देवर्षि नारद की चिंता

देवर्षि नारद को दुनिया का सबसे पहला पत्रकार माना जाता है। इसका कारण यह था कि वे सूचनाओं को इधर से उधर पहुंचाया करते थे। देवों और असुरों में देवर्षि नारद समान रूप से आदर पाते थे।

Created By : ashok on :11-12-2022 15:35:46 अशोक मिश्र खबर सुनें

बोधिवृक्ष

अशोक मिश्र
देवर्षि नारद को दुनिया का सबसे पहला पत्रकार माना जाता है। इसका कारण यह था कि वे सूचनाओं को इधर से उधर पहुंचाया करते थे। देवों और असुरों में देवर्षि नारद समान रूप से आदर पाते थे। इसका कारण यह है कि वे सूचनाओं का आदान-प्रदान लोकहित में करते थे। इसके पीछे उनका स्वार्थ नहीं होता था। एक बार वे बद्रीनाथ धाम पहुंचे। वहां ब्रह्मा के मानस पुत्र सनकादि तपस्या कर रहे थे। उन्हें देखकर सनकादि अत्यंत प्रसन्न हुए। उन्होंने देवर्षि का आदर सत्कार किया, लेकिन नारद के चेहरे पर चिंता की झलक देखकर ऋषियों ने पूछा, देवर्षि आप चिंतित दिखाई दे रहे हैं।

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इसका क्या कारण है? इस पर नारद ने कहा कि इधर कुछ समय से लोगों में धर्म के कार्यों में अरुचि पैदा हो रही है। लोग यज्ञ और धार्मिक कर्मकांडों से विरत हो रहे हैं जिसकी वजह से दुनिया में पापाचार बढ़ रहा है। यदि लोग इसी तरह धार्मिक कार्यों से विरत रहे, तो पृथ्वी का कैसे भला होगा? इस पर सनत्कुमार ने अन्य ऋषियों से पूछा कि लोगों की धर्म में रुचि जगाने के लिए क्या करना चाहिए। कुछ देर सोचने के बाद एक ऋषि ने कहा कि यदि लोगों को धर्म शास्त्रों का ज्ञान प्रदान किया जाए, लोगों को वेदादि पढ़ने की ओर प्रवृत्त किया जाए, तो लोगों की धर्म में आस्था बढ़ेगी। वे यज्ञ और अन्य धार्मिक अनुष्ठान करने लगेंगे, तो लोग आसुरी प्रवृत्तियों से दूर रहेंगे।

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वे अपना जीवन सत्कर्मों को करते हुए बिता पाएंगे। इससे दुनिया में पापाचार घटेगा, लोग सदाचारी और सरल हृदय वाले होंगे। धार्मिक कार्यों में लोगों की रुचि बढ़ेगी। यह सुनकर देवर्षि नारद की चिंता दूर हो गई और वे लोगों को अध्ययन की प्रेरणा देने लगे।

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