मुग़ले  आजम के शहंशाह

16 वर्षों की अवधि में पृथ्वी थिएटर ने कुछ 2,662 शो   दिखाए

Created By : Manuj on :03-11-2022 13:18:28 पृथ्वीराज कपूर खबर सुनें

बेनजीर हाशमी.

भारतीय रंगमंच के प्रमुख स्तंभों में गिने जाने वाले व मुग़ले आजम के शहंशाह पृथ्वीराज कपूर का जन्म 3 नवंबर 1901 में पेशावर पाकिस्तान में हुआ और उन्होने वही के एडवर्ड कालेज से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की। जिसके बाद पृथ्वीराज ने बतौर अभिनेता मूक फ़िल्मों से अपना करियर शुरू किया और साथ भारतीय जन नाट्य संघ (इप्टा) के संस्थापक सदस्यों में से एक होने का भी गौरव हासिल है।

साल 1928 में उनका मुंबई आगमन हुआ। जिसके बाद साल 1944 में मुंबई में पृथ्वी थिएटर की स्थापना की, जो देश भर में घूम-घूमकर नाटकों का प्रदर्शन करता था। जिसमें आसमान महल, तीन बहूरानियां, कल आज और कल और पंजाबी फिल्में आदि शामिल हैं।उन्होंने ‘पैसा’ नामक फिल्म का निर्देशन करते हुए अपनी आवाज खोदी, जिसके परिणामस्वरूप पृथ्वी थिएटर बंद हो गया और उन्होंने फिल्में करनी छोड़ दी।

पृथ्वीराज को देश के सर्वोच्च फ़िल्म सम्मान दादा साहब फाल्के के अलावा पद्मभूषण तथा कई अन्य पुरस्कारों से भी नवाजा गया। उन्हें राज्य सभा के लिए भी नामित किया गया था।

पृथ्वीराज ने पेशावर पाकिस्तान के एडवर्ड कालेज से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की। उन्होंने एक साल तक कानून की शिक्षा भी प्राप्त की जिसके बाद उनका थियेटर की दुनिया में प्रवेश हुआ। कुछ एक मूक फ़िल्मों में काम करने के बाद उन्होंने भारत की पहली बोलनेवाली फ़िल्म आलम आरा में मुख्य भूमिका निभाई। पृथ्वीराज कपूर ने साल 1944 में पृथ्वी थिएटर, हिंदुस्तान का पहला व्यवसायी थिएटर की स्थापना की।

16 वर्षों की अवधि में पृथ्वी थिएटर ने कुछ 2,662 शो दिखाए। थिएटर के हर शो में पृथ्वीराज कपूर ने प्रमुख भूमिका निभाई।पृथ्वी थिएटर ने रामानंद सागर, शंकर-जयकिशन और राम गांगुली जैसी कई महत्वाकांक्षी प्रतिभाएं प्रस्तुत की। ये महान अभिनेता थिएटर और फिल्म दोनों में सफल रहें।उनकी प्रमुख फिल्में वी.शांताराम की ‘दहेज’, राज कपूर की ‘आवारा’ शामिल है।

वर्ष 1960 में प्रदर्शित के. आसिफ की मुग़ले आज़म में उनके सामने अभिनय सम्राट दिलीप कुमार थे, इसके बावजूद पृथ्वी राज कपूर अपने दमदार अभिनय से दर्शकों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित करने में सफल रहे।इसके साथ ही अपने पुत्र रणधीर कपूर की फ़िल्म कल आज और कल में भी पृथ्वीराज कपूर ने यादगार भूमिका निभाई।वर्ष 1969 में पृथ्वीराज कपूर ने एक पंजाबी फ़िल्म नानक नाम जहाज में भी अभिनय किया।फ़िल्म की सफलता ने लगभग गुमनामी में आ चुके पंजाबी फ़िल्म इंडस्ट्री को एक नया जीवन दिया।

उनकी अंतिम फ़िल्मों में राज कपूर की आवारा (1951), कल आज और कल, जिसमें कपूर परिवार की तीन पीढ़ियों ने अभिनय किया था और ख़्वाजा अहमद अब्बास की 'आसमान महल' भी थी।

फ़िल्मों में अपने अभिनय से सम्मोहित करने वाले और रंगमंच को नई दिशा देने वाली यह महान हस्ती 29 मई, 1972 को इस दुनिया से रुखसत हो गए।

ये भी पढ़ें

तीन नवंबर का इतिहास

Share On