बॉन्ड पॉलिसी लागू करने पर उभरे मतभेद

प्रदेश सरकार द्वारा बॉन्ड पालिसी में तीन लाख रुपये और एक साल की समयसीमा घटाने के बावजूद एमबीबीएस छात्र हड़ताल पर हैं। वे सरकार के फैसले को लेकर सहमत नहीं हैं।

Created By : ashok on :04-12-2022 14:18:02 संजय मग्गू खबर सुनें

संजय मग्गू
प्रदेश सरकार द्वारा बॉन्ड पालिसी में तीन लाख रुपये और एक साल की समयसीमा घटाने के बावजूद एमबीबीएस छात्र हड़ताल पर हैं। वे सरकार के फैसले को लेकर सहमत नहीं हैं। लेकिन प्रदेश सरकार इसे लागू करने के लिए कमर कस चुकी है। संभावना यह जताई जा रही है कि कुछ ही दिनों बाद अधिसूचना भी जारी होने वाली है। इस मुददे को लेकर मुख्यमंत्री मनोहर लाल और स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज इस मुददे पर एकमत नहीं हैं। अनिल विज का कहना है कि अभी पॉलिसी को लागू करने से सरकार को परहेज करना चाहिए। यदि अभी यह व्यवस्था लागू की गई तो कई तरह अव्यवस्थाएं पैदा हो सकती हैं।

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लेकिन मुख्यमंत्री मनोहर लाल इस मामले में कुछ ज्यादा ही जल्दी में हैं। पिछले दिनों मुख्यमंत्री और छात्रों के बीच हुई वार्ता के बाद एमबीबीएस छात्रों को समर्थन दे रहे आईएमए यानी इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने तो अपने कदम पीछे खींच लिए हैं, लेकिन छात्रों का आंदोलन जारी है। जहां तक पॉलिसी की बात है, सरकार चाहे तो इसे कम कर सकती है। इससे सरकार को कोई नुकसान भी नहीं है। सबसे जरूरी यह है कि यदि किसी तरह एमबीबीएस छात्रों का पढ़ाई के बाद पलायन रोका जा सके, तो बेहतर होगा। यह पलायन रोकने के लिए दूसरे तरीके भी अपनाए जा सकते हैं। बांड पॉलिसी की राशि और समयावधि बढ़ाना ही एकमात्र विकल्प नहीं हो सकता है। इस बारे में सरकार को गंभीरता से विचार करना होगा। तभी समस्या का हल निकलना संभव है। यदि ऐसा हुआ, तो निश्चित रूप से एमबीबीएस छात्रों का पलायन रुक जाएगा।

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यह बात भी सही है कि सरकारी स्कूल में पढ़ कर डाक्टर बनने वाले छात्र जब प्रदेश में सेवा देने का मौका आता है, तो वे विदेश की राह पकड़ लेते हैं। यदि यह नहीं हुआ, तो वे दूसरे राज्यों में क्लीनिक या नर्सिंग होम खोल लेते हैं। इससे प्रदेश को डॉक्टरों की कमी की समस्या से जूझना पड़ता है। यही वजह है कि प्रदेश सरकार एमबीबीएस पढ़ने वाले छात्रों के लिए कड़े नियम बनाने को मजूबर होना पड़ रहा है। वैसे सरकार का अपने प्रदेश की जनता को सुविधाएं देने की बात सोचना, कतई गलत नहीं है। लेकिन ऐसा भी न हो कि उनकी कड़ाई की वजह से यहां के छात्र दूसरे राज्यों या विदेश जाकर पढ़ाई करने को प्राथमिकता देने लगें।

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