ओ राजा!

लाशों के ढेर पर मंदिर बनाता राजा सोचता है, वो तो मंदिर बना रहा है

Created By : ashok on :15-11-2021 14:31:53 खबर सुनें

-अनुपमा तिवाड़ी
लाशों के ढेर पर मंदिर बनाता राजा
सोचता है, वो तो मंदिर बना रहा है
सोने - चाँदी के सिक्के नींव में रखवा रहा है
जो रहेंगे,
अनंत काल तक।
राजा नहीं जानता शुभ कार्यों पर भारी पड़ते हैं दुष्कर्म।
दुष्कर्म, पीछा करते हैं जीवनभर।
वो डराते रहते हैं हर वक्त उसे।
एक डरा हुआ राजा प्रयुत्तर में
हुँकार भरता है,
चिल्लाता है,
ललकारता है,
गुट बनाता है,
पासे फेंकता है
षड्यंत्र रचता है
उसकी तमाम कुटिलताओं के बीच
चुप लाशें देती हैं बददुआएँ।
और राजा के सारे महल ध्वस्त कर देती हैं।
राजा, चीजों से भला कोई कहाँ अमीर हुआ है ?
क्या तुमने कभी
खंडहर होते किलों को नहीं देखा ?
नहीं देखा,
तो जाओ और उनकी कहानी सुनो।
वो जार - जार रोकर सुनाएँगे तुम्हें अपनी
भव्यता से खंडहर होने की कहानी।

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