जाम से हालात बने ऐसे कि सिर पर मौर रखे दूल्हा भी निभाने लगे ट्रैफिक पुलिस की ड्यूटी, जानें पलवल की ताजा स्थिति

अच्छा मान लीजिए, आज आपकी शादी हो और आप अपने घर से बड़ी सज-धज के साथ मन में हजारों मुरादें लिए घर से निकले हों। घर से निकलते ही आपके मन में पहला लड्डू फूटा हो, फिर जब आप मेन सड़क पर आए हों और आपकी सजी धजी कार ने रफ्तार पकड़ी हो, तो दूसरा लड्डू फूटना स्वाभाविक है।

Created By : Shiv Kumar on :19-02-2022 13:58:57 पलवल खबर सुनें

संजय मग्गू
अच्छा मान लीजिए, आज आपकी शादी हो और आप अपने घर से बड़ी सज-धज के साथ मन में हजारों मुरादें लिए घर से निकले हों। घर से निकलते ही आपके मन में पहला लड्डू फूटा हो, फिर जब आप मेन सड़क पर आए हों और आपकी सजी धजी कार ने रफ्तार पकड़ी हो, तो दूसरा लड्डू फूटना स्वाभाविक है। अपनी प्रियतमा से मिलने की बेचैनी आपको भीतर ही भीतर बेहाल किए हुए हो। साथ और आगे बैठे दोस्त आपकी शरीके हयात यानी जीवन संगिनी को लेकर आपसे छेड़छाड़ कर रहे हों, आप मंद-मंद मुस्कुराकर उनकी छेड़छाड़ का रसास्वादन कर रहे हों कि अचानक आपकी कार का ड्राइवर ब्रेक लगा देता है। धीरे-धीरे रेंगती आपकी कार कब एक लंबे जाम में फंस गई आपको पता नहीं चलता है। उधर आपकी सजनी अपने साजन के इंतजार में यही सोच-सोचकर दिल को बहला रही होगी कि वो अब चल चुके हैं, वो अब  आ रहे हैं। ऐसे में आपके पास दो ही विकल्प होंगे। पहला यह कि आप मन मसोस कर जाम में फंसे रहिए और सब कुछ भगवान के भरोसे छोड़ दीजिए। दूसरा कि आप अपनी कार का दरवाजा खोलें और बन जाइए हरियाणा के ट्रैफिक पुलिस के सिपाही और जाम खुलवाने में लोगों की मदद कीजिए।

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अब आप कहेंगे कि ऐसा कहीं होता है? जी हां, जनाब! ऐसा ही हुआ आज शाम को पलवल के रसूलपुर चौक पर। एक दूल्हा अपने सारे ठाठबाठ के साथ जाम से जूझ रहा था और ट्रैफिक पुलिस के कांस्टेबल की तरह ट्रैफिक को नियंत्रित कर लोगों को जाम से छुटकारा दिलाने का प्रयास कर रहा था। अब  आपको सच्ची-सच्ची बताऊं वाकया क्या था? आज मैं ओमेक्स सिटी से लगभग पांच-साढ़े पांच बजे घर से बाली नगर स्थित आफिस के लिए निकला। आगरा-दिल्ली रोड पर थोड़ा आगे गया, तो निर्माणाधीन ओवर ब्रिज से काफी पहले जाम में फंस गया। पहले तो सोचा कि दाएं हाथ गाड़ी को ले जाकर वहां से निकल जाऊं। लेकिन यहां मेरा अंतरमन थोड़ा ज्यादा शरीफ हो गया। जब आज तक कोई गलत काम नहीं किया, देश के संविधान के मुताबिक ही जीवन यापन करता आया, तो फिर जरा सी जहमत उठाने से बचने के लिए क्यों अपने जमीर को दागदार करूं। बस, गाड़ी को डाल दिया जाम के बहाव में और बन गए 'सर्पÓ। न..न..गलत मत समझिए। आज मुझे सर्प और जाम में काफी हद तक समानता दिखी। आपको बताएं, संस्कृत में सर्प का अर्थ होता है रेंगने वाला प्राणी। घडिय़ाल, सांप, केंचुआ, छिपकली जैसे सभी प्राणी सर्प हैं, लेकिन हिंदी में सांप को ही सर्प कहा गया। जैसे खग शब्द को लें। ख माने आकाश और ग माने गमन करना। आकाश में गमन करने वाले बादल, हवाई जहाज, पक्षी, हवा सब खग हैं, लेकिन पक्षियों को ही खग माना जाता है। तो भइया, बात हो रही थी जाम की और हम बातें करने लगे ज्ञान की। ढाई घंटे तक रेंग-रेंगकर सभी देवी-देवताओं को याद करते हुए रसूलपुर चौक पहुंचे। यहीं से मुझे आगरा चौक की ओर वापस आना था।

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वहां पहुंच देखा कि सजी धजी एक कार साइड में खड़ी है और दूल्हा जाम खुलवाने में लगा हुआ है। पहली बार तो यकीन ही नहीं हुआ, दो बार आंखें मली, तब जाकर विश्वास हुआ कि जो देख रहा हूं, वह सौ फीसदी सच है। इससे पहले मैं पलवल के पुलिस अधीक्षक को फोन किया था, उन्होंने फोन नहीं उठाया । एसएमएस भी किया । और भी लोगों ने उन्हें फोन और एस एम एस किया होगा, लेकिन शायद वह भी कहीं किसी जाम में फंसे रहेंगे । ऐसे में बेचारे दूल्हे को जाम खुलवाना पड़ा। वैसे एक संभावना यह भी है कि हो सकता है कि दूल्हा खुद ट्रैफिक पुलिस में हो और अपनी शादी की चिंता छोड़कर ड्यूटी निभाना जरूरी समझा हो। इस बीच और भी लोगों ने उन्हें फोन जरूर किया होगा। भाई, मैं तो तब से यही सोच-सोचकर मुस्कुरा रहा हूं कि मुस्कुराइए, आप दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र के तेजी से विकसित हो रहे पलवल जिले में हैं।

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