जन्मकुंडली से जानें ग्रहों की वह स्थिति जो जातक को अपने संगे-संबंधियों से भी शारीरिक संबंध बनाने को करती है मजबूर

मेडिकल लाइन से जुड़े लोग जानते ही होंगे कि वर्तमान में अपने यौनसुख को बढ़ावा देने वाले कैसे-कैसे उत्पाद मेडिकल शॉप और ऑनलाइन साइट्स पर आसानी से उपलब्ध है। कुंडली में आखिर कौनसी ऐसी ग्रहस्थिति बनती है जिससे जातक अपने सगे-संबंधियों से भी काम के अधीन होकर शारीरिक सम्बंध बनाने के प्रयास करता रहता है।

Created By : Mukesh on :24-01-2022 10:30:37 प्रतीकात्मक खबर सुनें

मेडिकल लाइन से जुड़े लोग जानते ही होंगे कि वर्तमान में अपने यौनसुख को बढ़ावा देने वाले कैसे-कैसे उत्पाद मेडिकल शॉप और ऑनलाइन साइट्स पर आसानी से उपलब्ध है। कुंडली में आखिर कौनसी ऐसी ग्रहस्थिति बनती है जिससे जातक अपने सगे-संबंधियों से भी काम के अधीन होकर शारीरिक सम्बंध बनाने के प्रयास करता रहता है।
लग्न / लग्नेश
1.यदि लग्न और बारहवें भाव के स्वामी युति बनाकर चतुर्थ,सप्तम या द्वादश भाव में बैठ जाएँ तो जातक अत्यंत कामी और परस्त्री गमन करने वाला भी होता है ।
2.यदि लग्नेश सप्तम स्थान पर हो और सप्तमेश लग्न में हो , तो जातक स्त्री और पुरुष दोनों में रूचि रखता है , उसे समय पर जैसा साथी मिल जाए वह अपनी भूख मिटा लेता है । यदि केवल सप्तमेश लग्न में स्थित हो तो जातक में कामवासना अधिक होती है तथा उसमें रतिक्रिया करते समय पशुप्रवृति उत्पन्न हो जाती है और वह निषिद्ध स्थानों को अपनी जिह्वा से चाटने तक में नही हिचकिचाता
3. लग्न में शुक्र की युति 2 /7 /6 के स्वामी के साथ हो तो जातक का चरित्र संदिग्ध ही रहता है।
शुक्र,सप्तम भाव और तुला राशि
1.सातवें भाव में मंगल,बुध और शुक्र की युति हो और इस युति पर कोई शुभ प्रभाव न हो तो जातक अपनी काम की पूर्ति अप्राकृतिक तरीकों से करता है ।
2.तुला राशि में चन्द्रमा और शुक्र की युति जातक की कामवासना को कई गुणा बड़ा देती है। अगर इस युति पर राहु/मंगल की दृष्टि भी तो जातक अपनी वासना की पूर्ति के लिए किसी भी हद तक गिर सकता है ।
3.दूषित शुक्र और बुध की युति सप्तम भाव में हो तो जातक कामवासना की पूर्ति के लिए गुप्त तरीके खोजता है।
4.सप्तम भाव में बली शुक्र की उपस्थिति जातक को कामुक बना देती है। ऐसे में यदि चंद्र पीड़ित हो तो व्यभिचारी प्रवृतियां अधिक होती है।
चंद्र और शनि
1.शुक्र,सप्तमेश या द्वादशेश होने बली चंद्र का कमजोर शनि से किसी भी तरह सम्बंध बनने पर जातक दूसरों की कमजोरियों को जानने वाला, गरीब दिहाड़ी और मजदूर वर्ग के लोगो की पत्नी से सम्बन्ध स्थापित करने की प्रबल इच्छा रखने वाला होता है। कभी कभी अपने इस दुराचार के लिए उसकी प्रतिष्ठा कलंकित होता है, वह दूसरों की नज़रों में भी गिरता है और समाज में अपमानित भी होता है।
2.नीच का चन्द्रमा सप्तम स्थान पर हो तो और शनि 4/7/8/12 में हो जातक आपने नौकर /नौकरानी से शारीरिक सम्बन्ध बनाते हैं।
मंगल
1.पीड़ित मंगल छठे या सप्तम भाव में हो और उस पर कोई शुभ प्रभाव न हो तो जातक नबालिकों के साथ सम्बन्ध बनाता है।
2.जातक कामांध होकर पशु सामान व्यवहार करता है यदि मंगल और एक पाप ग्रह सप्तम में स्थित हो या सूर्य सप्तम में और मंगल चतुर्थ भाव हो या मंगल चतुर्थ भाव में और राहु सप्तम भाव में हो या शुक्र मंगल की राशि में स्थित होकर सप्तम को देखता हो।
इस तरह की कामवासना से बचने हेतु सर्वोत्तम उपाय है शिवभक्ति। शिवजी की वो तश्वीर जिसमें वो क्रोधित होकर कामदेव को भस्म कर रहे है वो तश्वीर प्रतिदिन सुबह और रात्रि को सोते वक्त देखे साथ ही शिव पंक्षाचरी मंत्र का जप भी करे। सफ़ेद सूती कपड़े अधिक पहनें।
Disclaimer: इस स्टोरी में दी गई सूचनाएं सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं। Desh Rojana Portal किसी भी अंधविश्वास और इन तथ्यों की किसी प्रकार से कोई पुष्टि नहीं करता है। इन तथ्यों पर अमल करने से पहले संबंधित ज्योतिषी, आचार्य तथा विशेषज्ञ से संपर्क करें।

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