अनाज को सड़ने से बचाने की कवायद

हरियाणा देश के बड़े अन्न उत्पादक राज्यों में से एक है। यहां प्रति एकड़ उपज देश के कुछ बड़े राज्यों की तुलना में काफी अधिक है। प्रदेश का क्षेत्रफल कम होने के बावजूद देश के बड़े राज्यों के बराबर या अधिक अन्न उपजाता है।

Created By : ashok on :22-11-2022 14:35:24 संजय मग्गू खबर सुनें

संजय मग्गू
हरियाणा देश के बड़े अन्न उत्पादक राज्यों में से एक है। यहां प्रति एकड़ उपज देश के कुछ बड़े राज्यों की तुलना में काफी अधिक है। प्रदेश का क्षेत्रफल कम होने के बावजूद देश के बड़े राज्यों के बराबर या अधिक अन्न उपजाता है। देश के कुछ चुनिंदा बड़े अन्न उत्पादक राज्य में अनाज भंडारण की सुविधा अभाव है। यही वजह है कि पिछले दिनों समाचार पत्रों 40 हजार टन अनाज के सड़ने की खबर सुर्खियों में रही। हालांकि प्रदेश सरकार ने इस मामले में जांच समिति का गठन किया है। समिति की रिपोर्ट आने के बाद जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी, ऐसा समझा जाता है। इस घटना से सबक लेकर मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने प्रदेश के 37 जगहों पर अनाज को बरबाद होने से बचाने के लिए गोदाम बनवाने का फैसला किया। इन 37 जगहों पर साढ़े दस लाख टन अनाज को सुरक्षित रखा जाएगा।

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प्रदेश के 37 स्थानों पर बनने वाले ये गोदाम स्पोक और हब प्रणाली पर आधारित होंगे। साइलोो स्टोरेज एक विशाल स्टील का ढांचा होता है जिसमें बहुत बड़ी मात्रा में अनाज का भंडारण किया जाता है। इसमें कई विशाल बेलनाकार टैंक होते हैं जिसमें भरा अनाज नमी और तापमान से अप्रभावित रहता है। यही वजह है कि इसमें भरा अनाज काफी लंबे समय तक सुरक्षित रहता है। प्रदेश सरकार ने जो तय किया है, उसके हिसाब से पांच स्थानों करनाल, अंबाला, यमुनानगर, कुरुक्षेत्र और सिरसा में ढाई लाख टन क्षमता के पांच हब बनाए जाएंगे। बाकी 32 स्थानों पर कम क्षमता के हब बनाए जाएंगे। अनाज उत्पादन से अधिक दिक्कत अनाज को सहेजकर रखने की होती है। अनाज भंडारण की समस्या से देश के कई राज्य जूझ रहे हैं। देश के कई राज्यों में भी काफी बड़े पैमाने पर अनाज के सड़ने की खबरें आती रहती हैं।

हरियाणा में जो 40 हजार टन अनाज पिछले दिनों सड़ गया है, उतने अनाज से अफ्रीकी महाद्ीप के कुछ छोटे देशों की जनता का चार-पांच महीने पेट भरा जा सकता था। हमारे देश में ही जितना अनाज साल भर में सड़ जाता है, उससे काफी लोगों को कई महीने तक खाना खिलाया जा सकता है। यह कैसी विडंबना है कि कहीं कोई भूखे पेट सोने को मजबूर है, तो कहीं लाखों टन अनाज सड़ रहा है और अधिकारियों को कोई फर्क नहीं पड़ रहा है।

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