महात्मा बुद्ध ने इंसान को इंसान समझा

महात्मा बुद्ध अपने युग के क्रांतिकारी विचारक और दार्शनिक थे। जिस युग में वे पैदा हुए थे, उस युग में वैचारिकता का अभाव था और धार्मिक कर्मकांड का बोलबाला था।

Created By : ashok on :05-12-2022 15:26:02 अशोक मिश्र खबर सुनें

अशोक मिश्र
महात्मा बुद्ध अपने युग के क्रांतिकारी विचारक और दार्शनिक थे। जिस युग में वे पैदा हुए थे, उस युग में वैचारिकता का अभाव था और धार्मिक कर्मकांड का बोलबाला था। महात्मा बुद्ध ने अपने संदेश में धर्म का सरलीकरण कर दिया। उन्होंने धर्म के वाह्य आडंबर को अमान्य करते हुए पूजा की सरल पद्धति को प्रमुखता दी जिसकी वजह से लोग आकर्षित हुए।

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उन्होंने जातीय उच्चता के भाव को खत्म करने के लिए अपने संघ में सबको बराबर का स्थान दिया। इसका नतीजा यह निकला कि देश की गरीब और शोषित पीड़ित जनता महात्मा बुद्ध से जुड़ती चली गई। उन्होंने कहा कि संघ में सब बराबर हैं। जो भी धर्म की शरण में आ गया, जो भी बुद्ध की शरण में आ गया, जो भी संघ की शरण में आ गया, वह मनुष्य होने का अधिकारी हो गया। उन्होंने अपने शिष्यों को उपदेश देते हुए कहा कि तुम्हारा भला करने के लिए कोई अवतार नहीं आएगा। तुम्हें आपना पथ प्रदर्शक खुद बनना होगा। यही वजह है कि बौद्ध धर्म काफी फला फूला। कई सदियों तक बौद्ध धर्म देश का प्रमुख धर्म बनकर रहा।

इसका देश और विदेश में खूब प्रचार-प्रसार हुआ। मानव को मानव की तरह समझने और मानने की जो महात्मा बुद्ध ने शुरू की थी, वह कोई नई नहीं थी। वह तो पहले से ही जैन और सनातन धर्म में विद्यमान थी। लेकिन कर्मकांड और पाखंड की धूल उस पर जम गई थी। महात्मा बुद्ध और जैन तीर्थंकरों ने अहिंसा का पाठ देश की प्रजा को ही नहीं पढ़ाया, बल्कि उन्होंने तत्कालीन राजाओं को भी अहिंसक बनाने का प्रयास किया। यही वजह है कि महात्मा बुद्ध भगवान माने और पूजे गए।

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