समस्या का कारण जानो, तब सुलझाओ

जीवन में अगर कोई समस्या आती है, तो उसे उस समस्या को सुलझाने की कोशिश तो करनी ही चाहिए, लेकिन वह समस्या क्यों पैदा हुई, इसको भी जानने का प्रयास करना चाहिए।

Created By : ashok on :30-11-2022 15:13:37 अशोक मिश्र खबर सुनें

अशोक मिश्र
जीवन में अगर कोई समस्या आती है, तो उसे उस समस्या को सुलझाने की कोशिश तो करनी ही चाहिए, लेकिन वह समस्या क्यों पैदा हुई, इसको भी जानने का प्रयास करना चाहिए। यह बात स्वामी विवेकानंद लोगों को अक्सर कहा करते थे। उन्होंने अपने बचपन का एक संस्मरण सुनाकर एक बार कहा था कि जब तक हम समस्या के तह में नहीं जाते हैं, तब तक हम समस्या को ठीक से सुलझा नहीं सकते हैं।

ये भी पढ़ें

कुप्रथाओं के मूल में है अज्ञान

यह सभी जानते हैं कि स्वामी विवेकानंद के बचपन का नाम नरेंद्र था। वे बचपन में अपने घर के पास के एक बगीचे में खेलने जाया करते थे। वहां मोहल्ले के काफी बच्चे जमा होते थे। सभी बच्चे चंपा की डाली पकड़कर झूलते थे और उसके फूल गिराया करते थे। इन बच्चों को चंपा की डाली पर झूलते देखकर उधर से गुजर रहे एक बुजुर्ग ने कहा कि बच्चो! चंपा के पेड़ पर एक भूत रहता है। वह बच्चों का गला पकड़कर उन्हें मार देता है। यह सुनकर वहां मौजूद बच्चे डर गए। वे वहां से भाग खड़े हुए। दरअसल, बुजुर्ग का इरादा बच्चों को डराना नहीं था। वे चाहते थे कि चंपा की डाली कमजोर होती है, इस पर झूलने के दौरान उन्हें चोट लग सकती है।

ये भी पढ़ें

खाद्यान्न संकट से बचाएगा तो गेहूं ही

इसके बाद उस बगीचे में बच्चों का खेलना रुक गया। यह नरेंद्र को अच्छा नहीं लगा। उन्होंने बच्चों से बात की, लेकिन कोई भी बगीचे में खेलने को तैयार नहीं हुआ। नरेंद्र को बचपन से ही खेलना, दौड़ना, व्यायाम करना बहुत पसंद था। जब बच्चे तैयार नहीं हुए, तो वह अकेले ही बगीचे में जाकर खेलने लगे। कई दिनों बाद जब बच्चों ने उन्हें वहां खेलते देखा, तो कहा कि बगीचे में मत जाओ, नहीं तो भूत मार डालेगा। इस पर नरेंद्र ने कहा कि जब तक बुजुर्ग ने नहीं बताया था, तब तक तो हम खेलते ही थे। अगर भूत को नुकसान पहुंचाना होता, तो वह पहले ही पहुंचाता। यह बात बच्चों को समझ में आ गई और वे फिर वहीं खेलने लगे।

Share On