पीएम मोदी ने पहला जनताजीय गौरव दिवस किया संबोधित, पूर्व सरकार पर इनके योगदानों को भुलाने का लगाया आरोप

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज मध्य प्रदेश के जंबूरी मैदान में जनताजीय गौरव दिवस को संबोधित किया। इस दौरान पीएम मोदी ने कहा कि आज जब हम राष्ट्र निर्माण में जनजातीय समाज के योगदान के बारे में बात करते हैं तो कई लोग हैरान हो जाते हैं।

Created By : Shiv Kumar on :15-11-2021 17:04:10 खबर सुनें

एजेंसी, भोपाल।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि आज जब हम राष्ट्रीय मंचों से राष्ट्र निर्माण में जनजातीय समाज के योगदान के बारे में बातें करते हैं तो कई लोग चौंक जाते हैं। पीएम मोदी ने कहा कि ये इसलिए है कि जनजातीय समाज के योगदान के विषय में या तो बताया ही नहीं गया, यदि बताया भी गया कि तो काफी सीमित। पीएम मोदी ने कहा ये इस वजह से भी हुआ कि स्वतंत्रता के बाद वर्षों तक जिन लोगों ने देश पर राज किया। उन लोगों ने अपनी स्वार्थ भरी सियासत को ही प्राथमिकता दी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यह बातें आज को मध्य प्रदेश में बोलीं। पीएम मोदी यहां जंबूरी मैदान में जनताजीय गौरव दिवस पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।
यही तो हैंहमारे असली नायक
पीएम मोदी ने कहा कि देश का जनजातीय इलाके, संसाधनों के तौरप पर, संपदा की स्थिति में सदैव समृद्ध रहे हैं। पर जो पूर्व में सरकार चला रहे थे, वो इन इलाकों की दोहन की नीति पर आगे बढ़े। वहीं उन्होंने कहा कि हम इन इलाकों में सामर्थ्य के बेहतर प्रयोग की नीति पर चल रहे हैं। वर्तमान में पद्म पुरस्कार भी दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि जनजातीय समाज से आने वाले साथी जब राष्ट्रपति भवन पहुंचे तो दुनिया चौंक गई। आदिवासी व ग्रामीण समाज में कार्य करने वाले ये लोग देश के असली नायक हैं।
स्वतंत्रता की जंग में निभाई अहम भूमिका
इससे पहले पीएम नरेंद्र मोदी ने जनजातीय भाषा में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करना प्ररारंभ किया। जहां पीएम मोदी ने कहा कि आज भारत अपना पहला जनजातीय गौरव दिवस मना रहा है। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता के बाद देश में पहली बार इतने बड़े स्तर पर, पूरे देश के जनजातीय समाज की कला-संस्कृति, स्वतंत्रता आंदोलन और राष्ट्रनिर्माण में उनके योगदान को गौरव के साथ याद किया जा रहा है। उनका मान बढ़ाया जा रहा है। स्वतंत्रता की जंग में जनजातीय नायक-नायिकाओं की वीर गाथाओं को देश के सामने लाना, उसे नई पीढ़ी से इसके बारे में बताना, हमारा कर्तव्य है। गुलामी के कालखंड में विदेशी शासन के विरूद्ध खासी-गारो आंदोलन, मिजो आंदोलन, कोल आंदोलन समेत कई संग्राम हुए। गोंड महारानी वीर दुर्गावती का शौर्य हो या फिर रानी कमलापति का बलिदान, उनके बलिदानों को देश भूल नहीं सकता। वहीं वीर महाराणा प्रताप के संघर्ष की गाथा उन बहादुर भीलों के बिना पूर्ण नहीं होती। इन भीलों ने महाराणा प्रताप के कंधे से कंधा मिलाकर जंग लड़ी व बलिदान दिया।

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