गहलोत-पायलट विवाद और कांग्रेस का संकट

कांग्रेस महासचिव और मीडिया प्रमुख जयराम रमेश का कहना है कि कांग्रेस के लिए गहलोत भी जरूरी हैं और पायलट भी। मतलब दोनों हाथों में लड्डू चाहिए। कांग्रेस की असल समस्या यही है।

Created By : ashok on :29-11-2022 15:28:37 संजय मग्गू खबर सुनें

त्वरित टिप्पणी

संजय मग्गू
कांग्रेस महासचिव और मीडिया प्रमुख जयराम रमेश का कहना है कि कांग्रेस के लिए गहलोत भी जरूरी हैं और पायलट भी। मतलब दोनों हाथों में लड्डू चाहिए। कांग्रेस की असल समस्या यही है। वह राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को नाराज नहीं करना चाहती है, वहीं युवा और गुर्जर नेता सचिन पायलट को भी हाथ से निकलने देना नहीं चाहती है। कांग्रेस के नवनियुक्त अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे बार-बार गांधी परिवार की ओर ताक रहे हैं, लेकिन इस मामले में गांधी परिवार ने पूरी तरह चुप्पी साध रखी है। सोनिया गांधी सक्रिय राजनीति से अपने आपको लगातार हटाती जा रही हैं। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी भारत जोड़ो यात्रा में इस तरह व्यस्त हैं, जैसे अब उन्हें कांग्रेस की किसी भी परेशानी से कुछ लेना देना नहीं है।

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यात्रा से ही वे कांग्रेस को इस लायक बना देंगे कि वह भाजपा का राष्ट्रीय स्तर पर मुकाबला कर लेगा। हां, कांग्रेस महासचिव और उत्तर प्रदेश प्रभारी प्रियंका गांधी वाड्रा जरूर चाहती हैं कि राजस्थान में चल रहा गहलोत और पायलट का विवाद जल्दी सुलझ जाए ताकि अगले साल नवंबर-दिसंबर में होने वाले चुनाव में नुकसान न हो। लेकिन अकेली प्रियंका के चाहने से कुछ नहीं होगा। जब तक दोनों पक्ष थोड़ा-थोड़ा सा झुकेंगे नहीं। लेकिन ऐसा होने वाला नहीं है। पिछले दो-तीन वर्षों में दोनों में इतनी कटुता आ गई है कि दोनों के बीच अब किसी तरह के समझौते की गुंजाइश ही नहीं बची है। जब जुलाई 2020 में सचिन पायलट ने अशोक गहलोत के खिलाफ बगावत की थी, तो उन्होंने पायलट को निकम्मा, नकारा कहा था। दो-चार दिन पहले मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने एक टीवी चैनल को दिए गए इंटरव्यू में पायलट को पार्टी का गद्दार तक कह दिया।

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इसके बावजूद अगर सचिन पायलट कांग्रेस में बने हुए हैं, तो इसका एक ही मतलब है कि वह न तो गुलाम नबी आजाद बनना चाहते हैं और न ही ज्योतिरादित्य सिंधिया। अशोक गहलोत की अब भी कांग्रेस के विधायकों पर पकड़ मजबूत है। यदि पायलट बगावत करते हैं, तो पंजाब के तत्कालीन मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह वाला हाल हो सकता है। कैप्टन के साथ भी पंजाब कांग्रेस का कोई भी विधायक नहीं गया था। वैसे कल यानी 29 नवंबर को कांग्रेस के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल जयपुर जा रहे हैं। चर्चा तो यह है कि वे गहलोत और पायलट से भी इस मुद्दे पर बातचीत कर सकते हैं। हालांकि आधिकारिक तौर पर यही कहा जा रहा है कि वे दिसंबर के पहले हफ्ते में राजस्थान में प्रवेश राहुल गांधी की यात्रा की तैयारियों की समीक्षा करने जा रहे हैं।

इस दौरान वे वहां के विधायकों से हालात पर चर्चा कर सकते हैं। दरअसल, समस्या यही है कि कांग्रेस को दोनों चाहिए, लेकिन जिन दोनों को साथ रखने की कवायद कांग्रेस कर रही है, वे दोनों इस स्थिति में आ चुके हैं कि अब उनमें एकता या समझौते का कोई रास्ता नहीं बचा है। ऐसी स्थिति में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को कठोर फैसला लेना ही होगा। यदि ऐसा नहीं हुआ, तो अगले साल राजस्थान में होने वाले चुनाव में नुकसान हो सकता है।

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