गुरुकुलीय शिक्षा पद्धति वर्तमान की सबसे बड़ी जरूरत

गुरुकुल यानी गुरु का कुल जहां विद्यार्थी अपने परिवार से दूर गुरु के परिवार का हिस्सा बनकर शिक्षा प्राप्त करता है। भारत के प्राचीन इतिहास में ऐसे विद्यालयों का बहुत महत्व था। प्रसिद्ध आचार्यों के गुरुकुल में पढ़े हुए छात्रों का सब जगह बहुत सम्मान होता था।

Created By : Pradeep on :03-04-2022 13:06:12 प्रतीकात्मक तस्वीर खबर सुनें

गुरुकुल यानी गुरु का कुल जहां विद्यार्थी अपने परिवार से दूर गुरु के परिवार का हिस्सा बनकर शिक्षा प्राप्त करता है। भारत के प्राचीन इतिहास में ऐसे विद्यालयों का बहुत महत्व था। प्रसिद्ध आचार्यों के गुरुकुल में पढ़े हुए छात्रों का सब जगह बहुत सम्मान होता था। राम ने ऋषि वशिष्ठ के यहां रह कर शिक्षा प्राप्त की थी। इसी प्रकार पांडवों ने ऋषि द्रोण के यहां रह कर शिक्षा प्राप्त की थी। प्राचीन भारतीय काल में अध्ययन अध्यापन के प्रधान केंद्र गुरुकुल हुआ करते थे, जहां दूर-दूर से ब्रह्मचारी विद्यार्थी शिक्षा ग्रहण कर देश व समाज सेवा करते थे।

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प्राचीनकाल से ही शिक्षा हर सभ्यता का जरूरी हिस्सा रही है। समय और बदलते जमाने के साथ शिक्षा का स्वरूप भी बदला है। शिक्षा की एक ऐसी ही प्राचीन प्रणाली जो दुनिया के पूर्वी हिस्से से शुरू हुई और आज भी प्रेरणा का मुख्य स्रोत बनी हुई है वो है गुरुकुल शिक्षा प्रणाली। प्राचीनतम शिक्षा प्रणाली गुरुकुलीय शिक्षा पद्धति से बदलते समय के साथ आधुनिकता की आड़ में वर्तमान पीढ़ी का विमुख होना खतरे की घंटी है। एक समय था ज़ब देश में हजारों की संख्या में गुरुकुलीय शिक्षा पद्धति के माध्यम से बच्चे शिक्षा के साथ भारतीय संस्कृति, वेद उपनिषद, संस्कार, अनुशासन, आचार व्यवहार और शारीरिक शिक्षा के माध्यम से विभिन्न क्षेत्रों में प्रकाण्ड विद्वान बन समाज सुधार और देश को आगे बढ़ाने का कार्य करते थे लेकिन वर्तमान की शिक्षा प्रणाली जोकि पूर्णतः शिक्षा के स्थान पर व्यापारीय प्रणाली को आगे बढ़ाने का कार्य कर रही है।

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बच्चे संस्कृति, संस्कार, देशभक्ति, अनुशासन के स्थान पर मोबाईल के माध्यम से अपना जीवन बर्बाद कर रहे हैं। बच्चों के अभिभावक बच्चों को बचपन से ही अपने सपनों को पूरा करने का तनाव और दबाव डालकर उन्हें अंक लाने की मशीन बना रहे हैं लेकिन गुरुकुलीय शिक्षा पद्धति बच्चों को अंक बनाने की मशीन नहीं बल्कि उन्हें मनुष्य बनाकर शिक्षा के साथ, देशभक्ति, संस्कृति, संस्कार, वेद उपनिषद, अनुशासन, योग विद्या के साथ अस्त्र और शास्त्र का पाठ सीख देशसेवा करते थे। वर्तमान में बच्चे कितने ही शिक्षित हो जाएं लेकिन गुरुकुलीय शिक्षा के अभाव में वर्तमान पीढ़ी संस्कार विहीन होती जा रही है। गुरुकुलीय शिक्षा पद्धति में अनुशासन से बच्चे भविष्य की कठिन से कठिन और विषम परिस्थितियों को आसानी से अपना लेते थे। गुरुकुलीय शिक्षा प्रणाली व्यवहारिक व सैद्धांतिक थी। जिसमें सिर्फ किताबी ज्ञान नहीं बल्कि बच्चों को हर विषय के ज्ञान के साथ सर्वांगीण विकास लक्ष्य था लेकिन बावजूद इसके वर्तमान पीढ़ी दिशा भटकती जा रही है। बच्चे मानसिक, शारीरिक और सैद्धांतिक रूप से पिछड़ते जा रहे हैं। बच्चों का आतंबल कमजोर हो रहा है।

