निरीह प्राणी की हत्या न करने का संकल्प

हमारे देश में कई ऐसे साधु स्वभाव के लोग हुए हैं जिन्होंने अपने राजाओं, महाराजाओं को बड़ी निर्भीकता से गलत काम करने से रोक दिया है।

Created By : ashok on :28-11-2022 16:35:27 अशोक मिश्र खबर सुनें

बोधिवृक्ष

अशोक मिश्र
हमारे देश में कई ऐसे साधु स्वभाव के लोग हुए हैं जिन्होंने अपने राजाओं, महाराजाओं को बड़ी निर्भीकता से गलत काम करने से रोक दिया है। अपने स्वामी को सही रास्ते पर लाने के लिए कई बार अपना जीवन और प्रतिष्ठा को भी दांव पर लगाया है। राज्य और प्रजा के हित में उन्होंने यहां तक नहीं सोचा कि यदि उनके महाराज नाराज हो गए, तो उनके पूरे परिवार के प्राण संकट में आ सकते हैं। ऐसे ही एक दरबारी थे भुवन सिंह चौहान। वे उदयपुर के महाराणा के दरबार में नौकरी करते थे। वे भगवान श्रीनाथ के परम भक्त थे।

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वे ब्रह्म मुहूर्त में उठकर पूजा पाठ करते थे और भजन गाते थे। इसके बाद दरबार चले जाते थे। वे रोज श्रीनाथ से किसी निरपराध के प्रति अन्याय न होने की प्रार्थना करते थे। महाराणा तो भुवन सिंह की भक्ति और सेवा भावना से बहुत प्रभावित थे। एक बार की बात है। महाराणा शिकार के लिए जा रहे थे। उन्होंने भुवन सिंह चौहान से भी चलने को कहा। साथ में सामंतों की टोली भी थी। महाराणा ने एक हिरनी का पीछा किया। हिरनी एक वृक्ष के नीचे जाकर छिप गई। उसी वृक्ष के पास भुवन सिंह खड़े थे। महाराणा ने हिरनी को मारने का इशारा किया, तो भुवन सिंह ने तलवार चला दी। मरती हुई हिरनी की पीड़ा को देखकर भुवन सिंह द्रवित हो उठे। उन्हें बहुत पीड़ा हुई। वहां से लौटकर उन्होंने भगवान के आगे पश्चाताप किया और कभी किसी की हत्या न करने का संकल्प लिया।

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एक दिन महाराणा ने कहा कि भुवन सिंह तुम सच्चे अर्थों में श्रीनाथ के दरबारी हो। तुम्हारी जागीर दो गुनी की जाती है। इस पर भुवन सिंह ने कहा कि मुझे जागीर नहीं चाहिए, लेकिन अब यह संकल्प लें कि आज से आप किसी भी निरीह प्राणी की हत्या नहीं करेंगे। इस पर महाराणा ने ऐसा ही करने का संकल्प लिया और आजीवन उसका पालन किया।

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