टोक्यो में पीएम मोदी ने किया भारतीय प्रवासियों को संबोधित, बोले- मुझे मक्खन पर लकीर करने में मजा नहीं आता, मैं पत्थर पर लकीर करता हूं

प्रधानमंत्री मोदी ने टोक्यो में भारतीय प्रवासियों से संबोधित करते हुए कहा कि जब भी मैं जापान आता हूं, तो  मैं देखता हूं कि आपकी स्नेह वर्षा हर बार बढ़ती ही जाती है। आप में से कईं साथी अनेक वर्षों से यहां बसे हुए हैं। जापान की भाषा, वेशभूषा, संस्कृति और खानपान एक प्रकार से आपके जीवन का भी हिस्सा बन गया है।

Created By : Pradeep on :23-05-2022 17:10:13 टोक्यो में पीएम मोदी। खबर सुनें

प्रधानमंत्री मोदी ने टोक्यो में भारतीय प्रवासियों से संबोधित करते हुए कहा कि जब भी मैं जापान आता हूं, तो मैं देखता हूं कि आपकी स्नेह वर्षा हर बार बढ़ती ही जाती है। आप में से कईं साथी अनेक वर्षों से यहां बसे हुए हैं। जापान की भाषा, वेशभूषा, संस्कृति और खानपान एक प्रकार से आपके जीवन का भी हिस्सा बन गया है। ये हम लोगों की विशेषता है कि हम कर्मभूमि से तन मन से जुड़ जाते हैं, खप जाते हैं। लेकिन मातृभूमि की जड़ों से जो जुड़ाव है, उससे कभी दूरी नहीं बनने देते हैं। यही हमारा सबसे बड़ा सामर्थ्य है।
पीएम मोदी ने कहा कि आजादी का ये अमृत काल भारत की समृद्धि का, भारत की संपन्नता का एक बुलंद इतिहास लिखने वाला है। मुझे जो संस्कार मिले हैं, जिन-जिन लोगों ने मुझे गढ़ा है उसके कारण मेरी भी एक आदत बन गई है। मुझे मक्खन पर लकीर करने में मजा नहीं आता है, मैं पत्थर पर लकीर करता हूं।

वहीं उन्होंने कहा कि विवेकानंद जी जब अपने ऐतिहासिक संबोधन के लिए शिकागो जा रहे थे उससे पहले वो जापान आए थे। जापान में उनके मन मस्तिष्क पर गहरा प्रभाव छोड़ा हुआ था। जापान के लोगों की देशभक्ति, जापान के लोगों का आत्मविश्वास, स्वच्छता के लिए जापान के लोगों की जागरूकता की उन्होंने खुलकर प्रशंसा की थी।
भारत और जापान natural partners हैं। भारत की विकास यात्रा में जापान की महत्त्वपूर्ण भूमिका रही है। जापान से हमारा रिश्ता आत्मीयता का है, आध्यात्म का है, सहयोग का है, अपनेपन का है।

आज की दुनिया को भगवान बुद्ध के विचारों पर, उनके बताए रास्ते पर चलने की बहुत जरूरत है। यही रास्ता है जो आज दुनिया की हर चुनौती, चाहे वो हिंसा हो, अराजकता हो, आतंकवाद हो, क्लाइमेट चेंज हो, इन सबसे मानवता को बचाने का यही मार्ग है। भारत सौभाग्यशाली है कि उसे भगवान बुद्ध का प्रत्यक्ष आशीर्वाद मिला है। उनके विचारों को आत्मसात करते हुए भारत निरंतर मानवता की सेवा कर रहा है। चुनौतियां चाहे कितनी प्रकार की हो, कितनी बड़ी क्यों न हो, भारत उनका समाधान ढूंढता ही है।


कोरोना से दुनिया के सामने 100 साल का सबसे बड़ा संकट पैदा हुआ। ये जब शुरू हुआ तो किसी को पता नहीं था कि आगे क्या होगा। किसी को ये पता तक नहीं था कि इसकी वैक्सीन आएगी भी या नहीं आएगी। लेकिन भारत ने उस समय भी दुनिया के देशों को दवाएं भेजीं। WHO ने भारत की आशा बहनों को Director Generals- Global Health Leaders Award से सम्मानित किया है। भारत की लाखों आशा बहनें, मैटेरनल केयर से लेकर वैक्सीनेशन तक, पोषण से लेकर स्वच्छता तक, देश के स्वास्थ्य अभियान को गति दे रही हैं।

भारत आज ग्रीन फ्यूचर, ग्रीन जॉब्स रोडमैप के लिए भी बहुत तेजी से आगे बढ़ रहा है। भारत में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को बहुत प्रोत्साहन दिया जा रहा है। ग्रीन हाइड्रोजन को हाइड्रोकार्बन का विकल्प बनाने के लिए विशेष मिशन शुरू किया गया है। भारत में आज सही मायने में people led goveance काम कर रही है। गवर्नेंस का यही मॉडल, डिलिवरी को efficient बना रहा है। यही democracy पर निरंतर मज़बूत होते विश्वास का सबसे बड़ा कारण है।

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