भारत-चीन व्यापार घाटा सौ करोड़ डॉलर

भारत से चीन भेजे जाने वाले सामानों में 37.9 प्रतिशत की गिरावट आई थी। इससे भी पिछले साल यानी वर्ष 2021 में भी भारत-चीन व्यापार असंतुलन का शिकार रहा।

Created By : ashok on :14-01-2023 15:49:31 संजय मग्गू खबर सुनें


संजय मग्गू

शुक्रवार को चीन के कस्टम विभाग ने एक आंकड़ा जारी किया है जिसके मुताबिक पिछले साल चीन और भारत के बीच व्यापार में 8.4 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ 135.98 अरब डॉलर तक पहुंच गया। यही नहीं, पिछले साल यानी वर्ष 2022 में भारत को होने वाले चीनी सामान के निर्यात में 21.7 प्रतिशत में बढ़ोतरी हुई है। वहीं, भारत से चीन भेजे जाने वाले सामानों में 37.9 प्रतिशत की गिरावट आई थी। इससे भी पिछले साल यानी वर्ष 2021 में भी भारत-चीन व्यापार असंतुलन का शिकार रहा।

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अगर इस दृष्टिकोण से देखें, तो भारत को चीन से व्यापार करने में किसी तरह का फायदा नहीं हुआ, बल्कि सौ अरब डालर की चपत लग गई यानी भारत को सौ अरब डालर का घाटा हुआ। यह घाटा कोई पहली बार नहीं हुआ है, पिछले कई साल से भारत को चीन से व्यापार करने में घाटा ही उठाना पड़ रहा है। हालात यह है कि वर्ष 2020 में गलवान घाटी में हुई दोनों देशों के सैनिकों की झड़प में भारत को अपने 20 जवानों से हाथ धोना पड़ा था। अभी पिछले दिनों ही सिक्किम में भारत और चीन के सैनिकों के बीच भी झड़प हुई थी। इस मामले को लेकर भारत में खूब हंगामा मचा था। देश की विपक्षी पार्टियां भारत और चीन मुद्दे को लेकर केंद्र सरकार पर हमलावर रहीं। शीतकालीन सत्र के दौरान भी लोकसभा और राज्य सभा में विपक्षी पार्टियों ने सरकार को घेरने का प्रयास किया। कई बार सत्र बाधित हुए। केंद्र सरकार सीमा पर चीनी सेना के किसी भी तरह के हस्तक्षेप या नियंत्रण की बात से इनकार करती रही। लेकिन यह भी सच है कि पिछले कुछ सालों में भारत और चीन के बीच सीमा पर न केवल संबंध खराब हुए हैं,

बल्कि भारत में चीन से होने वाला निवेश भी काफी हद तक कम हुआ है।

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पिछले महीने खत्म हुए संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान केंद्र सरकार ने लगभग थोड़े-बहुत रद्दोबदल के साथ यही आंकड़ा सदन में पेश किया था जिसमें भारत और चीन के बीच व्यापार बढ़ने की बात कही गई थी। अब सवाल यह है कि भारत ऐसा क्या चीन से खरीदता है जिसको खरीदना उसकी मजबूरी है। सरकारी आंकड़ों के आधार पर बात करें, तो भारत चीन को कच्चा माल अधिक सप्लाई करता है। लेकिन वहां से इलेक्ट्रानिक्स गुड्स, कई तरह के रसायन, मैकेनिकल मशीनरीज मंगाता है। भारत में मंगाए गए रसायन का उपयोग यहां के मेडिकल इंडस्ट्रीज में किया जाता है। भारत में बनने वाली ज्यादातर दवाओं का कच्चा माल चीन से ही आता है। भारत अगर दुनिया भर के ज्यादातर देशों को दवाएं सप्लाई करता है, तो उसका कच्चा माल का ही होता है।

चीन से फार्मा इंडस्ट्री के लिए कच्चा माल मंगाने की मजबूरी यह है कि अन्य देशों के मुकाबले यह सस्ता पड़ता है और जल्दी मिल जाता है। भारत चीन को कॉटन, आयरन एंड स्टील, आर्टिफिसियल फूल, अयस्क, स्लैग, राख और अन्य तरह के केमिकल बेचता है। चीन यही चीजें अपने अन्य पड़ोसी देशों से भी आयात करता है। इस वजह से इन वस्तुओं के लिए चीन भारत पर उतना निर्भर भी नहीं है। राजनीतिक और कूटनीतिक स्तर पर भले ही चीन का विरोध करे और करना भी चाहिए, लेकिन कुछ बातों पर हमारी निर्भरता का फायदा चीन उठा रहा है जिससे निजात पाने की कोशिश करनी होगी।

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