समय को पहचानना सीखिए

दाराशिकोह ने पता चलने पर बहुत रोका, लेकिन वे नहीं माने। कुछ दिनों बाद दाराशिकोह कहीं जा रहे थे, तो लोगों ने बताया कि यहीं पास में एक संत बनवारी दास रहते हैं।

Created By : ashok on :25-11-2022 15:00:34 अशोक मिश्र खबर सुनें

बोधिवृक्ष

अशोक मिश्र
समय को सबसे बड़ा बलवान कहा गया है। कहा जाता है कि समय ठीक हो, तो बिगड़े हुए काम भी फटाफट हो जाते हैं, लेकिन समय खराब हो, तो बना बनाया काम भी बिगड़ जाता है। एक कथा है कि दाराशिकोह के दरबार में एक मुंशी थे बनवारी दास। उन्हें एक बार कुछ पैसे की जरूरत हुई, तो उन्होंने प्रार्थना पत्र लिखा और दरबार में जाकर खड़े हो गए। दाराशिकोह ने उन्हें देखा तक नहीं। इससे क्षुब्ध होकर वे घर आए और सारा सामान गरीबों को दान देकर संन्यास ग्रहण कर लिया।

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दाराशिकोह ने पता चलने पर बहुत रोका, लेकिन वे नहीं माने। कुछ दिनों बाद दाराशिकोह कहीं जा रहे थे, तो लोगों ने बताया कि यहीं पास में एक संत बनवारी दास रहते हैं। उनके दर्शन कर लिया जाए। दाराशिकोह वहां पहुंचे, तो उन्होंने बनवारी दास को पहचान लिया और बोले कि आपको सब कुछ छोड़कर आपको क्या मिला? इस पर बनवारी दास ने कहा कि एक समय ऐसा था कि मैं आपके सामने हाथ बांधे खड़ा रहता था और आप ध्यान नहीं देते थे। वहीं आज आप हाथ बांधे खड़े हैं और मैं आपको कोई भाव नहीं दे रहा हूं। इस पर दाराशिकोह निरुत्तर हो गए।

यह समय ही था कि कभी अपने कर्मचारी की ओर ध्यान न देने वाला शासक अपने ही कर्मचारी के सामने हाथ बांधे खड़ा था। यही समय की महत्ता है। समय किसी का इंतजार नहीं करता है। लोगों को समय के अनुसार काम करने की जरूरत होती है। अगर समय को पहचान करके काम किया जाए, तो सफलता जरूर मिलती है। दाराशिकोह के मुंशी ने समय को पहचाना, वे सब कुछ छोड़कर संन्यासी हो गए और वह उच्चता प्राप्त की जो पूरे हिंदुस्तान के बादशाह को भी हासिल नहीं था। यह समय ही है जो अनुकूल होने पर राजा को रंक और रंक को राजा बना देता है।

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