यदि पर्यावरण का संरक्षण नहीं किया, तो पछताने का नहीं मिलेगा मौका

हम पर्यावरण को खुद ही बीमार कर रहे हैं, इसका आभास हमें 90 के दशक से ही होने लगा था कि पर्यावरण आहिस्ता-आहिस्ता चोटिल होने लगा है।

Created By : Manuj on :26-11-2022 16:03:35 स्मिता सिंह खबर सुनें

यदि पर्यावरण का संरक्षण नहीं किया, तो पछताने का नहीं मिलेगा मौका

स्मिता सिंह
आज विश्व पर्यावरण संरक्षण दिवस है जो 26 नवंबर को हर साल मनाया जाता है। कभी आपने सोचा है कि हमें, इस दिन को मनाने की जरूरत क्यों पड़ी? क्यों हमें इस विषय के प्रति भी जागरूक करना पड़ रहा है कि धरती है तो हम हैं, इसलिए इसे बचाओ। हम पर्यावरण को खुद ही बीमार कर रहे हैं, इसका आभास हमें 90 के दशक से ही होने लगा था कि पर्यावरण आहिस्ता-आहिस्ता चोटिल होने लगा है। साल 1992 में ही पर्यावरण संरक्षण दिवस मनाने की शुरुआत हो गई।

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30 साल से हम पर्यावरण संरक्षण दिवस मानते आ रहे हैं। जैसे-जैसे हम पर्यावरण से प्रभावित होते हैं, वैसे ही पर्यावरण भी हमारी गतिविधियों से प्रभावित होता है। हम तीन दशक में भी नहीं समझ पाए कि पर्यावरण ही अगर पस्त होगा, तो मानव स्वस्थ हो ही नहीं सकता। अगर हमने इस ओर ध्यान नहीं दिया तो भविष्य में बहुत कुछ ऐसा होगा, जो बदतर होगा, खासकर अपने देश के लिए। दुनिया के वे टॉप 100 सिटीज, जो पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन से जुड़े जोखिमों से जूझ रहे हैं, उनमें 99 एशिया में हैं। सबसे ज्यादा 43 शहर अपने देश के हैं। 37 शहर चीन के भी हैं,

लेकिन अपना नंबर बड़ा है और यही खतरे की घंटी है। ये आंकड़ा वेरिस्क मैपलक्राफ्ट की जारी की गई रिपोर्ट एनवायरमेंटल रिस्क आउटलुक 2021 में बताया गया था।
इससे पहले बीते साल ही वर्ल्ड एयर क्वालिटी रिपोर्ट 2020 में बताया गया था कि दुनिया के 30 सबसे प्रदूषित शहरों में 22 अकेले भारत के हैं जिनमें देश की राजधानी दिल्ली सहित यूपी और हरियाणा के कई बड़े शहर शामिल हैं। एनवायर मेंटल रिस्क आउटलुक 2021 की रिपोर्ट में बताया गया कि पर्यावरण और जलवायु संबंधी खतरों के बादल जिन 100 शहरों पर मंडरा रहे हैं। उनमें बढ़ता प्रदूषण, पानी की घटती सप्लाई, बाढ़, सूखा, तूफान और हीट वेव जैसी प्राकृतिक के गंभीर खतरे हैं।
यह रिपोर्ट कहती है कि ऐसी विपत्तियों से दो-चार होने वाला दुनिया का सबसे ज्यादा प्रभावित शहर है जर्काता और दूसरे नंबर पर है भारत की राजधानी दिल्ली। यह चिंता की बात है क्योंकि अपने देश के तो 43 शहर इस खतरे की जद में हैं। भारत की आबादी तेजी से बढ़ रही है और संसाधन प्रभावित हो रहे हैं। इससे लोगों की आय, रोजगार, जीवन स्तर, स्वास्थ्य, कुछ भी अछूता नहीं रहा। वैसे भी दुनिया की आबादी आठ अरब के आंकड़े को पार कर चुकी है। अपना देश विश्व का सबसे ज्यादा आबादी वाला देश बनने की दौड़ में अव्वल आने की ओर अग्रसर है।

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बिना ये सोचे कि अगर हम आबादी वाले आंकड़े में यों ही बढ़ते रहे, तो कौन-कौन सी मुश्किलें बढ़ जाएंगी। बीते हफ्ते ही दुनिया ने आठ अरब की आबादी का आंकड़ा पार किया है। हमें 7 से 8 अरब होने में मात्र 12 बरस लगे हैं। इस एक अरब आबादी को बढ़ाने में भारत की भागीदारी रही है 17.7 करोड़ यानि सबसे ज्यादा। हमसे ज्यादा आबादी वाले चीन ने इस आंकड़े में हमारे आधे से भी कम की भागीदारी दी है जो 7.3 करोड़ है। इन आंकड़ों से साफ है कि भारत में बाशिंदे तेजी से बढ़ रहे हैं। वैसे अपने देश की आबादी जिस रफ्तार से बढ़ रही है

, उसे देखते हुए यूनाइटेड नेशंस पापुलेशन फंड ने तो ये अंदाजा भी लगा लिया है कि अगले साल भारत विश्व में सबसे ज्यादा आबादी वाला देश हो जाएगा। हम चीन से कुछ खास पीछे नहीं हैं। चीन की आबादी अभी 1.43 अरब है और भारत की 1.41 अरब। साफ है कि हम जल्द ही चीन को पीछे छोड़ देंगे, वैसे भी अगले एक अरब में चीन की भागीदारी माइनस में होगी और हमारी प्लस में।

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वास्तविक मुद्दा है ये कि इस बढ़ती आबादी के बाद एक तरफ जहां पर्यावरण का बैरी व्यवहार हमारे सामने चुनौतियां खड़ी करेगा तो वहीं इन्हीं के प्रभाव के बाद बढ़ने वाली भुखमरी और गरीबी परिस्तिथियों को और विकट बनाएगी। आधारभूत जरूरतों की कमी ही पोषण, स्वास्थ्य, शिक्षा को भी प्रभावित करेंगी। वर्तमान की मौसम की करवटें, आपदाएं ये संकेत दे रही हैं

कि अगर इंसान समय रहते सचेत न हुआ तो भविष्य भयंकर होगा। धीरे धीर सर्दी घट जाएगाी, गर्मी इतनी तपन देगी कि हर ओर त्राहिमाम सुनाई पड़ेगा। झुलसती गर्मी न सिर्फ ग्लेशियरों के हिम खंड़ों को पिघला देगी, बल्कि फसलों के सूखने से खाद्यान्न भी प्रभावित होगा। कहीं बेमोसम बारिश, तो कहीं पानी की एक बूंद का न बरसना, अनाज उत्पादन को घटाएगा। भारत के अलग अलग हिस्सों में के साथ-साथ पाकिस्तान में आई बाढ़ भविष्य के संकटों का संकेत हैं।
(यह लेखिका के निजी विचार हैं।)

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