भारत भी कतर देश के सामने जताए विरोध

कतर ने यह हरकत जान बूझकर की है या अनजाने में, लेकिन विवादित और भारत के भगोड़े जाकिर नाइक को फीफा वर्ल्ड कप फुटबाल खेलों के दौरान कथित धार्मिक स्पीच देने के लिए आमंत्रित करके एक विवाद को जन्म दिया है।

Created By : ashok on :25-11-2022 14:20:48 संजय मग्गू खबर सुनें

त्वरित टिप्पणी

संजय मग्गू
कतर ने यह हरकत जान बूझकर की है या अनजाने में, लेकिन विवादित और भारत के भगोड़े जाकिर नाइक को फीफा वर्ल्ड कप फुटबाल खेलों के दौरान कथित धार्मिक स्पीच देने के लिए आमंत्रित करके एक विवाद को जन्म दिया है। हालांकि कतर ने सरकारी तौर पर जाकिर नाइक के आने की पुष्टि तो नहीं की है, लेकिन यह माना जा रहा है कि जाकिर नाइक वहां पहुंच चुका है। आपको याद दिला दें कि पिछले साल जब तत्कालीन भाजपा प्रवक्ता नूपुर शर्मा पर पैगम्बर मोहम्मद साहब के खिलाफ बोलने का आरोप लगा था, तो हमारे तत्कालीन उप राष्ट्रपति वैंकेया नायडू के कतर दौरे के दौरान ही वहां की सरकार ने भारतीय राजदूत को बुलाकर कड़ी आपत्ति जताते हुए नूपुर शर्मा पर कार्रवाई की मांग की थी।

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हमारे उपराष्ट्रपति के सामने असहज स्थिति पैदा करने वाले कतर ने मनी लांड्रिंग और हेट स्पीट मामले के आरोपी भारतीय भगोड़े जाकिर नाइक को धार्मिक स्पीच के लिए आमंत्रित किया है, तो ऐसे में भाजपा के प्रवक्ता सावियो रोड्रगेज की यह मांग बिल्कुल सही लगती है कि भारत को फीफा वर्ल्डकप का बहिष्कार करना चाहिए। आज जब भारत सहित पूरी दुनिया आंतकवाद के खिलाफ एक जंग लड़ रही है, ऐसे में नाइक को बुलाकर धार्मिक उन्माद फैलाने का मौका देना कहां तक उचित है। मुंबई में जन्मे जाकिर नाइक ने एमबीबीएस की डिग्री हासिल की है। वर्ष 1980 के दौरान इस्लामिक रिसर्च फाउंडेशन की स्थापना करने वाला जाकिर नाइक कट्टरपंथी सलाफी विचारधारा का प्रचार करता है। भारत में तो यह जगह-जगह हिंदुओं के खिलाफ मुसलमानों को भड़काने वाला बयान देकर माहौल खराब कर चुका है।

भारत और बांग्लादेश में इसके खिलाफ हेट स्पीच देकर माहौल को बिगाड़ने के कई मामले दर्ज हैं। दुबई से संचालित होने वाले पीस टीवी चैनल पर अंग्रेजी में भाषण देने वाले जाकिर पर भारत में प्रतिबंध लगाया जा चुका है। मनी लांड्र्ंिग और हेट स्पीच मामले में आरोपी जाकिर इन दिनों मलेशिया का नागरिक है। उसे कतर में मलेशियाई नागरिक की हैसियत से ही बुलाया गया है। सुन्नी बहुल सऊदी अरब जैसा देश जाकिर नाइक का समर्थन करता है क्योंकि वह शिया और अहमदिया समुदाय के खिलाफ जहर उगलता रहता है। यही वजह है कि वर्ष 2015 में सऊदी अरब ने जाकिर नाइक को इस्लाम की सेवा के लिए किंग फैसल अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया था। दरअसल, मुस्लिम राष्ट्र भी दो धड़ों में बंटे हुए हैं। शिया बहुल और सुन्नी बहुल राष्ट्रों के बीच हमेशा एक तलवार खिंची रहती है।

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वे एक दूसरे को नीचा दिखाने का कोई भी मौका नहीं छोड़ते हैं। कतर भी सुन्नी बहुल मुस्लिम मुल्क है। यही वजह है कि उसने जाकिर नाइक को फीफा वर्ल्डकप के दौरान इस्लाम के सुन्नी मत का प्रचार-प्रसार के नाम पर कट्टरपंथी विचारधारा को फैलाने का मौका दिया है। ऐसे में भारत को अपनी सधी हुई प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कतर को यह एहसास दिलाना चाहिए कि जिस तरह उसने नूपुर शर्मा मामले में तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की थी। ठीक वैसा ही अधिकार भारत भी जाकिर नाइक के मामले में रखता है। केंद्र सरकार को वैश्विक मंच पर इस मुद्दे को उठाना भी चाहिए।

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