हरियाणा का हक है विशेष पैकेज

यह सर्वविदित है कि पिछले आठ सालों के दौरान मनोहर लाल सरकार ने हरियाणा को विकास के रास्ते पर जिस गति और पूरी तरह पारदर्शी तरीके से आगे बढ़ाया है, उसके लिए राज्य को निजी प्रयासों से संसाधन जुटाने पड़े हैं।

Created By : ashok on :03-02-2023 15:54:17 संजय मग्गू खबर सुनें


संजय मग्गू


केंद्रीय बजट 2023-24 में हरियाणा को जरूरत के अनुरूप विशेष आर्थिक पैकेज न मिलना आश्चर्यजनक है, जबकि राज्य की यह मांग काफी समय से केंद्र सरकार के समक्ष लंबित है। विशेष पैकेज की जरूरत एनसीआर के 14 जिलों में विकास की रफ्तार बढ़ाने को लेकर है।

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इसके अलावा एनसीआर में केएमपी एक्सप्रेस-वे और 2.5 लाख हेक्टेयर में बनने वाले पांच शहरों के लिए भी केंद्रीय बजट में अलग से कोई प्रावधान न किए जाने से राज्य का निराश होना स्वाभाविक है। यह सर्वविदित है कि पिछले आठ सालों के दौरान मनोहर लाल सरकार ने हरियाणा को विकास के रास्ते पर जिस गति और पूरी तरह पारदर्शी तरीके से आगे बढ़ाया है, उसके लिए राज्य को निजी प्रयासों से संसाधन जुटाने पड़े हैं।

लोक कल्याण के कार्यक्रमों को जारी रखने के लिए भी राज्य सरकार को विशेष प्रबंध करने पड़े हैं। लेकिन, बावजूद इसके किसी भी योजना-कार्यक्रम की गति धीमी नहीं होने दी गई। और, यह राज्य सरकार के उस दृढ़ संकल्प का नतीजा है, जो उसने लोक कल्याण के निमित्त ले रखा है। नारनौल में इंटीग्रेटेड मल्टी मॉडल लाजिस्टिक हब और गन्नौर में इंटरनेशनल हार्टिकल्चर मार्केट आदि योजनाओं को लेकर भी राज्य सरकार को केंद्र का प्रोत्साहन नहीं मिल सका।

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इससे लोगों को काफी निराशा हुई। दरअसल, जो भी सरकार विकास और लोक कल्याण के कार्यों के प्रति पूर्ण समर्पण भाव से प्रयासरत रहती है, उसे समय-समय पर विशेष प्रोत्साहन की जरूरत होती है। और, राज्य के मामले में तो केंद्र ही एकमात्र सहारा है। हरियाणा सरकार ने फिजूलखर्ची पर पूरी तरह से रोक लगा रखी है। विकास और लोक कल्याण के सभी योजनाएं-कार्यक्रम यथावत जारी हैं।

बल्कि वे दिनोंदिन रफ्तार पकड़ रहे हैं। खसरा-रूबेला जैसी महामारी की रोकथाम के लिए भी राज्य सरकार ने युद्ध स्तर पर टीकाकरण अभियान छेड़ रखा है, ताकि बच्चों को सुरक्षित रखा जा सके। सरकारी सेवाओं-सुविधाओं तक आम जन की पहुंच सुनिश्चित की जा रही है। ऐसे में, विशेष पैकेज पर हरियाणा का हक बनता है, ताकि उसे किसी भी कदम पर आर्थिक संकोच का सामना न करना पड़े। उम्मीद है कि केंद्र का ध्यान हरियाणा की इस वाजिब मांग की ओर जरूर जाएगा और उसके नतीजे भी सुखद होंगे।

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