संत गंभीरनाथ ने समझाया धर्म का महत्व

गोरखनाथ संप्रदाय को भारत में ही नहीं, नेपाल सहित कुछ और देशों में प्रतिष्ठा प्राप्त है। कहा जाता है कि गुरु गोरखनाथ का संबंध नेपाल की गोरखा जाति से है।

Created By : ashok on :06-12-2022 14:49:08 अशोक मिश्र खबर सुनें

बोधिवृक्ष

अशोक मिश्र
गोरखनाथ संप्रदाय को भारत में ही नहीं, नेपाल सहित कुछ और देशों में प्रतिष्ठा प्राप्त है। कहा जाता है कि गुरु गोरखनाथ का संबंध नेपाल की गोरखा जाति से है। सच क्या है, यह तो विद्वान लोग ही बता सकते हैं या फिर गुरु गोरखनाथ के बारे में विशेष जानकारी रखने वाले लोग। लेकिन गोरखनाथ संप्रदाय ने भारत में लोगों का जीवन सुधारने में काफी सहयोग दिया, ऐसा लोग मानते हैं।

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कहते हैं कि जिन दिनों गोरखनाथ संप्रदाय का नेतृत्व संत योगिराज गंभीरनाथ करते थे, उन दिनों बंगाल से कुछ तीर्थयात्री कपिलधारा पहुंचे। संत गंभीरनाथ बहुत पहुंचे हुए संत और धर्मशास्त्रों के प्रकांंड विद्वान थे। उनकी ख्याति बहुत दूर-दूर तक थी, लेकिन उन्हें अहंकार मानो छू तक नहीं था। वे बहुत सादगी के साथ रहते हुए मानव कलाण में लगे रहते थे। तीर्थयात्रियों को उन्होंने बैठने के लिए आसन दिया तो तीर्थयात्रियों ने कहा कि आप जैसे संत के दर्शन से जीवन धन्य हो गया। आप हमें यह बताएं कि मनुष्य का कल्याण कैसे हो सकता है।

इस पर संत ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया कि मैंने तो अभी जानने का प्रयास किया है। ऐसे मैं आपको क्या उपदेश दूं। हां, मैं इतना कह सकता हूं कि व्यक्ति का कल्याण कर्म और आचरण से हो सकता है। जो व्यक्ति अच्छे कर्म और आचरा करता है, उसके जीवन का कल्याण तो होता ही है, वह समाज का भी भला कर सकता है। जो धर्म के अनुसार आचरण करता है, सदाचार का पालन करता है, वह सदा सुखी रहता है। यह सुनकर तीर्थ यात्रियों ने संत गंभीरनाथ को प्रणाम किया और कहा कि आपके इस संदेश को हम अपने जीवन उतारने का प्रयास करेंगे।

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