Haryana: नसीब नहीं हो सके डॉक्टर, जच्चा बच्चा केंद्र और पशु अस्पताल हो गए जर्जर

हरियाणा में नूंह जिला के गांव उमरा से लापरवाही का मामला मामला सामने आया है। गांव उमरा में 40 वर्ष पहले जच्चा बच्चा केंद्र और पशु अस्पताल बनाया गया था। लेकिन दोनों को ही डॉक्टर नसीब नहीं हो पाया और अब दोनों जर्जर स्थिति में पहुंच गए हैं। ग्रामीणों ने समस्या पर ध्यान देने की गुहार लगाई है।

Created By : Shiv Kumar on :12-03-2022 20:15:34 जर्जर हो चुके पशु अस्पताल की तस्वीर। खबर सुनें

चिराग गोयल,फिरोजपुर झिरका।
नगीना उपमंडल के गांव उमरा में पशु अस्पताल को बने चार दशक हो चुके हैं। हरियाणा सरकार ने 40 साल पहले इमारत तो बना दी। लेकिन चिकित्सक व स्टाफ की नियुक्ति अभी तक नहीं हुई है। जिसके चलते अस्पताल परिसर में घास वे बबूल के पेड़ काफी मात्रा में हो गए हैं। पशु अस्पताल के समीप ही जच्चा बच्चा केंद्र स्थित है। जच्चा बच्चा केंद्र को भी बने चार दशक ही हो चुके हैं लेकिन अभी तक ना तो पशु अस्पताल और ना ही जच्चा बच्चा केंद्र को कोई डॉक्टर नसीब हुआ है। इन दोनों सरकारी भवनों का लोग जुआ सट्टा जैसे बुरे कामों में इस्तेमाल कर रहे हैं।

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पशु अस्पताल व जच्चा बच्चा केंद्र के बिल्कुल पास ही सीनियर सेकेंडरी स्कूल है। अस्पताल व जच्चा बच्चा केंद्र परिसर में बड़ी-बड़ी घास होने के कारण उसमें सांप बिच्छू जैसे जहरीले जानवरों का अंदेशा बना रहता है। जिस कारण छात्रों के अभिभावकों को छात्रों को स्कूल भेजने में डर लगता है। ग्रामीणों में पशु अस्पताल व जच्चा बच्चा केंद्र दोनों में चार दशक से डॉक्टरों की नियुक्ति नहीं होने से सरकार व प्रशासन के खिलाफ भारी रोष व्याप्त है। गांव के हामिद अलमास, डाक्टर ईशा, डाक्टर महमूद, साफेद, जुनैद खान, एसएमसी मेंबर साजिद, गफ्फार, हाजी शहीद, डाक्टर साजिद आदि लोगों ने बताया कि चार दशक पहले बनी मवेशी अस्पताल की सुविधा क्षेत्र के लोगों को अभी भी नहीं मिल पा रही है। 40 साल पहले बनी अस्पताल की इमारत खंडहर व जर्जर अवस्था में है। ग्रामीणों ने जच्चा बच्चा केंद्र व पशु अस्पताल दोनों को सुधारने के लिए कई बार प्रशासन से गुहार लगाई है लेकिन अभी तक ग्रामीणों की समस्या का समाधान नहीं हुआ है।

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जब जब मवेशियों में बीमारी आती है तो ग्रामीणों की परेशानी और भी बढ़ जाती है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि हमारी समस्या का समाधान जल्द से जल्द किया जाए ताकि पशुओं का बेहतर व सही समय पर इलाज हो सके। वहीं जच्चा बच्चा केंद्र को स्टॉप मिल जाए तो डिलीवरी के लिए पीएचसी मरोड़ा,पीएचसी नगीना, तथा मांडीखेड़ा अस्पताल के चक्कर काटने ना पड़े और लोगों को अपने गांव में ही सहूलियत मिल सके। तथा महिलाओं को बच्चा पैदा करते समय उनकी जान बचाई जा सके। मांडीखेड़ा व नगीना अस्पताल की दूरी 10 किलोमीटर है जिस कारण जच्चा बच्चा दोनों की जान को खतरा बना रहता है इसलिए यहां के लोगों को सरकार स्टाफ मुहैया कराकर महिलाओं की जान बचाने में अपनी भूमिका निभाए। हरियाणा सरकार सबका साथ सबका विकास सबका विश्वास की तर्ज पर काम कर रही है जब हम जमीनी स्तर पर देखते हैं तो सरकार का यह नारा ओखला नजर आता है।

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