नई और पुरानी पीढ़ी का संघर्ष

नई पीढ़ी में जोश, ऊर्जा और जोखिम उठाने का साहस होता है। नई पीढ़ी अपने सपनों, अपनी इच्छाओं को पूरा करने का हर संभव प्रयास करती है।

Created By : ashok on :18-01-2023 16:56:57 अशोक मिश्र खबर सुनें


अशोक मिश्र
नई और पुरानी पीढ़ी के बीच संघर्ष हर युग में रहा है। हर युग में नई पीढ़ी हमेशा कुछ नया करना चाहती है। युवाओं में ऊर्जा बहुत होती है, वे पुरानी लीक पर चलना नहीं चाहते हैं। इसका अनुभव हम सबने किया है। जब हम बच्चे थे, युवा थे,

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तब हमारे बड़े हर बात में टोका करते थे। उनकी उलाहना ही यही होती थी कि हम सब अपनी मर्जी से ही सब कुछ करते रहते हैं। जो परंपराएं, नीतियां उनके पूर्वजों ने तय कर रखा है, उसे नई पीढ़ी वाले मानते ही नहीं हैं। नई पीढ़ी में जोश, ऊर्जा और जोखिम उठाने का साहस होता है। नई पीढ़ी अपने सपनों, अपनी इच्छाओं को पूरा करने का हर संभव प्रयास करती है। जबकि पुरानी पीढ़ी अपनी परंपराओं और रीतियों से जकड़ी रहती है।

वह अतीत जीवी होती है। हालांकि जब पुरानी पीढ़ी के लोग खुद युवा थे, तब उनसे पहले की पीढ़ी के लोगों की भी यही शिकायत रहती थी। दरअसल, परंपराएं और रीतियां कोई एक या दो पीढ़ी में नहीं बनती हैं। हर पीढ़ी अपनी अगली पीढ़ी को कुछ न कुछ सामाजिक, सांस्कृतिक धरोहर सौंप कर जाती है। पुरानी पीढ़ी हमेशा यही चाहती है कि नई पीढ़ी उनकी इच्छा और विचारों के अनुसार जीवन यापन करे।

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वह उनके अनुभवों को ग्रहण करे और उसका लाभ उठाए। लेकिन ऐसा होता नहीं है। नई पीढ़ी अपने पूर्वजों द्वारा सौंपी गई धरोहर में अपना कुछ न कुछ जोड़ना चाहती है, कुछ नया करना चाहती है। उसे लगता है कि उसके पूर्वजों यानी पुरानी पीढ़ी के लोगों ने जो देखा है, सुना है, भोगा है, वह आज के युग के अनुकूल नहीं है। बस यही संघर्ष हमेशा से रहा है। नई पीढ़ी को पुरानी पीढ़ी के अनुभव का लाभ जरूर उठाना चाहिए।

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