ईरानी महिलाओं ने जीत ली पहली जंग

ईरान में मोरैलिटी पुलिस व्यवस्था खत्म होने का यह मतलब नहीं है कि ईरानी महिलाओं की लड़ाई खत्म हो गई है।

Created By : - on :06-12-2022 15:22:45 संजय मग्गू खबर सुनें

ईरानी महिलाओं ने जीत ली पहली जंग


संजय मग्गू


ईरान में महिलाओं ने पहली लड़ाई जीत ली है। ईरान में मोरैलिटी पुलिस व्यवस्था खत्म होने का यह मतलब नहीं है कि ईरानी महिलाओं की लड़ाई खत्म हो गई है। अभी उनकी लड़ाई का एक पड़ाव पूरा हुआ हौ अभी उनकी जंग जारी है। यह महिलाओं की एकता और जुझारूपन की अप्रतिम मिसाल है। महिलाओं ने जब भी कुछ करने के लिए ठाना है, तो समाज बदला है, रूढ़ियां बदली हैं, परंपराएं बदली हैं

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और बदला है उनके शोषण का ढांचा। ईरानी महिलाओं की इस पहली जीत के लिए उन्हें हार्दिक बधाई और हिजाब के खिलाफ हुए प्रदर्शन के दौरान पहली शहादत देने वाली 22 वर्षीय महसा अमीनी को विनम्र श्रद्धांजलि। ईरान के अटार्नी जनरल मोहम्मद जफर मोंटाजेरी ने भले ही मोरैलिटी पुलिस व्यवस्था को भंग करने की घोषणा कर दी हो, लेकिन इसका यह मतलब कतई नहीं निकाला जाना चाहिए कि ईरानी महिलाओं को हिजाब पहनने से मुक्ति मिल जाएगी।

अभी हिजाब को लेकर ईरानी सरकार ने कोई घोषणा भी नहीं की है। दुनिया भर में मोरैलिटी पुलिस को लेकर आलोचना का शिकार होने वाली ईरानी सरकार ने अपने बचाव के लिए भले ही यह व्यवस्था खत्म कर दी हो, लेकिन दशकों पुराने इस्लामिक कानून में फिलहाल तात्कालिक रूप से कोई बदलाव आएगा, ऐसा नहीं लगता है। हां, यह बात भी सही है कि अटॉर्नी जनरल मोंटाजेरी ने संसद में हिजाब कानून पर दोबारा विचार करने का आश्वासन दिया है। इसी वर्ष 16 सितंबर को ईरान में हिजाब पहनने के अनिवार्य कानून के खिलाफ शुरू हुए आंदोलन में अब तक 470 से अधिक प्रदर्शनकारियों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा है। हिजाब के खिलाफ होने वाले आंदोलन में शरीक होने के अपराध में 18210 लोग गिरफ्तार किए जा चुके हैं।

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इसके बावजूद ईरान में हिजाब के खिलाफ शुरू हुआ मोरैलिटी पुलिस किसी भी तरह कमजोर नहीं पड़ा है। यह ईरानी जनता के संघर्ष और हक की लड़ाई की पहली जीत है। वैसे 16 सितंबर को जब हिजाब के खिलाफ आंदोलन शुरू हुआ था, तब वह धार्मिक कट्टरता के खिलाफ था, लेकिन जैसे-जैसे यह आंदोलन बढ़ता गया, हिजाब पहनने की अनिवार्यता के विरोध के साथ-साथ महंगाई, गरीबी, बेरोजगारी जैसे मुद्दे भी जुड़ते गए और यही वजह है कि इस संघर्ष को एक व्यापक जनसमर्थन मिलता गया।

नतीजा आज सबके सामने है। ईरानी सरकार को नैतिक पुलिस बल मामले में झुकना पड़ा है। वैसे भी नारी शक्ति को कमतर आंकने की भूल जिसने भी की है, उसे उसका खामियाजा भुगतना ही पड़ा है। अगर आज दुनिया भर के समाज गर्व से सीना ताने अपने को श्रेष्ठ बताने की कोशिश रहे हैं, अपनी भौतिक और वैज्ञानिक उपलब्धियों के लिए इतरा रहे हैं,

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तो इसके पीछे भी महिलाओं की बहुत बड़ी भूमिका रही है। विज्ञान, गणित, अंतरिक्ष विज्ञान, कला, भवन निर्माण, खेती जैसी विधाओं की खोज का श्रेय महिलाओं को ही है। यदि महिलाओं ने गणना यानी गिनती का आविष्कार न किया होता, तो हम अंतरिक्ष की सैर करने की जगह अब तक नदी-नाला पार करने की क्षमता भी शायद विकसित न कर पाए होते। महिलाओं की इस सेवा के लिए यदि मानव समाज को मूल्य चुकाना हो, तो पूरी पृथ्वी का अकूत धन भी शायद कम पड़ जाए।

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