पशु हत्या न करने का लिया संकल्प

महात्मा बुद्ध का अहिंसा का दर्शन काफी प्रभावशाली रहा। जन-जन में इसकी चर्चा होने लगी। देश भर में पशुओं का मांस बेचने वाले लोगों के सामने संकट यह खड़ा हुआ कि वे यदि पशुओं का मांस न बेचें, तो करें क्या?

Created By : ashok on :07-12-2022 12:07:27 अशोक मिश्र खबर सुनें

अशोक मिश्र
महात्मा बुद्ध का अहिंसा का दर्शन काफी प्रभावशाली रहा। जन-जन में इसकी चर्चा होने लगी। देश भर में पशुओं का मांस बेचने वाले लोगों के सामने संकट यह खड़ा हुआ कि वे यदि पशुओं का मांस न बेचें, तो करें क्या? यह तो उनका पुश्तैनी धंधा है। राजगृह वर्तमान नाम पटना में कारू नामका एक मांस विक्रेता था। वह भी कभी-कभार महात्मा बुद्ध का प्रवचन सुनने जाया करता था महात्मा बुद्ध हमेशा अहिंसा के संबंध में प्रवचन दिया करते थे। महात्मा बुद्ध का प्रवचन सुनने के बाद उसके मन में आया कि वह पशुओं का वध करना छोड़ दे।

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इस बात की जब उसने चर्चा अपने परिवार और समाज में की, तो लोगों ने उसका विरोध किया और कहा कि पुश्तैनी पेशे को छोड़कर तुम करोगे क्या? एक दिन की बात है। उसने एक पशु पर प्रहार किया। उसके हाथ की तलवार छिटक कर उसके पुत्र को जा लगी। उसका पुत्र छटपटाने लगा। उसने सोचा कि जब मेरे पुत्र को मामूली सी चोट लगने पर इतनी पीड़ा हुई, तो पशुओं को कितनी पीड़ा होती होगी। उसने तय किया कि वह अपने पुत्र को ऐसा नहीं करने देगा। धीरे-धीरे वह बूढ़ा हो गया और उसकी मौत हो गई।

बिरादरी वालों ने उससे देवी की प्रतिमा के सामने बलि देने को कहा, तो उसके पुत्र के हाथ पशु को बलि देने के लिए नहीं उठे। लोगों ने बहुत कहा कि वह बलि देकर देवी को प्रसन्न करे। लेकिन उसने इंकार कर दिया। लोगों के बहुत जोर देने पर उसने अपने पैर पर घाव करने के बाद देवी पर रक्त का छिड़काव और बिरादरी वालों से कहा कि आज के बाद वह कभी पशुओं का वध नहीं करेगा। उसके परिवार ने मांस बेचने का धंधा ही बंद कर दिया।

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