होलिका दहन पर रहेगा भद्रा का साया, जानें शुभ मुहूर्त और कैसे करें होलिका दहन

पंचांग के अनुसार 17 मार्च को होलिका दहन के लिए लोगों के पास केवल 1 घंटा 10 मिनट का समय रहेगा। इस दिन रात 9.02 से 10.14 तक जब भद्रा का पु`छकाल रहेगा, उस समय होलिका दहन किया जा सकता है। जो लोग इस अवधि में दहन नहीं कर पाएं वे रात डेढ़ बजे के बाद होलिका दहन करें।

Created By : Mukesh on :13-03-2022 11:47:12 प्रतीकात्मक खबर सुनें

पंचांग के अनुसार 17 मार्च को होलिका दहन के लिए लोगों के पास केवल 1 घंटा 10 मिनट का समय रहेगा। इस दिन रात 9.02 से 10.14 तक जब भद्रा का पु'छकाल रहेगा, उस समय होलिका दहन किया जा सकता है। जो लोग इस अवधि में दहन नहीं कर पाएं वे रात डेढ़ बजे के बाद होलिका दहन करें। फागुन महीने के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि 17 मार्च को दोपहर 1:29 से प्रारंभ होकर अगले दिन दोपहर 12.47 तक रहेगी। उदया तिथि में 18 मार्च को पूर्णिमा रहने पर इसी दिन होली खेली जाएगी।
शुभ मुहूर्त
होलिका दहन तिथि- 17 मार्च 2022
होलिका दहन मुहूर्त
17 मार्च 2022 - रात 09 :02 मिनट से रात 10 :14 मिनट
कुल अवधि - लगभग 01 घंटे 10 मिनट
भद्रा समाप्ति के बाद होलिका दहन मुहूर्त
17 मार्च को देर रात 01:12 बजे से अगले दिन 18 मार्च को प्रात: 06:28 बजे तक.
होली तिथि
पूर्णिमा तिथि प्रारम्भ- 17 मार्च 2022 को दोपहर 01:29
पूर्णिमा तिथि समाप्त- 18 मार्च 2022 को दोपहर 12:47
कैसे करें होलिका दहन
विश्वविख्यात भविष्यवक्ता और कुण्डली विश्ल़ेषक डा. अनीष व्यास ने बताया कि होलिका दहन के बाद जल से अर्घ्य दें। शुभ मुहूर्त में होलिका में स्वयं या परिवार के किसी वरिष्ठ सदस्य से अग्नि प्रज्जवलित कराएं। आग में किसी भी फसल को सेंक लें और अगले दिन इसे सपरिवार ग्रहण करें। मान्यता है कि ऐसा करने से परिवार के सदस्यों को रोगों से मुक्ति मिलती है।
होलिका दहन के दिन क्या नहीं करना चाहिए
विश्वविख्यात भविष्यवक्ता और कुण्डली विश्ल़ेषक डा. अनीष व्यास ने बताया कि होलिका दहन के दिन सफेद खाद्य पदार्थ ग्रहण नहीं करना चाहिए। होलिका दहन के समय सिर ढंककर ही पूजा करनी चाहिए। नवविवाहित महिलाओं को होलिका दहन नहीं देखना चाहिए। सास-बहू को एक साथ मिलकर होलिका दहन नहीं देखना चाहिए। इस दिन को भी शुभ या मांगलिक कार्य नहीं करना चाहिए।
होलिका दहन की रात भी महारात्रि की श्रेणी में शामिल
विश्वविख्यात भविष्यवक्ता और कुण्डली विश्ल़ेषक डा. अनीष व्यास ने बताया कि होलिका दहन की रात को भी दीपावली और शिव रात्रि की भांति ही महारात्रि की श्रेणी में शामिल किया गया है। होलिका की राख को मस्तक पर लगाने का भी विधान है। ऐसा करने से शारीरिक कष्ट दूर होते हैं। इस रात मंत्र जाप करने से वे मंत्र सिद्धि प्राप्त होती है। जीवन सुखमय बनता है, जीवन में आने वाली सभी परेशानियों का अपने आप निराकरण हो जाता है।
Disclaimer: इस स्टोरी में दी गई सूचनाएं सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं। Desh Rojana Portal किसी भी अंधविश्वास और इन तथ्यों की किसी प्रकार से कोई पुष्टि नहीं करता है। इन तथ्यों पर अमल करने से पहले संबंधित ज्योतिषी, आचार्य तथा विशेषज्ञ से संपर्क करें।

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