योगी-मोदी की जोड़ी बनी विकास की नई थ्योरी, समाज के हर तबके के लिए हो रहे कार्य

देश के सबसे बड़े सूबे यूपी में आजकल विकास की तस्वीर बयां होती है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में राज्य सरकार ने समाज के हर तबके के विकास के लिए काम किया व इस तरह उन्होंने विकास का एक समावेशी मॉडल लोगों के सामने रखा।

Created By : Shiv Kumar on :02-08-2022 17:44:19 योगी-मोदी की जोड़ी खबर सुनें

संदीप भूषण
दौर अर्थ का है तो सब चीजों को देखने के पैमाने भी आर्थिक हो गए हैं। सरकारों के कामकाज के मूल्यांकन का आधार बुनियादी तौर पर सड़क, बिजली व पानी की स्थिति हो गया है। इसी से किसी भी देश या सूबे के विकास की तस्वीर बयां होती हैं। ऐसे में अगर भ्रष्टाचार के खात्मे की मंशा रखने और उसे धरातल पर उतारने वाला नेतृत्व हो तो फिर बात ही क्या है। देश के सबसे बड़े सूबे यूपी में आजकल ऐसा ही कुछ देखने को मिल रहा है। दस मार्च 2022 को योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में भाजपा को मिला प्रचंड बहुमत प्रदेश में सुशासन के आश्वासन व भरोसे पर जनता की मुहर है। चुनाव नतीजे के आकलन में यह बात और तथ्यगत तौर पर दिखी। माना गया कि राज्य में सड़कों के जाल, एक्सप्रेसवे की भरमार, जनकल्याण की योजनाएं, भ्रष्टाचार के खिलाफ नो टॉलरेंस की नीति और रोजगार सृजन के लिए योजनाबद्ध नीति ये कुछ ऐसे काम रहे, जिसके दम पर भाजपा ने सभी मिथकों को तोड़ते हुए प्रदेश में लगातार दूसरी बार सरकार बनाई।

अपने पहले कार्यकाल में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में राज्य सरकार ने समाज के हर तबके के विकास के लिए काम किया व इस तरह उन्होंने विकास का एक समावेशी मॉडल लोगों के सामने रखा। योगी 2.0 में इस विकास को और रफ्तार मिली। इससे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के डबल इंजन की सरकार में यूपी में सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास के संकल्प को भी नई मजबूती मिली। इस मजबूती से जुड़ी एक दिलचस्प खबर की चर्चा इन दिनों खूब हो रही है। एक निजी न्यूज चैनल के सर्वे में यह बात निकल कर आई है कि अगर आज की तारीख में लोकसभा चुनाव हुए तो भाजपा पहले से बेहतर सीटें जीतने में कामयाब होगी। वहीं यूपी में विधानसभा चुनाव हुए तो योगी आदित्यनाथ की अगुआई में बीजेपी अच्छा प्रदर्शन करेगी। कुल मिलाकर देश और प्रदेश में डबल इंजन की सरकार यानी मोदी-योगी की जोड़ी सुपरहिट साबित हो रही है और जनता सरकार के काम से बेहद संतुष्ट नजर आ रही है।


सर्वे के मुताबिक अगर मतदाता आज वोट डालने घर से बाहर निकलें तो सबसे ज्यादा आबादी वाले राज्य यूपी में एनडीए को 80 में से 76 सीटों पर जीत मिल सकती है, वहीं यूपीए और अन्य को केवल दो सीटें जीतने का अनुमान है। विधानसभा में बीजेपी को 403 में से 292 सीटें प्राप्त होने का अनुमान है।इस सर्वे के मुताबिक अगर अभी लोकसभा के चुनाव हुए तो कांग्रेस की अगुवाई वाले संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) को केवल 97 सीटों पर जीत मिलने के आसार हैं। वहीं 'अन्य' जिसमें क्षेत्रीय दल और निर्दलीय भी शामिल हैं, उन्हें 84 सीटों पर जीत मिल सकती है। मत प्रतिशत की बात की जाए तो एनडीए को कुल 41 फीसदी वोट मिलने का अनुमान है, यूपीए को 28 फीसदी और 'अन्य' को 31 फीसदी वोट मिल सकते हैं।

