अनुसूचित जाति के बेरोजगारों के आर्थिक उत्थान के लिए विशेष अनुदान दे रहा मत्स्य पालन विभाग

फरीदाबाद के डीसी जितेन्द्र यादव ने बताया कि मत्स्य पालन विभाग द्वारा अनुसूचित जाति के बेरोजगारों के आर्थिक उत्थान के लिए विशेष अनुदान दिया जा रहा है।

Created By : Shiv Kumar on :12-05-2022 16:32:45 डीसी जितेंद्र यादव खबर सुनें

देश रोजाना, फरीदाबाद
डीसी जितेन्द्र यादव ने बताया कि सरकारी हिदायतों के अनुसार आजादी के अमृत महोत्सव की श्रृंखला में एक कड़ी और जोड़ते हुए मत्स्य पालन विभाग में नई-नई स्कीमों के साथ साथ सरकार द्वारा अनुसूचित जाति के बेरोजगारों के सामाजिक एवं आर्थिक स्तर को ऊंचा उठाने के लिए केन्द्र व प्रदेश सरकार की कुछ योजनाएं क्रियान्वित की जा रही हैं। उन्होंने बताया कि अनुसूचित जाति के व्यक्ति को मछली पालन के लिए पंचायती तालाब पट्टे पर लेने के लिए प्रथम वर्ष पट्टा राशि पर 50 हजार रुपये प्रति हैक्टेयर या पट्टे की वास्तविक राशि का 50 फीसदी, दोनो में से जो कम हो, का अनुदान प्रदान किया जाता है। वहीं द्वितीय वर्ष व आगामी वर्षो के लिए पट्टा राशि पर 25 प्रतिशत अथवा अधिकतम 25 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर में से जो भी कम हो, का अनुदान भी प्रदान किया जाता है।

उपायुक्त ने आगे बताया कि अधिसूचित पानी में से मछली पकड़ने के लिये ठेकेदारों को कुल बोली का 50 प्रतिशत अथवा तीन लाख रुपये अधिकतम सीमा तक अनुदान राशि प्रदान की जाएगी। अनुसूचित जाति का व्यक्ति बेहतर ढंग से मछली पालन का कार्य कर सके इसके लिये विभाग द्वारा मत्स्य पालन का प्रशिक्षण भी दिया जाता है। इसके लिए सौ रुपये प्रतिदिन का प्रशिक्षण भत्ता 10 दिन के लिये एंव एक बार का आने-जाने का सौ रुपये प्रति व्यक्ति किराया दिया जाता है। हरियाणा सरकार द्वारा मछली पालन हेतू जाल खरीद पर अधिकतम बीस हजार रुपये के खर्च पर 50 प्रतिशत या धनराशि 10 हजार रुपये प्रति मत्स्य किसान जो भी कम हो अनुदान के रूप में प्रदान किया जाएगा। इसके अलावा जिला में झींगा यूनिट, मौसम व बायोफलाक यूनिट तथा री-सर्कुलेट्री अकवा कल्चर सिस्टम (आरएएस) शामिल हैं।

केंद्रीय प्रायोजित स्कीम को सही तरीके से लागू किया गया या नहीं तथा मत्स्य पालन को मत्स्य पालक द्वारा किस प्रकार स्वरोजगार के रूप में अपनाया जा रहा है। सरकार द्वारा योजना के तहत प्रदान की गई वित्तीय सहायता का सही प्रकार से प्रयोग किया जा रहा है या नहीं भी शामिल है बारे भी प्रशासन द्वारा जानकारी ली जा रही है। जिला में भूमिगत जल का सदुपयोग करते हुए मत्स्य पालन स्वरोजगार का एक अच्छा स्त्रोत है। बेरोजगार युवाओं को मत्स्य पालकों की यूनिट का भ्रमण करवाकर उन्हें मत्स्य पालन के लिए प्रोत्साहित किया जा सकता है। जिला में बंजर भूमि व लवणीय जल का उपयोग करते हुए जल क्षेत्र को बढ़ाया जा सकता है।

जिला मत्स्य अधिकारी रीटा ने बताया कि मत्स्य पालन से जुड़ी किसी भी योजना के विषय में अधिक जानकारी व अपना प्रार्थना पत्र देने के लिए एनआईटी बड़खल झील जिला मत्स्य अधिकारी एंव मुख्य कार्यकारी अधिकारी, मत्स्य किसान विकास एजैन्सी के कार्यालय अथवा विभाग के अधिकारियो के मोबाइल नंबर 852730526, 8930241135, 9416738612 पर संपर्क कर सकते हैं।

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