कहां गए वो लोग...?

पलवल शहर वासी अब उस समय को याद कर रहे हैं, जब बहुत सारे समाज सेवियों की शहर में बाढ़ सी आ गई थी। लेकिन, पता नहीं क्यों समाजसेवियों की झलक तब से दिखनी कम हो गई जब से शहर की चौधर यानि नगर परिषद चेयरमैन पद की सीट एससी रिजर्व हो गई।

Created By : Pradeep on :28-11-2021 22:31:31 पलवल शहर का मैप। खबर सुनें

पलवल शहर वासी अब उस समय को याद कर रहे हैं, जब बहुत सारे समाज सेवियों की शहर में बाढ़ सी आ गई थी। लेकिन, पता नहीं क्यों समाजसेवियों की झलक तब से दिखनी कम हो गई जब से शहर की चौधर यानि नगर परिषद चेयरमैन पद की सीट एससी रिजर्व हो गई। चौधर की चाह में खुद को समाजसेवी का खिताब लिए नेतागण ऐसे गुम हुए जैसे बादलों के बीच में चमकती बिजली झलक दिखलाकर गायब हो जाती है। ऐसे में अब शहर में समाजसेवियों का अकाल सा पड़ता दिखाई दे रहा है। इनमें कई खादी धारी तो कई ऐसे भी हैं जो अपने वार्डों का प्रतिनिधित्व भी कर रहे थे। वैसे कुछ समाज सेवी तो दावा कर रहे हैं कि वो अब विधानसभा की तैयारियों में लगे हुए हैं। शहर के लोग समाजसेवियों को रात ही क्या दिन के उजाले में भी दीया लेकर ढूंढ रहे हैं। लेकिन, जनता को समाजसेवी मिले तो कुछ बात बने पाए।

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बिना पतवार कब तक चलेगी नैय्या
पूरे हरियाणा की तरह बृज नगरी पलवल में हाथ वाली पार्टी (कांग्रेस) को लंबे अरसे से जिलाध्यक्ष पद के लिए योग्य नेता की तलाश है, लेकिन जिलाध्यक्ष नहीं मिल पा रहा। ऐसे में पतवार के बिना हाथ वाली पार्टी की नैय्या को किसी तरह पार्टी के नेतागण खींच तो रहे हैं लेकिन बिना पतवार के जैसे नाव हिचकोले खाने लगती है वैसा ही यहां भी कई बार देखने को मिल जाता है। हालांकि, हाथ वाली पार्टी की सूबे की मुखिया ने कई बार दावा किया है कि जल्द ही जिले में जिलाध्यक्ष की नियुक्ति करा दी जाएगी। लेकिन, अभी तक हाथ वालों को पलवल जिले में कमान संभालने वाला कोई नहीं मिल पाया है। कोई दिन महीनों की बात नहीं बल्कि जिले में हाथ वाली पार्टी पिछले चार साल से बिना जिलाध्यक्ष के ही ऐसे ही चल रही है। हालांकि कई नेता अरसे से जिले की सरदारी का लॉलीपॉप लेकर तो घूम रहे हैं, लेकिन पार्टी के आंतरिक सूत्रों की मानें तो इसमें विलंब हुड्डा और शैलजा के समर्थकों की आपसी खींचातानी की वजह से भी हो रहा है।

कितना असर करेगी नेताजी की घुड़की
समर्थकों में नेता जी के उपनाम से प्रचारित केंद्रीय राज्य मंत्री कृष्णपाल गुर्जर वैसे तो अपने सरल और हंसमुख स्वभाव के लिए जाने जाते हैं तथा इसकी बानगी देखने को भी मिल भी जाती है। किन्तु पलवल के लघु सचिवालय में शुक्रवार को हुई जिला विकास समन्वय एवं निगरानी समिति की मासिक बैठक में नेताजी के कड़े तेवर देखने को मिले। बैठक में नेताजी सूबे के मुखिया द्वारा की घोषणाओं की स्टेट्स रिपोर्ट ले रहे थे। कई मामलों में जब संबंधित विभागों के अधिकारी स्पष्ट जवाब नहीं दे पाए तो नेताजी उन अधिकारियों को सख्त निर्देश देते हुए नज़र आए। सड़कों के निर्माण में बाधा बन रही वन विभाग की पेड़-पौधों की कटाई की मंजूरी पर उन्होंने तुरंत उच्च अधिकारियों को मोबाइल पर फ़ोन करके समाधान करने के निर्देश दिए और उनसे स्टेट्स रिपोर्ट भी मांग ली। उन्होंने सरकार द्वारा कराए जा रहे विकास कार्यों में कोताही और लापरवाही बरतने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की भी चेतावनी भी दे डाली। वैसे अब राजनीतिक गलियारों में चर्चा यह है कि नेता जी की घुड़की कितना असर करेगी।

फीते तो कट रहे, समस्या जस की तस
हथीन खंड के दर्जनों गांवों में दशकों से चली आ रही हजारों एकड़ में सेम की समस्या को लेकर क्षेत्र की सियासत गरमाती रही है। सेम की समस्या के समाधान के लिए क्षेत्र के माननीय विधायक महोदय ने कई बार फीते भी काटे। लेकिन, धरातल पर सब जीरो दिखाई देता है। सेम की समस्या का मुद्दा भले ही विधानसभा के सत्र में भी यदा कदा उठता रहा हो, लेकिन समस्या ज्यों-की-त्यों बनी हुई है। खादी धारियों ने सेम की समस्या को राजनीतिक मुद्दा बनाने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी। मौके पर पहुंचकर कई बार खादी धारियों और प्रशासनिक अधिकारियों ने फोटो कराए और वहां से निकलने के बाद पीछे मुड़कर नहीं। अधिकारी भी मौका मुआयने करने के अलावा कोई ठोस कार्रवाई नहीं कर पाए हैं। ग्रामीणों की मानें तो सेम का मुख्य कारण नहर से हो अवैध सिंचाई है और सिंचाई करने वालों को खादी धारियों का विशेष संरक्षण प्राप्त है। ऐसे में सरकार की सेम की समस्या का समाधान फीते कटने तक ही सीमित दिखाई पड़ता है।

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