भारत में बढ़ते साइबर अटैक चिंताजनक

हर देश के वित्तीय संस्थान भी इन हैकर्स के निशाने पर होते हैं। इसी साल अप्रैल और सितंबर महीने में भारत की पॉवर ग्रिड को निशाना बनाने की कोशिश की गई थी। वित्तीय संस्थानों को भी निशाना बनाने की कोशिश की गई थी।

Created By : ashok on :03-12-2022 15:48:45 संजय मग्गू खबर सुनें


संजय मग्गू
करीब एक हफ्ते पहले 23 नवंबर को खबर आई कि दिल्ली के सरकारी अस्पताल एम्स के सारे सर्वर ठप पड़ गए हैं। यह अब तक भारतीय चिकित्सा संस्थानों पर हैकर्स द्वारा किया गया सबसे बड़ा था। इस मामले में एक खबर यह भी आई कि हैकर्स ने 200 करोड़ क्रिप्टो करंसी की मांग की है। हालांकि दिल्ली पुलिस इस खबर से इत्तफाक नहीं रखती है। वह फिरौती मांगने की बात से इनकार करती है। एम्स पर हुए साइबर हमले में हैकर्स कितना डाटा चुराने में सफल हुए हैं या उनके हाथ कोई सफलता नहीं लगी, इस बारे में कुछ भी नहीं कहा जा सकता है।

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कहा जाता है कि एम्स के विभिन्न सर्वर पर करीब पांच करोड़ से अधिक मरीजों का डाटा 23 नवंबर तक मौजूद था। वर्ष 1956 में मरीजों के लिए दिल्ली में खुले एम्स में वर्तमान प्रधानमंत्री और केंद्रीय मंत्रिमंडल के सदस्यों सहित पूर्व प्रधानमंत्रियों, राष्ट्रपतियों और देश के अन्य महत्वपूर्ण व्यक्तियों का मेडिकल डाटा मौजूद रहता है। ऐसी स्थिति में एम्स पर हुए साइबर अटैक की गंभीरता को समझा जा सकता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बार-बार कहते हैं कि साइबर सुरक्षा सिर्फ डिजिटल वर्ल्ड के लिए ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा का विषय है। यह भी एक सच है कि अमेरिका के बाद सबसे ज्यादा साइबर अटैक भारत में होते हैं। साइबरपीस फाउंडेशन के ग्लोबल प्रेसिडेंट विनीत कुमार का कहना है कि इस संबंध में चेतावनी बहुत पहले से मिल रही थी, लेकिन अब भी देश में साइबर हाईजीन यानी सुरक्षा पर बहुत कम ध्यान दिया जाता है। सरकारी दफ्तरों में चलने वाले कंप्यूटरों में वायरस या हैकिंग अटैक रोकने के लिए एंटीवायरस आदि नहीं डाले जा रहे हैं। पिछले ही साल सिंगापुर स्थित सिफिरमा नाम की थ्रेट इंटेलिजेंस कंपनी ने भारत को चेताया था कि भारत बायोटेक, सीरम इंस्टीट्यूट, पतंजलि, एम्स, डॉ. रेड्डीज लैब आदि पर साइबर अटैक हो सकते हैं। दुनिया भर में जितने भी अटैक होते हैं, वह ज्यादातर रक्षा, अनुसंधान, चिकित्सा और सरकारी नीतियों को संचालित करने वाले संस्थानों पर होते हैं।

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हर देश के वित्तीय संस्थान भी इन हैकर्स के निशाने पर होते हैं। इसी साल अप्रैल और सितंबर महीने में भारत की पॉवर ग्रिड को निशाना बनाने की कोशिश की गई थी। वित्तीय संस्थानों को भी निशाना बनाने की कोशिश की गई थी। कहा तो यह जाता है कि चीन, रूस और उत्तर कोरिया जैसे देशों में अपना गुप्त हेडक्वार्टर्स बनाए कुछ हैकर ग्रुप विभिन्न देशों के सरकारी और निजी संस्थानों पर साइबर अटैक करके डाटा चुराते हैं और उसे उस देश के प्रद्विंद्वी देशों की सरकारों को बेच देते हैं। चीन, पाकिस्तान, उत्तर कोरिया, सोमालिया, रूस सहित कुछ गैर जिम्मेदार देश चुराए गए इन आंकड़ों के सबसे बड़े ग्रााहक होते हैं। वे हैकर्स को मुंहमांगी कीमत देकर इन आंकड़ों को खरीद लेते हैं और इन्हीं आंकड़ों के आधार पर अपने देश की नीतियां तय करते हैं। ऐसी हालत में देश और प्रदेश की सरकारों को अपने संस्थानों पर होने वाले साइबर अटैक से बचने का मुकम्मल इंतजाम करना होगा। तभी देश की सुरक्षा चाक-चौबंद होगी।

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