो कोरोना संक्रमण की एक पूरी रेंज पर निशाना साधा जा सकता है। ऐसी कई टीके बनाए भी जा रहे हैं।
अमेरिकी सेना का वॉल्‍टर रीड आर्मी इंस्टिट्यूट ऑफ रिसर्च अपनी पैन-कोरोना संक्रमण टीके के फेज 1 नतीजों का इंतजार कर रहा है। इसके अलावा डीआईओएसवाईएन नाम की कंपनी भी यह टीका तैयार कर रही है।
मैसाचुसेट्स की बीवीआई वैक्‍सीन्‍स ने अलग रूख अपनाया है। यह संक्रमण के स्‍टेबल पार्ट्स या एपिटोप्‍स की पहचान के बजाय, इसने 3 भिन्न-भिन्न कोरोना वायरस -एसएआरएस या एमईआरएस और कोरोना के स्‍पाइक प्रोटील्‍स को ऐसे पार्टिकल्‍स पर रखती है जो संक्रमण जैसे दिखते हैं और रोगप्रतिरोधक क्षमता को रिएक्‍ट करने के लिए सक्रिय करते हैं।
क्‍या ये वैक्सीन हमें सालाना बूस्‍टर्स की जरूरत से निजात दिला देंगे? अभी यह कहना आसान नहीं होगा। कुछ दक्षों का ये भी मानना है कि यूनिवर्सल टीका से भी ताउम्र इम्युनिटी संभव नहीं होगी पर पांच या 10 वर्ष की सुरक्षा भी बड़ी राहत देगी।

Share On