छोटी घटनाओं और अभिभावकों के बढ़ते दबाव और तनाव में कम अंक आने पर बच्चे आत्महत्या कर रहे हैं इसलिए समस्या विकराल होती जा रही है। वर्तमान पीढ़ी को गुरुकुलीय शिक्षा पद्धति ही बचा सकती है। बदलते समय के साथ गुरुकुलीय शिक्षा प्रणाली ने शिक्षा पद्धति को आधुनिक बनाने का कार्य किया। वर्तमान में गुरुकुलों में वैदिक शिक्षा प्रणाली के साथ आधुनिक शिक्षा प्रणाली के माध्यम से गुरुकुल बच्चों के भविष्य को पँख लगाने का कार्य कर रहे हैं। गुरुजन बच्चों के बेहतर और सुदृढ़ जीवन का निर्माण कर रहे है। पिछले कुछ समय से गुरुकुलीय शिक्षा प्रणाली पर लोगों का भरोसा फिर से लौटने लगा है और अभिभावक बच्चों को देश का अच्छा नागरिक बनाने के लिए गुरुकुलों की और लौटने लगे हैं। गुरुकुल कुरुक्षेत्र जिसमें मुझे स्वयं 9 वर्ष शिक्षा ग्रहण करने का अवसर मिला। पुरे देश की शिक्षा प्रणाली का उत्कृष्ट उदाहरण बनता जा रहा है।

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गुरुकुल कुरुक्षेत्र ने पूरी शिक्षा प्रणाली में क्रांतिकारी परिवर्तन लाने के साथ बच्चों को प्राचीन शिक्षा पद्धति के साथ आधुनिक शिक्षा पद्धति का सामंजस्य प्रदान कर रही है। गुरुकुल के छात्र हर क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर देश व प्रदेश का नाम रोशन कर रहे हैं। गुरुकुल कुरुक्षेत्र को संरक्षक के रूप में गुरुकुलीय शिक्षा को जीवंत कर उत्कृष्ट उदाहरण के रूप में प्रस्तुत करने वाले राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने गुरुकुलीय प्रणाली की दशा व दिशा बदलने का कार्य किया। वर्तमान में समाज व देश में नशा, अश्लीलता समेत अनेकों कुरीतियां बढ़ती जा रही हैं, समाज करुणा विहीनता और संवेदनहीनता की ओर बढ़ रहा है। बच्चे संस्कारों और संस्कृति से दूर होते जा रहे हैं। इन सब समस्याओं को जड़ से मिटाने और बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए फिर से गुरुकुलों की ओर लौटना ही होगा क्योंकि गुरुकुलीय शिक्षा पद्धति ही बच्चों को सर्वांगीण रूप से उत्कृष्ट बना सकती है। गुरुकुलीय शिक्षा पद्धति ही बच्चों में देशभक्ति का भाव, समाज सेवा व देशसेवा की अलख जगा सकती है इसलिए वर्तमान समय की जरूरत को समझते हुए गुरु के कुल में लौटना ही होगा।

प्रदीप दलाल की कलम से...

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