सरकार युद्ध स्तर पर गांवों-शहरों में चलाए स्वच्छता अभियान

भारत में हर साल डेंगू के मरीजों में बेतहाशा वृद्धि चिंताजनक है। डेंगू के बुखार को हड्डी तोड़ बुखार के नाम से भी जाना जाता है, जो स्वास्थ्य के लिए बहुत ही हानिकारक है। ज्यादातर डेंगू के लक्षण सामान्य फ्लू या वायरल बुखार से मिलते जुलते हैं। देश के शासक-प्रशासक डेंगू से रोकथाम के लिए मच्छरों को मारने के लिए एण्टी लारवा गैस का समय समय पर छिड़काव कराते रहते हैं।

Created By : ashok on :17-11-2022 14:54:19 अंशुमान खरे खबर सुनें

अंशुमान खरे
अभी देश कोरोना महामारी से उबर भी नहीं पाया था कि डेंगू ने पूरे देश को दहलाकर रख दिया है। मच्छरों के काटने से फैलने वाले डेंगू का पुरसाहाल नहीं है। डेंगू के बढ़ते बीमारों से लोग परेशान हो रहे हैं। अस्पतालों ने बीमारों की बढ़ती संख्या से अपने हाथ खड़े कर दिए हैं। अस्पतालों में मरीजों के लिए बेड खाली नहीं हैं। शासन प्रशासन चौकन्ना जरूर है, पर डेंगू के मरीज लगातार बढ़ते जा रहे हैं। अब तक देश में कई लोग डेंगू के कारण दम तोड़ चुके हैं। डेंगू वायरस से फैलने वाली बीमारी है जो मच्छर के काटने से होती है।

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भारत में हर साल डेंगू के मरीजों में बेतहाशा वृद्धि चिंताजनक है। डेंगू के बुखार को हड्डी तोड़ बुखार के नाम से भी जाना जाता है, जो स्वास्थ्य के लिए बहुत ही हानिकारक है। ज्यादातर डेंगू के लक्षण सामान्य फ्लू या वायरल बुखार से मिलते जुलते हैं। देश के शासक-प्रशासक डेंगू से रोकथाम के लिए मच्छरों को मारने के लिए एण्टी लारवा गैस का समय समय पर छिड़काव कराते रहते हैं। पर लगता है सम्बंधित विभाग मुस्तैदी से काम नहीं कर रहे हैं जिससे देश में मच्छरों की बाढ़ सी आ गई है। नगर पालिकाओं का प्रभावी ढंग से काम न करना भी इसके लिए जिम्मेदार है। जनता को भी चाहिए कि वह साफ सफाई पर विशेष ध्यान दे और घर के आस पास पानी जमा न होने दें। हो सके तो मच्छरदानी का प्रयोग करें। हो सके तो खिड़कियों और दरवाजों में जाली लगवाएं। जिससे मच्छरों से अपने शरीर को बचाएं।


नगर पालिका और स्थानीय प्रशासन से ज्यादा उम्मीद न करें। अपनी रक्षा स्वयं करने का प्रयास करें। इस समय मच्छरों का प्रकोप काफी बढ़ गया है। शासन-प्रशासन की ओर से लगातार बयानबाजी हो रही है पर जमीनी हकीकत कुछ और ही है। गांवों की कौन कहे, शहरों में भी पर्याप्त छिड़काव नहीं हुआ है। कागजों पर छिड़काव हो रहा है, ऐसी जानकारी प्राप्त हुई है। मच्छरों के खात्मे के लिए शासन प्रशासन को युद्ध स्तर पर काम करना पड़ेगा, तभी जनता को मच्छरों से निजात मिलेगी। देश में सफाई व्यवस्था पर इस समय टिप्पणी करना बेकार है। सफाईकर्मी जुटे तो हैं, पर ठीक से काम नहीं हो रहा है। निगरानी का अभाव है। मच्छर मारने के लिए बताते हैं, फागिंग लगातार हो रही है। पर फागिंग भी चुनिंदा जगहों पर ही हो रही है। फागिंग में लापरवाही के कारण मच्छरों की मौज है।

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अस्पताल मरीजों की भीड़ से परेशान हैं, वहीं मरीज को ठीक से इलाज नहीं मिल पा रहा है। वीआईपी क्षेत्रों में सफाई भी हो रही है, फागिंग भी हो रही है। गरीबों को सुविधा नदारद है। इसके परिणामस्वरूप डेंगू का कहर जारी है। सरकार की ओर से लगातार आश्वस्त किया जा रहा है कि परेशान न हों, सरकार हर सम्भव मदद करेगी। सरकार ने व्यवस्था की है कि अब एक क्लिक पर सरकारी अस्पताल में डेंगू मरीज के लिए रिजर्व बेड की स्थिति जान सकेंगे। ऐसी जानकारी मिली है कि जिले की वेबसाइट पर रोज सुबह अस्पतालों के बेड का व्योरा अपडेट होने लगा है। इसके साथ ही साथ रोज होने वाली फागिंग और एंटी लार्वा छिड़काव की जानकारी भी वेबसाइट पर अपलोड होने लगी है। ऐसा सुना जाता है कि डेंगू के प्रकोप से सरकार सतर्क हो गई है। सरकार डेंगू की रोकथाम के लिए गांव-गांव फागिंग कराएगी। इस संदर्भ में पंचायत सचिवों और ग्राम पंचायत अधिकारियों से डेंगू प्रभावित गांवों की सूची मांगी गई है। एक स्टडी के अनुसार डेंगू से पीड़ित करीब 90 प्रतिशत मरीजों का प्लेटलेट्स करीब एक लाख होता है, जबकि 10 प्रतिशत मरीजों का प्लेटलेट्स 20000 या उससे कम होता है जो काफी खतरनाक स्थिति होती है। प्लेटलेट्स बढ़ाने के लिए आंवले का सेवन करें, वीट ग्रास का भरपूर मात्रा में सेवन करें, भरपूर मात्रा में पानी पिएं, नियमित व्यायाम करें, नारियल का पानी पिएं, पालक, कद्दू का सेवन करें, गिलोय का जूस या काढ़ा बनाकर पिएं।


डेंगू की वैसे कोई दवा नहीं है। डेंगू का पता चलने पर पैरासिटामोल टेबलेट का सेवन करने से बुखार अगर एक हफ्ते में ठीक हो जाता है, तो ठीक है। नहीं तो चिकित्सक की सलाह लेना जरूरी है। डेंगू में पेनकिलर का सेवन घातक हो सकता है। अगर मरीज को भरती करने की जरूरत पड़े तो संकोच करना ठीक नहीं है। डेंगू से मौतों का सिलसिला शुरू हो गया है, जो चिंता का विषय है। सरकार गंभीर है, होना भी चाहिए। सरकार को चाहिए कि वह स्वच्छता अभियान पर युद्ध स्तर पर कार्य करने का निर्देश दे।
(यह लेखक के निजी विचार हैं।)

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