बिना चले घर पहुंचना असंभव

उन्होंने अपने श्रद्धालुओं को बोझिल बातों में उलझाने की जगह एकदम सरल और सुस्पष्ट तरीके से समझाया कि जीवन क्या है?

Created By : ashok on :12-11-2022 15:23:18 अशोक मिश्र खबर सुनें

बोधिवृक्ष

अशोक मिश्र

महात्मा बुद्ध ने अपने जीवन काल में सिर्फ बड़े-बड़े उपदेश नहीं दिए, बल्कि उन्होंने अपने शिष्यों और समर्थकों को उन पर अमल करने की प्रेरणा भी दी। वे हर व्यक्ति की समस्याओं का निराकरण व्यावहारिक धरातल पर करते थे। उन्होंने अपने श्रद्धालुओं को बोझिल बातों में उलझाने की जगह एकदम सरल और सुस्पष्ट तरीके से समझाया कि जीवन क्या है? धर्म क्या है? जीने का उद्देश्य क्या होना चाहिए। महात्मा बुद्ध श्रावस्ती में जब चातुर्यामास रहकर प्रवचन करते थे, तो एक व्यक्ति उनका प्रवचन सुनने नियमित आता था। वह श्रावस्ती नगर में रहता था और जेतवन में प्रवचन सुनने आता था।

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महात्मा बुद्ध कहते थे कि लोभ, दोष और मोह पाप के मूल कारण हैं। हिंसा करना और असत्य बोलना घोर अधर्म है। यदि सच्ची शांति चाहते हो, तो इन दुर्गुणों को हमेशा के लिए त्याग दो। क्रोध करने से कभी शांति नहीं मिलेगी। एक दिन वह व्यक्ति महात्मा बुद्ध के पास पहुंचा और बोला कि मैं आपको प्रवचन को बड़े ध्यान से सुनता हूं, लेकिन फिर भी मेरे मन को शांति नहीं मिलती है। इस पर महात्मा बुद्ध मुस्कुराए और बोले, कहां रहते हो? श्रावस्ती में। उसने कहा कि हां। इस पर बुद्ध बोले कि घर का रास्ता जानने के बावजूद क्या तुम बिना चले घर पहुंच सकते हो? उसने कहा कि नहीं भगवन! बिना चले घर कैसे पहुंचा जा सकता है।

इस पर बुद्ध ने कहा कि जब तक तुम इन बातों पर अमल नहीं करोगे, तब तक तुम्हें शांति कैसे मिलेगी। जो बातें सुनी हैं, उन्हें जीवन में उतारो, उन पर अमल करो। तब तुम्हें शांति अवश्य मिलेगी। यह सुनकर वह व्यक्ति समझ गए कि केवल प्रवचन सुनने से कुछ नहीं होता है। सुने गए प्रवचन की बातों पर अमल करना भी जरूरी है। तभी शांति मिलती है।

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