रंग पंचमी क्यों मनाई जाती है, जानें...

रंगों का त्योहार प्रमुख रुप से पांच दिन तक मनाया जाता है। पहले दिन होलिका को जलाया जाता है। जिसे होलिका दहन कहते हैं। दूसरे दिन लोग एक-दूसरे को रंग और अबीर लगाते हैं। जिसे धुलेंडी कहा जाता है। होली के पांचवे दिन भी होली का उत्सव मनाते हैं 17 मार्च को होलिका दहन है और 18 मार्च को धुलेंडी और इसके बाद 22 मार्च को रंग पंचमी का त्योहार मनाया जाएगा।

Created By : Mukesh on :06-03-2022 12:07:59 प्रतीकात्मक खबर सुनें

रंगों का त्योहार प्रमुख रुप से पांच दिन तक मनाया जाता है। पहले दिन होलिका को जलाया जाता है। जिसे होलिका दहन कहते हैं। दूसरे दिन लोग एक-दूसरे को रंग और अबीर लगाते हैं। जिसे धुलेंडी कहा जाता है। होली के पांचवे दिन भी होली का उत्सव मनाते हैं 17 मार्च को होलिका दहन है और 18 मार्च को धुलेंडी और इसके बाद 22 मार्च को रंग पंचमी का त्योहार मनाया जाएगा। तो आइए जानते हैं कि, रंग पंचमी आखिर क्यों मनायी जाती है।
चैत्र मास के कृष्ण पंचमी को खेली जाने वाली रंग पंचमी देवी देवताओं को समर्पित होती है। मान्यता है कि, रंग पंचमी पर पवित्र मन से पूजा-पाठ करने से देवी-देवता स्वयं अपने भक्तों को आशीर्वाद देने आते हैं। कहते हैं कि, इस दिन श्रीकृष्ण ने राधा पर रंग डाला था। इसी की याद में रंग पंचमी मनायी जाती है। इस दिन श्रीराधारानी और श्रीकृष्ण की आराधना की जाती है। रंग पंचमी में होली की तरह ही रंग खेले जाते हैं। मान्यता के अनुसार कहा जाता है कि, इस दिन हवा में रंग और अबीर उड़ाने से वातावरण में सकारात्मकता का संचार होता है। साथ ही यह भी कहा जाता है कि, रंग पंचमी सात्विक पूजा-अराधना का पर्व होता है। वहीं रंग पंचमी को धन दायक भी माना जाता है।
Disclaimer: इस स्टोरी में दी गई सूचनाएं सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं। Desh Rojana Portal किसी भी अंधविश्वास और इन तथ्यों की किसी प्रकार से कोई पुष्टि नहीं करता है। इन तथ्यों पर अमल करने से पहले संबंधित ज्योतिषी, आचार्य तथा विशेषज्ञ से संपर्क करें।

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