नागेश्वर राव ने नई शिक्षा नीति की प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला, भारतीय ज्ञान  प्रचार-प्रसार पर बल दिया

`भारत मंथन` राष्ट्रीय संगोष्ठी सत्र की अध्यक्षता इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय के कुलपति श्री नागेश्वर राव जी के द्वारा की गई। उन्होंने अपने वक्तव्य में नई शिक्षा नीति की प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला। साथ ही भारतीय ज्ञान के प्रचार-प्रसार पर बल दिया।

Created By : Rajesh on :26-06-2022 21:51:23 `भारत मंथन` राष्ट्रीय संगोष्ठी खबर सुनें

देश रोजाना, नई दिल्ली
इंद्रप्रस्थ अध्ययन केंद्र, दिल्ली वर्ष 2018 से निरंतर 'भारत मंथन' राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन करता आ रहा है। इसी श्रृंखला में 'स्वराज 75' के उपलक्ष्य में इंद्रप्रस्थ अध्ययन केंद्र, संस्कृत एवं प्राच्य विद्या अध्ययन संस्थान, जे.एन.यू, दिल्ली एवं चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय मेरठ के संयुक्त तत्वाधान में 'भारत मंथन' राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस संगोष्ठी में लगभग 400 प्रतिभागी उपस्थित रहे। 12 समानांतर सत्रों में अनेक विद्यार्थियों, शोधार्थियों, प्रवक्ताओं एवं अन्य प्रबुद्ध जनों ने अपने शोध पत्रों का वाचन किया। संगोष्ठी के उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय के कुलपति श्री नागेश्वर राव जी के द्वारा की गई। उन्होंने अपने वक्तव्य में नई शिक्षा नीति की प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला। साथ ही भारतीय ज्ञान के प्रचार-प्रसार पर बल दिया।

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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के उत्तर क्षेत्र बौद्धिक शिक्षक प्रमुख, श्री अजय कुमार जी ने मुख्य वक्ता के रूप में उद्बोधन दिया। उन्होंने कहा की हिंदुत्व और भारतीयता एक सिक्के के दो पहलू हैं। देश के प्रति समर्पण की भावना को जागृत करते हुए उन्होंने कहा कि देश के प्रति समर्पण एक दिन का विषय नहीं बल्कि यह क्षण क्षण का विषय है। इंद्रप्रस्थ अध्ययन केंद्र के प्रमुख, श्री विनोद कुमार 'विवेक' जी ने संगोष्ठी में आए अतिथियों का परिचय एवं स्वागत किया। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय की ओर से संस्कृत एवं प्राच्य विद्या अध्ययन संस्थान के अध्यक्ष प्रोफेसर बृजेश पांडे जी का सानिध्य प्राप्त हुआ। इसी सत्र में चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के प्रोफेसर पवन कुमार शर्मा जी का सानिध्य प्राप्त हुआ तथा आपने धन्यवाद ज्ञापन करते हुए कहा कि आज की नई शिक्षा नीति रामराज्य की पुनर्व्यवस्था का आरंभ करती है।

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समापन सत्र की अध्यक्षता वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद की निदेशक प्रो रंजना अग्रवाल जी द्वारा की गई। आपने 'स्व' के जागरण की बात कही। मुख्य वक्ता के रूप में गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय, नोएडा के पूर्व कुलपति प्रोफेसर भगवती प्रसाद शर्मा जी ने अपने उद्बोधन में भारतीय कला और संस्कृति के अद्भुत तथ्यों को उजागर किया। संगोष्ठी में वैज्ञानिक एवं तकनीकी शब्दावली आयोग (भारत सरकार) के अध्यक्ष प्रो गिरीश नाथ झा जी का सानिध्य प्राप्त हुआ। उन्होंने कहा कि भारत सदा से विश्व गुरु के स्थान पर सुशोभित रहा है। तथा आपने संस्कृत के प्रचार- प्रसार पर जोर देने की बात कही।

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संस्कृत एवं प्राच्य विद्या अध्ययन संस्थान, जेएनयू के डीन, प्रो श्री सुधार कुमार आर्य जी मंच पर उपस्थित रहे। आपने अपने उद्बोधन द्वारा मार्गदर्शन और अतिथियों का धन्यवाद ज्ञापित किया। इस दौरान इंद्रप्रस्थ अध्ययन केंद्र द्वारा प्रकाशित तीन पुस्तकों का विमोचन किया गया। 2019 में भारत मंथन में प्रस्तुत शोध पत्रों की संकलन पुस्तक 'भारतीय संस्कृति (भूत, वर्तमान, भविष्य)', 2020 भारत मंथन की पुस्तक, 'चराचर सृष्टि, भारत दृष्टि' एवं डॉ ओम प्रकाश पाहुजा जी द्वारा लिखित, 'सूक्ष्म शोध' नामक पुस्तक का लोकार्पण इस संगोष्ठी के दौरान किया गया। संगोष्ठी का समापन कल्याण मंत्र के द्वारा किया गया।

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