एनडीए को लोकसभा की 362 सीटों पर मिल सकती है शानदार जीत
लोकसभा चुनाव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) को लोकसभा की कुल 543 में से 362 सीटों पर शानदार जीत मिल सकती है। इस सर्वे के दौरान जब प्रधानमंत्री पद के लिए लोगों से उनकी पहली पसंद के बारे में पूछा गया तो 48 प्रदिशत लोग नरेंद्र मोदी को फिर से प्रधानमंत्री के रूप में देखना चाहते हैं। राहुल गांधी को 11 प्रतिशत लोगों ने पंसद किया। वहीं, ममता बनर्जी को 8 प्रतिशत, सोनिया गांधी को 7 प्रतिशत, मायावती को 6 प्रतिशत और अरविंद केजरीवाल को महज 5 प्रतिशत लोगों ने पीएम के तौर पर पहली पसंद बताया।

यूपी विधानसभा में केसरिया जोर साफ बढ़ता दिख रहा
इस सर्वे के आधार पर यूपी विधानसभा में केसरिया जोर साफ बढ़ता दिख रहा है। प्रदेश के कुल 403 सीटों पर विधानसभा चुनाव अगर अभी होते हैं तो योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली बीजेपी को 292 सीटें, समाजवादी पार्टी को 94 सीटें, कांग्रेस को 1 और अन्य को 16 सीटें मिल सकती हैं। गौरतलब है कि इस साल मार्च में हुए विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने 255, समाजवादी पार्टी ने 111, कांग्रेस ने 1, बसपा ने 1 और अन्य ने 35 सीटें जीती थीं। सर्वे के मुताबिक भाजपा को 44.6 प्रतिशत और सपा 31.3 प्रतिशत वोट मिल सकते हैं। इस सर्वे के दौरान 38 प्रतिशत लोगों ने योगी की लोकप्रियता को पहली पसंद का पैमाना बनाया तो 26 प्रतिशत लोगों ने सुशासन और राशन को तरजीह दी। 56 प्रतिशत लोगों ने मोदी-योगी की जोड़ी यानी डबल इंजन की सरकार को ही वोटिंग का पैमाना बनाया।

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मोदी-योगी की समावेशी राजनीति आज देश में विकास के नए ब्रांड वैल्यू का नाम

हाल के विधानसभा चुनाव और उसके कुछ ही महीने बाद आए इस सर्वे ने योगी 2.0 को लेकर कुछ बातों को साफ कर दिया है। योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश में अपने शासनकाल के सौ दिन पूरा होते-होते सरकार की कार्य संस्कृति में स्पष्ट बदलाव के संकेत दिए। मोदी-योगी की समावेशी राजनीति आज देश में विकास के नए ब्रांड वैल्यू का नाम है। 2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने न केवल अपना 2017 का जनाधार सुरक्षित रखा, अपितु उसमें वृद्धि की। मोदी-योगी के नेतृत्व में लोगों में विश्वास जगा कि सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास केवल जुमला भर नहीं, बल्कि वास्तविकता में यह साकार हो रहा है।

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डेवलपमेंट थ्योरी को विपक्ष नकारने में कोई कसर नहीं छोड़ रहा
जाहिर है कि डबल इंजन की इस डेवलपमेंट थ्योरी को विपक्ष नकारने में कोई कसर नहीं छोड़ रहा। ऐसे में सवाल है कि आखिर भाजपा ने यूपी में सालों के राजनीतिक सूखे को झमाझम बरसते मानसून में कैसे बदल दिया? जाहिर है कि इसमें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की भूमिका अहम रही। उन्होंने भ्रष्टाचार पर नो टॉलरेंस और लोक कल्याण जैसे शासन के मूल उद्देश्यों को प्रदेश में सामाजिक विकास का आधार बनाया। दृढ़ निश्चय के साथ राजनीतिक और प्रशासनिक दायित्वों को पूरा किया। कोरोना महामारी के दौरान मुस्तैदी के साथ पूरी व्यवस्था को संभाला। प्रवासी मजदूरों और अन्य राज्यों से यूपी लौटे लोगों के लिए अन्न, रोजगार की व्यवस्था की। गरीब परिवारों तक मुफ्त राशन पहुंचाया। सड़कों और एक्सप्रेसवे का जाल बिछाया। घर-घर तक बिजली और पानी की व्यवस्था कराई। योगी सरकार के ये काम भाजपा पर विश्वास जताने का आधार बना। सर्वे के आंकड़ों ने उत्तर प्रदेश में सुशासन के नए दौर को जनता की पसंद के तौर पर जिस तरह सामने रखा है, वह देश के सबसे बड़े सूबे से लेकर देश की राजधानी तक राजनीति के बदले बयार की बानगी है।

संदीप भूषण

वरिष्ठ पत्रकार एवं यूपी मामलों के जानकार

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