सुख एक क्षण के सिवा कुछ नहीं

सुख क्या है? यदि कुछ लोगों से पूछा जाए, तो लोग अलग-अलग बातों को, स्थितियों को सुख के रूप में बताएंगे। किसी के लिए बहुत अधिक धन होना सुख है, तो किसी के लिए शारीरिक इच्छाओं की पूर्ति ही सुख होगा।

Created By : - on :08-11-2022 15:07:55 अशोक मिश्र खबर सुनें

अशोक मिश्र

सुख क्या है? यदि कुछ लोगों से पूछा जाए, तो लोग अलग-अलग बातों को, स्थितियों को सुख के रूप में बताएंगे। किसी के लिए बहुत अधिक धन होना सुख है, तो किसी के लिए शारीरिक इच्छाओं की पूर्ति ही सुख होगा। किसी के लिए बेटे-बेटियों और भाई-बहनों को अथाह धन मिलने की कामना ही सुख कहलाएगी। सुख की कोई एक परिभाषा है ही नहीं। हो भी नहीं सकती है क्योंकि सुख एक काल्पनिक अवस्था है। दरअसल सुख एक छलावे की तरह है जिसकी तलाश में व्यक्ति जीवन भर भटकता रहता है। जब किसी क्षण किसी व्यक्ति को सुख की प्राप्ति हो जाती है, तो वह दूसरे सुख की तलाश करने लगता है।

ये भी पढ़ें

गुजरात में आम आदमी पार्टी का आदमपुर जैसा हाल न हो

यही विडंबना है सुख प्राप्त करने को लेकर। कोई ऐसा सुख व्यक्ति को जीवन में कभी नहीं प्राप्त होता जिसके बाद किसी दूसरे सुख की कामना ही न रह जाए। यह सुख ही हो जिसके फेर में फंसकर व्यक्ति अपना पूरा जीवन होम कर देता है। सुख हिरण की नाभि का कस्तूरी जैसा है जिसकी तलाश व्यक्ति को जीवन भर रहती है। यह सुख एक क्षण है जिसकी अनुभूति तो होती है, लेकिन उसे पदार्थ के रूप में दिखाया नहीं जा सकता है। सुख का संबंध दिमाग से है। अगर कभी सुख के क्षण आते भी हैं, तो उसकी अनुभूति सिर्फ मस्तिष्क को ही होती है। मनुष्य की बाकी इंद्रियां सुख से वंचित ही रहती है।

हाथ-पैर, कान, आंख सुख का अनुभव नहीं कर पाते हैं। इसलिए जो व्यक्ति सुख के पीछे भागते हैं, वह हमेशा खाली हाथ ही रहते हैं। सुख उनसे दूर भागता रहता है। जब हम निष्काम भाव धारण कर लेते हैं, तो सुख खुद ब खुद व्यक्ति के पास चला आता है। सुख हासिल करने का तरीका भी शायद यही है। सुख के पीछे भागने से कुछ नहीं होगा।

Share On